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"स्त्री का प्रेम और गुरु-भक्ति की मूर्खता"वेदांत 2.0 के लिए एक नया दृष्टिकोणप्...
मेरी अलग दुनियाएक प्रेरणादायक हिन्दी कहानीलेखक: विजय शर्मा Erry"तुम्हारी दुनिया...
डॉक्टर भारी कदमों से अपने केबिन में आकर कुर्सी पर बैठ गई।आँखों में अब भी रेशमा क...
“मैंने कुछ नहीं किया… मुझे मत मारो… बहुत दर्द हो रहा है।मैंने कोई गलती नहीं की।...
------------------------------ अध्याय 5: क्रोध और अहंकार (भीतर का ज्वालामुखी: आत...
“जे का रंजले गांजले। त्यासी म्हणे जो आपुले।तोचि साधु ओळखावा। देव तेथेचि जाणावा।।...
वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप): बदलते सामाजिक परिवेश और कानूनी पेचीदगियों का एक व...
अंकिता डर तो गई थी, लेकिन उसने खुद को संभालते हुए सर से बात की। उधर, Ranvijay का...
dhvani's sucide attempt anइसी के साथ वो उसे उठा कर हॉस्पिटल ले जाता है।ये है...
Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे।अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी...
माने हुए व्यापारी किशनचंद भगनानी के बेटे मानस भगनानी की इंगेजमेंट श्वेता रामचंद्रन के साथ होती है। इस इंगेजमेंट की सुर्खियां सही तरह से मीडिया में फैलती उससे पहले ही मानस के स्टड फ...
तस्वीर में अवांछित (कहानी - पंकज सुबीर) (1) ‘‘रंजन जी, आ रहे हैं ना आप ?’’ उधर से फ़ोन पर आयोजक ने शहद घुली आवाज़ में पूछा। ‘‘नहीं भाई साहब मैं पहले ही कह चुका हूँ रविवार को मैं कार...
मेरी शादी हुए पाँच साल हो गए हैं लेकिन मैं आजतक न तो अपने पति को और न ससुराल वालों को समझ पाई हूँ | सब कहते हैं कि दुनिया बदल रही है साथ ही हमारे देश की सोच भी बदल रही है | मगर मुझ...
चंपा पहाड़न (1) आसमान की साफ़-शफ्फाक सड़क पर उन रूई के गोलों में जैसे एक सुन्दर सा द्वार खुल गया | शायद स्वर्ग का द्वार ! और उसमें से एक सुन्दर, युवा चेहरा झाँकने लगा, उसने देखा चेहरे...
क्वारंटाइन...लॉक डाउन...कोविड 19... कोरोना के नाम रहेगी यह सदी। हम सब इस समय एक चक्र के भीतर हैं और बाहर है एक महामारी। अचानक आई इस विपदा ने हम सबको हतप्रभ कर दिया हैं | ऐसा समय इस...
सुनो पुनिया (1) घाम की चादर आंगन के पूर्वी कोने में सिकुड़ गई थी. पुनिया ने मुंडेर की ओर देखा और अनुमान लगाया सांझ होने में अधिक देर नहीं है. ठंड का असर काफी देर पहले से ही बढ़ने लगा...
कहानी किससे ये कहें! नीला प्रसाद (1) 31 अगस्त 1991. सुबह-सुबह आसमान में छाए घने काले बादल इंगित कर रहे हैं कि किसी भी क्षण वर्षा शुरू हो जा सकती है। लगभग साढ़े तीन दशक लंबी नौकरी क...
घेराव (कहानी पंकज सुबीर) (1) घटना को देखा जाए तो एसी कोई बहुत बड़ी घटना भी नहीं है कि उस पर इतना हंगामा हो। लेकिन अगर शहर का इतिहास देखें तो यही छोटी सी घटना बारूद के घर में जलती ह...
फ्लाई किल्लर एस. आर. हरनोट (1) उस चिनार के पेड़ पर सारे मौसम रहते थे। उसके नीचे लगी लोहे की बैंच अंग्रेजों के ज़माने की थी जिस पर वह बैठा रहता था। वह कई बार अपनी उंगलियों के पोरों पर...
क्या तुम वापस आ गयी ? मुख्य पात्र डॉ साहिल आलिया डॉ विवेक कहानी का आधार -ये कहानी एक डॉक्टर की हैं जिसका दो साल पहले तलाक हो चूका...
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