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सड़क के किनारे लगा इकलौता पीला बल्ब बारिश की तेज़ बौछारों के बीच किसी बीमार इंसान...
आधी रात, कमराShreya Karan से लगी हुई है, पर उसका पूरा शरीर बर्फ जैसा था—इतना ठंड...
क्या मैं मृत्युलो...
रावल खुमाण (820-860 ईसवी)खुमाण बाप्पा रावल के सीधे वंशज थे। यद्यपि उनके बीच चार...
तुम्हारे हिस्से का मौन मेरे हिस्से में आया.... और तेरा मन मेरे मन को भाया.....या...
---*मेरी डिग्री बेकार नहीं है *लेखिका: डॉ वंदना शर्मा*वो एक गुनगुनी धूप से सजी स...
अध्याय 3: नियति का ज्वारविराज अपने अंतर्मन की गहराइयों में उतरने ही वाला था, अपन...
उसका शिकारलेखन: कुमार (भयकथासूर)हर्षदा और रवि की शादी को मुश्किल से तीन महीने हु...
राघव बोलता है, चलो एक बार जाकर देख लिया जाए क्या है, उस हवेली में? सौरव कहता है,...
बाप्पा रावल (728-758 ईसवी)पिता नागादित्य एवं माता कमलावती के पुत्र बाप्पा, गुहिल...
कुछ लोग हमारे जीवन में कभी नहीं आते।वे हमारे घरों की चौखट नहीं लाँघते, हमारी उँगलियों को नहीं छूते, हमारे साथ तस्वीरों में नहीं दिखते।फिर भी, एक दिन जब हम अपनी स्मृतियों की अलमारी...
(साउंड इफेक्ट: एक पुरानी घड़ी की 'टिक-टिक' की आवाज जो धीरे-धीरे दिल की धड़कन जैसी तेज होती है। बाहर मूसलाधार बारिश और बादलों के गरजने की गूँज।) नैरेटर: समय का पहिया अक्सर...
वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जमाए हुए है। बिज़नेस वर्ल्ड में एक नाम गूंजता है .. वेदांश राठौर। इनकी दूसरी ओर सबसे खतरनाक पर्सनेल...
शिवपुर। एक ऐसा शहर… जहाँ रातें गोलियों की आवाज़ से शुरू होती थीं और लाशों पर खत्म। यहाँ लोग नाम से नहीं, गिरोह से पहचाने जाते थे। कानून सिर्फ दीवारों पर टंगे पोस्टरों में जिंदा...
शहर की साफ और चौडी सडक पर कबीर मेहरा की नई' मेबैक' किसी काले चीते की तरह हवा से बातें कर रही थी. कबीर मेहरा—शहर का वो नाम जिससे बिजनेस के गलियारों में सन्नाटा पसर जाता था....
नकारात्मक विचार (Negative Thoughts) वे विचार होते हैं जो हमारे मन में चिंता, डर, निराशा, आत्म-संदेह, गुस्सा या हीन भावना पैदा करते हैं। ये विचार अक्सर किसी स्थिति, व्यक्ति या खुद क...
कभी कभी ज़िंदगी हमें ऐसी चीज़ें दे देती है, जो हमने कभी माँगी भी नहीं होती… पर वही चीज़ें हमारी सोच और दिल दोनों बदल देती हैं। मैं राधा रानी, एक सीधी-सादी लड़की। मेरी ज़िंदगी बि...
कृषांत ठाकुर (Hero) — 25 वर्ष का, सख्त मिज़ाज, कम बोलने वाला, लेकिन अंदर से बहुत सी बातें छिपाए हुए। श्रव्या सिंह (Heroine) — 23 वर्ष की, नई-नई जॉइन करने वाली, मासूम, डरपोक और ब...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जम्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी.मुझे देखकर मेरे माता पीता खुश हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी. नर्स ने मुझे प...
लोग कहते हैं कि जीवन में पैसा ही सब कुछ होता है। यह बात मैं नहीं कहता—मेरे आसपास के सभी लोग कहते हैं। बचपन से ही मैं यह सुनता आया था कि अगर आपके पास पैसा हो, तो जीवन की हर चीज आसान...
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