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यह साल 2800 है। पृथ्वी का वह चेहरा, जिसे कभी 'नीला ग्रह' कहा जाता था, अब...
सुदूर इलाकों के अंदर गहरे नाले के पार, एक सुंदर गाँव, जिसे "नीलाम्बरा" के नाम से...
कहानियां न बहुत कुछ सिखाती है, कभी कभी मायूसी मैं रोशनी सी जगा देती है, हल्की सी...
बगावत के सुरशहर में खबर फैल गई कि स्टेशन की जमीन पर काम फिर से शुरू हो गया है। इ...
शादी को कुछ ही दिन बीते थे।संस्कृति अब भी उस घर को समझने की कोशिश में थी—कि कब,...
कहानी की रूपरेखाभाग 1: गाँव की मि ट्टी और पहली नज़र● शभु म, एक शांत, तकनीक-प्रेम...
आईने की दूसरी तरफदीनू काका की मौत को एक हफ्ता बीत चुका था। पुलिस की फाइलों में क...
कुछ कहानियाँ सिर्फ़ अपराध की नहीं होतीं।कुछ कहानियाँ सिर्फ़ प्यार की भी नहीं होत...
स्कूल की सुबह हमेशा की तरह हल्की-सी हलचल और बच्चों की हँसी-मज़ाक से भरी हुई थी।...
विवेक और प्रज्ञाआश्रम के प्रवेश द्वार के पास बने आगंतुक कक्ष में विवेक के पहचान...
कुदरत जब सितम-ज़रीफ़ी (अत्याचार करने) पर उतर आए तो हज़रत इंसान का तमाशा बना देती है। ठाकुर साहब हरनाम सिंह ने कभी ख्वाब में भी न सोचा था कि उन्हें इतने बड़े इम्तिहान से दो-चार होना...
जनवरी के महीने की रात।मौसम बेहद ठंडा था।य कोहरे की वजह से बिजली के लट्ठों पर लगे बल्बों का प्रकाश टिमटिमाता नजर आ रहा था। प्लेटफॉर्म पर कोई आता जाता नजर नही आ रहा था।मुसाफिर लोग ठ...
सर्दियी की रात।रात के बारह बज चुके थे।वर्षा के सास ससुर और ननद कब के अपने अपने कमरों में जाकर सो चुके थे।वर्षा भी रोज सो जाती थी।लेकिन आज उसकी आँखों मे नींद नही थी। वर्षा ने शेखर...
1--प्यार"आप अंदर जा सकते है।"नर्स के कहने पर रमेश अंदर चला गया।इला पलँग पर लेटी थी।उसकी बगल में उसका नवजात शिशु सो रहा था।रमेश बच्चे की तरफ देखते हुए बोला,"इसकी आंखे तु...
‘‘वाह! बहनजी, बहुत ही खूबसूरत कढ़ाई की है इन चुन्नियों पर। अब ये सारी चुन्नियाँ सीधी फिल्मों के सेट पर जाएँगी। इन चुन्नियों को फिल्मों की हिरोइनें अपनी फिल्मों में ओढ़ेंगी।’’...
जुड़ी रहूँ जड़ों से शहर की सबसे आलीशान कोठी में एक तरफ बैडमिंटन कोर्ट है जहाँ अभी भी कुछ लोग काम करे रहे है। इसी के दूसरे छोर पर दो आउट हाऊस भी बने हुए है। दोनों आउट हाऊस हरियाली...
दास्ताँ ए दर्द ! 1 रिश्तों के बंधन, कुछ चाहे, कुछ अनचाहे ! कुछ गठरी में बंधे स्मृतियों के बोझ से तो कुछ खुलकर बिखर जाने से महकी सुगंध से ! क्या नाम दिया जा सकता है रिश्तों को ?...
नमश्ते दोस्तो तो मे लेकर आया हू एक नय पेश कश और उमीद है सब अच्छे ही होंगे तो चलो शुरुआत करते है /वाघेला परिवार मे आपका स्वागत है/ अरे वाघेला साहेब आप एक बार ब...
ठक ठक ठक...ठक ठक ठक... दरवाज़े पर ज़ोर से आहट होती है,विहान!विहान...स्कूल बस आती ही होगी 7 बज चुके हैं क्या कर रहे हो,आज फिर देर करोगे क्या?विहान की माँ( प्रज्ञा) उसे आवाज़ लगातीहै।वि...
वह युवा सोशल मीडिया पर एक जाना पहचाना नाम बन गया था। लोगों तक पहुँचकर जन समस्याओं की पड़ताल करना और सरकार के बारे में उनकी राय सोशल मीडिया पर ज्यों की त्यों दिखाना उसका कार्य था। आ...
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