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रात के ठीक बारह बजे पूरा शहर अचानक घने अंधेरे में डूब गया। मोबाइल की स्क्रीन पर...
मैं धीरे से उठा नदी में स्नान किया और वापस अपने घर की तरफ चल पड़ा,,,,।रास्ते में...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके...
एक जोड़ी चप्पल🩴 लेखिका प्राची गुर्जरलेखिका की ओर से...
भाग 2 – फिर वही मुस्कानशादी खत्म हो गई थी और हम वहाँ से निकल गए। उसके बाद हम अपन...
LIVING ROOM – DAY (गाना खत्म होने के बाद)Shreya ने आखिरी नोट गाया और हल्की हँसी...
ज़िंदगी सच में अजीब होती है।इतना कुछ हो जाता है कि एक दिन अचानक एहसास होता है—हम...
बरसात के बाद की सुबह थी। गाँव की पगडंडियाँ भीगी हुई थीं, खेतों से मिट्टी की खुशब...
चंडीगढ़ के एक बहुत बड़े और महंगे कैफ़े में हल्की-हल्की म्यूज़िक बज रही थी। **करण...
सावन नहीं आया जुलाई का उमस भरा मौसम। हवा तो बस नाम मात्र की चल रही थी। सड़ी हुई...
अपने महापुरुषों का स्मरण भारत में एक श्रेष्ठ परम्परा रही है। कथा-कहानियों से लगाकर पुस्तकों तक उनके कर्तृत्व और आदर्श जीवन का सजीव चित्रण किया गया है। यदा-कदा पर्वों के माध्यम से भ...
दिव्य जीवन की एक झलक हमारा सौभाग्य है कि हमारी वसुन्धरा कभी संतों से विरहित नहीं रही। संतों की चेष्टायें साधन काल में भी एवं सिद्धावस्था में भी विभिन्न प्रकार की होती हैं पर होती...
फिल्मी दुनिया की बेरुखी और हद दर्जे की खुदगर्जी को भी काफी गहराई से महसूस किया है मैने। चढ़ते सूरज को नमस्कार करना ही शहर की फितरत में हैं।गिरते हुए को धक्का मार कर जमीन पर लेटा द...
"क्या देख रही हो?" उन दिनों मैं साल 1966 की बात कर रहा हूँ।तब कालेज आज की तरह जगह जगह नही हुआ करते थे।मेरे पिता रेलवे में थे और उनके ट्रांसफर होते रहते थे।इसलिए मेरी शिक्ष...
छत्रपति शिवाजी महाराज अप्रतिम थे। उनका पराक्रम, कूटनीति, दूरदृष्टि, साहस व प्रजा के प्रति स्नेहभाव अद्वितीय है। सैन्य-प्रबंधन, रक्षा नीति, अर्थशास्त्र, विदेश नीति, वित्त, प्रबंधन —...
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत। अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।। — श्रीमद्भगवद्गीता संसार में दो प्रकार के पुरुष होते हैं। एक तो वह जो संसार के पीछे चलते हैं और...
मीठी की माँ को गुजरे कुछ ही वक्त हुआ था, और उसके रिश्तेदार उसके पापा की दूसरी शादी के लिए रिश्ते लाने लगे। पिताजी की सरकारी नोकरी होने के कारण किसी को भी ज्यादा वक्त नहीं लगता था...
एक बुक है जिसका में जिक्र कर रहा हूं। गृहस्थ संन्यासी जो बहुत पोपुलर है, जिसका आज सेमिनार आयोजित किया गया है और उसमें उसके लेखक खुद प्रस्तुत होने वाले हैं, जो स्टेज पर जा कर बुक के...
मेरा जन्म कृषक परिवार में हुआ था।पुश्तेनी पेशा खेती था।लेकिन बाद में सर्विस में भी आने लगे थे।मेरे बड़े ताऊजी रेलवे में ड्राइवर थे।उनसे छोटे खेती सम्हालते थे।उनसे छोटे हेड मास्टर...
में खुद से अलग हुआ जब मुझे घर से निकाला गया। तब मे कुछ नहीं करता था, मे बस घूमता रहता था, इसीलिए मुझे अपने घर से निकला दिया था। घरवालों ने कहा, "घर से निकाल जाओ।" तो म...
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