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अपना-घरजिंदगी की कहानी बस इतनी सी है, जो चीज हमारे पास नहीं होती, उसे पाने के लि...
️ लेखिका: Zeenat Taufeeqसुबह के आठ बजे थे। सूरज की हल्की सुनहरी किरणें शहर की ऊँ...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 27 : सत्यलेखक का पहला सत्यलाल किताब के भीतर से निकली...
उधर...जंगल से सैकड़ों किलोमीटर दूर...रात के लगभग दो बजे थे। घर में सन्नाटा पसरा...
बर्बाद इश्कएपिसोड 14 — जब माज़ी लौटामुंबई में कुछ रातें ऐसी होती हैं जब पुराने ज...
मैं बिना एक पल गँवाए बोला, "सर, मैंने अब तक जितना खोया है, उसके बाद डरना लगभग छो...
इस खबर ने कमरे में मौजूद हर शख्स को पत्थर बना दिया। पंडित शास्त्री केवल एक पुजार...
गहरे राज ---- बड़े दुखदायी होते है, भुगतने पड़ते है। क्यूंकि राज तभी बनते है ज़ब हम...
खोटा सिक्काशिबू धीरे-धीरे अपने आसन से उठा। उसने एक बार चारों ओर बैठे लोगों पर दृ...
इधर श्रेया की आँखों से नींद रूठ चुकी थी। करवट बदलते-बदलते उसका मन बार-बार करण की...
जनवरी के महीने की रात।मौसम बेहद ठंडा था।य कोहरे की वजह से बिजली के लट्ठों पर लगे बल्बों का प्रकाश टिमटिमाता नजर आ रहा था। प्लेटफॉर्म पर कोई आता जाता नजर नही आ रहा था।मुसाफिर लोग ठ...
सर्दियी की रात।रात के बारह बज चुके थे।वर्षा के सास ससुर और ननद कब के अपने अपने कमरों में जाकर सो चुके थे।वर्षा भी रोज सो जाती थी।लेकिन आज उसकी आँखों मे नींद नही थी। वर्षा ने शेखर...
1--प्यार"आप अंदर जा सकते है।"नर्स के कहने पर रमेश अंदर चला गया।इला पलँग पर लेटी थी।उसकी बगल में उसका नवजात शिशु सो रहा था।रमेश बच्चे की तरफ देखते हुए बोला,"इसकी आंखे तु...
‘‘वाह! बहनजी, बहुत ही खूबसूरत कढ़ाई की है इन चुन्नियों पर। अब ये सारी चुन्नियाँ सीधी फिल्मों के सेट पर जाएँगी। इन चुन्नियों को फिल्मों की हिरोइनें अपनी फिल्मों में ओढ़ेंगी।’’...
जुड़ी रहूँ जड़ों से शहर की सबसे आलीशान कोठी में एक तरफ बैडमिंटन कोर्ट है जहाँ अभी भी कुछ लोग काम करे रहे है। इसी के दूसरे छोर पर दो आउट हाऊस भी बने हुए है। दोनों आउट हाऊस हरियाली...
दास्ताँ ए दर्द ! 1 रिश्तों के बंधन, कुछ चाहे, कुछ अनचाहे ! कुछ गठरी में बंधे स्मृतियों के बोझ से तो कुछ खुलकर बिखर जाने से महकी सुगंध से ! क्या नाम दिया जा सकता है रिश्तों को ?...
नमश्ते दोस्तो तो मे लेकर आया हू एक नय पेश कश और उमीद है सब अच्छे ही होंगे तो चलो शुरुआत करते है /वाघेला परिवार मे आपका स्वागत है/ अरे वाघेला साहेब आप एक बार ब...
ठक ठक ठक...ठक ठक ठक... दरवाज़े पर ज़ोर से आहट होती है,विहान!विहान...स्कूल बस आती ही होगी 7 बज चुके हैं क्या कर रहे हो,आज फिर देर करोगे क्या?विहान की माँ( प्रज्ञा) उसे आवाज़ लगातीहै।वि...
वह युवा सोशल मीडिया पर एक जाना पहचाना नाम बन गया था। लोगों तक पहुँचकर जन समस्याओं की पड़ताल करना और सरकार के बारे में उनकी राय सोशल मीडिया पर ज्यों की त्यों दिखाना उसका कार्य था। आ...
भाग- 1 विद्या सदन आज फूलों व सजा था और रंग-बिरंगी रोशनी से जगमगा रहा था।। द्वार पर सजा वंदनवार व घर के अंदर बाहर लगा सुंदर सा शामियाना विद्या सदन में हर आने वाले मेहमान का स्वागत क...
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