सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • बड़े भइया

    पूछताछ खिड़की पर यह पता चलते ही कि ट्रेन प्लेटफार्म नंबर- दो पर आ चुकी है, राकेश...

  • असली आज़ादी वाली आजादी - (भाग-6)

    भाग -5 से आगे अगली सुबह मैं थोड़ी जल्दी घर से निकला। रात भर सो तो नही पाया था फिर...

  • मुखिया काका

    “मुखिया चाचा नहीं रहे, विमला...” फोन का रिसीवर रख, अरविंद ने पत्नी के निकट आकर क...

वापसी की प्रतीक्षा By Dr pradeep Upadhyay

आज उसे अपने जिला प्रमुख होने पर भी किसी तरह के गौरव का अनुभव नहीं हो रहा था बल्कि बहुत ही शर्मसार सा महसूस कर रही थी।वह बहुत ही असमंजस में होकर अन्तर्द्वन्द्व में फँसी हुई थी।उसे क...

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अदृश्य हमसफ़र - 12 By Vinay Panwar

दोनो के मध्य खूब वाद विवाद हुआ। बाबा ने हर तरह से अनुराग को समझाने की कोशिश की लेकिन अनुराग की जिद के सामने उन्हें झुकना ही पड़ा। उनसे कमरे का सन्नाटा सहन नही हो रहा था तो वह लड़खड़ात...

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बड़े भइया By Asha Pandey Author

पूछताछ खिड़की पर यह पता चलते ही कि ट्रेन प्लेटफार्म नंबर- दो पर आ चुकी है, राकेश ने अपना सामान उठाया और लगभग दौड़ते हुए प्लेटफार्म नंबर – दो पर पहुंच गया टिकट जेब में ऊपर ही रखा था...

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असली आज़ादी वाली आजादी - (भाग-6) By devendra kushwaha

भाग -5 से आगे अगली सुबह मैं थोड़ी जल्दी घर से निकला। रात भर सो तो नही पाया था फिर भी सुबह अपने आप ही नींद जल्दी खुल गयी। सोंचा कि पहले अस्पताल में मनोरमा बिटिया को देख लूंगा फिर गां...

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मुखिया काका By Seema Singh

“मुखिया चाचा नहीं रहे, विमला...” फोन का रिसीवर रख, अरविंद ने पत्नी के निकट आकर कहा, तो एक बार को तो वह लड़खड़ा गई।
पर दूसरे ही पल स्वयं को सम्भालती हुई बोली, “हमें जाना होगा... आप च...

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मैं कायर नहीं हूं By पूर्णिमा राज

"टैक्सी , टैक्सी ,रुक, रुक, रुक, खाली हो भाइया , गोसाईं रोड चलोगे ।" निधि ने हाथ टैक्सी को हाथ देते हुए कहा ।"जी मैडम , जरूर , बैठिये ।""हेलो, हाँ मां , टैक्सी मिल गयी है बस आ रही...

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मुमताज़ By SURENDRA ARORA

पात्र - परिचय
ज़ावेद-देश-विभाजन के समय पश्चिमी पाकिस्तान को पलायन करके वहाँ बसने वाला हिंदुस्तानी मुसलमान
हबीब-पाकिस्तान में कुछ समय के लिए ज़ावेद से मिलता है
राधा-ज़ावेद इसे हिंदु...

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चक्रव्यूह By Asha Pandey Author

दरवाजे की घंटी बजते ही सुरेखा का दिल जोरों से काँप गया कहीं फिर वही लोग तो नहीं ? डरते डरते उसने दरवाजा खोला, सामने पति को देख आश्वस्त हुई सुरेखा के फक्क पड़े चेहरे को देखकर सिद...

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नई सुबह By Seema Singh

“टन-टन...”
दीवार पर टंगी घड़ी ने समय बताया तो चौंक कर सिर ऊपर कर वैशाली बड़बड़ाई,
“उफ़.! आज फिर लेट हो गयी, ये क्लोजिंग का काम भी ना, कितना टाइम लग जाता है, इतना बड़ा स्टाफ है ! मगर...

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कुल का दिया By Asha Pandey Author

मुझे रंजना दी के फोन से पता चला कि बुआ नहीं रहीं
“मन्नो ने मार डाला, छोटी”
‘कब ? कैसे ?’ मैं चौंकी थी
‘कल शाम, ..चार बजे, ...मैं रात में ही यहाँ आ गई ....बाबू, मुन्ना, लता –स...

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पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग (पी0 टी0 एम0) By r k lal

पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग (पी0 टी0 एम0)आर 0 के 0 लाल "देखिए! मेरी बेटी के कितने नंबर आए हैं। आपने जो भी उत्तर क्लास में लिखवाया था, वही तो इसने लिखा था। अन्य सभी विषयों में अच्छे नंबर...

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अधकढ़ा गुलाब By Seema Singh

“अरे, आप अँधेरे में क्या कर रही हो? कौन सा खजाना खोल कर बैठी हो, मम्मा, जो हमारी आवाज़ तक नहीं सुन पा रही हो?”
शैली की आवाज़ से विचारों मे डूबी मृदुला वर्तमान में वापस आई.
“नहीं बे...

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पछतावा... By Dhavalkumar Padariya Kalptaru

ऑर्डर...ऑर्डर ... तमाम सबूतों एवं गवाहों के मद्दे नज़र रखते हुए अदालत यह नतीजे पर पहुंची हैं कि मुजरिम रामु को को चोरी करने एवं मासूम लोगों को डराने धमकाने के आरोपसर दफा ३...

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छोटी बहू By Pushp Saini

कहानी [छोटी बहू ✍]******************मृणाल यह एक नाम जैसे ज़िन्दगी बन गया है ।पहले कभी वैसा महसूस ही नहीं किया जैसा उससे मिलने के बाद,वह जिस दिन हाँ कहेगी वह दिन मेरी ज़िंदगी का सबस...

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खोज By Asha Pandey Author

दुनिया चाहे कितनी भी भरी हो, पर अपना दिल खाली हो तो सब ओर खाली ही खाली लगता है शहर के सबसे व्यस्त होटल में, ग्राहकों की सेवा में एक टेबल से दूसरी टेबल तक दौड़ता-भागता छोटू अपनी उदास...

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आ लौट चलें By Ajay Kumar Awasthi

त्रिपाठी जी का बड़ा संयुक्त परिवार था सो आपस मे खटपट तो होती ही रहती थी । पर बात इतनी बढ़ जाएगी ये घर के किसी सदस्य ने नही सोचा था । दरअसल छोटी बहू को लगा कि उनका भाई और भाभी...

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सोलमेट्स By Seema Singh

भागती-दौड़ती कॉलेज के लिए तैयार होती संजना की एक नजर घड़ी पर लगातार बनी हुई थी, अगर बस छूट गई तो दिन बर्बाद!
“ प्रोफेसर भार्गव एक नम्बर के खडूस! किसी से नोट्स भी कॉपी नहीं करने देंग...

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फ़तह By Neelam Kulshreshtha

जिग्ना रोज़ की तरह बालकनी में सुबह की चाय पीने के बाद अख़बार पढ़ती है, ऎसे में आस पास के गमलों के छोटे पौधे व हरी भरी मनी प्लांट की बेल से लिपटकर तिरते हुए ताज़ी हवा के झोंकों का उसके...

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फिर फिर By Asha Pandey Author

स्वप्न इतना डरावना तो नही था, किन्तु न जाने कैसे वृन्दा पसीने से तर-ब-तर हो गई । गला सूख गया था उसका । आजकल अक्सर ऐसा होता है । स्वप्न देखना नही, स्वप्न से डरना । यद्यपि वह इन मान्...

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कहाँ गईं तुम नैना - 16 By Ashish Kumar Trivedi

            कहाँ गईं तुम नैना (16)संजय नैना को अपने मन की बात नहीं बता सका था। लेकिन औरतों को लेकर मन में जो कड़वाहट थी वह दूर हो चुकी थी। बांग्ला न्य...

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खुशी By નિમિષા દલાલ્

“रूपल निहार कहा है?’ घर में आते ही देवांग ने पूछा.“सो गया रोते रोते, आज आप उसे पटाखे लेने ले जाने वाले थे. आपका इंतजार करते करते सो गया. वो तो खाना भी नहीं खानेवाला था. पर बाबुजीने...

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अधूरा प्रायश्चित By Seema Singh

“ सर, इमरजेंसी है, जली हुई औरत है, एट्टी परसेंट जली हुई है.” जूनियर डॉक्टर ने चैम्बर में झांक कर थोड़े हडबडाए स्वर में बताया तो मैंने झटपट लैपटॉप बंद किया और अपना गाउन और मास्क उठा...

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अंतर्द्वन्द्व By Asha Pandey Author

आज उसे घर से निकलने में थोड़ी देर हो गई थी वह तेज कदमों से चलकर ठीक समय पर काम पर पहुँच जाना चाहता था सामने से आते साइकिल सवार से उसने समय पूछा उसके ‘साढ़े आठ’ कहते ही वह लगभग...

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पुनरागमन By Seema Singh

“ हांजी ! हमें पता है. सच में? अच्छा ठीक है कल बात करतें है. अरे काम है मुझे.. ठीक ठीक कल कल...”
बाय बोलते हुए अनुभा ने फोन काट दिया...
“बड़ा गहरा रोमांस चल रहा है.”
अचानक शशि की...

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ख़ब्त - 2 By Mangi

" आ जुबान रख, भरोसो कोनी के ? न मैं मुकरूँगा और ना मेरा विजया..." अरे, भानु कर दी न छोटी बात, बिस्वास है तेरी जुबां पे, "" और मुझपे, " और दोनों खिलखिलाहट हसने लगते है " ! भानुप्रता...

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सत्यम ब्रूयात By Asha Pandey Author

ट्रेन जब ‘विश्वनाथ गंज’ स्टेशन पर रुकी तो दीनानाथ ने अपना झोला कंधे पर टांगा और सूटकेस उठाकर नीचे उतर गए प्लेटफार्म पर ट्रेन से उतरने और चढ़ने वालों की कुछ भीड़ थी चाय-समोसा बेचन...

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भाभी माँ By Seema Singh

“क्या बना रही है रूपा”
बगल वाली चाची की आवाज़ सुन कर रुपाली ने सिर उठा कर ऊपर देखा और मुस्कराहट बिखेरते हुए कहा.
“आइये चाची जी ..बस धूप में बैठी थी तो सोचा कुछ काम ही कर लूँ. आप ब...

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गुरु मां By Amita Joshi

"मां आपने भईया को साइकिल लेकर दी उनके जन्मदिन पर और मुझे नहीं ",बेबी ने तुनक कर खाने की प्लेट नीचे फैंक दी ।"तुझे इस बार तेरे पापा ने कान की सोने की बाली लेकर दी है न , साईकिल दो...

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इंतज़ार By નિમિષા દલાલ્

ओह सात बज गए। वो आ गये होंगे तो फिर सुबह ख़राब होगी। रचना ब्रश किये बगैर ही किचन मे चली गई। आलाप मॉर्निंग वॉक करने जाते वहां से आने के बाद गरम पानी में शहद डालकर पीता। रचना ने गरम प...

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जब हम मुसलमान थे....! By vandana A dubey

टटक-डिडक...टटक-डिडक....टटक-डिडक......ट्रेन के पहियों की इन आवाज़ों के साथ-साथ गौतमी के दिल की धड़कनें भी बढ़ती जा रहीं थीं. बगल में बैठे उसके पतिदेव रामकुमार की भी लगभग यही हालत थी. ग...

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वापसी की प्रतीक्षा By Dr pradeep Upadhyay

आज उसे अपने जिला प्रमुख होने पर भी किसी तरह के गौरव का अनुभव नहीं हो रहा था बल्कि बहुत ही शर्मसार सा महसूस कर रही थी।वह बहुत ही असमंजस में होकर अन्तर्द्वन्द्व में फँसी हुई थी।उसे क...

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अदृश्य हमसफ़र - 12 By Vinay Panwar

दोनो के मध्य खूब वाद विवाद हुआ। बाबा ने हर तरह से अनुराग को समझाने की कोशिश की लेकिन अनुराग की जिद के सामने उन्हें झुकना ही पड़ा। उनसे कमरे का सन्नाटा सहन नही हो रहा था तो वह लड़खड़ात...

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पूछताछ खिड़की पर यह पता चलते ही कि ट्रेन प्लेटफार्म नंबर- दो पर आ चुकी है, राकेश ने अपना सामान उठाया और लगभग दौड़ते हुए प्लेटफार्म नंबर – दो पर पहुंच गया टिकट जेब में ऊपर ही रखा था...

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असली आज़ादी वाली आजादी - (भाग-6) By devendra kushwaha

भाग -5 से आगे अगली सुबह मैं थोड़ी जल्दी घर से निकला। रात भर सो तो नही पाया था फिर भी सुबह अपने आप ही नींद जल्दी खुल गयी। सोंचा कि पहले अस्पताल में मनोरमा बिटिया को देख लूंगा फिर गां...

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मुखिया काका By Seema Singh

“मुखिया चाचा नहीं रहे, विमला...” फोन का रिसीवर रख, अरविंद ने पत्नी के निकट आकर कहा, तो एक बार को तो वह लड़खड़ा गई।
पर दूसरे ही पल स्वयं को सम्भालती हुई बोली, “हमें जाना होगा... आप च...

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मैं कायर नहीं हूं By पूर्णिमा राज

"टैक्सी , टैक्सी ,रुक, रुक, रुक, खाली हो भाइया , गोसाईं रोड चलोगे ।" निधि ने हाथ टैक्सी को हाथ देते हुए कहा ।"जी मैडम , जरूर , बैठिये ।""हेलो, हाँ मां , टैक्सी मिल गयी है बस आ रही...

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मुमताज़ By SURENDRA ARORA

पात्र - परिचय
ज़ावेद-देश-विभाजन के समय पश्चिमी पाकिस्तान को पलायन करके वहाँ बसने वाला हिंदुस्तानी मुसलमान
हबीब-पाकिस्तान में कुछ समय के लिए ज़ावेद से मिलता है
राधा-ज़ावेद इसे हिंदु...

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चक्रव्यूह By Asha Pandey Author

दरवाजे की घंटी बजते ही सुरेखा का दिल जोरों से काँप गया कहीं फिर वही लोग तो नहीं ? डरते डरते उसने दरवाजा खोला, सामने पति को देख आश्वस्त हुई सुरेखा के फक्क पड़े चेहरे को देखकर सिद...

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नई सुबह By Seema Singh

“टन-टन...”
दीवार पर टंगी घड़ी ने समय बताया तो चौंक कर सिर ऊपर कर वैशाली बड़बड़ाई,
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कुल का दिया By Asha Pandey Author

मुझे रंजना दी के फोन से पता चला कि बुआ नहीं रहीं
“मन्नो ने मार डाला, छोटी”
‘कब ? कैसे ?’ मैं चौंकी थी
‘कल शाम, ..चार बजे, ...मैं रात में ही यहाँ आ गई ....बाबू, मुन्ना, लता –स...

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पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग (पी0 टी0 एम0) By r k lal

पेरेंट्स टीचर्स मीटिंग (पी0 टी0 एम0)आर 0 के 0 लाल "देखिए! मेरी बेटी के कितने नंबर आए हैं। आपने जो भी उत्तर क्लास में लिखवाया था, वही तो इसने लिखा था। अन्य सभी विषयों में अच्छे नंबर...

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अधकढ़ा गुलाब By Seema Singh

“अरे, आप अँधेरे में क्या कर रही हो? कौन सा खजाना खोल कर बैठी हो, मम्मा, जो हमारी आवाज़ तक नहीं सुन पा रही हो?”
शैली की आवाज़ से विचारों मे डूबी मृदुला वर्तमान में वापस आई.
“नहीं बे...

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पछतावा... By Dhavalkumar Padariya Kalptaru

ऑर्डर...ऑर्डर ... तमाम सबूतों एवं गवाहों के मद्दे नज़र रखते हुए अदालत यह नतीजे पर पहुंची हैं कि मुजरिम रामु को को चोरी करने एवं मासूम लोगों को डराने धमकाने के आरोपसर दफा ३...

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छोटी बहू By Pushp Saini

कहानी [छोटी बहू ✍]******************मृणाल यह एक नाम जैसे ज़िन्दगी बन गया है ।पहले कभी वैसा महसूस ही नहीं किया जैसा उससे मिलने के बाद,वह जिस दिन हाँ कहेगी वह दिन मेरी ज़िंदगी का सबस...

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खोज By Asha Pandey Author

दुनिया चाहे कितनी भी भरी हो, पर अपना दिल खाली हो तो सब ओर खाली ही खाली लगता है शहर के सबसे व्यस्त होटल में, ग्राहकों की सेवा में एक टेबल से दूसरी टेबल तक दौड़ता-भागता छोटू अपनी उदास...

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आ लौट चलें By Ajay Kumar Awasthi

त्रिपाठी जी का बड़ा संयुक्त परिवार था सो आपस मे खटपट तो होती ही रहती थी । पर बात इतनी बढ़ जाएगी ये घर के किसी सदस्य ने नही सोचा था । दरअसल छोटी बहू को लगा कि उनका भाई और भाभी...

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सोलमेट्स By Seema Singh

भागती-दौड़ती कॉलेज के लिए तैयार होती संजना की एक नजर घड़ी पर लगातार बनी हुई थी, अगर बस छूट गई तो दिन बर्बाद!
“ प्रोफेसर भार्गव एक नम्बर के खडूस! किसी से नोट्स भी कॉपी नहीं करने देंग...

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फ़तह By Neelam Kulshreshtha

जिग्ना रोज़ की तरह बालकनी में सुबह की चाय पीने के बाद अख़बार पढ़ती है, ऎसे में आस पास के गमलों के छोटे पौधे व हरी भरी मनी प्लांट की बेल से लिपटकर तिरते हुए ताज़ी हवा के झोंकों का उसके...

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फिर फिर By Asha Pandey Author

स्वप्न इतना डरावना तो नही था, किन्तु न जाने कैसे वृन्दा पसीने से तर-ब-तर हो गई । गला सूख गया था उसका । आजकल अक्सर ऐसा होता है । स्वप्न देखना नही, स्वप्न से डरना । यद्यपि वह इन मान्...

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कहाँ गईं तुम नैना - 16 By Ashish Kumar Trivedi

            कहाँ गईं तुम नैना (16)संजय नैना को अपने मन की बात नहीं बता सका था। लेकिन औरतों को लेकर मन में जो कड़वाहट थी वह दूर हो चुकी थी। बांग्ला न्य...

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खुशी By નિમિષા દલાલ્

“रूपल निहार कहा है?’ घर में आते ही देवांग ने पूछा.“सो गया रोते रोते, आज आप उसे पटाखे लेने ले जाने वाले थे. आपका इंतजार करते करते सो गया. वो तो खाना भी नहीं खानेवाला था. पर बाबुजीने...

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“ सर, इमरजेंसी है, जली हुई औरत है, एट्टी परसेंट जली हुई है.” जूनियर डॉक्टर ने चैम्बर में झांक कर थोड़े हडबडाए स्वर में बताया तो मैंने झटपट लैपटॉप बंद किया और अपना गाउन और मास्क उठा...

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अंतर्द्वन्द्व By Asha Pandey Author

आज उसे घर से निकलने में थोड़ी देर हो गई थी वह तेज कदमों से चलकर ठीक समय पर काम पर पहुँच जाना चाहता था सामने से आते साइकिल सवार से उसने समय पूछा उसके ‘साढ़े आठ’ कहते ही वह लगभग...

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पुनरागमन By Seema Singh

“ हांजी ! हमें पता है. सच में? अच्छा ठीक है कल बात करतें है. अरे काम है मुझे.. ठीक ठीक कल कल...”
बाय बोलते हुए अनुभा ने फोन काट दिया...
“बड़ा गहरा रोमांस चल रहा है.”
अचानक शशि की...

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ख़ब्त - 2 By Mangi

" आ जुबान रख, भरोसो कोनी के ? न मैं मुकरूँगा और ना मेरा विजया..." अरे, भानु कर दी न छोटी बात, बिस्वास है तेरी जुबां पे, "" और मुझपे, " और दोनों खिलखिलाहट हसने लगते है " ! भानुप्रता...

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ट्रेन जब ‘विश्वनाथ गंज’ स्टेशन पर रुकी तो दीनानाथ ने अपना झोला कंधे पर टांगा और सूटकेस उठाकर नीचे उतर गए प्लेटफार्म पर ट्रेन से उतरने और चढ़ने वालों की कुछ भीड़ थी चाय-समोसा बेचन...

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भाभी माँ By Seema Singh

“क्या बना रही है रूपा”
बगल वाली चाची की आवाज़ सुन कर रुपाली ने सिर उठा कर ऊपर देखा और मुस्कराहट बिखेरते हुए कहा.
“आइये चाची जी ..बस धूप में बैठी थी तो सोचा कुछ काम ही कर लूँ. आप ब...

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गुरु मां By Amita Joshi

"मां आपने भईया को साइकिल लेकर दी उनके जन्मदिन पर और मुझे नहीं ",बेबी ने तुनक कर खाने की प्लेट नीचे फैंक दी ।"तुझे इस बार तेरे पापा ने कान की सोने की बाली लेकर दी है न , साईकिल दो...

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इंतज़ार By નિમિષા દલાલ્

ओह सात बज गए। वो आ गये होंगे तो फिर सुबह ख़राब होगी। रचना ब्रश किये बगैर ही किचन मे चली गई। आलाप मॉर्निंग वॉक करने जाते वहां से आने के बाद गरम पानी में शहद डालकर पीता। रचना ने गरम प...

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जब हम मुसलमान थे....! By vandana A dubey

टटक-डिडक...टटक-डिडक....टटक-डिडक......ट्रेन के पहियों की इन आवाज़ों के साथ-साथ गौतमी के दिल की धड़कनें भी बढ़ती जा रहीं थीं. बगल में बैठे उसके पतिदेव रामकुमार की भी लगभग यही हालत थी. ग...

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