सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


Categories
Featured Books

कलयुग के श्रवण कुमार - 3 - पिता का जन्म By संदीप सिंह (ईशू)

पिता का जन्म एक एक गुजरता पल मानो दिनों की तरह गुजर रहा था , सीने में वज्र समान के अस्थि पंजरों के बीच बाएं तरफ स्थित दिल घोड़े की गति सा बेतहाशा सरपट धड़के जा रहा था। ट्रेन सी आती ज...

Read Free

बंधन प्यार का - 4 By Kishanlal Sharma

"चेम्बर ऑफ हॉरर में दुष्ट,दुर्जन,हत्यारे निर्मम लोगो के पुतले के साथ उनके जुर्म करने का तरीका भी था,"।गईदे उन्है चेम्बर के बारे मे बताते हुए बोला,"उस चएमबार मे गर्भवती महिलाओं और ब...

Read Free

एक अदद औरत - 4 By Kishanlal Sharma

उसने फिर से एक बार किराए पर मकान ले लिया था।अब एक बार फिर उसकी दिनचर्या में एक बार फिर परिवर्तन आया था।पहले वह स्टेशन पर ही रहता था।लेकिन मकान लेने के बाद वह रात को ट्राली को नौकर...

Read Free

शाकुनपाॅंखी - 43 - सवाल अहम है By Dr. Suryapal Singh

63. सवाल अहम है कच्चे बाबा का आश्रम। बरगद के पेड़ के नीचे बाबा, सूफी फकीर और पं पारिजात शर्मा बैठे हैं। उनके सामने आश्रम के विद्यार्थी । कान्यकुब्ज कुछ ही कोस की दूरी पर है। उसके प...

Read Free

उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

=================== "अरे ! यहाँ क्यों नहीं बैठती ? किताबों में इस उमर में क्या मिलेगा, लड्डू?" एक दिन नह...

Read Free

विस्थापन By bhagirath

    25 विस्थापन   (बेताल कथा 1)      रास्ता लंबा था। रास्ते को रोमांचक बनाने के लिए बेताल ने राजा विक्रम को एक कहानी सुनाई।    एक बार की बात है राजतन्त्र ने इतनी उन्नति कर ली कि रा...

Read Free

काली बिल्ली By संदीप सिंह (ईशू)

आज सुबह ही वह जल्दी उठ कर तैयार हो रहा था। पर दिमाग दो राहे पर खड़ा था।उसका रिज्यूम एक बड़ी कंपनी मे चयनित हो गया था और आज सुबह 10 बजे उसका साक्षात्कार (इन्टरव्यू) था। वह चयनित होग...

Read Free

पाजेब By Bharati babbar

उसके बाहर आने तक मोबाइल चार बार बज चुका था।सुबह-सुबह कौन इतना बेताब है... लगभग झींकते हुए,आधा गीला बदन लिये वह बाथरूम से तौलिया लपेटते-लपेटते बाहर आया।चारों मिस्डकॉल अमृतसर में उनक...

Read Free

जीने का हक By Dr. Pradeep Kumar Sharma

जीने का हकरात को सबके सो जाने के बाद मालती ने अपने पति जयंत के कान में धीरे से फुसफुसाया, ‘‘अजी सो गए क्या ?’’‘‘नहीं, क्या बात है मालती ? मैं देख रहा हूँ कि तुम पिछले कुछ दिनों से...

Read Free

जलसतह By Bharati babbar

उसके स्टेशन पहुँचते ही बूँदाबाँदी शुरू हो गयी।मॉनसून के साथ ही शहर का मूड जैसे बदल गया।सबके चेहरे खिले हुए लगे।एक मॉनसून ही तो बदलता है मुंबई शहर को, अन्यथा दो ही मौसम हैं यहाँ,गर्...

Read Free

सरला लौट आई By Wajid Husain

वाजिद हुसैन की कहानी -मार्मिक सरला का प्रभाव कुछ ऐसा था कि लोग उसे सर्वगुण संपन्न लड़की मानते थे‌। उसकी सम्मोहक आंखों का जादू चल जाता तो कोई शायर शायरी लिखने लगता‌। उसके पापा के पा...

Read Free

मछरगन्धा... By Saroj Verma

"क्या हुआ पुरोहित जी! ऐसे उदास क्यों बैठें हैं"? राममूरत ने बूढ़े पुरोहित जी से पूछा.... "बहुत बुरा हुआ बेटा उसके साथ,ऐसा नहीं होना चाहिए था,उसके कर्मों की इतनी बुरी सजा उसे नहीं मि...

Read Free

दिखता नहीं क्या By vinayak sharma

दशरथ पढ़ा लिखा वहीं तक था, जहाँ तक कि कुछ लिखा पढ़ सके। दशरथ का बचपन बहुत हिंज्यादा गरीबी में बीता था। गरीबी इतनी ज्यादा थी कि बहुत ही मुश्किल से परिवार का पेट भर पाता था। किसी दिन ए...

Read Free

बीते दिनों का करवा चौथ By Sudhir Srivastava

संस्मरणबीते दिनों में करवा चौथ"""""""""""""""""""""""""******* करवा चौथ का पर्व आते ही मुझे अपने बचपन के दिनों की याद आ जाती है, जब घर के आंगन में हफ्तों पहले से ही बड़ी मां दादी क...

Read Free

मैं ग़लत था - भाग - 11 (अंतिम भाग) By Ratna Pandey

विवाह के दो दिन बाद पग फेरे के लिए जब छोटे लाल छुटकी और भले राम को अपने घर ले गया तब उसने अपने माँ-बाप की आपस में बात सुनी। उसकी माँ ने कहा, "छोटे के बाबूजी एक परात में पानी रख लेत...

Read Free

सानिध्या By Lakhan Nagar

अंततया , अंतिम रूप से रेलवे की परीक्षा में चयन के बाद आज देहरादून से दिल्ली जा रहा हूँ  । सारा सामान पैक कर लिया हैं । घर-परिवार स्टेशन तक छोड़कर चला गया हैं । स्टेशन पर पहुँचते ही...

Read Free

कलयुग के श्रवण कुमार - 3 - पिता का जन्म By संदीप सिंह (ईशू)

पिता का जन्म एक एक गुजरता पल मानो दिनों की तरह गुजर रहा था , सीने में वज्र समान के अस्थि पंजरों के बीच बाएं तरफ स्थित दिल घोड़े की गति सा बेतहाशा सरपट धड़के जा रहा था। ट्रेन सी आती ज...

Read Free

बंधन प्यार का - 4 By Kishanlal Sharma

"चेम्बर ऑफ हॉरर में दुष्ट,दुर्जन,हत्यारे निर्मम लोगो के पुतले के साथ उनके जुर्म करने का तरीका भी था,"।गईदे उन्है चेम्बर के बारे मे बताते हुए बोला,"उस चएमबार मे गर्भवती महिलाओं और ब...

Read Free

एक अदद औरत - 4 By Kishanlal Sharma

उसने फिर से एक बार किराए पर मकान ले लिया था।अब एक बार फिर उसकी दिनचर्या में एक बार फिर परिवर्तन आया था।पहले वह स्टेशन पर ही रहता था।लेकिन मकान लेने के बाद वह रात को ट्राली को नौकर...

Read Free

शाकुनपाॅंखी - 43 - सवाल अहम है By Dr. Suryapal Singh

63. सवाल अहम है कच्चे बाबा का आश्रम। बरगद के पेड़ के नीचे बाबा, सूफी फकीर और पं पारिजात शर्मा बैठे हैं। उनके सामने आश्रम के विद्यार्थी । कान्यकुब्ज कुछ ही कोस की दूरी पर है। उसके प...

Read Free

उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

=================== "अरे ! यहाँ क्यों नहीं बैठती ? किताबों में इस उमर में क्या मिलेगा, लड्डू?" एक दिन नह...

Read Free

विस्थापन By bhagirath

    25 विस्थापन   (बेताल कथा 1)      रास्ता लंबा था। रास्ते को रोमांचक बनाने के लिए बेताल ने राजा विक्रम को एक कहानी सुनाई।    एक बार की बात है राजतन्त्र ने इतनी उन्नति कर ली कि रा...

Read Free

काली बिल्ली By संदीप सिंह (ईशू)

आज सुबह ही वह जल्दी उठ कर तैयार हो रहा था। पर दिमाग दो राहे पर खड़ा था।उसका रिज्यूम एक बड़ी कंपनी मे चयनित हो गया था और आज सुबह 10 बजे उसका साक्षात्कार (इन्टरव्यू) था। वह चयनित होग...

Read Free

पाजेब By Bharati babbar

उसके बाहर आने तक मोबाइल चार बार बज चुका था।सुबह-सुबह कौन इतना बेताब है... लगभग झींकते हुए,आधा गीला बदन लिये वह बाथरूम से तौलिया लपेटते-लपेटते बाहर आया।चारों मिस्डकॉल अमृतसर में उनक...

Read Free

जीने का हक By Dr. Pradeep Kumar Sharma

जीने का हकरात को सबके सो जाने के बाद मालती ने अपने पति जयंत के कान में धीरे से फुसफुसाया, ‘‘अजी सो गए क्या ?’’‘‘नहीं, क्या बात है मालती ? मैं देख रहा हूँ कि तुम पिछले कुछ दिनों से...

Read Free

जलसतह By Bharati babbar

उसके स्टेशन पहुँचते ही बूँदाबाँदी शुरू हो गयी।मॉनसून के साथ ही शहर का मूड जैसे बदल गया।सबके चेहरे खिले हुए लगे।एक मॉनसून ही तो बदलता है मुंबई शहर को, अन्यथा दो ही मौसम हैं यहाँ,गर्...

Read Free

सरला लौट आई By Wajid Husain

वाजिद हुसैन की कहानी -मार्मिक सरला का प्रभाव कुछ ऐसा था कि लोग उसे सर्वगुण संपन्न लड़की मानते थे‌। उसकी सम्मोहक आंखों का जादू चल जाता तो कोई शायर शायरी लिखने लगता‌। उसके पापा के पा...

Read Free

मछरगन्धा... By Saroj Verma

"क्या हुआ पुरोहित जी! ऐसे उदास क्यों बैठें हैं"? राममूरत ने बूढ़े पुरोहित जी से पूछा.... "बहुत बुरा हुआ बेटा उसके साथ,ऐसा नहीं होना चाहिए था,उसके कर्मों की इतनी बुरी सजा उसे नहीं मि...

Read Free

दिखता नहीं क्या By vinayak sharma

दशरथ पढ़ा लिखा वहीं तक था, जहाँ तक कि कुछ लिखा पढ़ सके। दशरथ का बचपन बहुत हिंज्यादा गरीबी में बीता था। गरीबी इतनी ज्यादा थी कि बहुत ही मुश्किल से परिवार का पेट भर पाता था। किसी दिन ए...

Read Free

बीते दिनों का करवा चौथ By Sudhir Srivastava

संस्मरणबीते दिनों में करवा चौथ"""""""""""""""""""""""""******* करवा चौथ का पर्व आते ही मुझे अपने बचपन के दिनों की याद आ जाती है, जब घर के आंगन में हफ्तों पहले से ही बड़ी मां दादी क...

Read Free

मैं ग़लत था - भाग - 11 (अंतिम भाग) By Ratna Pandey

विवाह के दो दिन बाद पग फेरे के लिए जब छोटे लाल छुटकी और भले राम को अपने घर ले गया तब उसने अपने माँ-बाप की आपस में बात सुनी। उसकी माँ ने कहा, "छोटे के बाबूजी एक परात में पानी रख लेत...

Read Free

सानिध्या By Lakhan Nagar

अंततया , अंतिम रूप से रेलवे की परीक्षा में चयन के बाद आज देहरादून से दिल्ली जा रहा हूँ  । सारा सामान पैक कर लिया हैं । घर-परिवार स्टेशन तक छोड़कर चला गया हैं । स्टेशन पर पहुँचते ही...

Read Free