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Featured Books

आत्मा की खोज - तीसरी आँख से परे By Puneet Katariya

भूमिका:

यह पुस्तक आत्म-अन्वेषण, आध्यात्मिक जागरण और गूढ़ रहस्यों की खोज पर आधारित है। इसमें एक ऐसे पात्र की यात्रा को दर्शाया गया है, जो अपनी आंतरिक शक्ति और आत्मा के गहरे रहस्य...

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श्रापित हवेली By priyanshu kumar

"मैं उस जगह फिर कभी नहीं जाऊँगा, चाहे कुछ भी हो जाए..."

ये शब्द थे आर्यन के, जिसने अपने बचपन के पंद्रह साल दुर्गापुर की पुरानी हवेली में बिताए थे। अब दस साल बाद, पिता के...

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नामुमकिन इश्क By kajal jha

यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...

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अनकही दास्तां (शानवी अनंत) By Akshay Tiwari

(एक भावनात्मक प्रेम कहानी)

दोस्तों,
मेरा नाम अनंत है।
मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मा, जहां सुबह की शुरुआत होती है घर के पास के मंदिर की घंटियों से और रातें ढलती...

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भुइंधर का मोबाइल By Pradeep Shrivastava

भुइंधर का मोबाइल - प्रदीप श्रीवास्तव भाग १ अम्मा आज विवश होकर आपको यह पत्र लिख रही हूँ , क्योंकि मोबाइल पर यह सारी बातें कह पाने की हिम्मत मैं नहीं जुटा पाई। आप जानती हैं कि मैं ऐस...

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मेरे दूल्हे को मरना होगा By Varun Vilom

घर भरा हुआ था।

आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक।

शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ।

सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...

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हुश्शू By Ratan Nath Sarshar

बेतुकी हाँक
महुए से कुछ गरज है न हाजत है ताड़ की
साकी को झोंक दूँगा मैं भट्टी में भाड़ की!
हात्‍तेरे पीनेवाले की दुम में पुरानी भट्टी का जंग लगा हुआ भभका! ओ गीदी, हात्‍तेरे शराब...

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यादों के उजाले By Lajpat Rai Garg

यादों के उजाले लाजपत राय गर्ग (1) आज प्रह्लाद को मन मारकर कार्यालय आना पड़ा था। उसके बॉस का सख़्त आदेश न होता तो इस समय वह आने वाली मीटिंग की फाइल तैयार करने की बजाय अपनी पत्नी रेण...

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सुनहरी गलियों का प्यार By Rekha Rani

जयपुर का बस स्टॉप शाम को और भी गुलाबी लगता है। हवा में गुलाब जल की महक है, और सामने की दीवार पर जान्हवी पेंट कर रही है — एक अधूरा मोर जिसकी आँखों में उदासी है।

जान्हवी कोई आम...

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कामिनी एक अजीब दास्तां By Chetan Joshi

एक एसी हारर कहानी जो पल पल रोमांच और रहस्य से भरी है, जिसे पढ़ते समय पाठक को लगता है व‌ह किसी रहस्यमय दुनिया में आ गया है

कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है और सब कुछ पाने के लिए...

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बारह पन्ने - अतीत की शृंखला से By Mamta

बारह पन्ने अतीत की शृंखला के बचपन इंसान की ज़िंदगी का सबसे सुनहरा दौर जिसे शायद अंतिम साँस तक नही भुलाया जा सकता ।जीवन का सबसे स्वर्णिम काल ,चिंतारहित खेलना खाना ,बेपरवाह सी ज...

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Imperfectly Fits You By rakhi

सखी (मन मे) - आप मेरे हो सत्या और मैं आपकी हु। में आपकी ही रहूंगी । में आपकी हंसिनी हु जो अकेली रह सकती है मर सकती है पर कही ओर नहीं जा सकती । दुनिया की रिवाजों जरूरत मुझे नहीं है...

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My Mafia Boyfriend By unknown writer

एक अंडरवर्ल्ड की परछाईं में पनपती मासूम मोहब्बत की दास्तान......
Characters introduction............


-वीर सैयद (28 वर्ष) :-
"शहर में डर का दूसरा नाम — पर...

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हनुमत हांक - समीक्षा व परिचय By Ram Bharose Mishra

हनुमत हांक' बलदेव दास जी द्वारा लिखी गई बड़ी महत्वपूर्ण पुस्तक है । यद्यपि यह सामान्य रूप से सब जगह नहीं पाई जाती, मंदिरों, बड़े पुस्तकालयों और पुस्तक विक्रेताओं से मांगने पर भ...

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अंधेरे से इंसाफ तक By mood Writer

सागरपुर नाम का शहर, जो न तो पूरी तरह गाँव था और न ही पूरी तरह महानगर। यहाँ न तो मेट्रो की गूंज थी और न ही ऊँची-ऊँची इमारतों की चकाचौंध। लेकिन यहाँ के लोग अपनी ज़िंदगी जीने के लिए स...

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मोहब्बत एक बदला By saif Ansari

मदरसे के सहन में, जहाँ बचपन की बेफिक्रियाँ रक़्स करती थीं, आरिफ़ की निगाहें अक्सर एक नूरानी चेहरे पर ठहर जाती थीं - ज़ोया। ज़ोया, अपनी हया और सादगी में बे-मिसाल थी। आरिफ़, जो अपनी...

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रिश्ता एक कागज का. By Dhruv oza

निशांत :- पोपकोर्न खाओगी ? ये भैया बहोत अच्छे पॉपकॉर्न बनाता है पता है ?क्यारा :- हम यहा शायद पोपकोर्न खाने नही आये निशांत ? एक साल में कुछ कुछ तो में समजती हु आपको ।निशांत :- अच्छ...

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सनम By shikha

मुंबई की एक सर्द सुबह...

समंदर की लहरें शांत थीं, लेकिन शहर के बीचोंबीच एक तूफानी शख्सियत की एंट्री होने वाली थी।

काली Mercedes-Benz Maybach का दरवाज़ा खुला, और धुएं की तरह ब...

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दूध का क़र्ज़ By S Sinha

एक दिन जब तनुजा ने अपने घर फोन किया , उसके पापा ने फोन उठा कर कहा “ हाँ बेटा , बोल कैसी चल रही है तेरी पढ़ाई ? “

“ वो सब ठीक है , मुझे आपलोगों को एक खुशखबरी देनी है . “

“...

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सिर्फ़ 30 दिनों में वज़न कम करने का आसान तरीका By Yogi Krishnadev Nath

# सिर्फ़ 30 दिनों में वज़न कम करने का आसान तरीका

आज की दुनिया में सबसे तेज़ी से फैलने वाली बीमारी अगर कोई है, तो वह है मोटापा। यह केवल सौंदर्य या लुक्स की समस्या नहीं है, बल्क...

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मानो या न मानो By Koushik B

ये बात २००५ की तब हम लखनऊ इसी आलमबाग रेलवे क्वार्टर में रहते थे। हमारा परिवार तीसरे माले में रहता था। एक रात सोटे हुए अचानक मेरी आंख खुल गई। में बाथरूम की तरफ से बड़ा तो मुझे किसी...

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लड़का होना आसान नहीं होता By parth Shukla

कितनी अजीब बात है ना...
बचपन जहाँ खेल और खिलौनों का होना चाहिए,
वहाँ कुछ बच्चों के हिस्से सिर्फ ताने, ज़िम्मेदारियाँ और रोने की मनाही आती है।

क्यों?
क्योंकि वो "लड़का&#34...

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Beginning of My Love By My imaginary world

बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है…
वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था।
छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...

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पहली मुलाक़ात By vaghasiya

छोटे शहर बरेली के एक साधारण से कॉलेज में, नया सत्र शुरू हो चुका था। कॉलेज की भीड़ में, हलके भूरे रंग की शर्ट और नीली जींस पहने एक लड़का, कुछ घबराया, कुछ उत्साहित-सा कैंपस में प्रवे...

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इश्क के साये में By kajal jha

खामोश पेंटिंग की पहली साँस

पुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस शाम भी आधी अँधेरे में डूबी हुई थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्थरों से टकरा रही थीं और अंदर हवा में पुरान...

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जेहादन By Pradeep Shrivastava

वह चार साल बाद अपने घर पहुँची लेकिन गेट पर लगी कॉल-बेल का स्विच दबाने का साहस नहीं कर पाई। क़रीब दस मिनट तक खड़ी रही। उसके हाथ कई बार स्विच तक जा-जा कर ठहर गए। जून की तपा देने वाली...

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‎समर्पण से आंगे By vikram kori

सुबह के छह बज रहे थे।
‎शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज़िंदगी में नींद के लिए जगह कब की खत्म हो चुकी थी।
‎
‎किराए के छोटे से कमरे में रखे एक पुराने से पलंग पर वह...

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रूहों का सौदा By mamta

रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...

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उस बाथरूम में कोई था By Varun Vilom

हिमालय की ढलानों पर रात पूरी तरह उतर चुकी थी। देवदार के घने जंगल के बीच बने छोटे-से कैम्प में एक अलाव जल रहा था, जिसकी लपटें सबके चेहरों पर नारंगी रोशनी बिखेर रही थीं। ठंडी हवा तम्...

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हनुमान साठिका लेखक महात्मा बलदेव दास कृत By Ram Bharose Mishra

दोहा- श्री गणपति मंगल करण हरण अमंगल मूल । मंगल मूरति मोहि पर रहहु सदा अनुकूल ॥१॥ संवत सर श्रुति खंड विधु कार्तिक शुभ सित पक्ष । छठि मंगल बलदेव कृत हनुमत विनय प्रत्यक्ष ॥२॥(

दोहे...

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तेरा ज़हर, मेरी मोहब्बत By Yasmeen Khan

19 साल की थी मैं, जब ज़िंदगी ने मुझे बेच दिया था…”

बरसों से जिसे घर कहा था, उसी घर के कोने में बैठी मैं उस दिन अपना वजूद समेट रही थी। माँ की आँखें भीगी थीं, लेकिन लाचार। बाप… वो...

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक By jassu

मौत का दस्तक
​बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...

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एक अदद फ्लैट By Arpan Kumar

नंदलाल यादव दिल्ली में नौकरी करते हैं और साहिबाबाद में किराए के एक फ्लैट में रहते हैं। लोकल ट्रेन से आना-जाना करते हैं। आई.टी.ओ. पर उतर कर बस से आर.के.पुरम जाते हैं।सुबह शाम सप्ताह...

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JANVI - राख से उठती लौ By Luqman Gangohi

प्रस्तावना"वो कहते हैं न, कि लड़कियां कमजोर होती हैं...पर मैंने तो देखा है-एक लड़की अपने टूटने की आवाज़ भी अंदर ही दबा लेती है,और जब दुनिया उसे गिरा देती है,तब वो जमीन से नहीं...

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शांतनु By Siddharth Chhaya

शांतनु मातृभारती पर इसी नाम से अत्यंत लोकप्रिय साबित हुए गुजराती उपन्यास का हिन्दी रूपांतरण है इस उपन्यास में एक तरफ़ा प्रेम और दोस्ती की ऊंचाईयों को बड़ी परिपक्वता से दर्शाया गया ह...

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जोग लिखी By Sunita Bishnolia

जोग लिखी
‘‘बाऊजी आप फिर हुक्का गुड़गुड़ाने लगे कित्ती बार कहा कि जे तोहार सेहत के लिए ठीक ना है। ’’
‘अरी लाली, तू क्यों मेरे पीछे पड़ी है, अब जे लत आज की तो है ना जो छूट जाए। अब तो...

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Operation Mirror By bhagwat singh naruka

Location:
अंडरग्राउंड RAW फ़ैसिलिटी, लद्दाख
वक्त: सुबह 4:30 बजे

काँपती हुई ठंडी हवा उस बंकर के लोहे के दरवाज़े से टकरा रही थी, जहाँ देश का सबसे ख़ुफ़िया मिशन शुरू होने जा रहा...

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ग़ज़ल - सहारा में चल के देखते हैं By alka agrwal raj

ख़ुलूस ओ प्यार के सांचे में ढल के देखते हैं।

जफ़ा की क़ैद से बाहर निकल के देखते हैं।।



हम अपने आप को थोडा बदल के देखते हैं।

चलो के हम भी हक़ीक़त पे चल के देखते हैं।।...

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मेनका By Raj Phulware

अध्याय 1 — रामगढ़ में मेनका का आगमन

सुबह की धूप अभी-अभी पहाड़ियों के पीछे से झाँकने लगी थी।
रामगढ़ गाँव की मिट्टी से उठती हल्की भाप, खपरैल के घरों की छतों से टपकती ओस की बूंदें...

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कहानी सरस्वती और संस्कार की By Hemant Sharma

यह एक काल्पनिक कहानी है इसके सभी पात्र और स्थान भी काल्पनिक हैं। अगर इस कहानी में किसी की भी बातों से आपको कष्ट पहुंचे तो उसके लिए मैं माफी चाहूंगा।)

~~एससीबीएस इंटर कॉलेज(काल्प...

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गाजा वार By suhail ansari

इजरायल-हमास संघर्ष के वास्तविक तथ्यों (जैसे, गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 55,223 मौतें, 1.8 मिलियन विस्थापित) पर आधारित होगी। यह काल्पनिक लेकिन प्रामाणिक कहानी आमिना (28, शिक्...

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भ्रम राक्षस। By Ravi Bhanushali

एक बार की बात है—निलेश, जय और पार्थ देर रात निलेश के घर पर पार्टी कर रहे थे। पार्टी खत्म होने के बाद जय और पार्थ अपने-अपने घर के लिए निकल पड़े। जय तो अपने घर पहुँच गया, लेकिन पार्थ...

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मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग By Abhi Anand

हर कहानी में एक नायक होता है, पर कुछ नायक ऐसे भी होते हैं, जो कभी अपने लिए नहीं जीते। वो चुप रहते हैं, मगर हर पल लड़ते रहते हैं। 'आर्यन' एक साधारण सा इंसान, जिसके कंधों पर...

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साँसत में काँटे By Pradeep Shrivastava

उसकी आँखों में भर आए आँसू उसके गालों पर गिरने ही वाले थे। आँसुओं से भरी उसकी आँखों में भीड़ और उनके हाथों में लहराते तिरंगे के अक्स दिखाई दे रहे थे। ज़ीरो डिग्री टेम्प्रेचर वाली कड़...

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बडी प्रतिमा By Sudha Trivedi

एक झुंड भरकर युवा आधुनिक लडकियां टीचर्स ट्रेंनिंग काॅलेज के गेट पर रुककर यह देहाती गीत गा रही हैं। सभी लडकियों ने ट्रेनिंग काॅलेज की यूनिफाॅर्म पहन रखी है - राजकमल की सफेद काॅटन सा...

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प्रथा : एक ज़िन्दगी, कई इम्तेहान By shrutika dhole

वो उस वक्त सिर्फ 12 साल की थी।

एक छोटी सी लड़की, जिसकी सुबह बाकी बच्चों जैसी हँसी-खुशी से नहीं, बल्कि घुटन और ज़िम्मेदारियों से शुरू होती थी।

वो बाकी बच्चों से अलग स्कूल जाने...

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श्रीji - अनचाहा विवाह बंधन By Bhumi

दूर दूर तक यह भजन पहुंचकर अपने ओर लोगों को आकर्षित कर रहा था!! मंदिर के रास्ते पर दो बड़े-बड़े काले रंग कि विलायती गाड़ियां रास्ते से गुजर रही थी उसमें बैठे शख्स को भजन कि आवाज ने...

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उस पार भी तू By Nirbhay Shukla

कुछ प्रेम कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं... और कुछ अधूरी होकर भी अमर हो जाती हैं।
यह कहानी भी उन्हीं में से एक है।

‘प्रकाश और राधिका’— दो नाम नहीं, दो आत्माएँ थीं जो एक-दूसरे की सा...

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फ्लाई किल्लर By SR Harnot

फ्लाई किल्लर एस. आर. हरनोट (1) उस चिनार के पेड़ पर सारे मौसम रहते थे। उसके नीचे लगी लोहे की बैंच अंग्रेजों के ज़माने की थी जिस पर वह बैठा रहता था। वह कई बार अपनी उंगलियों के पोरों पर...

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चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख By Divya Shukla

चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख (1) इवनिंग वाक से लौट कर अभी गेट खोल ही रही थी कि फोन की घंटी बजने लगी | स्क्रीन पर अनजान नंबर चमक रहा था सोचा अभी चेंज कर के ही फोन रिसीव करुँगी |नं...

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आत्मा की खोज - तीसरी आँख से परे By Puneet Katariya

भूमिका:

यह पुस्तक आत्म-अन्वेषण, आध्यात्मिक जागरण और गूढ़ रहस्यों की खोज पर आधारित है। इसमें एक ऐसे पात्र की यात्रा को दर्शाया गया है, जो अपनी आंतरिक शक्ति और आत्मा के गहरे रहस्य...

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श्रापित हवेली By priyanshu kumar

"मैं उस जगह फिर कभी नहीं जाऊँगा, चाहे कुछ भी हो जाए..."

ये शब्द थे आर्यन के, जिसने अपने बचपन के पंद्रह साल दुर्गापुर की पुरानी हवेली में बिताए थे। अब दस साल बाद, पिता के...

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नामुमकिन इश्क By kajal jha

यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...

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अनकही दास्तां (शानवी अनंत) By Akshay Tiwari

(एक भावनात्मक प्रेम कहानी)

दोस्तों,
मेरा नाम अनंत है।
मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में जन्मा, जहां सुबह की शुरुआत होती है घर के पास के मंदिर की घंटियों से और रातें ढलती...

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भुइंधर का मोबाइल By Pradeep Shrivastava

भुइंधर का मोबाइल - प्रदीप श्रीवास्तव भाग १ अम्मा आज विवश होकर आपको यह पत्र लिख रही हूँ , क्योंकि मोबाइल पर यह सारी बातें कह पाने की हिम्मत मैं नहीं जुटा पाई। आप जानती हैं कि मैं ऐस...

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मेरे दूल्हे को मरना होगा By Varun Vilom

घर भरा हुआ था।

आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक।

शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ।

सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...

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हुश्शू By Ratan Nath Sarshar

बेतुकी हाँक
महुए से कुछ गरज है न हाजत है ताड़ की
साकी को झोंक दूँगा मैं भट्टी में भाड़ की!
हात्‍तेरे पीनेवाले की दुम में पुरानी भट्टी का जंग लगा हुआ भभका! ओ गीदी, हात्‍तेरे शराब...

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यादों के उजाले By Lajpat Rai Garg

यादों के उजाले लाजपत राय गर्ग (1) आज प्रह्लाद को मन मारकर कार्यालय आना पड़ा था। उसके बॉस का सख़्त आदेश न होता तो इस समय वह आने वाली मीटिंग की फाइल तैयार करने की बजाय अपनी पत्नी रेण...

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सुनहरी गलियों का प्यार By Rekha Rani

जयपुर का बस स्टॉप शाम को और भी गुलाबी लगता है। हवा में गुलाब जल की महक है, और सामने की दीवार पर जान्हवी पेंट कर रही है — एक अधूरा मोर जिसकी आँखों में उदासी है।

जान्हवी कोई आम...

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कामिनी एक अजीब दास्तां By Chetan Joshi

एक एसी हारर कहानी जो पल पल रोमांच और रहस्य से भरी है, जिसे पढ़ते समय पाठक को लगता है व‌ह किसी रहस्यमय दुनिया में आ गया है

कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है और सब कुछ पाने के लिए...

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बारह पन्ने - अतीत की शृंखला से By Mamta

बारह पन्ने अतीत की शृंखला के बचपन इंसान की ज़िंदगी का सबसे सुनहरा दौर जिसे शायद अंतिम साँस तक नही भुलाया जा सकता ।जीवन का सबसे स्वर्णिम काल ,चिंतारहित खेलना खाना ,बेपरवाह सी ज...

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Imperfectly Fits You By rakhi

सखी (मन मे) - आप मेरे हो सत्या और मैं आपकी हु। में आपकी ही रहूंगी । में आपकी हंसिनी हु जो अकेली रह सकती है मर सकती है पर कही ओर नहीं जा सकती । दुनिया की रिवाजों जरूरत मुझे नहीं है...

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My Mafia Boyfriend By unknown writer

एक अंडरवर्ल्ड की परछाईं में पनपती मासूम मोहब्बत की दास्तान......
Characters introduction............


-वीर सैयद (28 वर्ष) :-
"शहर में डर का दूसरा नाम — पर...

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हनुमत हांक - समीक्षा व परिचय By Ram Bharose Mishra

हनुमत हांक' बलदेव दास जी द्वारा लिखी गई बड़ी महत्वपूर्ण पुस्तक है । यद्यपि यह सामान्य रूप से सब जगह नहीं पाई जाती, मंदिरों, बड़े पुस्तकालयों और पुस्तक विक्रेताओं से मांगने पर भ...

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अंधेरे से इंसाफ तक By mood Writer

सागरपुर नाम का शहर, जो न तो पूरी तरह गाँव था और न ही पूरी तरह महानगर। यहाँ न तो मेट्रो की गूंज थी और न ही ऊँची-ऊँची इमारतों की चकाचौंध। लेकिन यहाँ के लोग अपनी ज़िंदगी जीने के लिए स...

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मोहब्बत एक बदला By saif Ansari

मदरसे के सहन में, जहाँ बचपन की बेफिक्रियाँ रक़्स करती थीं, आरिफ़ की निगाहें अक्सर एक नूरानी चेहरे पर ठहर जाती थीं - ज़ोया। ज़ोया, अपनी हया और सादगी में बे-मिसाल थी। आरिफ़, जो अपनी...

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रिश्ता एक कागज का. By Dhruv oza

निशांत :- पोपकोर्न खाओगी ? ये भैया बहोत अच्छे पॉपकॉर्न बनाता है पता है ?क्यारा :- हम यहा शायद पोपकोर्न खाने नही आये निशांत ? एक साल में कुछ कुछ तो में समजती हु आपको ।निशांत :- अच्छ...

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सनम By shikha

मुंबई की एक सर्द सुबह...

समंदर की लहरें शांत थीं, लेकिन शहर के बीचोंबीच एक तूफानी शख्सियत की एंट्री होने वाली थी।

काली Mercedes-Benz Maybach का दरवाज़ा खुला, और धुएं की तरह ब...

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दूध का क़र्ज़ By S Sinha

एक दिन जब तनुजा ने अपने घर फोन किया , उसके पापा ने फोन उठा कर कहा “ हाँ बेटा , बोल कैसी चल रही है तेरी पढ़ाई ? “

“ वो सब ठीक है , मुझे आपलोगों को एक खुशखबरी देनी है . “

“...

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सिर्फ़ 30 दिनों में वज़न कम करने का आसान तरीका By Yogi Krishnadev Nath

# सिर्फ़ 30 दिनों में वज़न कम करने का आसान तरीका

आज की दुनिया में सबसे तेज़ी से फैलने वाली बीमारी अगर कोई है, तो वह है मोटापा। यह केवल सौंदर्य या लुक्स की समस्या नहीं है, बल्क...

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मानो या न मानो By Koushik B

ये बात २००५ की तब हम लखनऊ इसी आलमबाग रेलवे क्वार्टर में रहते थे। हमारा परिवार तीसरे माले में रहता था। एक रात सोटे हुए अचानक मेरी आंख खुल गई। में बाथरूम की तरफ से बड़ा तो मुझे किसी...

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लड़का होना आसान नहीं होता By parth Shukla

कितनी अजीब बात है ना...
बचपन जहाँ खेल और खिलौनों का होना चाहिए,
वहाँ कुछ बच्चों के हिस्से सिर्फ ताने, ज़िम्मेदारियाँ और रोने की मनाही आती है।

क्यों?
क्योंकि वो "लड़का&#34...

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Beginning of My Love By My imaginary world

बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है…
वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था।
छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...

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पहली मुलाक़ात By vaghasiya

छोटे शहर बरेली के एक साधारण से कॉलेज में, नया सत्र शुरू हो चुका था। कॉलेज की भीड़ में, हलके भूरे रंग की शर्ट और नीली जींस पहने एक लड़का, कुछ घबराया, कुछ उत्साहित-सा कैंपस में प्रवे...

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इश्क के साये में By kajal jha

खामोश पेंटिंग की पहली साँस

पुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस शाम भी आधी अँधेरे में डूबी हुई थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्थरों से टकरा रही थीं और अंदर हवा में पुरान...

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जेहादन By Pradeep Shrivastava

वह चार साल बाद अपने घर पहुँची लेकिन गेट पर लगी कॉल-बेल का स्विच दबाने का साहस नहीं कर पाई। क़रीब दस मिनट तक खड़ी रही। उसके हाथ कई बार स्विच तक जा-जा कर ठहर गए। जून की तपा देने वाली...

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‎समर्पण से आंगे By vikram kori

सुबह के छह बज रहे थे।
‎शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज़िंदगी में नींद के लिए जगह कब की खत्म हो चुकी थी।
‎
‎किराए के छोटे से कमरे में रखे एक पुराने से पलंग पर वह...

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रूहों का सौदा By mamta

रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...

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उस बाथरूम में कोई था By Varun Vilom

हिमालय की ढलानों पर रात पूरी तरह उतर चुकी थी। देवदार के घने जंगल के बीच बने छोटे-से कैम्प में एक अलाव जल रहा था, जिसकी लपटें सबके चेहरों पर नारंगी रोशनी बिखेर रही थीं। ठंडी हवा तम्...

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हनुमान साठिका लेखक महात्मा बलदेव दास कृत By Ram Bharose Mishra

दोहा- श्री गणपति मंगल करण हरण अमंगल मूल । मंगल मूरति मोहि पर रहहु सदा अनुकूल ॥१॥ संवत सर श्रुति खंड विधु कार्तिक शुभ सित पक्ष । छठि मंगल बलदेव कृत हनुमत विनय प्रत्यक्ष ॥२॥(

दोहे...

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तेरा ज़हर, मेरी मोहब्बत By Yasmeen Khan

19 साल की थी मैं, जब ज़िंदगी ने मुझे बेच दिया था…”

बरसों से जिसे घर कहा था, उसी घर के कोने में बैठी मैं उस दिन अपना वजूद समेट रही थी। माँ की आँखें भीगी थीं, लेकिन लाचार। बाप… वो...

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अदृश्य: कालचक्र का रक्षक By jassu

मौत का दस्तक
​बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...

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एक अदद फ्लैट By Arpan Kumar

नंदलाल यादव दिल्ली में नौकरी करते हैं और साहिबाबाद में किराए के एक फ्लैट में रहते हैं। लोकल ट्रेन से आना-जाना करते हैं। आई.टी.ओ. पर उतर कर बस से आर.के.पुरम जाते हैं।सुबह शाम सप्ताह...

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JANVI - राख से उठती लौ By Luqman Gangohi

प्रस्तावना"वो कहते हैं न, कि लड़कियां कमजोर होती हैं...पर मैंने तो देखा है-एक लड़की अपने टूटने की आवाज़ भी अंदर ही दबा लेती है,और जब दुनिया उसे गिरा देती है,तब वो जमीन से नहीं...

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शांतनु By Siddharth Chhaya

शांतनु मातृभारती पर इसी नाम से अत्यंत लोकप्रिय साबित हुए गुजराती उपन्यास का हिन्दी रूपांतरण है इस उपन्यास में एक तरफ़ा प्रेम और दोस्ती की ऊंचाईयों को बड़ी परिपक्वता से दर्शाया गया ह...

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जोग लिखी By Sunita Bishnolia

जोग लिखी
‘‘बाऊजी आप फिर हुक्का गुड़गुड़ाने लगे कित्ती बार कहा कि जे तोहार सेहत के लिए ठीक ना है। ’’
‘अरी लाली, तू क्यों मेरे पीछे पड़ी है, अब जे लत आज की तो है ना जो छूट जाए। अब तो...

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Operation Mirror By bhagwat singh naruka

Location:
अंडरग्राउंड RAW फ़ैसिलिटी, लद्दाख
वक्त: सुबह 4:30 बजे

काँपती हुई ठंडी हवा उस बंकर के लोहे के दरवाज़े से टकरा रही थी, जहाँ देश का सबसे ख़ुफ़िया मिशन शुरू होने जा रहा...

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ग़ज़ल - सहारा में चल के देखते हैं By alka agrwal raj

ख़ुलूस ओ प्यार के सांचे में ढल के देखते हैं।

जफ़ा की क़ैद से बाहर निकल के देखते हैं।।



हम अपने आप को थोडा बदल के देखते हैं।

चलो के हम भी हक़ीक़त पे चल के देखते हैं।।...

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मेनका By Raj Phulware

अध्याय 1 — रामगढ़ में मेनका का आगमन

सुबह की धूप अभी-अभी पहाड़ियों के पीछे से झाँकने लगी थी।
रामगढ़ गाँव की मिट्टी से उठती हल्की भाप, खपरैल के घरों की छतों से टपकती ओस की बूंदें...

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कहानी सरस्वती और संस्कार की By Hemant Sharma

यह एक काल्पनिक कहानी है इसके सभी पात्र और स्थान भी काल्पनिक हैं। अगर इस कहानी में किसी की भी बातों से आपको कष्ट पहुंचे तो उसके लिए मैं माफी चाहूंगा।)

~~एससीबीएस इंटर कॉलेज(काल्प...

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गाजा वार By suhail ansari

इजरायल-हमास संघर्ष के वास्तविक तथ्यों (जैसे, गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 55,223 मौतें, 1.8 मिलियन विस्थापित) पर आधारित होगी। यह काल्पनिक लेकिन प्रामाणिक कहानी आमिना (28, शिक्...

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भ्रम राक्षस। By Ravi Bhanushali

एक बार की बात है—निलेश, जय और पार्थ देर रात निलेश के घर पर पार्टी कर रहे थे। पार्टी खत्म होने के बाद जय और पार्थ अपने-अपने घर के लिए निकल पड़े। जय तो अपने घर पहुँच गया, लेकिन पार्थ...

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मौन नायक: कर्तव्य की अनकही जंग By Abhi Anand

हर कहानी में एक नायक होता है, पर कुछ नायक ऐसे भी होते हैं, जो कभी अपने लिए नहीं जीते। वो चुप रहते हैं, मगर हर पल लड़ते रहते हैं। 'आर्यन' एक साधारण सा इंसान, जिसके कंधों पर...

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साँसत में काँटे By Pradeep Shrivastava

उसकी आँखों में भर आए आँसू उसके गालों पर गिरने ही वाले थे। आँसुओं से भरी उसकी आँखों में भीड़ और उनके हाथों में लहराते तिरंगे के अक्स दिखाई दे रहे थे। ज़ीरो डिग्री टेम्प्रेचर वाली कड़...

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बडी प्रतिमा By Sudha Trivedi

एक झुंड भरकर युवा आधुनिक लडकियां टीचर्स ट्रेंनिंग काॅलेज के गेट पर रुककर यह देहाती गीत गा रही हैं। सभी लडकियों ने ट्रेनिंग काॅलेज की यूनिफाॅर्म पहन रखी है - राजकमल की सफेद काॅटन सा...

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प्रथा : एक ज़िन्दगी, कई इम्तेहान By shrutika dhole

वो उस वक्त सिर्फ 12 साल की थी।

एक छोटी सी लड़की, जिसकी सुबह बाकी बच्चों जैसी हँसी-खुशी से नहीं, बल्कि घुटन और ज़िम्मेदारियों से शुरू होती थी।

वो बाकी बच्चों से अलग स्कूल जाने...

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श्रीji - अनचाहा विवाह बंधन By Bhumi

दूर दूर तक यह भजन पहुंचकर अपने ओर लोगों को आकर्षित कर रहा था!! मंदिर के रास्ते पर दो बड़े-बड़े काले रंग कि विलायती गाड़ियां रास्ते से गुजर रही थी उसमें बैठे शख्स को भजन कि आवाज ने...

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उस पार भी तू By Nirbhay Shukla

कुछ प्रेम कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं... और कुछ अधूरी होकर भी अमर हो जाती हैं।
यह कहानी भी उन्हीं में से एक है।

‘प्रकाश और राधिका’— दो नाम नहीं, दो आत्माएँ थीं जो एक-दूसरे की सा...

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फ्लाई किल्लर By SR Harnot

फ्लाई किल्लर एस. आर. हरनोट (1) उस चिनार के पेड़ पर सारे मौसम रहते थे। उसके नीचे लगी लोहे की बैंच अंग्रेजों के ज़माने की थी जिस पर वह बैठा रहता था। वह कई बार अपनी उंगलियों के पोरों पर...

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चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख By Divya Shukla

चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख (1) इवनिंग वाक से लौट कर अभी गेट खोल ही रही थी कि फोन की घंटी बजने लगी | स्क्रीन पर अनजान नंबर चमक रहा था सोचा अभी चेंज कर के ही फोन रिसीव करुँगी |नं...

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