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श्री भगवान से बात कर रही थी... वहां हरि ने सारी बात सीता जी को बताई ....हरि— माँ...
ज्यों ज्यों समय बीत रहा था… सब कुछ ठीक था। मैं अपने बीते दिनों को भी भूल चुकी थी...
Sirf TumharaPart 11लीगल नोटिस का असर पूरे घर में फैल गया था। रुद्र के पिता का चे...
नारी चेतना: झूठे सम्मान के भ्रम से वास्तविक स्वतंत्रता की क्रांति..सदियों से मान...
कमरे में हल्की सी खामोशी थी…खिड़की से आती हवा परदे हिला रही थी…दोनों बेड पर बैठे...
️ भरोसा मत तोड़िए ️किसी के हिस्से की इंसानियत बचा लीजिएएक भावुक कहानी — ---️ भाग...
प्रियांशी मधु नगर में अपनी दादी कमला के साथ रहती थी। उसके परिवार में कमला के अला...
बांसुरी की वह धुनभाग — प्रथमभारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे।देश स्वतंत्...
जन्म से कॉलेज तक मेरा नाम अंकित है। मैं उत्तराखंड के चमोली जिले के एक छोटे से गा...
एक भाई का प्यार... एक लड़की का समर्पण... और एक ऐसा राज़, जो तीन जिंदगियों को बदल...
उदासियों का वसंत हृषीकेश सुलभ (1) वे चले जा रहे थे। श्लथ पाँव। छोटी-सी मूठवाली काले रंग की छड़ी के सहारे। यह छड़ी कुछ ही दिनों पहले, ......कल ही, उनकी ज़िन्दगी में जबरन शामिल हुई थी,...
माने हुए व्यापारी किशनचंद भगनानी के बेटे मानस भगनानी की इंगेजमेंट श्वेता रामचंद्रन के साथ होती है। इस इंगेजमेंट की सुर्खियां सही तरह से मीडिया में फैलती उससे पहले ही मानस के स्टड फ...
तस्वीर में अवांछित (कहानी - पंकज सुबीर) (1) ‘‘रंजन जी, आ रहे हैं ना आप ?’’ उधर से फ़ोन पर आयोजक ने शहद घुली आवाज़ में पूछा। ‘‘नहीं भाई साहब मैं पहले ही कह चुका हूँ रविवार को मैं कार...
मेरी शादी हुए पाँच साल हो गए हैं लेकिन मैं आजतक न तो अपने पति को और न ससुराल वालों को समझ पाई हूँ | सब कहते हैं कि दुनिया बदल रही है साथ ही हमारे देश की सोच भी बदल रही है | मगर मुझ...
चंपा पहाड़न (1) आसमान की साफ़-शफ्फाक सड़क पर उन रूई के गोलों में जैसे एक सुन्दर सा द्वार खुल गया | शायद स्वर्ग का द्वार ! और उसमें से एक सुन्दर, युवा चेहरा झाँकने लगा, उसने देखा चेहरे...
क्वारंटाइन...लॉक डाउन...कोविड 19... कोरोना के नाम रहेगी यह सदी। हम सब इस समय एक चक्र के भीतर हैं और बाहर है एक महामारी। अचानक आई इस विपदा ने हम सबको हतप्रभ कर दिया हैं | ऐसा समय इस...
सुनो पुनिया (1) घाम की चादर आंगन के पूर्वी कोने में सिकुड़ गई थी. पुनिया ने मुंडेर की ओर देखा और अनुमान लगाया सांझ होने में अधिक देर नहीं है. ठंड का असर काफी देर पहले से ही बढ़ने लगा...
कहानी किससे ये कहें! नीला प्रसाद (1) 31 अगस्त 1991. सुबह-सुबह आसमान में छाए घने काले बादल इंगित कर रहे हैं कि किसी भी क्षण वर्षा शुरू हो जा सकती है। लगभग साढ़े तीन दशक लंबी नौकरी क...
घेराव (कहानी पंकज सुबीर) (1) घटना को देखा जाए तो एसी कोई बहुत बड़ी घटना भी नहीं है कि उस पर इतना हंगामा हो। लेकिन अगर शहर का इतिहास देखें तो यही छोटी सी घटना बारूद के घर में जलती ह...
फ्लाई किल्लर एस. आर. हरनोट (1) उस चिनार के पेड़ पर सारे मौसम रहते थे। उसके नीचे लगी लोहे की बैंच अंग्रेजों के ज़माने की थी जिस पर वह बैठा रहता था। वह कई बार अपनी उंगलियों के पोरों पर...
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