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  • वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप)

    वैवाहिक बलात्कार (मैरिटल रेप): बदलते सामाजिक परिवेश और कानूनी पेचीदगियों का एक व...

  • Mafia King - 2

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    Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे।अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी...

हूफ प्रिंट By Ashish Kumar Trivedi

माने हुए व्यापारी किशनचंद भगनानी के बेटे मानस भगनानी की इंगेजमेंट श्वेता रामचंद्रन के साथ होती है। इस इंगेजमेंट की सुर्खियां सही तरह से मीडिया में फैलती उससे पहले ही मानस के स्टड फ...

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तस्वीर में अवांछित By PANKAJ SUBEER

तस्वीर में अवांछित (कहानी - पंकज सुबीर) (1) ‘‘रंजन जी, आ रहे हैं ना आप ?’’ उधर से फ़ोन पर आयोजक ने शहद घुली आवाज़ में पूछा। ‘‘नहीं भाई साहब मैं पहले ही कह चुका हूँ रविवार को मैं कार...

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बेटी By Anil Sainger

मेरी शादी हुए पाँच साल हो गए हैं लेकिन मैं आजतक न तो अपने पति को और न ससुराल वालों को समझ पाई हूँ | सब कहते हैं कि दुनिया बदल रही है साथ ही हमारे देश की सोच भी बदल रही है | मगर मुझ...

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चंपा पहाड़न By DrPranava Bharti

चंपा पहाड़न (1) आसमान की साफ़-शफ्फाक सड़क पर उन रूई के गोलों में जैसे एक सुन्दर सा द्वार खुल गया | शायद स्वर्ग का द्वार ! और उसमें से एक सुन्दर, युवा चेहरा झाँकने लगा, उसने देखा चेहरे...

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मूड्स ऑफ़ लॉकडाउन By Neelima Sharma

क्वारंटाइन...लॉक डाउन...कोविड 19... कोरोना के नाम रहेगी यह सदी। हम सब इस समय एक चक्र के भीतर हैं और बाहर है एक महामारी। अचानक आई इस विपदा ने हम सबको हतप्रभ कर दिया हैं | ऐसा समय इस...

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सुनो पुनिया By Roop Singh Chandel

सुनो पुनिया (1) घाम की चादर आंगन के पूर्वी कोने में सिकुड़ गई थी. पुनिया ने मुंडेर की ओर देखा और अनुमान लगाया सांझ होने में अधिक देर नहीं है. ठंड का असर काफी देर पहले से ही बढ़ने लगा...

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कहानी किससे ये कहें! By Neela Prasad

कहानी किससे ये कहें! नीला प्रसाद (1) 31 अगस्त 1991. सुबह-सुबह आसमान में छाए घने काले बादल इंगित कर रहे हैं कि किसी भी क्षण वर्षा शुरू हो जा सकती है। लगभग साढ़े तीन दशक लंबी नौकरी क...

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घेराव By PANKAJ SUBEER

घेराव (कहानी पंकज सुबीर) (1) घटना को देखा जाए तो एसी कोई बहुत बड़ी घटना भी नहीं है कि उस पर इतना हंगामा हो। लेकिन अगर शहर का इतिहास देखें तो यही छोटी सी घटना बारूद के घर में जलती ह...

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फ्लाई किल्लर By SR Harnot

फ्लाई किल्लर एस. आर. हरनोट (1) उस चिनार के पेड़ पर सारे मौसम रहते थे। उसके नीचे लगी लोहे की बैंच अंग्रेजों के ज़माने की थी जिस पर वह बैठा रहता था। वह कई बार अपनी उंगलियों के पोरों पर...

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क्या तुम वापस आ गयी ? By zeba Praveen

क्या तुम वापस आ गयी ? मुख्य पात्र डॉ साहिल आलिया डॉ विवेक कहानी का आधार -ये कहानी एक डॉक्टर की हैं जिसका दो साल पहले तलाक हो चूका...

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