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  • तेरा लाल इश्क - 25

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    भाग 1: गाँव की दास्तानमालपुरा गाँव के किनारे पर एक पुरानी हवेली खड़ी थी। उसकी दी...

  • A Loyal Soul of the Streets

           मेरी वफादारी आप ने कभी देखी हैं??में डॉगईस्ट भाई आपका , में भी आपकी तरह ए...

पागल-ए-इश्क़ By Deepak Bundela Arymoulik

दोस्तों.. नमस्कार.. ?आपके सामने एक फिर प्यार की कहानी के साथ मौजूद हूं... मेरा हमेशा से मकसद यहीं रहा हैं कि प्यार को समझें एक दूसरे की भावनाओं को समझें आप कितने खुश नसीब हैं कि आप...

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ममता की छाँव By Sarita Sharma

हर रविवार छुट्टी के दिन मौली अपने पड़ोस में रहने वाले बच्चों के साथ जानवरों को जंगल छोड़ने जाते और दिन तक घर आ जाते थे..आज भी जब पड़ोस में रहने वाली खुशी जो मौली की उम्र की है आवाज दी...

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बाली का बेटा By राज बोहरे

1 बाल उपन्यास बाली का बेटा...

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धरना By Deepak Bundela Arymoulik

शाम हों चली थी, सूरज वसुंधरा को कल आने का वादा करके जा चूका था.. शहर की सड़कों पर दिन की अपेक्षा शाम कुछ ज्यादा ही रंगीन दिखाई देने लगी थी... कहते हैं किसी के जीवन में जिंदगी भी दिन...

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मर्डर मिस्ट्री By Vismay

" लगातार बज रहीं टेलीफोन की घंटी की वजह से हवलदार मातरे की नींद खुल गई." उसने नींद में ही फोन उठा लिया और अपने कान पर रख दिया ,और उ...

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मंज़िलों का 'दलदल' By Deepak Bundela Arymoulik

इस क़ामयाबी के दलदल से कैसे निकलोगे जब मंज़िले -ए- ज़माना ही दलदल हो.... !****************************************गुंजन.... गुंजन.... अरे उठोगी या यू ही सारा दिन सोती रहोगी.... देखो ग...

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अब लौट चले By Deepak Bundela Arymoulik

अब लौट चले आज मुझें ऐसा लग रहा था कि मै सच में आज़ाद हूं, सारी दुनियां आज पहली बार मुझें नई लग रहीं थी, सब कुछ नया और सुकून से भरा गर्त के अँधेरे को चीर मेरे कदम नए उजाले की और अनया...

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दास्तान-ऐ अश्क By SABIRKHAN

आज से आपके लिए पेश कर रहा हूं एक ऐसी लडकी की कहानी जिसने अपनी जिंदगी में कभी हार नहीं मानी मुश्किले चट्टानों की तरह उसकी जिंदगी में थी , मगर वो अपनी पूरी वफादारी और मजबूत ह्रदय के...

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अलिफ़ लैला By MB (Official)

फारस देश भी हिंदुस्तान और चीन के समान था और कई नरेश उसके अधीन थे। वहाँ का राजा महाप्रतापी और बड़ा तेजस्वी था और न्यायप्रिय होने के कारण प्रजा को प्रिय था। उस बादशाह के दो बेटे थे ज...

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चंद्रकांता By Devaki Nandan Khatri

चंद्रकान्ता हिन्दी के शुरुआती उपन्यासों में है जिसके लेखक देवकीनन्दन खत्री हैं। इसकी रचना १९ वीं सदी के आखिरी में हुई थी। यह उपन्यास अत्यधिक लोकप्रिय हुआ था और कहा जाता है कि इसे प...

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