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**कहानी का शीर्षक:** **“तक़दीर के तूफ़ान और प्यार की जीत”**### अध्याय १: मुंबई...
भाग 1शापित हवेलीरात के ठीक 3 बजकर 13 मिनट हुए थे।पूरा गाँव गहरी नींद में डूबा हु...
रॉनी ने वॉशरूम में देखा, गैलरी में देखा, पर राजस उसे कहीं नहीं मिला। वह अमाया क...
भाग 1: कबाड़खाना, कौतूहल और कालचक्र रामपुर गाँव की दोपहरें हमेशा से बेहद सुस्त औ...
28.सच्चा बेटा कौन?बेटा वह नहीं जो बस 'वंश' चलाए,या बुढ़ापे की लाठी बनने...
ऋगुवेद सूक्ति--(21) की व्याख्या ऋगुवेद--"मा स्रेधत"--7/32/9अर्थ---आलस्य मत कर...
राधा का संगम - प्रकरण 18 दादू की अर्थी क...
प्रातः 6:00 बजेआर्या की आँख खुली।एकदम ठीक छह बजे।वह कुछ सेकंड तक छत को देखती रही...
सुबह का समय था। घर में अजीब सी चुप्पी थी। कबीर ने बिना बहस किए धीरे से कहा,सृष्ट...
"प्यार, दोस्ती और अंतहीन सस्पेंस से बुनी एक ऐसी दास्तान, जहाँ हर कदम पर एक नया र...
कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को गोवर्धन पूजन किया जाता है। खासतौर पर यह त्यौहार मनुष्यों के द्वारा प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए गोवर्धन का ये पर्व मन...
गोस्वामी तुलसीदास ने जब रामायण अपनी प्रादेशिक भाषा अवधी मे लिखी, तो उसपर बहुत विवाद हुआ। परंतु गोस्वामी जी ने अपना फैसला नहीं बदला क्योंकि उन्हें इस का विश्वास था कि रामायण की कहान...
यह कहानी किसी भी जाति वर्ग स्थान भाषा धर्म लिंग से मैच नहीं खाती है इसे लिखने का मुख्य उद्देश्य सिर्फ मनोरंजन है और इसे मनोरंजन के लिए ही लिखा गया है फिर भी अगर कुछ तथ्य मिलते हैं...
"यज्ञ--लेकिन रुचि ऋषि देवशर्मा अपने ही विचारों में उलझे थे।ऋषि की यज्ञ करने की इच्छा पिछले कुछ दिनों से काफी बलवती हो रही थी।लेकिन रुचि को लेकर वह चिंतित थे।जब वह यज्ञ करने के...
"आदि है वो अंत है,आकार नहीं साक्षात्कार है वो, निराकार निर्विकार ओमकार है,वो अंत है अनादि है, जगतपिता जगत व्यापी है, जो हर कन मे बसे है हर मन मे बसें है बस हम उनसे अलग हो जाते...
सुभ प्रभात आज एक नई कहानी की और चलते है जहा पे एहसास थोड़ा पुराना होगा और थोड़ा अलग सा होगा तो चलो फिर शुरू करते हैसावधान महराज पधार रहे है...तशरीफ रखिए सब लोगमहराज आज एक बड़ी समस्...
अनुभव को जब भी समय मिलता वह लाइब्रेरी से अपनी मनपसंद पुस्तकें लाकर पढ़ लेता । छुट्टियों में वह घर में रखी हुई पुस्तकें निकाल कर पढ़ता,उसे पढ़ने का बहुत शौक़ था । एक दिन उ...
कुरुक्षेत्र के युद्ध मे मारे गए वीरो के परिवारजन भागीरथी के तट पर पहुंचे थे।खुले आसमान में चमक रहे सूर्य की किरणें नदी के जल पर पड़ रही थी। स्त्री पुरषो ने नदी के किनारे पहुंचकर अ...
2 जन चर्चा में.शम्बूक अयोध्या में एक सुमत योगी नामके व्यक्ति निवास करते थे। उनके पिता जी योग साधना के अतिरिक्त पाण्डित्य कर्म में रत रहते थे। वे अष्टांग योग के ज्ञाता थे। उसी का...
"मुझे राज्य के छिन्न जाने का दुख नही है।पुत्रो के जुए मे हार जाने और वनवास जाने का भी बिल्कुल दुख नही है।परंतु भरी सभा मे मेरी पुत्र वधू का जो अपमान हुआ है और रोते हुए द्रौपदी ने...
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