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पुस्तक समीक्षा बाल मनोभावों का संग्रह 'बाल वाटिका' स...
प्रिय मित्रो! हर बार की भाँति यह वर्ष भी चला गया। कितना खोया, कितना पाया,...
भूल-117 वीर सावरकर के प्रति दुर्व्यवहार सावरकर का मामला बिल्कुल अनोखा, चौंकानेवा...
6 बच्चों के गरीब मां - बापदुनिया आपको सब कुछ देगी - प्यार, दुःख,दर्दलेकिन अगर आप...
इश्क़ कभी अचानक नहीं होता।वो धीरे-धीरे किसी के लहजे में उतरता है, किसी की आँखों...
Heroine: शानवी सिंहHero: कार्तिकेय (दिन में बिल्ली, रात में इंसान)शानवी सिंह को...
मैं अपने बचपन में दादा-दादी की लाड़ली थी।उनकी आँखों का नूर, उनके आँगन की सबसे प्...
एक सफल प्रेम कहानी ️ लेखक: विजय शर्मा एरी प्रस्तावनाज़िंदगी की राहें अक्सर हमे...
( युवी रोता हुआ!) "आप सब मुझसे झूठ बोलते हैं, मेरी मम्मा मेरे पास ही थी ,और आप...
मैं कोई लेखक नहीं , ना ही कोई खास तजुर्बा हैं जिंदगी का, बस कुछ सैलाब हैं मन के ...
"सुरेश तुम तो एकदम बदल गए,"वह आराम से बैठ भी नही पाया था कि विभा ने बंदूक की गोली की तरह प्रश्न दाग दिया था। "नही तो।बिल्कुल वैसा ही हूँ।देख लो।कहा से बदला हुआ नजर आ र...
कविता भारी कदमों से वो बस की और बढ़ी, उसे लगा शमित उसे शायद रोक लेगें.., इसलिये स्टेशन तक छोड़ने आये हों..,कुछ तो कहेगें .., बस में चढ़ते कविता ने पीछे मुड़ के देखा ..शमित नही...
"ऐसे नही,"सुशांत ने पत्नी को अपने से सटा या तो नताशा पति से अलग होते हुए बोली,"ऐसे नही।" "तो कैसे?" "पहले कंडोम।" "ओहो नताशा,"पत्नी की बा...
नारी के लिए विवाह बंधन है या जरूरत पढ़िए यह कहानी -------///----------//// "आखिर तेरी शादी हो ही गयी।तू एक मर्द की दासी बन ही गयी,"रूपा बोली,"तूने एक आदमी की गुलामी स...
आज पूनम और प्रकाश का विवाह था। बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ, धूमधाम से यह विवाह हो रहा था। पूनम बहुत ख़ुश थी, क्योंकि एक ही शहर में ससुराल और मायका दोनों थे। विदाई के समय जब उस...
शाम के धुले प्रकाश में एक खूबसूरत औरत बनारस सागर के तट पर किसी का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही थी , मगर जब दिये हुए समय को इंतजार की घड़ियां पार करने लगी तो उसका उत्सुक पल मायूसी...
सूरज कब का दूर क्षितिज में ढल चुका था।शाम अपनी अंतिम अवस्था मे थी।आसमान से उतर रही अंधेरे की परतों ने धरती को अपने आगोश में समेटना शुरू कर दिया था।प्लेटफॉर्म नम्बर पांच के अंतिम छो...
जीवन में एक समय ऐसा भी आया जब मैं रोना चाहता था । पर वो कहते हैं ना, लड़के नहीं रोते बे......... हाँ, सच में लड़के नहीं रोते, चाहे जेब एक भी पैसा नहीं हो बाजार से कई चीजें खरीदने...
"यह कौन है?"राजन के साथ आयी युवती को देखकर कल्पना बोली थी। "यह सुनीता है,"राजन अपने साथ आयी युवती का परिचय कल्पना से कराते हुए बोला,"और सुनीता मेरी पत्नी है &#...
सूरज ढल रहा था।ढलते सूरज की तिरक्षी किरणें नदी के बहते पानी मे पड़ रही थी।अनुपम नदी के किनारे एक पत्थर पर बैठा बहते हुए पानी को देख रहा था।जब भी उसका मन करता वह यहां आकर बैठ जाता था...
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