लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • बूढ़ी अम्मा

    रवि, जय और खुशी अच्छे दोस्त है तीनों एक ही क्लास में पढ़ते है। शाम के वक्त खुशी ज...

  • जीवन की एक नई शुरुआत

    राजेंद्र जी कमरे में अकेले बैठे एकटक दीवार पर लगी ताजमहल की तस्वीर को निहार रहे...

  • प्रिय वर

    पजानकी : सुंदर सी लड़की, जिसकी शादी हों गई हे। छोटे से शहर की एक आम लड़की।मनोहर :...

छलावा By Niyati Kapadia Nirjhar

एक हट्टा कट्टा सुंदरसा नौ जवान शाम के वक्त झाड़ियो के बीच से गुजर रहा था। उसका नाम वीर है। वीर: ये लोग भी कमाल के है सारा शहर छोडकर यहा जंगल में शूटिंग रखने...

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पापा, आप नहीं समझोगे By Ashish Dalal

वही बेचैनी, वही उत्सुकता, वही उतावलापन।जानता हूं, तू नहीं बताएगा और अपने मन में उमड़ते भावों को छिपाने की भरसक चेष्टा करता रहेगा लेकिन मै भी तेरा बाप हूं। सब कुछ समझ कर नासमझ बनना...

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दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें - 3 By DrPranava Bharti

अचानक उन्हें टी वी पर देखा, संगीत पर कुछ चर्चा चल रही थी।थोड़ा सा समय लगा पृष्ठ पलटने में लेकिन लगभग तीस वर्ष पूर्व की प्रथम कक्ष की रेलगाड़ी की यात्रा ने उनके दिल के द्वारा पर दस्...

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टिंग टोंग By Niyati Kapadia Nirjhar

“टिंग टोंग! टिंग टोंग!”“टिंग टोंग! टिंग टोंग!”“अरे आ रही हूँ कौन बेल मारे जा रहा है?” सरोजने अपने फोन को कानो से दूर कर दरवाजा खोलते हुए कहा और सामने अपनी बेटी को देखते ही खुश होकर...

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रंग थे मेरे पास लेकिन… - 2 By Hetal

में वहा जा पोहोची जहा.....मुझे इस देखे हुए नजारेसे ये लगरहा था की शायद वहा मेरी दोस्त एक कोने में बेठी होगी सहमी हुई सी में उस कमरे में गई मेने पुकारा उसे, लगाकि वो सामने से आकर मु...

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किससे कहूँ By Mahima Shree

“हाँ! हाँ! वही! वाह! दोनों मिल गई” सुबू के हाथों में साड़ी देखते ही रश्मि चहकने लगी। “ला मुझे थमा,“अब नीचे आजा” “रुक जा मैं टेबल पकड़ती हूँ । आराम से उतर, पैर ठीक से जमा के रख।...

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बूढ़ी अम्मा By Niyati Kapadia Nirjhar

रवि, जय और खुशी अच्छे दोस्त है तीनों एक ही क्लास में पढ़ते है। शाम के वक्त खुशी जय के घर जाती है जहा पर रवि भी आया हुआ है।खुशी: क्या सोचा? उस बूढ़ी अम्मा से मिलने जाना है की नहीं?खुश...

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मां का अंतिम समय  By Ashish Dalal

‘बस। अब और नहीं होता मुझसे। परेशान हो गई हूं मैं।’ उसके अंतिम कौर मुंह में डालते ही जूठी थाली उसके सामने से उठाते हुए बड़बड़ाती वह बोली। बादल गरजने के लिए जैसे अनुकूल वातावरण तलाश रह...

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दरका आइना By Renu Gupta

जेठ माह की तपती आग उगलती लंबी रात थी। हवा में बेहद तपिश थी। दुर्गा की टीन-टप्पर की बनी खोली में एक भी खिडक़ी नहीं थी। रात को टीन का दरवाजा जो बंद होता तो पूरी खोली जैसे दमघोंटू भट्ट...

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मिस्टर बेचारा By Niyati Kapadia Nirjhar

सागर धीरे से घर में प्रवेश करता है और कमरे में अपनी पत्नी को ना देखते आराम से आके सोफा पर बैठ जाता है। जरना (सागर की पत्नी): अरे तुम कब आये? बेल बजने की आवाज भी नहीं सुनी, मैंने दर...

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वक्त वक्त की बात है.... By Ajay Kumar Awasthi

बारिश के दिन थे लेकिन वर्षा नही हो रही थी, पर घने काले बादल मंडरा रहे थे । उसके पास रेन कोट नही था, उसने सिर बचाने के लिए केवल प्लास्टिक का एक टुकड़ा साथ रखा था । उसे पहुचने में देर...

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साहब By Satish Sardana Kumar

लघुकथासाहबसाहब राजीव गाँधी के बड़े भक्त थे लेकिन जमाना वी पी सिंह का था।हिंदी अखबार बोल कर बाँचते थे।जो वाक्य समझ न आये बाबुओं से बेहिचक पूछ लेते थे।उनका मुँह लगा और होशियार बाबू मै...

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जीवन की एक नई शुरुआत By Saroj Prajapati

राजेंद्र जी कमरे में अकेले बैठे एकटक दीवार पर लगी ताजमहल की तस्वीर को निहार रहे थे। उन्हें याद है जब सुदेश ने एक बार बड़े प्यार से कहा था कि "चलो ना ताजमहल चलते हैं। मेरी उसे देखने...

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प्रिय वर By Niyati Kapadia Nirjhar

पजानकी : सुंदर सी लड़की, जिसकी शादी हों गई हे। छोटे से शहर की एक आम लड़की।मनोहर : जानकी का पति। हसमुख, सुंदर और जानकी के लिए कुछ भी करने को तैयार। उसकी हसी बहोत ही सुंदर हे। गीता : ज...

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मेरीड दोस्त  By Niyati Kapadia Nirjhar

एक फ्लेट के कमरे में सोफा पर पड़ा एक लड़का सो रहा है। उसके पाँव जमीन पर लटके हुए है वहाँ नीचे एक और लड़का सो रहा है। कमरे में चारो और कागज के टुकड़े और कपड़े बिखरे हुए पड़े है। कल रात को...

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इंतज़ार By Anju Gupta

कहते हैं प्यार किया नहीं जाता बस हो जाता है ! पर ना जाने क्यों, ये अक्सर वहीं क्यों हो जाता है, जहाँ कायदे से इसे नहीं होना चाहिए ! जमीं आसमान का फर्क था उन दोनों के स्तर में ! कहा...

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सन 3019 By Niyati Kapadia Nirjhar

सन 3019 एक हवा में उड़ते स्पेस शीप में से कायरा ने देखा उसका बेटा एक अजीब से प्राणी के साथ जमीन पर खड़ा बाते कर रहा था। उस प्राणी की शक्ल काले रंग के गोल मटके जैसी थी और उसमे से एन्ट...

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फूल गुलाब सी वह लड़की By Ashish Dalal

फूल गुलाब सी वह लड़की शुचि. विश्वास और साहस से भरा वह लड़का अनिकेत. यह उनकी किस्मत ही थी कि कॉलेज की सीढ़ियां साथ उतरकर जिन्दगी की सीढ़ियां चढ़ते हुए नौकरी भी दोनों ने एक ही कम्पनी में...

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मौत तू डराती क्यों है...? By Ajay Kumar Awasthi

कभी अचानक किसी विस्फोट की तरह, किसी मशीन के विशाल जबड़े में फंसकर टुकड़े टुकड़े हो जाना ,किसी तेज रफ्तार गाड़ी के पहिये के नीचे .कभी आहिस्ते से शरीर के किसी एक सिरे से रोग के संक्रमण क...

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लेफ्ट साइड से राइट साइड By Niyati Kapadia Nirjhar

स्वीटी की आज एक्जाम थी, वह समय रहते कॉलेज जाने के लिए निकली थी। पर ये क्या? उसकी गाड़ी के ग्लास पर किसी बर्डने पोटी करदी थी। उसने कपड़े से ग्लास को पोंछा और अंदर बेठ गई। अंदर जाके उस...

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लम्हों की गाथा - 5 By सीमा जैन 'भारत'

13 - बुलबुल
14 - काज़ल
15 - परिवार

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बिदाई By Raje.

मैने-जमाने ने भी देखा था।
सुर्खलाल रंग, तेरी आँखों का,
आसु अपनो से बीछडने के थे, या फिर ....... पता नही ?

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नाकाम या असहाय प्रशासन By NR Omprakash Saini

बात सितम्बर माह की हैं। जब एक 12वी पढ़ने वाली 15 वर्षीय लड़की समाज और परिवार के किसी भी सदस्य से मदद नहीं मिली तो प्रशासन से ही मदद कि एक मात्र आखरी उम्मीद लगा बैठी। उसको लगा अब इस...

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आदत से मजबुर By Niyati Kapadia Nirjhar

आज सुबह से मीनू कुछ उदास सी दिखाई पड रही थी। घरके कामकाज में भी उसका ध्यान न था। बार बार बरतन पटकने की आवाज़े आ रही थी। बीच बीच में पति को भी डांट पड़ रही थी!“कितनी बार कहा तुमसे ये...

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मां बहुत परेशान करती है । By Ashish Dalal

‘देखो, मुझसे नहीं होता अब । सारा दिन थक जाती हूं मैं ।’ खाना खाकर जैसे ही वह हाथ धोकर कुर्सी पर बैठा तो वह दो घड़ी उसके संग बतियाने को उसके पास आकर बैठ गई । ‘कामवाली रख लो ।’ दांत क...

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मृणालिनी By Ashka Shukal

© आशका शुक्ल "टीनी" © यह रचना के सारे कॉपीराइट्स लेखक के खुद के हाथों में है । अगर यह रचना कोई भी जगह पर पर्सनल वेबसाइट, कोई पुस्तक या कोई ऑडियो या वीडियो स्वरूप से लेखक की मंज़ूर...

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पिता की छाया By Hareesh Kumar Sharma

मां ने अगर बच्चे को खाना खाना सिखाया है तो वहीं पर पिता बच्चे को खाना कमाना कर सिखाया है।मां अगर डांट से बचाकर हमें अपने आंचल में छुपा ती है तो वहीं पर पिता हमें डांट कर समाज में ख...

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लघुकथाएँ (दिव्यदान, कोथली) By Gyan Prakash Peeyush

दिव्य दान.......................मोहन सिंह मामूली हैसियत का आदमी था। उसने मेहनत मजदूरी करके अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बना दिया था। उसके बेटे- बहू बहुत अच्छे स्वभाव के थे। समय पर उस...

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इंदिरा एकादशी व्रत कथा  By Jyoti Prakash Rai

हम और आप सभी अपने अपने धार्मिक परंपराओं के अनुसार हर कार्य को सोच समझ कर ही करते हैं ! हमारे भारत मे छह ऋतुए हैं १. शरद ऋतु- इसे पतझड़ का मौसम भी कहते है। गर्मी कम हो जाती है और वा...

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दो लघुकथाएं By Krishna manu

लघुकथा1.भस्मासुर - अलख निरंजन!- आ जाइए बाबा पेड़ की छाह में। बाबा के आते ही वह हाथ जोड़कर खड़ा हो गया- आज्ञा महाराज। बाबा ने खटिया पर आसन जमाया। बोले- बच्चा, तेरा चेहरा मुरझाया...

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दिवाली के फटाके By आदित्य पारीक

मोहल्ले के घरों में रंग रोशन हो रहा था और उनसे निकलने वाली भीनी भीनी गंध ने माधव को दीवाली के आने का संकेत दे दिया माधव ने उत्सुकता से माँ से पूछा "हमारे घर में रंग नही होगा क्या म...

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ऐसी वाणी बोलिए… By Saroj Prajapati

राजेंद्र जी एक साधारण किसान परिवार से थे। बहुत कम उम्र में उनके पिता का निधन हो गया तो बड़ा बेटा होने के कारण सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर ही आ गई। अपना मां का हाथ बटाने के लिए उन...

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एक जंगल एक भाषा By Siraj Ansari

एक बार जंगल की सत्ता सियारों के हाथ लग गयी। उन्होंने "हुआ-हुआ" की आवाज़ को ही जंगल की राष्ट्रभाषा घोषित करने का निश्चय किया और अंदर ही अंदर जंगल के नियम कानून ताक पर रख कर, घालमेल क...

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शिवानी का टुनटुनवा By Upasna Siag

शिवानी आज सुबह से मन ही मन बहुत खुश थी। रात को अच्छे से नींद भी नहीं आयी फिर भी एक दम तरो-ताज़ा लग रही थी। पूजा पाठ में भी मन नहीं लग रहा था। बार -बार ध्यान अपने कमरे में रखे हुए ब...

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बिग बैंग By Pritpal Kaur

फाइल पर आख़िरी टिप्पणी कर के अपने हस्ताक्षर चिपकाये, झटके से फाइल बंद की और अपनी झुकी हुयी गर्दन सीधी की. सामने दीवार पर लगी घड़ी पर नज़र डाली तो देखा साढ़े छह बज चुके थे. खुद पर गुस्स...

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ख़्वाब....जो बता न सके By Satender_tiwari_brokenwordS

नैना की नौकरी विदेश में लग गयी थी। घर वाले खुश तो थे लेकिन वही बात है ना कि लड़की है कैसे रह पाएगी ? वही समाज के चार ताने और वो चार लोग, न जाने कौन ??लेकिन फिर भी नैना के माता पिता...

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हुस्न कि तख़लीक़ By Saadat Hasan Manto

कॉलिज में शाहिदा हसीन-तरीन लड़की थी। उस को अपने हुस्न का एहसास था। इसी लिए वो किसी से सीधे मुँह बात न करती और ख़ुद को मुग़्लिया ख़ानदान की कोई शहज़ादी समझती। Gस के ख़द्द-ओ-ख़ाल वाक़ई मुग...

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सबूत By Dr Narendra Shukl

सबूत सुच्चा सिंह , ये तू किन्हें उठा लाया है ? सामने खड़े , दुबले-पतले से दिखने वाले ग्रामीण युवक तथा पास खड़ी , सांवले - मंझोले कद - काठी वाली युवती की ओर इशारा करते हुये इंस्पैक्ट...

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हारता चला गया By Saadat Hasan Manto

लोगों को सिर्फ़ जीतने में मज़ा आता है। लेकिन उसे जीत कर हार देने में लुत्फ़ आता है।
जीतने में उसे कभी इतनी दिक़्क़त महसूस नहीं हुई। लेकिन हारने में अलबत्ता उसे कई दफ़ा काफ़ी तग-ओ-द...

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ऐक लड़की की कहानी By Savu Baleviya

मे ऐक छोटे से गांव में रहती हूं . मेरे गांव का नाम विरपुर है मुझे बसपन से कुछ बड़ा बनने का सपना है मेरे गांव के लिए कुछ करना है पर सपना तो सपना होता है .मे ५ कछातक गांव में ही अभ्...

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बाबा मेरे बच्चे कैसे हैं ? By Upasna Siag

बाबा, मेरे बच्चे कैसे हैं ?
.............
बोलो बाबा ! हर बार मेरी कही अनसुनी कर देते हो ...., अब तो बोलो !
................
बाबा !
................
मैं क्य...

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मुश्किल घड़ी न देखन दई By Swati Grover

पंचायत का फ़ैसला आ चुका था। स्कूल की ज़मीन को पंचायत ने ख़रीद लिया। और इस ज़मीन पर मंदिर, मस्ज़िद और गुरुद्वारा बनेगा ईसाई की संख्या गॉंव में न के बराबर थीं । स्कूल की हालत बड़...

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इंतक़ाम By S Sinha

कहानी - इंतक़ाम गर्मी की एक दोपहर में अर्चना के फ्लैट का कॉल बेल बजा . वह अपनी विधवा बूढी माँ के साथ उस छोटे से फ्लैट में बहुत दिनों से रह रही थी . कुछ ही देर पहले उसे न...

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छलावा By Niyati Kapadia Nirjhar

एक हट्टा कट्टा सुंदरसा नौ जवान शाम के वक्त झाड़ियो के बीच से गुजर रहा था। उसका नाम वीर है। वीर: ये लोग भी कमाल के है सारा शहर छोडकर यहा जंगल में शूटिंग रखने...

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पापा, आप नहीं समझोगे By Ashish Dalal

वही बेचैनी, वही उत्सुकता, वही उतावलापन।जानता हूं, तू नहीं बताएगा और अपने मन में उमड़ते भावों को छिपाने की भरसक चेष्टा करता रहेगा लेकिन मै भी तेरा बाप हूं। सब कुछ समझ कर नासमझ बनना...

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दिल की ज़मीन पर ठुकी कीलें - 3 By DrPranava Bharti

अचानक उन्हें टी वी पर देखा, संगीत पर कुछ चर्चा चल रही थी।थोड़ा सा समय लगा पृष्ठ पलटने में लेकिन लगभग तीस वर्ष पूर्व की प्रथम कक्ष की रेलगाड़ी की यात्रा ने उनके दिल के द्वारा पर दस्...

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टिंग टोंग By Niyati Kapadia Nirjhar

“टिंग टोंग! टिंग टोंग!”“टिंग टोंग! टिंग टोंग!”“अरे आ रही हूँ कौन बेल मारे जा रहा है?” सरोजने अपने फोन को कानो से दूर कर दरवाजा खोलते हुए कहा और सामने अपनी बेटी को देखते ही खुश होकर...

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रंग थे मेरे पास लेकिन… - 2 By Hetal

में वहा जा पोहोची जहा.....मुझे इस देखे हुए नजारेसे ये लगरहा था की शायद वहा मेरी दोस्त एक कोने में बेठी होगी सहमी हुई सी में उस कमरे में गई मेने पुकारा उसे, लगाकि वो सामने से आकर मु...

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किससे कहूँ By Mahima Shree

“हाँ! हाँ! वही! वाह! दोनों मिल गई” सुबू के हाथों में साड़ी देखते ही रश्मि चहकने लगी। “ला मुझे थमा,“अब नीचे आजा” “रुक जा मैं टेबल पकड़ती हूँ । आराम से उतर, पैर ठीक से जमा के रख।...

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बूढ़ी अम्मा By Niyati Kapadia Nirjhar

रवि, जय और खुशी अच्छे दोस्त है तीनों एक ही क्लास में पढ़ते है। शाम के वक्त खुशी जय के घर जाती है जहा पर रवि भी आया हुआ है।खुशी: क्या सोचा? उस बूढ़ी अम्मा से मिलने जाना है की नहीं?खुश...

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मां का अंतिम समय  By Ashish Dalal

‘बस। अब और नहीं होता मुझसे। परेशान हो गई हूं मैं।’ उसके अंतिम कौर मुंह में डालते ही जूठी थाली उसके सामने से उठाते हुए बड़बड़ाती वह बोली। बादल गरजने के लिए जैसे अनुकूल वातावरण तलाश रह...

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दरका आइना By Renu Gupta

जेठ माह की तपती आग उगलती लंबी रात थी। हवा में बेहद तपिश थी। दुर्गा की टीन-टप्पर की बनी खोली में एक भी खिडक़ी नहीं थी। रात को टीन का दरवाजा जो बंद होता तो पूरी खोली जैसे दमघोंटू भट्ट...

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मिस्टर बेचारा By Niyati Kapadia Nirjhar

सागर धीरे से घर में प्रवेश करता है और कमरे में अपनी पत्नी को ना देखते आराम से आके सोफा पर बैठ जाता है। जरना (सागर की पत्नी): अरे तुम कब आये? बेल बजने की आवाज भी नहीं सुनी, मैंने दर...

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वक्त वक्त की बात है.... By Ajay Kumar Awasthi

बारिश के दिन थे लेकिन वर्षा नही हो रही थी, पर घने काले बादल मंडरा रहे थे । उसके पास रेन कोट नही था, उसने सिर बचाने के लिए केवल प्लास्टिक का एक टुकड़ा साथ रखा था । उसे पहुचने में देर...

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साहब By Satish Sardana Kumar

लघुकथासाहबसाहब राजीव गाँधी के बड़े भक्त थे लेकिन जमाना वी पी सिंह का था।हिंदी अखबार बोल कर बाँचते थे।जो वाक्य समझ न आये बाबुओं से बेहिचक पूछ लेते थे।उनका मुँह लगा और होशियार बाबू मै...

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जीवन की एक नई शुरुआत By Saroj Prajapati

राजेंद्र जी कमरे में अकेले बैठे एकटक दीवार पर लगी ताजमहल की तस्वीर को निहार रहे थे। उन्हें याद है जब सुदेश ने एक बार बड़े प्यार से कहा था कि "चलो ना ताजमहल चलते हैं। मेरी उसे देखने...

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प्रिय वर By Niyati Kapadia Nirjhar

पजानकी : सुंदर सी लड़की, जिसकी शादी हों गई हे। छोटे से शहर की एक आम लड़की।मनोहर : जानकी का पति। हसमुख, सुंदर और जानकी के लिए कुछ भी करने को तैयार। उसकी हसी बहोत ही सुंदर हे। गीता : ज...

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मेरीड दोस्त  By Niyati Kapadia Nirjhar

एक फ्लेट के कमरे में सोफा पर पड़ा एक लड़का सो रहा है। उसके पाँव जमीन पर लटके हुए है वहाँ नीचे एक और लड़का सो रहा है। कमरे में चारो और कागज के टुकड़े और कपड़े बिखरे हुए पड़े है। कल रात को...

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इंतज़ार By Anju Gupta

कहते हैं प्यार किया नहीं जाता बस हो जाता है ! पर ना जाने क्यों, ये अक्सर वहीं क्यों हो जाता है, जहाँ कायदे से इसे नहीं होना चाहिए ! जमीं आसमान का फर्क था उन दोनों के स्तर में ! कहा...

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सन 3019 By Niyati Kapadia Nirjhar

सन 3019 एक हवा में उड़ते स्पेस शीप में से कायरा ने देखा उसका बेटा एक अजीब से प्राणी के साथ जमीन पर खड़ा बाते कर रहा था। उस प्राणी की शक्ल काले रंग के गोल मटके जैसी थी और उसमे से एन्ट...

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फूल गुलाब सी वह लड़की By Ashish Dalal

फूल गुलाब सी वह लड़की शुचि. विश्वास और साहस से भरा वह लड़का अनिकेत. यह उनकी किस्मत ही थी कि कॉलेज की सीढ़ियां साथ उतरकर जिन्दगी की सीढ़ियां चढ़ते हुए नौकरी भी दोनों ने एक ही कम्पनी में...

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मौत तू डराती क्यों है...? By Ajay Kumar Awasthi

कभी अचानक किसी विस्फोट की तरह, किसी मशीन के विशाल जबड़े में फंसकर टुकड़े टुकड़े हो जाना ,किसी तेज रफ्तार गाड़ी के पहिये के नीचे .कभी आहिस्ते से शरीर के किसी एक सिरे से रोग के संक्रमण क...

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लेफ्ट साइड से राइट साइड By Niyati Kapadia Nirjhar

स्वीटी की आज एक्जाम थी, वह समय रहते कॉलेज जाने के लिए निकली थी। पर ये क्या? उसकी गाड़ी के ग्लास पर किसी बर्डने पोटी करदी थी। उसने कपड़े से ग्लास को पोंछा और अंदर बेठ गई। अंदर जाके उस...

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लम्हों की गाथा - 5 By सीमा जैन 'भारत'

13 - बुलबुल
14 - काज़ल
15 - परिवार

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बिदाई By Raje.

मैने-जमाने ने भी देखा था।
सुर्खलाल रंग, तेरी आँखों का,
आसु अपनो से बीछडने के थे, या फिर ....... पता नही ?

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नाकाम या असहाय प्रशासन By NR Omprakash Saini

बात सितम्बर माह की हैं। जब एक 12वी पढ़ने वाली 15 वर्षीय लड़की समाज और परिवार के किसी भी सदस्य से मदद नहीं मिली तो प्रशासन से ही मदद कि एक मात्र आखरी उम्मीद लगा बैठी। उसको लगा अब इस...

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आदत से मजबुर By Niyati Kapadia Nirjhar

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मां बहुत परेशान करती है । By Ashish Dalal

‘देखो, मुझसे नहीं होता अब । सारा दिन थक जाती हूं मैं ।’ खाना खाकर जैसे ही वह हाथ धोकर कुर्सी पर बैठा तो वह दो घड़ी उसके संग बतियाने को उसके पास आकर बैठ गई । ‘कामवाली रख लो ।’ दांत क...

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मृणालिनी By Ashka Shukal

© आशका शुक्ल "टीनी" © यह रचना के सारे कॉपीराइट्स लेखक के खुद के हाथों में है । अगर यह रचना कोई भी जगह पर पर्सनल वेबसाइट, कोई पुस्तक या कोई ऑडियो या वीडियो स्वरूप से लेखक की मंज़ूर...

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पिता की छाया By Hareesh Kumar Sharma

मां ने अगर बच्चे को खाना खाना सिखाया है तो वहीं पर पिता बच्चे को खाना कमाना कर सिखाया है।मां अगर डांट से बचाकर हमें अपने आंचल में छुपा ती है तो वहीं पर पिता हमें डांट कर समाज में ख...

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लघुकथाएँ (दिव्यदान, कोथली) By Gyan Prakash Peeyush

दिव्य दान.......................मोहन सिंह मामूली हैसियत का आदमी था। उसने मेहनत मजदूरी करके अपने बच्चों को आत्मनिर्भर बना दिया था। उसके बेटे- बहू बहुत अच्छे स्वभाव के थे। समय पर उस...

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इंदिरा एकादशी व्रत कथा  By Jyoti Prakash Rai

हम और आप सभी अपने अपने धार्मिक परंपराओं के अनुसार हर कार्य को सोच समझ कर ही करते हैं ! हमारे भारत मे छह ऋतुए हैं १. शरद ऋतु- इसे पतझड़ का मौसम भी कहते है। गर्मी कम हो जाती है और वा...

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दो लघुकथाएं By Krishna manu

लघुकथा1.भस्मासुर - अलख निरंजन!- आ जाइए बाबा पेड़ की छाह में। बाबा के आते ही वह हाथ जोड़कर खड़ा हो गया- आज्ञा महाराज। बाबा ने खटिया पर आसन जमाया। बोले- बच्चा, तेरा चेहरा मुरझाया...

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दिवाली के फटाके By आदित्य पारीक

मोहल्ले के घरों में रंग रोशन हो रहा था और उनसे निकलने वाली भीनी भीनी गंध ने माधव को दीवाली के आने का संकेत दे दिया माधव ने उत्सुकता से माँ से पूछा "हमारे घर में रंग नही होगा क्या म...

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ऐसी वाणी बोलिए… By Saroj Prajapati

राजेंद्र जी एक साधारण किसान परिवार से थे। बहुत कम उम्र में उनके पिता का निधन हो गया तो बड़ा बेटा होने के कारण सारी जिम्मेदारी उनके कंधों पर ही आ गई। अपना मां का हाथ बटाने के लिए उन...

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एक जंगल एक भाषा By Siraj Ansari

एक बार जंगल की सत्ता सियारों के हाथ लग गयी। उन्होंने "हुआ-हुआ" की आवाज़ को ही जंगल की राष्ट्रभाषा घोषित करने का निश्चय किया और अंदर ही अंदर जंगल के नियम कानून ताक पर रख कर, घालमेल क...

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शिवानी का टुनटुनवा By Upasna Siag

शिवानी आज सुबह से मन ही मन बहुत खुश थी। रात को अच्छे से नींद भी नहीं आयी फिर भी एक दम तरो-ताज़ा लग रही थी। पूजा पाठ में भी मन नहीं लग रहा था। बार -बार ध्यान अपने कमरे में रखे हुए ब...

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बिग बैंग By Pritpal Kaur

फाइल पर आख़िरी टिप्पणी कर के अपने हस्ताक्षर चिपकाये, झटके से फाइल बंद की और अपनी झुकी हुयी गर्दन सीधी की. सामने दीवार पर लगी घड़ी पर नज़र डाली तो देखा साढ़े छह बज चुके थे. खुद पर गुस्स...

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ख़्वाब....जो बता न सके By Satender_tiwari_brokenwordS

नैना की नौकरी विदेश में लग गयी थी। घर वाले खुश तो थे लेकिन वही बात है ना कि लड़की है कैसे रह पाएगी ? वही समाज के चार ताने और वो चार लोग, न जाने कौन ??लेकिन फिर भी नैना के माता पिता...

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हुस्न कि तख़लीक़ By Saadat Hasan Manto

कॉलिज में शाहिदा हसीन-तरीन लड़की थी। उस को अपने हुस्न का एहसास था। इसी लिए वो किसी से सीधे मुँह बात न करती और ख़ुद को मुग़्लिया ख़ानदान की कोई शहज़ादी समझती। Gस के ख़द्द-ओ-ख़ाल वाक़ई मुग...

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सबूत By Dr Narendra Shukl

सबूत सुच्चा सिंह , ये तू किन्हें उठा लाया है ? सामने खड़े , दुबले-पतले से दिखने वाले ग्रामीण युवक तथा पास खड़ी , सांवले - मंझोले कद - काठी वाली युवती की ओर इशारा करते हुये इंस्पैक्ट...

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हारता चला गया By Saadat Hasan Manto

लोगों को सिर्फ़ जीतने में मज़ा आता है। लेकिन उसे जीत कर हार देने में लुत्फ़ आता है।
जीतने में उसे कभी इतनी दिक़्क़त महसूस नहीं हुई। लेकिन हारने में अलबत्ता उसे कई दफ़ा काफ़ी तग-ओ-द...

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ऐक लड़की की कहानी By Savu Baleviya

मे ऐक छोटे से गांव में रहती हूं . मेरे गांव का नाम विरपुर है मुझे बसपन से कुछ बड़ा बनने का सपना है मेरे गांव के लिए कुछ करना है पर सपना तो सपना होता है .मे ५ कछातक गांव में ही अभ्...

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बाबा मेरे बच्चे कैसे हैं ? By Upasna Siag

बाबा, मेरे बच्चे कैसे हैं ?
.............
बोलो बाबा ! हर बार मेरी कही अनसुनी कर देते हो ...., अब तो बोलो !
................
बाबा !
................
मैं क्य...

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मुश्किल घड़ी न देखन दई By Swati Grover

पंचायत का फ़ैसला आ चुका था। स्कूल की ज़मीन को पंचायत ने ख़रीद लिया। और इस ज़मीन पर मंदिर, मस्ज़िद और गुरुद्वारा बनेगा ईसाई की संख्या गॉंव में न के बराबर थीं । स्कूल की हालत बड़...

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इंतक़ाम By S Sinha

कहानी - इंतक़ाम गर्मी की एक दोपहर में अर्चना के फ्लैट का कॉल बेल बजा . वह अपनी विधवा बूढी माँ के साथ उस छोटे से फ्लैट में बहुत दिनों से रह रही थी . कुछ ही देर पहले उसे न...

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