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Featured Books

वह आखिरी पल By Ratna Pandey

90 वर्ष की उम्र पार कर चुकी कावेरी अम्मा अब तक तो एकदम टनकी थीं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हृदय की धड़कनों में थोड़ी मंदी आ गई थी इसलिए उनका शरीर अब वैसा साथ नहीं निभा पा रहा था जैस...

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पहली नज़र की चुप्पी By Priyam Gupta

बारिश की हल्की बूँदें खिड़की के शीशे से टकरा रही थीं। हवा में मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी, जैसे ज़मीन भी अपनी कहानी सुनाने को बेचैन हो।
Prakhra ने अपनी किताब बंद की, खिड़की के पास...

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जुड़ी रहूँ जड़ों से By Sunita Bishnolia

जुड़ी रहूँ जड़ों से
शहर की सबसे आलीशान कोठी में एक तरफ बैडमिंटन कोर्ट है जहाँ अभी भी कुछ लोग काम करे रहे है। इसी के दूसरे छोर पर दो आउट हाऊस भी बने हुए है। दोनों आउट हाऊस हरियाली...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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हंसता क्यों है पागल By Prabodh Kumar Govil

कुछ दिन पहले शाम को पार्क में अपने साथी सीनियर सिटीजंस के साथ टहल कर गप्पें लड़ाते समय पड़ौस में रहने वाले एक साथी ने बताया कि आज तो उनका सारा दिन बहुत आराम से बीत गया। उनका गीज़र...

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अनामिका By R B Chavda

सूरज एक सफल बिजनेसमैन था। वह अपनी मेहनत और लगन से शहर के सबसे प्रमुख उद्योगपतियों में गिना जाता था। मगर दौलत और शोहरत के इस सफर में भी एक खालीपन था, जिसे सिर्फ वह महसूस कर सकता था।...

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मुलाकात By दिलीप कुमार

शाम का समय था... हल्की हल्की हवाओं के साथ छोटी छोटी बारिस की बूंदे पड़ रही थी। बड़ा ही सुहाना मौसम था...मैं ग्राउंड में टहल रहा था अचानक मेरे कानों में आवाज आई ।ओ मिस्टर मैंने पलट क...

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THIEF BECOME A PRESEDENT By saif Ansari

गायब हैंडल का रहस्य
सुबह के 10 बजे थे। बरेली के एक व्यस्त बैंक में लोगों की ऐसी भीड़ थी, मानो कुंभ का मेला लगा हो। सब अपने-अपने काम में ऐसे डूबे थे, जैसे चींटी शक्कर के दाने पर। कि...

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एक थी...आरजू By Satyam Mishra

प्रिय पाठकों,यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है जिसका किसी भी व्यक्ति के जीवन अथवा किसी घटना विशेष से कोई सम्बन्ध नहीं है। कहानी का उद्देश्य मनोरंजन मात्र है,किसी की भावनाओं को ठेस पहुं...

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अंधेरी कोठरी का रहस्य By Pawan

एक बार की बात है...

राजस्थान के एक शांत, धूल से भरे गाँव "कुंभसर" में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग “चौधरियों की कोठरी” कहते थे। ये हवेली अब वीरान थी, लेकिन गाँव के बुज़ु...

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पीड़ा में आनंद By Ashish Kumar Trivedi

पीड़ा इस शब्द से हम सभी का परिचय हैं। क्योंकि जिसमें चेतना है उसे पीड़ा की अनुभूति भी होगी।

जैसे हंसना मुस्कुराना हमारे जीवित होने की निशानी है। वैसे ही पीड़ा का अनुभव करना भी...

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एमी By Pradeep Shrivastava

मुझे बाइक चलाना बहुत पसंद है। बहुत ज़्यादा। जुनून की हद तक। जब मैं एट स्टैंडर्ड में पहुँची तो स्कूल जाने के लिए फ़ादर ने लेडी बर्ड साइकिल दी। उन्हें यक़ीन था कि नई साइकिल पाकर मैं ख़ु...

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जीवन सरिता नोंन By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

मानव सभ्‍यता के इतिहास में पंचमहल धरती का अपना एक अनूठा गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। पूर्व सताब्‍दियों के साथ अष्‍टमी सताब्‍दी भी नवीन अनुभूति के, कई पन्‍ने पलटती दिखीं है।महाकवि भवभूत...

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सम्राट- अपने सच से अनजान By Khushwant Singh

एक आलिशान विला,

सुबह के 8 बजे,

विला के सभी नौकर अपने-अपने कामों में व्यस्त है। वही दूसरी तरफ सीढियों से एक 52 वर्ष के व्यक्ति फोर्मल सूट पहने हुए नीचे डाईनिंग एर...

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पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार By Neha kariyaal

एक छोटा-सा शहर, जो खूबसूरत पहाड़ों पर बसा था। वहाँ का मौसम कुछ ऐसा था, जैसे मन को सुकून देने वाली कोई पुरानी धुन — चिड़ियों की चहचहाहट, ठंडी हवा की सरसराहट और आसमान में तैरते बादल।...

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भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम By Brijmohan sharma

यह लघु उपन्यास ग्रामीण भारत में स्वतंत्रता व गांधीजी के आन्दोलन के प्रति अलख जगाने की लोमहर्षक अनकही दस्तान है I

२ स्वतत्रता सेनानी द्वारा हरिजन उत्थान का प्रयास करने पर जाति वा...

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किर_दार By sk hajee

एक ही व्यक्ति के दो किरदारों को मानना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है, यूं कहूँ तो उसके दो किरदार मै मानता ही नही । पहले किरदार मे वह लोगों मे फुट डालने की बात करता है, लोगों मे नफरत फैला...

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सलाखों से झाँकते चेहरे By DrPranava Bharti

जैसे ही इशिता ने उस कमरे में प्रवेश किया उसकी साँसें ऊपर की ऊपर ही रह गईं | एक अजीब सी मनोदशा में वह जैसे साँस लेना भूल गई, लड़खड़ा गई जैसे चक्कर से आने लगे |

"व्हाट हैपेंड म...

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हमनशीं । By Shwet Kumar Sinha

"इतनी जरूरी मीटिंग और ऊपर से लेट हो गया। आज तो मेरी खैर नहीं। पक्का आज तो मुझपर शामत आने वाली है और बॉस से गालियां खाने को मिलेंगी।" – अपनी अम्मी को बोलता हुआ रफ़ीक़ घर से बा...

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फिर से By Ambalika Sharma

यह कहानी एक लड़की रिया के बारे मे है जिसकी जिंदगी मे नवीन प्यार की बहार ले आता है उसे यकीन नही होता के कोई उसे इतना प्यार भी कर सकता है जब रिया नवीन से जीवन भर का साथ मांगती है त...

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श्री गुरु नानक देव जी By Singh Pams

श्री गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा विक्रमी समवत् 1526के अनुसार 20

अक्तूबर 1469ईस्वी तलवंडी राई भोइ जिला शेखापूर पाकिस्तान में हुआ उस भाग्यशाली नगर तलवंडी का नाम तदुप...

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बेजुबान By Kishanlal Sharma

एक औरत से उसे ऐसी उम्मीद नही थी।वह यह सोचकर आया था कि उसकी नीच और घिनोनी हरकत पर उसके साथी उसे डांटेंगे, जलील करेंगे, भला बुरा कहेंगे। लेकि न जैसा वह सोचकर आया था वैसा नही हुआ था।ब...

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शरणागति By S Bhagyam Sharma

इस लघु उपन्यास के प्रसिद्ध लेखक इंदिरा सौंदर्राजन हैं। यह तमिल के बहुत बड़े लेखक हैं। इन्होंने करीब 500 उपन्यास और 800 कहानियां लिखी है। आपने चार हजार के करीब लेख लिखे हैं।

आप क...

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स्वप्न--भुलाए नही भूलता By Kishanlal Sharma

पचास साल से ज्यादा हो गए पर मुझे आज भी वह सपना ऐसे याद है मानो कल की ही बात हो।भूल भी कैसे सकता हूँ।उस सपने ने साकार होकर मेरे उज्ज्वल भविष्य के सपने को निगल लिया था।उस सपने की टीस...

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वर्जित व्योम में उड़ती स्त्री By Ranjana Jaiswal

यह उपन्यास डायरी विधा में लिखित एक स्त्री की दास्तान है। समाज ने स्त्रियों के लिए कुछ साँचे बना रखे हैं जैसे अच्छी माँ ....सुगढ़ गृहणी और फरमावदार बीबी, जो इन साँचों में फिट हो जाती...

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The Situation Self By ADARSH PRATAP SINGH

परिचय (Introduction)जीवन में परिस्थितियाँ हर पल बदलती रहती हैं। कभी हमें आत्मविश्वास से भरा हुआ दिखना पड़ता है, तो कभी शांत और धैर्यवान रहना पड़ता है। कभी हमें एक लीडर बनकर निर्णय...

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बेगम पुल की बेगम उर्फ़ By DrPranava Bharti

घुँघरुओं की छनछनहाट क्यों और कहाँ से उसके कानों में पिघलने लगी थी, वहाँ वह गिरजाघर के प्राँगण में खड़ा था, कॉलेज का नया लेक्चरर अपने कॉलेज के छात्र-छात्राओं के साथ इस गिरजाघर की ज़मी...

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बागी आत्मा By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

बागी आत्मा 1 रचना काल-1970-71 उपन्यास रामगोपाल भावुक सम्पर्क- कमलेश्वर कोलो...

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किरदार By Priya Saini

माँ का सपना बस पूरा ही होने वाला था, दो दिन बाद अंजुम की शादी जो थी। माँ ने अंजुम की शादी के लिए न जाने कितने खुआब बुन रखे थे। सब शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। माँ सब कुछ अंजु...

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गुलकंद By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

मैं, एक लेखिका, श्रुत कीर्ति अग्रवाल, आज पहली बार आपके साथ अपनी रचनाओं के माध्यम से नहीं, स्वयं अपने-आप को माध्यम बना आपके समक्ष हूँ। अभी तक मुझे लगता था कि अगर मैं अपनी सारी बातें...

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चंद्रिका एक नन्हीं जादूगरनी By Pooja Singh

ये कहानी शुरू होती हैं कंचनापुर से चंद्रिका को उसके भाई नीलेश ने एक गुप्त स्थान पर छुपा रखा है ताकि भावी जादूगरनी को कोई नुक़सान न पहुॅंचा सके।
चंद्रिका नादान सी इन सब बातो से अनज...

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चुनिंदा लघुकथाएँ - भाग 2 By Lajpat Rai Garg

रात के बारह बजने वाले थे। करीबी रिश्तेदारों तथा वर-वधू परिवारों के लोगों को छोड़कर विवाह समारोह में आमंत्रित लगभग सभी लोग खा-पीकर तथा बधाई-शुभकामनाएँ देने का फ़र्ज़ निभाकर जा चुके...

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माफिया की दीवानगी - सीजन 2 By InkImagination

ऑथर नोट: हेलो फ्रेंड्स! ?? आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने सीजन 1 को इतना प्यार दिया। 30 पार्ट्स में Aira और Rehaan की जर्नी—कैफे से शुरू होकर शादी तक—आपके कमेंट्स ने मुझे मोटिव...

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तीसरी रात By mahesh sharma

वह आवाज़ ठीक वैसी थी मानो किसी चाकू या तलवार को, धारदार बनाने के लिए, किसी पत्थर पर घिसा जा रहा हो। हालाँकि यह आवाज़ बहुत ही धीमे से उभरी थी लेकिन इस सन्नाटे में साफ-साफ सुनी जा सकती...

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लिविंग विथ डाय By Makvana Bhavek

आज साकुरा नाम कि एक हाईस्कूल स्टूडेन्ट का फिनरल होता है जहा उसके सारे दोस्त आये होते है लेकिन उसीका एक क्लासमेट हारुकि वहा नहि गया होता वो अपने रूम में उसने किया अपना आखरी मैसेज दे...

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धुंधली यादें: एक अधूरी दास्तान By kajal jha

शहर की कंक्रीट की दीवारों और इंसानी शोर के बीच कुछ ऐसी कहानियाँ जन्म लेती हैं, जो किसी उपन्यास के आखिरी पन्ने तक पहुँचने की ज़िद नहीं करतीं। दिल्ली जैसे शहर में, जहाँ हर कोई किसी न...

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झंझावात में चिड़िया By Prabodh Kumar Govil

गोरा - चिट्टा, गोल - मटोल, आंखों से मुस्कराता सा खड़ा था।
पड़ोस की कोठी में काम करने वाली बूढ़ी औरत बोल पड़ी - काला टीका दे दो माथे पर!
- अरे नहीं - नहीं! ऊपर से नीचे तक बस वो टी...

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श्री बप्पा रावल श्रृंखला - खण्ड-दो By The Bappa Rawal

कहानी शुरू होती है मेवाड़ के एक नगर नागदा से जहाँ भीलों के एक कबीले को घेरकर गुहिलवंशी शिवादित्य भीलों के सरदार भीलराज बलेऊ को द्वन्द की चुनौती देता है। वो बलेऊ को हराकर उसे मारने व...

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जलता इश्क By soni yadav

कियारा, कियारा कहां हो ? अभी के अभी नीचे आओ। तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा है क्या ?उस महल जैसी हवेली के बीच यह आवाज ऐसी गूंज रहे थे कि मानो वह आवाज किसी हवेली में नहीं बल्कि किसी पहाड...

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सफर से पहले ही By Kishanlal Sharma

सूरज कब का दूर क्षितिज में ढल चुका था।शाम अपनी अंतिम अवस्था मे थी।आसमान से उतर रही अंधेरे की परतों ने धरती को अपने आगोश में समेटना शुरू कर दिया था।प्लेटफॉर्म नम्बर पांच के अंतिम छो...

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हरिसिंह हरीश की कविताएं व समीक्षा By राज बोहरे

मेरा खत न मिलने पर 1

हरिसिंह 'हरीश' :

परिचय

: 1 अगस्त, 1935 (दतिया म.प्र.)

शिक्षा

: एम.ए. (हिन्दी) तक ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय से ।

मानद

: विद्या...

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फैसला By Divya Shukla

फैसला (1) शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है राघव पहली बार अकेले सफर कर रहा है उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा के उसे ट्रेन में...

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Shadows Of Love By Amreen Khan

मुंबई की शाम हमेशा किसी फिल्म के सेट जैसी लगती थी. ऊँची बिल्डिंग्स की चमकती खिडकियाँ, गाडियों का लगातार शोर, और बीच- बीच में समुद्र की आवाज. उसी समुद्र किनारे खडी थी आयरा मेहता. उस...

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भूत सम्राट By OLD KING

मुंबई की रातें— जो कभी हज़ारों सपनों की धड़कन हुआ करती थीं, वे अब अविन अविनाशी चौहान के लिए किसी रोमांच से नहीं, बल्कि एक खामोश मजबूरी से भरी थीं। यह नवंबर की उमस भरी रात थी; मरीन...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी By Jyoti Prajapati

सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...

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हूफ प्रिंट By Ashish Kumar Trivedi

माने हुए व्यापारी किशनचंद भगनानी के बेटे मानस भगनानी की इंगेजमेंट श्वेता रामचंद्रन के साथ होती है। इस इंगेजमेंट की सुर्खियां सही तरह से मीडिया में फैलती उससे पहले ही मानस के स्टड फ...

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सूर By Jhanvi chopda

This story is roaming around the life of gangster. It is not a common story we have seen in movies . It is a truly new concept of representation of gangster.
Are you ready for the...

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खाली हाथ By Ratna Pandey

सूरज और नताशा का इकलौता बेटा अरुण विवाह के दस वर्ष के पश्चात नताशा के गर्भ में आया था। इसके लिए उन्होंने मंदिर-मंदिर जाकर भगवान के आगे माथा टेका था, ना जाने कितनी मानता रखी थीं। तब...

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जवान लड़का By Katha kunal

हर्ष एक 17 साल का सामान्य सा लड़का था, जो अभी 12वीं कक्षा में पढ़ता था। पढ़ाई में ठीक-ठाक और स्वभाव से थोड़ा शांत था, लेकिन उसकी संगत उसके स्वभाव से मेल नहीं खाती थी। हर्ष की दोस्त...

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वो खोफनाक रात By Khushwant Singh

दिल्ली,

शहर की दुर्गा कॉलोनी ,

आलोक शर्मा जी का घर,

आलोक शर्मा एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर हैं। सुबह-सुबह हॉल में बैठकर चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहे हैं।


सुबह के तकरीबन 8...

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वह आखिरी पल By Ratna Pandey

90 वर्ष की उम्र पार कर चुकी कावेरी अम्मा अब तक तो एकदम टनकी थीं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हृदय की धड़कनों में थोड़ी मंदी आ गई थी इसलिए उनका शरीर अब वैसा साथ नहीं निभा पा रहा था जैस...

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पहली नज़र की चुप्पी By Priyam Gupta

बारिश की हल्की बूँदें खिड़की के शीशे से टकरा रही थीं। हवा में मिट्टी की खुशबू घुली हुई थी, जैसे ज़मीन भी अपनी कहानी सुनाने को बेचैन हो।
Prakhra ने अपनी किताब बंद की, खिड़की के पास...

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जुड़ी रहूँ जड़ों से By Sunita Bishnolia

जुड़ी रहूँ जड़ों से
शहर की सबसे आलीशान कोठी में एक तरफ बैडमिंटन कोर्ट है जहाँ अभी भी कुछ लोग काम करे रहे है। इसी के दूसरे छोर पर दो आउट हाऊस भी बने हुए है। दोनों आउट हाऊस हरियाली...

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जीवन @ शटडाऊन By Neelam Kulshreshtha

[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...

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हंसता क्यों है पागल By Prabodh Kumar Govil

कुछ दिन पहले शाम को पार्क में अपने साथी सीनियर सिटीजंस के साथ टहल कर गप्पें लड़ाते समय पड़ौस में रहने वाले एक साथी ने बताया कि आज तो उनका सारा दिन बहुत आराम से बीत गया। उनका गीज़र...

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अनामिका By R B Chavda

सूरज एक सफल बिजनेसमैन था। वह अपनी मेहनत और लगन से शहर के सबसे प्रमुख उद्योगपतियों में गिना जाता था। मगर दौलत और शोहरत के इस सफर में भी एक खालीपन था, जिसे सिर्फ वह महसूस कर सकता था।...

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मुलाकात By दिलीप कुमार

शाम का समय था... हल्की हल्की हवाओं के साथ छोटी छोटी बारिस की बूंदे पड़ रही थी। बड़ा ही सुहाना मौसम था...मैं ग्राउंड में टहल रहा था अचानक मेरे कानों में आवाज आई ।ओ मिस्टर मैंने पलट क...

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THIEF BECOME A PRESEDENT By saif Ansari

गायब हैंडल का रहस्य
सुबह के 10 बजे थे। बरेली के एक व्यस्त बैंक में लोगों की ऐसी भीड़ थी, मानो कुंभ का मेला लगा हो। सब अपने-अपने काम में ऐसे डूबे थे, जैसे चींटी शक्कर के दाने पर। कि...

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एक थी...आरजू By Satyam Mishra

प्रिय पाठकों,यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है जिसका किसी भी व्यक्ति के जीवन अथवा किसी घटना विशेष से कोई सम्बन्ध नहीं है। कहानी का उद्देश्य मनोरंजन मात्र है,किसी की भावनाओं को ठेस पहुं...

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अंधेरी कोठरी का रहस्य By Pawan

एक बार की बात है...

राजस्थान के एक शांत, धूल से भरे गाँव "कुंभसर" में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग “चौधरियों की कोठरी” कहते थे। ये हवेली अब वीरान थी, लेकिन गाँव के बुज़ु...

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पीड़ा में आनंद By Ashish Kumar Trivedi

पीड़ा इस शब्द से हम सभी का परिचय हैं। क्योंकि जिसमें चेतना है उसे पीड़ा की अनुभूति भी होगी।

जैसे हंसना मुस्कुराना हमारे जीवित होने की निशानी है। वैसे ही पीड़ा का अनुभव करना भी...

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एमी By Pradeep Shrivastava

मुझे बाइक चलाना बहुत पसंद है। बहुत ज़्यादा। जुनून की हद तक। जब मैं एट स्टैंडर्ड में पहुँची तो स्कूल जाने के लिए फ़ादर ने लेडी बर्ड साइकिल दी। उन्हें यक़ीन था कि नई साइकिल पाकर मैं ख़ु...

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जीवन सरिता नोंन By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

मानव सभ्‍यता के इतिहास में पंचमहल धरती का अपना एक अनूठा गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। पूर्व सताब्‍दियों के साथ अष्‍टमी सताब्‍दी भी नवीन अनुभूति के, कई पन्‍ने पलटती दिखीं है।महाकवि भवभूत...

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सम्राट- अपने सच से अनजान By Khushwant Singh

एक आलिशान विला,

सुबह के 8 बजे,

विला के सभी नौकर अपने-अपने कामों में व्यस्त है। वही दूसरी तरफ सीढियों से एक 52 वर्ष के व्यक्ति फोर्मल सूट पहने हुए नीचे डाईनिंग एर...

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पतझड़ के बाद - एक सच्चा इंतजार By Neha kariyaal

एक छोटा-सा शहर, जो खूबसूरत पहाड़ों पर बसा था। वहाँ का मौसम कुछ ऐसा था, जैसे मन को सुकून देने वाली कोई पुरानी धुन — चिड़ियों की चहचहाहट, ठंडी हवा की सरसराहट और आसमान में तैरते बादल।...

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भारत के गावों में स्वतंत्रा संग्राम By Brijmohan sharma

यह लघु उपन्यास ग्रामीण भारत में स्वतंत्रता व गांधीजी के आन्दोलन के प्रति अलख जगाने की लोमहर्षक अनकही दस्तान है I

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किर_दार By sk hajee

एक ही व्यक्ति के दो किरदारों को मानना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है, यूं कहूँ तो उसके दो किरदार मै मानता ही नही । पहले किरदार मे वह लोगों मे फुट डालने की बात करता है, लोगों मे नफरत फैला...

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सलाखों से झाँकते चेहरे By DrPranava Bharti

जैसे ही इशिता ने उस कमरे में प्रवेश किया उसकी साँसें ऊपर की ऊपर ही रह गईं | एक अजीब सी मनोदशा में वह जैसे साँस लेना भूल गई, लड़खड़ा गई जैसे चक्कर से आने लगे |

"व्हाट हैपेंड म...

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हमनशीं । By Shwet Kumar Sinha

"इतनी जरूरी मीटिंग और ऊपर से लेट हो गया। आज तो मेरी खैर नहीं। पक्का आज तो मुझपर शामत आने वाली है और बॉस से गालियां खाने को मिलेंगी।" – अपनी अम्मी को बोलता हुआ रफ़ीक़ घर से बा...

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फिर से By Ambalika Sharma

यह कहानी एक लड़की रिया के बारे मे है जिसकी जिंदगी मे नवीन प्यार की बहार ले आता है उसे यकीन नही होता के कोई उसे इतना प्यार भी कर सकता है जब रिया नवीन से जीवन भर का साथ मांगती है त...

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श्री गुरु नानक देव जी By Singh Pams

श्री गुरु नानक देव जी का जन्म कार्तिक पूर्णिमा विक्रमी समवत् 1526के अनुसार 20

अक्तूबर 1469ईस्वी तलवंडी राई भोइ जिला शेखापूर पाकिस्तान में हुआ उस भाग्यशाली नगर तलवंडी का नाम तदुप...

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बेजुबान By Kishanlal Sharma

एक औरत से उसे ऐसी उम्मीद नही थी।वह यह सोचकर आया था कि उसकी नीच और घिनोनी हरकत पर उसके साथी उसे डांटेंगे, जलील करेंगे, भला बुरा कहेंगे। लेकि न जैसा वह सोचकर आया था वैसा नही हुआ था।ब...

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शरणागति By S Bhagyam Sharma

इस लघु उपन्यास के प्रसिद्ध लेखक इंदिरा सौंदर्राजन हैं। यह तमिल के बहुत बड़े लेखक हैं। इन्होंने करीब 500 उपन्यास और 800 कहानियां लिखी है। आपने चार हजार के करीब लेख लिखे हैं।

आप क...

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स्वप्न--भुलाए नही भूलता By Kishanlal Sharma

पचास साल से ज्यादा हो गए पर मुझे आज भी वह सपना ऐसे याद है मानो कल की ही बात हो।भूल भी कैसे सकता हूँ।उस सपने ने साकार होकर मेरे उज्ज्वल भविष्य के सपने को निगल लिया था।उस सपने की टीस...

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वर्जित व्योम में उड़ती स्त्री By Ranjana Jaiswal

यह उपन्यास डायरी विधा में लिखित एक स्त्री की दास्तान है। समाज ने स्त्रियों के लिए कुछ साँचे बना रखे हैं जैसे अच्छी माँ ....सुगढ़ गृहणी और फरमावदार बीबी, जो इन साँचों में फिट हो जाती...

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The Situation Self By ADARSH PRATAP SINGH

परिचय (Introduction)जीवन में परिस्थितियाँ हर पल बदलती रहती हैं। कभी हमें आत्मविश्वास से भरा हुआ दिखना पड़ता है, तो कभी शांत और धैर्यवान रहना पड़ता है। कभी हमें एक लीडर बनकर निर्णय...

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बेगम पुल की बेगम उर्फ़ By DrPranava Bharti

घुँघरुओं की छनछनहाट क्यों और कहाँ से उसके कानों में पिघलने लगी थी, वहाँ वह गिरजाघर के प्राँगण में खड़ा था, कॉलेज का नया लेक्चरर अपने कॉलेज के छात्र-छात्राओं के साथ इस गिरजाघर की ज़मी...

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बागी आत्मा By रामगोपाल तिवारी (भावुक)

बागी आत्मा 1 रचना काल-1970-71 उपन्यास रामगोपाल भावुक सम्पर्क- कमलेश्वर कोलो...

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किरदार By Priya Saini

माँ का सपना बस पूरा ही होने वाला था, दो दिन बाद अंजुम की शादी जो थी। माँ ने अंजुम की शादी के लिए न जाने कितने खुआब बुन रखे थे। सब शादी की तैयारियों में जुटे हुए थे। माँ सब कुछ अंजु...

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गुलकंद By श्रुत कीर्ति अग्रवाल

मैं, एक लेखिका, श्रुत कीर्ति अग्रवाल, आज पहली बार आपके साथ अपनी रचनाओं के माध्यम से नहीं, स्वयं अपने-आप को माध्यम बना आपके समक्ष हूँ। अभी तक मुझे लगता था कि अगर मैं अपनी सारी बातें...

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चंद्रिका एक नन्हीं जादूगरनी By Pooja Singh

ये कहानी शुरू होती हैं कंचनापुर से चंद्रिका को उसके भाई नीलेश ने एक गुप्त स्थान पर छुपा रखा है ताकि भावी जादूगरनी को कोई नुक़सान न पहुॅंचा सके।
चंद्रिका नादान सी इन सब बातो से अनज...

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चुनिंदा लघुकथाएँ - भाग 2 By Lajpat Rai Garg

रात के बारह बजने वाले थे। करीबी रिश्तेदारों तथा वर-वधू परिवारों के लोगों को छोड़कर विवाह समारोह में आमंत्रित लगभग सभी लोग खा-पीकर तथा बधाई-शुभकामनाएँ देने का फ़र्ज़ निभाकर जा चुके...

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माफिया की दीवानगी - सीजन 2 By InkImagination

ऑथर नोट: हेलो फ्रेंड्स! ?? आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने सीजन 1 को इतना प्यार दिया। 30 पार्ट्स में Aira और Rehaan की जर्नी—कैफे से शुरू होकर शादी तक—आपके कमेंट्स ने मुझे मोटिव...

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तीसरी रात By mahesh sharma

वह आवाज़ ठीक वैसी थी मानो किसी चाकू या तलवार को, धारदार बनाने के लिए, किसी पत्थर पर घिसा जा रहा हो। हालाँकि यह आवाज़ बहुत ही धीमे से उभरी थी लेकिन इस सन्नाटे में साफ-साफ सुनी जा सकती...

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लिविंग विथ डाय By Makvana Bhavek

आज साकुरा नाम कि एक हाईस्कूल स्टूडेन्ट का फिनरल होता है जहा उसके सारे दोस्त आये होते है लेकिन उसीका एक क्लासमेट हारुकि वहा नहि गया होता वो अपने रूम में उसने किया अपना आखरी मैसेज दे...

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धुंधली यादें: एक अधूरी दास्तान By kajal jha

शहर की कंक्रीट की दीवारों और इंसानी शोर के बीच कुछ ऐसी कहानियाँ जन्म लेती हैं, जो किसी उपन्यास के आखिरी पन्ने तक पहुँचने की ज़िद नहीं करतीं। दिल्ली जैसे शहर में, जहाँ हर कोई किसी न...

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झंझावात में चिड़िया By Prabodh Kumar Govil

गोरा - चिट्टा, गोल - मटोल, आंखों से मुस्कराता सा खड़ा था।
पड़ोस की कोठी में काम करने वाली बूढ़ी औरत बोल पड़ी - काला टीका दे दो माथे पर!
- अरे नहीं - नहीं! ऊपर से नीचे तक बस वो टी...

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श्री बप्पा रावल श्रृंखला - खण्ड-दो By The Bappa Rawal

कहानी शुरू होती है मेवाड़ के एक नगर नागदा से जहाँ भीलों के एक कबीले को घेरकर गुहिलवंशी शिवादित्य भीलों के सरदार भीलराज बलेऊ को द्वन्द की चुनौती देता है। वो बलेऊ को हराकर उसे मारने व...

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जलता इश्क By soni yadav

कियारा, कियारा कहां हो ? अभी के अभी नीचे आओ। तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा है क्या ?उस महल जैसी हवेली के बीच यह आवाज ऐसी गूंज रहे थे कि मानो वह आवाज किसी हवेली में नहीं बल्कि किसी पहाड...

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सफर से पहले ही By Kishanlal Sharma

सूरज कब का दूर क्षितिज में ढल चुका था।शाम अपनी अंतिम अवस्था मे थी।आसमान से उतर रही अंधेरे की परतों ने धरती को अपने आगोश में समेटना शुरू कर दिया था।प्लेटफॉर्म नम्बर पांच के अंतिम छो...

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हरिसिंह हरीश की कविताएं व समीक्षा By राज बोहरे

मेरा खत न मिलने पर 1

हरिसिंह 'हरीश' :

परिचय

: 1 अगस्त, 1935 (दतिया म.प्र.)

शिक्षा

: एम.ए. (हिन्दी) तक ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय से ।

मानद

: विद्या...

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फैसला By Divya Shukla

फैसला (1) शाम की ट्रेन थी बेटे की अभी सत्ररह साल का ही तो है राघव पहली बार अकेले सफर कर रहा है उसे अकेले भेजते हुए मेरा कलेजा कांपा तो बहुत फिर भी खुद को समझा के उसे ट्रेन में...

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Shadows Of Love By Amreen Khan

मुंबई की शाम हमेशा किसी फिल्म के सेट जैसी लगती थी. ऊँची बिल्डिंग्स की चमकती खिडकियाँ, गाडियों का लगातार शोर, और बीच- बीच में समुद्र की आवाज. उसी समुद्र किनारे खडी थी आयरा मेहता. उस...

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भूत सम्राट By OLD KING

मुंबई की रातें— जो कभी हज़ारों सपनों की धड़कन हुआ करती थीं, वे अब अविन अविनाशी चौहान के लिए किसी रोमांच से नहीं, बल्कि एक खामोश मजबूरी से भरी थीं। यह नवंबर की उमस भरी रात थी; मरीन...

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डबल गेम: मर्यादा वर्सेस मक्कारी By Jyoti Prajapati

सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...

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हूफ प्रिंट By Ashish Kumar Trivedi

माने हुए व्यापारी किशनचंद भगनानी के बेटे मानस भगनानी की इंगेजमेंट श्वेता रामचंद्रन के साथ होती है। इस इंगेजमेंट की सुर्खियां सही तरह से मीडिया में फैलती उससे पहले ही मानस के स्टड फ...

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सूर By Jhanvi chopda

This story is roaming around the life of gangster. It is not a common story we have seen in movies . It is a truly new concept of representation of gangster.
Are you ready for the...

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खाली हाथ By Ratna Pandey

सूरज और नताशा का इकलौता बेटा अरुण विवाह के दस वर्ष के पश्चात नताशा के गर्भ में आया था। इसके लिए उन्होंने मंदिर-मंदिर जाकर भगवान के आगे माथा टेका था, ना जाने कितनी मानता रखी थीं। तब...

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जवान लड़का By Katha kunal

हर्ष एक 17 साल का सामान्य सा लड़का था, जो अभी 12वीं कक्षा में पढ़ता था। पढ़ाई में ठीक-ठाक और स्वभाव से थोड़ा शांत था, लेकिन उसकी संगत उसके स्वभाव से मेल नहीं खाती थी। हर्ष की दोस्त...

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वो खोफनाक रात By Khushwant Singh

दिल्ली,

शहर की दुर्गा कॉलोनी ,

आलोक शर्मा जी का घर,

आलोक शर्मा एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर हैं। सुबह-सुबह हॉल में बैठकर चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहे हैं।


सुबह के तकरीबन 8...

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