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Featured Books

आखा तीज का ब्याह By Ankita Bhargava

सपनों को पूरा करने निकली वासंती अपने रिश्तों को ही खो बैठी। जब फिर से अतीत की गलियों ने उसे पुकारा तो वह अनिष्ट की आशंका से घबरा गई। मगर प्रतीक ने आश्वासन दिया कि कोई है वहां उसकी...

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History of Kashmir.... By puja

आज से करीब 700 साल पहले। कश्मीर में सहदेव नाम का एक हिंदू राजा था। उसे न तो प्रजा की फिक्र थी और न ही शासन चलाने में दिलचस्पी। सहदेव के नाम पर उसके प्रधानमंत्री और सेनापति रामचंद्र...

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रक्तरेखा By Pappu Maurya

पत्तों की सरसराहट थम चुकी थी।

आसमान फट पड़ा था — और मानो देवताओं के क्रोध से बरस रहा था पानी।

हर पेड़, हर झाड़ी, हर तिनका काँप रहा था। हवा में मिट्टी, कीचड़ और काई की गंध घुल...

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रूस के पत्र By Rabindranath Tagore

सोवियत शासन के प्रथम परिचय ने मेरे मन को खास तौर से आकर्षित किया है, यह मैं पहले ही कह चुका हूँ। इसके कई विशेष कारण हैं और वे आलोचना के योग्य हैं।
रूस की जिस तसवीर ने मेरे हृदय मे...

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शिव बोल मेरी रसना घड़ी घड़ी By vandana A dubey

दूर, झुरमुट के बीच में जो खण्डहर दिखाई दे रहा है न, असल में वो खन्डहर नहीं है. पुरानी हवेली है. लेकिन लोग उसे खण्डहर ही कहते हैं. हवेली यानि बड़ा सा घर. बड़ा सा बंगला. बहुत पुराना बं...

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दिल से दिल तक एक तरफ़ा सफ़र By R B Chavda

यह प्यार क्या है ? और कैसे होता है ? क्या कोई इतना पसंद आ सकता है जिसमे हम हमारी पूरी दुनिया देखते है ! मैंने सुना है एक फिल्म में की प्यार दोस्ती है मतलब वह हमारा दोस्त होना चाहिए...

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अधूरे संवाद ( अतुकांत ) By Alok Mishra

कुछ रचनाऐं भाव के प्रवाह मेंं .... सोचने को मजबूर करेंगी । संवाद तब पूर्ण होगा जब पाठक पढ़ेगा और चिंतन करेगा।

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आँच By Dr. Suryapal Singh

आँच अठारह सौ सत्तावन के संघर्ष की पृष्ठभूमि को उकेरता उपन्यास यह उपन्यास ? इक्कीसवीं सदीं का दूसरा दशक। उदारीकरण के बढ़ते क़दम। भारतीय ही नहीं सम्पूर्ण एशियाई बाज़ारों को आच्छादित करन...

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Rebirth of my Innocent Wife By Rani prajapati

बारिश बहुत तेजो से झमाझम बरस रही थी।

वही एक लड़की सड़क पर भागे जा रही थी। उसके पीछे एक लड़का हाथों में चाकू लिए उसके पीछे भाग रहा था।

वो लड़की बेहद ही सुंदर थी लेकिन इस वक्...

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अक्षयपात्र : अनसुलझा रहस्य By Rajnish

अक्षयपात्र : अनसुलझा रहस्य (भाग - 1) चारों तरफ दर्शक दीर्घा को देखते हुए.... विवेक बंसल: यश! कुछ भी हो, आज भी लड़कियों के बीच में तुम्हारा जादू बरकरार है (चुटकी लेते हुए) तभी उद्घो...

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A Secret Letter By Hardik Chande

DISCLAIMERप्रस्तुत कथा संपूर्ण: काल्पनिक है। इसका किसी भी घटना, व्यक्ति, स्थान, समय, जाति, लिंग, धर्म से कोई संबंध नहीं है। ये कथा का उद्देश्य किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुँचाना नह...

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प्यार का खेल By निखिल ठाकुर

5 जनवरी 2020 की बात थी तो निखिल अपने दोस्त टाले को उसके नम्बर में मैसेज करता है...क्योंकि निखिल ने उसे कुछ पैसे दिये थे और अब उसे कुछ पैसों की जरूरत थी तो इसलिए वह अपने दोस्त टाले...

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वो जो मैं नहीं था By Rohan

स्थान: नासिक, महाराष्ट्र
वर्ष: 2031
---

नासिक के एक शांत मोहल्ले में सुबह की चाय की भाप के साथ एक नाम हवा में गूंजता है —
"आरव… उठ जा बे! आज फिर लेट हो जाएगा!"

22...

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सुरजू छोरा By Kusum Bhatt

..... तो एक ठहरी जिद के तहत सुरजू ने निर्णय लिया और गांव में मुनादी पिटा दी....
भूकंप आ गया गांव में.....! गोया सुरजू ने पृथ्वी तल पर घुस कर धीरे से खिसका दी हो प्लेट...., गांव के...

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मुझे तुम याद आएं... By Saroj Verma

अरी,भाग्यवान! सत्या कहाँ है?नाश्ते का समय हो गया है और साहबजादे अभी तक फरार हैं,सेठ जानकी दास जी बोले.....
अरे,सुबह-सुबह निकल गया था,पता नहीं क्यों नहीं लौटा अब तक?,कल्याणी ने टेब...

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Agent Tara By Pooja Singh

मुंबई कभी नहीं सोती.
रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए की तरह.
आकृति मेहता इन्हीं सायों में खडी थी.
दुनिया की नजरों में वह आज भी वही थी...

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सरल नहीं था यह काम By डॉ स्वतन्त्र कुमार सक्सैना

1 तनी बंदूकों के साए



तनी बंदूकों के साए हों, भय के अंधियारे छाए हों

घड़ी-घड़ी आशंक...

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अपने साथ मेरा सफ़र By Prabodh Kumar Govil

मुझे अपने आरंभिक दिनों से ही ऐसा लगता था कि समाज के कुछ लोग मेरे मन पर बहुत असर डालते हैं। मैं ये कभी समझ नहीं पाता था कि किसी - किसी व्यक्ति से मैं इतना क्यों प्रभावित हो रहा हूं?...

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Reborn to be Loved By Mini

Let's begin…

आरवी ने अपनी पूरी ज़िंदगी अपने सपनों को पूरा करने में गुज़ार दी थी। सात साल की करी मेहनत के बाद, वो आखिरकार एक सक्सेसफुल डॉक्टर बन गई थी। उसकी लाईफ एकदम सही चल...

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बद्री विशाल सबके हैं By डॉ स्वतन्त्र कुमार सक्सैना

पंडित विभूति नारायण सर्दियों में क्षेत्र के यजमानों के पास आए थे।

उन्‍हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी सांस चलने लगी थी वे ठीक से सो नहीं पाए थे । उनके यजमान पटेल साहब, उन्‍हें...

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ईश्‍वर लीला विज्ञान By ramgopal bhavuk

ईश्‍वर लीला विज्ञान 1 अनन्‍तराम गुप्‍त कवि ईश्‍वर की अनूठी कारीगरी पर मुग्‍ध हैं, और आकाश, अग्नि, पवन, जल एवं पृथ्‍वी के पांच पुराने तत्‍वों का वर्णन आज के वैज्ञानिक सिद्धान्‍तों क...

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ये हम आ गए कहां!!! By दुःखी आत्मा जलीभूनी

पूरे आठ साल बाद लौटा था वह, वापस अपने शहर, अपने देश में! फिर से उन्हीं हवाओं उन्हीं गलियों में जहां वापस ना आने की कसम खाई थी उसने। लेकिन जिंदगी हमारे हिसाब से कहां चलती है! मजबूरी...

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इस रिश्ते को क्या नाम दूँ ? By Kalpana Sahoo

में जो अब लिखने जा रही हुं वो कोई काल्पनीक Story नहीं है । वो एक बास्तबिक घटणा है । जिसे में जब भी याद करती हुं तो मेरी अन्दर एक अजीब सी सबाल पैदा होती है । पता नहीं क्युं ?...

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पवित्र रिश्ता... By निशा शर्मा

नोएडा की एक पचास मंजिला सोसायटी, जहाँ हर तरफ़ बस इमारतें ही इमारतें, एक-दूसरे का मुँह ताकती हुई इमारतें ! नीचे बने हुए चिल्ड्रन्स पार्क में खेलते हुए बच्चे और इसी पार्क के ठीक सामने...

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महावीर लचित बड़फूकन By Mohan Dhama

अपने महापुरुषों का स्मरण भारत में एक श्रेष्ठ परम्परा रही है। कथा-कहानियों से लगाकर पुस्तकों तक उनके कर्तृत्व और आदर्श जीवन का सजीव चित्रण किया गया है। यदा-कदा पर्वों के माध्यम से भ...

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बदलाव ज़रूरी है By Pallavi Saxena

एक स्त्री अपने सुहाग का जोड़ा पहने अपने बंद कमरे में मध्यम सी रौशनी में खुद को आईने में देख कर आँसू बाह रही है. बार-बार उसका हाथ सिंदूर और मंगल सूत्र की और बढ़ता है लेकिन उसमें इतनी...

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बोलता आईना By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

(काव्य संकलन) समर्पण - जिन्होंने अपने जीवन को, समय के आईने के समक्ष, खड़ाकर,उससे कुछ सीखने - समझने की कोशिश की, उन्हीं के कर कमलों में-सादर। वेदराम प्रजापति मनमस्त मो.9981284867...

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चुनिंदा लघुकथाएँ By Lajpat Rai Garg

माँ, माँ होती है आज राकेश जल्दी तैयार होकर वृद्धाश्रम पहुँचा। आज उसकी माँ का 80वाँ जन्मदिन है। उसने माँ के चरर्णस्पर्श किये, उनका मुँह मीठा करवाया। आशीर्वाद लिया। पूछा - ‘माँ, कोई...

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सचमुच तुम ईश्वर हो! By ramgopal bhavuk

व्यंग्य की तेजधर उच्छंखल समाज की शल्य-क्रिया करने में समर्थ होती है। आज के दूषित वातावरण में यहाँ संवेदना मृत प्रायः हो रही है। केवल व्यंग्य पर ही मेरा विश्वास टिक पा रहा है कि कही...

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विचित्र मोहब्बत अरुंधति कि...! By Yashoda Yashoda

रात में चांद अपने पूरे आकार में चमक रहा था, और आज की ये रात अमावस की काली अंधेरी रात थी! मिर्ज़ा पुर रेलवे फाटक के उस पार एक स्टेशन है, और उस स्टेशन से कुछ एक दो घंटे की दूरी पे कब...

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मज़बूर By Shrikar Dixit

ये कहानी एक ऐसे मजदूर की है,जो अपने परिवार के साथ घर से बहुत दूर काम की तलाश में जाता है,अचानक से लॉकडाउन होने की वजह से कमाई और आवागमन के सारे रास्ते बंद हो जाने के कारण कुछ दिनों...

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मंजिल अपनी अपनी By Awantika Palewale

मोहन खासते-खासते बोला दरवाजा खोलो सूरज बेटा।
चंदा एकदम बौखला गई उसको लगा इस वक्त कौन आया होगा।

मोहन बोला मैं चाचा मोहन आया हूं।
चंदा झलाए हुए स्वर में कहा अच्छा-अच्छा रुको कपड...

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एलओसी- लव अपोज क्राइम By jignasha patel

नशे से बोझिल नंदिनी की आंखों में थोड़ी चैतन्यता नज़र आने लगी। फाइव स्टार होटल के बार में बैठी नंदिनी के कानों में गीत संगीत की स्वर लहरियां धीरे धीरे गूंजने लगी-तेरे वादे क...

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सेवा और सहिष्णुता के उपासक संत तुकाराम By Charu Mittal

संसार में सभी मनुष्यों का लक्ष्य, धन, संतान और यश बताया गया है। इन्हीं को विद्वानों ने वित्तैषणा, पुत्रेषणा और लोकैषणा के नाम से पुकारा है। इन तीनों से विरक्त व्यक्ति ढूँढ़ने से भी...

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अधूरे इश्क की पूरी दास्तान By Nirali Ahir

खुली खिड़की से आती ठंडी हवा प्रीतम के कुछ कुछ सफेद हुए बालों को धीरे धीरे सहेला रही थी। 56 साल का प्रीतम अपनी कुर्सी पर बैठा बैठा कुछ सोच रहा था ।बाहर से आता शोर मानो उसके कानो तक...

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दीवानगी By Sona

वो हस्पताल के वेटिंग रूम में कुर्सी पर पीछे सिर टिका कर आंखें बंद कर के बैठी थी।
उसकी आंखों के कोर से आंसू निकल रहे थे। और उसके कंधों को भीगों रहे थे।
उसकी आंखों के आगे एक हफ्ते...

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सुहागिन या विधवा By Kishanlal Sharma

"थप। थप-------दरवाजे पर पड़ने वाली दस्तको ने राधा की नींद में विघ्न डाला था।कौन हो सकता है इतनी रात को? यह सोचती हुई वह दरवाजे तक आयी थी।दरवाजा खोलने से पहले उसने पूछा था,"कौन...

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सुसाइड पार्टनर्स By Nirali patel

हा भई हा.......

सही पढ़ा आपने सुसाइड पार्टनर।

आप सोच रहे होंगे की यार लाइफ पार्टनर होता है, डांस पार्टनर भी होता है, और तो और अगर कोई दो व्यक्ति साथ में एक ही बिजनेस कर रहे ह...

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तुम मेरी आखिरी सांस हो By kajal jha

खामोश हवेली का रहस्य
रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...

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बेगुनाह गुनेहगार By Monika Verma

सुहानी। एक प्यारी सी लड़की। जो अपने ख्यालो से इस दुनिया को देखती है, समझती है। जिसे संभव असंभव, मुमकिन नामुमकिन, मुश्किल आसान का फर्क समझ नही आता। जो करना चाहती है वो कर के ही रहती...

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भारत By नन्दलाल सुथार राही

भारत की विविधताओं एवं यहाँ की संस्कृति पर एक काव्य ग्रंथ जिसमें अलग-अलग कविताओं का संग्रह है। जिसकी शुरुआत "भारत" कविता से कर रहा हूँ । आशा है आप इस रचना को उचित प्रोत्साहन...

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मेरी नजर से देखो By Rajat Singhal

मै एक नवीन लेखक अपनी इन लघु कहानियों से एक समाज की भिन्न - २ समस्याओ से ग्रस्त छवि को दिखाने का प्रयत्न करूँगा। मै हर समस्या के मध्य रह व मुझसे जूडे अनुभवो की भ्रांतियो को अपने लेख...

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तेरे बिना अधूरी सी ज़िंदगी By Prashant Singh

बारिश की हल्की फुहारें जब दिल्ली की सड़कों को भिगो रही थीं, तब वह पहली बार उसे देखा था—कॉफ़ी शॉप की खिड़की से झाँकती हुई, किताबों में खोई हुई।

आरव, एक 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनि...

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जीवनधारा By Shwet Kumar Sinha

रूपेश ट्रेन में अपने बर्थ पर आकर बैठा ही था, तभी जीन्स और टी-शर्ट पहने 25–26 साल की एक लड़की सामने आकर खड़ी हो गयी और सीट छोडने का इशारा करती हुई अपना भारी-भरकम बैग रूपेश के बर्थ पर...

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इंडियन कपल By PARIKH MAULIK

ये कहानी एक इंसान सूरज से शुरू होती है वह अमेरीका मे स्थित शहर में रहता है वहा एक बेकरी की शॉप चाला रहा है और अकेला ही एक बड़े से घर में रहता है। मगर खुश नहीं है पता नहीं किसीके इं...

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जीवन का गणित By Seema Singh

शाम तक पूरा घर चमाचम हो जाना चाहिए नीतू! अवंतिका ने फिर से दोहराया। नीली सलवार, पीला कुर्ता, गुलाबी स्वेटर के साथ लाल दुपट्टा कंधे से ओढ़ कर कमर तक लपेटे, नीतू ठुमकती सी दरवाजे के...

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बुजुर्गो का आशिष By Ashish

बुजुर्गो ने मुझे बहुत सी कहानियाँ सुनाई है उसमें से कुछ....

आशिष / आशीर्वाद

*!! समस्या रूपी बंदर !!

*एक बार स्वामी विवेकानंद को बंदरों का सामना करना पड़ा था। वह इस आप बी...

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वो श्याम सलोनी By Anshika

वो एकटक बगीचे के फूलों को निहार रही थी रंग रूप पर उसने कभी खुद से ध्यान ही नहीं दिया था क्योंकि उसने हमेशा अपने पापा से यही सुना था की बच्चे इंसान का मन साफ होना चाहिए रंग और खुबसू...

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कामनाओं के नशेमन By Husn Tabassum nihan

दरवाजे बहुत होते हैं, कुछ सहजता के साथ खुल जाने वाले और कुछ दरवाजे बहुत खटखटाने के बाद खुलने वाले। उतना अर्थ दरवाजे का नहीं होता जितना अर्थ चौखट का होता है। चौखट लांघ कर भीतर आना औ...

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आखा तीज का ब्याह By Ankita Bhargava

सपनों को पूरा करने निकली वासंती अपने रिश्तों को ही खो बैठी। जब फिर से अतीत की गलियों ने उसे पुकारा तो वह अनिष्ट की आशंका से घबरा गई। मगर प्रतीक ने आश्वासन दिया कि कोई है वहां उसकी...

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History of Kashmir.... By puja

आज से करीब 700 साल पहले। कश्मीर में सहदेव नाम का एक हिंदू राजा था। उसे न तो प्रजा की फिक्र थी और न ही शासन चलाने में दिलचस्पी। सहदेव के नाम पर उसके प्रधानमंत्री और सेनापति रामचंद्र...

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रक्तरेखा By Pappu Maurya

पत्तों की सरसराहट थम चुकी थी।

आसमान फट पड़ा था — और मानो देवताओं के क्रोध से बरस रहा था पानी।

हर पेड़, हर झाड़ी, हर तिनका काँप रहा था। हवा में मिट्टी, कीचड़ और काई की गंध घुल...

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रूस के पत्र By Rabindranath Tagore

सोवियत शासन के प्रथम परिचय ने मेरे मन को खास तौर से आकर्षित किया है, यह मैं पहले ही कह चुका हूँ। इसके कई विशेष कारण हैं और वे आलोचना के योग्य हैं।
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शिव बोल मेरी रसना घड़ी घड़ी By vandana A dubey

दूर, झुरमुट के बीच में जो खण्डहर दिखाई दे रहा है न, असल में वो खन्डहर नहीं है. पुरानी हवेली है. लेकिन लोग उसे खण्डहर ही कहते हैं. हवेली यानि बड़ा सा घर. बड़ा सा बंगला. बहुत पुराना बं...

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दिल से दिल तक एक तरफ़ा सफ़र By R B Chavda

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कुछ रचनाऐं भाव के प्रवाह मेंं .... सोचने को मजबूर करेंगी । संवाद तब पूर्ण होगा जब पाठक पढ़ेगा और चिंतन करेगा।

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आँच By Dr. Suryapal Singh

आँच अठारह सौ सत्तावन के संघर्ष की पृष्ठभूमि को उकेरता उपन्यास यह उपन्यास ? इक्कीसवीं सदीं का दूसरा दशक। उदारीकरण के बढ़ते क़दम। भारतीय ही नहीं सम्पूर्ण एशियाई बाज़ारों को आच्छादित करन...

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बारिश बहुत तेजो से झमाझम बरस रही थी।

वही एक लड़की सड़क पर भागे जा रही थी। उसके पीछे एक लड़का हाथों में चाकू लिए उसके पीछे भाग रहा था।

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अक्षयपात्र : अनसुलझा रहस्य By Rajnish

अक्षयपात्र : अनसुलझा रहस्य (भाग - 1) चारों तरफ दर्शक दीर्घा को देखते हुए.... विवेक बंसल: यश! कुछ भी हो, आज भी लड़कियों के बीच में तुम्हारा जादू बरकरार है (चुटकी लेते हुए) तभी उद्घो...

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A Secret Letter By Hardik Chande

DISCLAIMERप्रस्तुत कथा संपूर्ण: काल्पनिक है। इसका किसी भी घटना, व्यक्ति, स्थान, समय, जाति, लिंग, धर्म से कोई संबंध नहीं है। ये कथा का उद्देश्य किसी की भी भावनाओं को ठेस पहुँचाना नह...

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प्यार का खेल By निखिल ठाकुर

5 जनवरी 2020 की बात थी तो निखिल अपने दोस्त टाले को उसके नम्बर में मैसेज करता है...क्योंकि निखिल ने उसे कुछ पैसे दिये थे और अब उसे कुछ पैसों की जरूरत थी तो इसलिए वह अपने दोस्त टाले...

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वो जो मैं नहीं था By Rohan

स्थान: नासिक, महाराष्ट्र
वर्ष: 2031
---

नासिक के एक शांत मोहल्ले में सुबह की चाय की भाप के साथ एक नाम हवा में गूंजता है —
"आरव… उठ जा बे! आज फिर लेट हो जाएगा!"

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सुरजू छोरा By Kusum Bhatt

..... तो एक ठहरी जिद के तहत सुरजू ने निर्णय लिया और गांव में मुनादी पिटा दी....
भूकंप आ गया गांव में.....! गोया सुरजू ने पृथ्वी तल पर घुस कर धीरे से खिसका दी हो प्लेट...., गांव के...

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मुझे तुम याद आएं... By Saroj Verma

अरी,भाग्यवान! सत्या कहाँ है?नाश्ते का समय हो गया है और साहबजादे अभी तक फरार हैं,सेठ जानकी दास जी बोले.....
अरे,सुबह-सुबह निकल गया था,पता नहीं क्यों नहीं लौटा अब तक?,कल्याणी ने टेब...

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Agent Tara By Pooja Singh

मुंबई कभी नहीं सोती.
रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए की तरह.
आकृति मेहता इन्हीं सायों में खडी थी.
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सरल नहीं था यह काम By डॉ स्वतन्त्र कुमार सक्सैना

1 तनी बंदूकों के साए



तनी बंदूकों के साए हों, भय के अंधियारे छाए हों

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अपने साथ मेरा सफ़र By Prabodh Kumar Govil

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आरवी ने अपनी पूरी ज़िंदगी अपने सपनों को पूरा करने में गुज़ार दी थी। सात साल की करी मेहनत के बाद, वो आखिरकार एक सक्सेसफुल डॉक्टर बन गई थी। उसकी लाईफ एकदम सही चल...

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बद्री विशाल सबके हैं By डॉ स्वतन्त्र कुमार सक्सैना

पंडित विभूति नारायण सर्दियों में क्षेत्र के यजमानों के पास आए थे।

उन्‍हें सांस लेने में तकलीफ होने लगी सांस चलने लगी थी वे ठीक से सो नहीं पाए थे । उनके यजमान पटेल साहब, उन्‍हें...

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ईश्‍वर लीला विज्ञान By ramgopal bhavuk

ईश्‍वर लीला विज्ञान 1 अनन्‍तराम गुप्‍त कवि ईश्‍वर की अनूठी कारीगरी पर मुग्‍ध हैं, और आकाश, अग्नि, पवन, जल एवं पृथ्‍वी के पांच पुराने तत्‍वों का वर्णन आज के वैज्ञानिक सिद्धान्‍तों क...

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ये हम आ गए कहां!!! By दुःखी आत्मा जलीभूनी

पूरे आठ साल बाद लौटा था वह, वापस अपने शहर, अपने देश में! फिर से उन्हीं हवाओं उन्हीं गलियों में जहां वापस ना आने की कसम खाई थी उसने। लेकिन जिंदगी हमारे हिसाब से कहां चलती है! मजबूरी...

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इस रिश्ते को क्या नाम दूँ ? By Kalpana Sahoo

में जो अब लिखने जा रही हुं वो कोई काल्पनीक Story नहीं है । वो एक बास्तबिक घटणा है । जिसे में जब भी याद करती हुं तो मेरी अन्दर एक अजीब सी सबाल पैदा होती है । पता नहीं क्युं ?...

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पवित्र रिश्ता... By निशा शर्मा

नोएडा की एक पचास मंजिला सोसायटी, जहाँ हर तरफ़ बस इमारतें ही इमारतें, एक-दूसरे का मुँह ताकती हुई इमारतें ! नीचे बने हुए चिल्ड्रन्स पार्क में खेलते हुए बच्चे और इसी पार्क के ठीक सामने...

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महावीर लचित बड़फूकन By Mohan Dhama

अपने महापुरुषों का स्मरण भारत में एक श्रेष्ठ परम्परा रही है। कथा-कहानियों से लगाकर पुस्तकों तक उनके कर्तृत्व और आदर्श जीवन का सजीव चित्रण किया गया है। यदा-कदा पर्वों के माध्यम से भ...

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बदलाव ज़रूरी है By Pallavi Saxena

एक स्त्री अपने सुहाग का जोड़ा पहने अपने बंद कमरे में मध्यम सी रौशनी में खुद को आईने में देख कर आँसू बाह रही है. बार-बार उसका हाथ सिंदूर और मंगल सूत्र की और बढ़ता है लेकिन उसमें इतनी...

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बोलता आईना By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

(काव्य संकलन) समर्पण - जिन्होंने अपने जीवन को, समय के आईने के समक्ष, खड़ाकर,उससे कुछ सीखने - समझने की कोशिश की, उन्हीं के कर कमलों में-सादर। वेदराम प्रजापति मनमस्त मो.9981284867...

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चुनिंदा लघुकथाएँ By Lajpat Rai Garg

माँ, माँ होती है आज राकेश जल्दी तैयार होकर वृद्धाश्रम पहुँचा। आज उसकी माँ का 80वाँ जन्मदिन है। उसने माँ के चरर्णस्पर्श किये, उनका मुँह मीठा करवाया। आशीर्वाद लिया। पूछा - ‘माँ, कोई...

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सचमुच तुम ईश्वर हो! By ramgopal bhavuk

व्यंग्य की तेजधर उच्छंखल समाज की शल्य-क्रिया करने में समर्थ होती है। आज के दूषित वातावरण में यहाँ संवेदना मृत प्रायः हो रही है। केवल व्यंग्य पर ही मेरा विश्वास टिक पा रहा है कि कही...

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विचित्र मोहब्बत अरुंधति कि...! By Yashoda Yashoda

रात में चांद अपने पूरे आकार में चमक रहा था, और आज की ये रात अमावस की काली अंधेरी रात थी! मिर्ज़ा पुर रेलवे फाटक के उस पार एक स्टेशन है, और उस स्टेशन से कुछ एक दो घंटे की दूरी पे कब...

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मज़बूर By Shrikar Dixit

ये कहानी एक ऐसे मजदूर की है,जो अपने परिवार के साथ घर से बहुत दूर काम की तलाश में जाता है,अचानक से लॉकडाउन होने की वजह से कमाई और आवागमन के सारे रास्ते बंद हो जाने के कारण कुछ दिनों...

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मंजिल अपनी अपनी By Awantika Palewale

मोहन खासते-खासते बोला दरवाजा खोलो सूरज बेटा।
चंदा एकदम बौखला गई उसको लगा इस वक्त कौन आया होगा।

मोहन बोला मैं चाचा मोहन आया हूं।
चंदा झलाए हुए स्वर में कहा अच्छा-अच्छा रुको कपड...

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एलओसी- लव अपोज क्राइम By jignasha patel

नशे से बोझिल नंदिनी की आंखों में थोड़ी चैतन्यता नज़र आने लगी। फाइव स्टार होटल के बार में बैठी नंदिनी के कानों में गीत संगीत की स्वर लहरियां धीरे धीरे गूंजने लगी-तेरे वादे क...

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सेवा और सहिष्णुता के उपासक संत तुकाराम By Charu Mittal

संसार में सभी मनुष्यों का लक्ष्य, धन, संतान और यश बताया गया है। इन्हीं को विद्वानों ने वित्तैषणा, पुत्रेषणा और लोकैषणा के नाम से पुकारा है। इन तीनों से विरक्त व्यक्ति ढूँढ़ने से भी...

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अधूरे इश्क की पूरी दास्तान By Nirali Ahir

खुली खिड़की से आती ठंडी हवा प्रीतम के कुछ कुछ सफेद हुए बालों को धीरे धीरे सहेला रही थी। 56 साल का प्रीतम अपनी कुर्सी पर बैठा बैठा कुछ सोच रहा था ।बाहर से आता शोर मानो उसके कानो तक...

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दीवानगी By Sona

वो हस्पताल के वेटिंग रूम में कुर्सी पर पीछे सिर टिका कर आंखें बंद कर के बैठी थी।
उसकी आंखों के कोर से आंसू निकल रहे थे। और उसके कंधों को भीगों रहे थे।
उसकी आंखों के आगे एक हफ्ते...

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सुहागिन या विधवा By Kishanlal Sharma

"थप। थप-------दरवाजे पर पड़ने वाली दस्तको ने राधा की नींद में विघ्न डाला था।कौन हो सकता है इतनी रात को? यह सोचती हुई वह दरवाजे तक आयी थी।दरवाजा खोलने से पहले उसने पूछा था,"कौन...

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सुसाइड पार्टनर्स By Nirali patel

हा भई हा.......

सही पढ़ा आपने सुसाइड पार्टनर।

आप सोच रहे होंगे की यार लाइफ पार्टनर होता है, डांस पार्टनर भी होता है, और तो और अगर कोई दो व्यक्ति साथ में एक ही बिजनेस कर रहे ह...

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तुम मेरी आखिरी सांस हो By kajal jha

खामोश हवेली का रहस्य
रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...

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बेगुनाह गुनेहगार By Monika Verma

सुहानी। एक प्यारी सी लड़की। जो अपने ख्यालो से इस दुनिया को देखती है, समझती है। जिसे संभव असंभव, मुमकिन नामुमकिन, मुश्किल आसान का फर्क समझ नही आता। जो करना चाहती है वो कर के ही रहती...

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भारत By नन्दलाल सुथार राही

भारत की विविधताओं एवं यहाँ की संस्कृति पर एक काव्य ग्रंथ जिसमें अलग-अलग कविताओं का संग्रह है। जिसकी शुरुआत "भारत" कविता से कर रहा हूँ । आशा है आप इस रचना को उचित प्रोत्साहन...

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मेरी नजर से देखो By Rajat Singhal

मै एक नवीन लेखक अपनी इन लघु कहानियों से एक समाज की भिन्न - २ समस्याओ से ग्रस्त छवि को दिखाने का प्रयत्न करूँगा। मै हर समस्या के मध्य रह व मुझसे जूडे अनुभवो की भ्रांतियो को अपने लेख...

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तेरे बिना अधूरी सी ज़िंदगी By Prashant Singh

बारिश की हल्की फुहारें जब दिल्ली की सड़कों को भिगो रही थीं, तब वह पहली बार उसे देखा था—कॉफ़ी शॉप की खिड़की से झाँकती हुई, किताबों में खोई हुई।

आरव, एक 26 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनि...

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जीवनधारा By Shwet Kumar Sinha

रूपेश ट्रेन में अपने बर्थ पर आकर बैठा ही था, तभी जीन्स और टी-शर्ट पहने 25–26 साल की एक लड़की सामने आकर खड़ी हो गयी और सीट छोडने का इशारा करती हुई अपना भारी-भरकम बैग रूपेश के बर्थ पर...

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इंडियन कपल By PARIKH MAULIK

ये कहानी एक इंसान सूरज से शुरू होती है वह अमेरीका मे स्थित शहर में रहता है वहा एक बेकरी की शॉप चाला रहा है और अकेला ही एक बड़े से घर में रहता है। मगर खुश नहीं है पता नहीं किसीके इं...

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जीवन का गणित By Seema Singh

शाम तक पूरा घर चमाचम हो जाना चाहिए नीतू! अवंतिका ने फिर से दोहराया। नीली सलवार, पीला कुर्ता, गुलाबी स्वेटर के साथ लाल दुपट्टा कंधे से ओढ़ कर कमर तक लपेटे, नीतू ठुमकती सी दरवाजे के...

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बुजुर्गो का आशिष By Ashish

बुजुर्गो ने मुझे बहुत सी कहानियाँ सुनाई है उसमें से कुछ....

आशिष / आशीर्वाद

*!! समस्या रूपी बंदर !!

*एक बार स्वामी विवेकानंद को बंदरों का सामना करना पड़ा था। वह इस आप बी...

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वो श्याम सलोनी By Anshika

वो एकटक बगीचे के फूलों को निहार रही थी रंग रूप पर उसने कभी खुद से ध्यान ही नहीं दिया था क्योंकि उसने हमेशा अपने पापा से यही सुना था की बच्चे इंसान का मन साफ होना चाहिए रंग और खुबसू...

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कामनाओं के नशेमन By Husn Tabassum nihan

दरवाजे बहुत होते हैं, कुछ सहजता के साथ खुल जाने वाले और कुछ दरवाजे बहुत खटखटाने के बाद खुलने वाले। उतना अर्थ दरवाजे का नहीं होता जितना अर्थ चौखट का होता है। चौखट लांघ कर भीतर आना औ...

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