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गृहस्थ संन्यासी By PARIKH MAULIK

एक बुक है जिसका में जिक्र कर रहा हूं। गृहस्थ संन्यासी जो बहुत पोपुलर है, जिसका आज सेमिनार आयोजित किया गया है और उसमें उसके लेखक खुद प्रस्तुत होने वाले हैं, जो स्टेज पर जा कर बुक के...

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महापुरुष के जीवन की बात By Pandya Ravi

महापुरुष के जीवन की बात Ravi Pandya ભારત માતા કી જય . मैं अपने जीवन में उन लोगों के बारे में बात करना चाहता हूं, जिन्हें मैं आदर्श मानता हूं। वे लोग जिन्होंने...

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मेरी लेखन यात्रा By Kishanlal Sharma

मेरा जन्म कृषक परिवार में हुआ था।पुश्तेनी पेशा खेती था।लेकिन बाद में सर्विस में भी आने लगे थे।मेरे बड़े ताऊजी रेलवे में ड्राइवर थे।उनसे छोटे खेती सम्हालते थे।उनसे छोटे हेड मास्टर...

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घर से निकाल गया प्यार में गिर गया By Dear Zindagi 2

में खुद से अलग हुआ जब मुझे घर से निकाला गया। तब मे कुछ नहीं करता था, मे बस घूमता रहता था, इसीलिए मुझे अपने घर से निकला दिया था। घरवालों ने कहा, "घर से निकाल जाओ।" तो म...

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चार्ली चैप्लिन - मेरी आत्मकथा By Suraj Prakash

ऊना को चार्ली चैप्लिन होने का मतलब

फ्रैंक हैरीज़, चार्ली चैप्लिन के समकालीन लेखक और पत्रकार ने अपनी किताब चार्ली चैप्लिन को भेजते उस पर निम्नलिखित पंक्तियां लिखी थीं:

चार्ली...

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यादों के झरोखे से By S Sinha

यादों के झरोखे से ====== मेरे जीवनसाथी की डायरी के कुछ पन्ने - मैट्रिक , प्री यूनिवर्सिटी और इंजीनियरिंग में एडमिशन और चीनी आक्रमण ====...

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चार्ल्स डार्विन की आत्मकथा By Suraj Prakash

महान प्रकृतिविज्ञानी चार्ल्स रॉबर्ट डार्विन (12 फरवरी 1809- 19 अप्रैल 1882) को प्रजातियों के विकास की नयी अवधारणाओं के जनक के रूप में जाना जाता है। वे आधुनिक विज्ञान के भी जनक हैं।...

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पके फलों का बाग़ By Prabodh Kumar Govil

बाग़ के फल अब पकने लगे थे। लेकिन माली भी बूढ़ा होने लगा। माली तो अब भी मज़े में था, क्योंकि बूढ़ा होने की घटना कोई एक अकेले उसी के साथ नहीं घटी थी। जो उसके सामने पैदा हुए वो भी बूढ...

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मेरे घर आना ज़िंदगी By Santosh Srivastav

मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (1) ज़िंदगी यूँ हुई बसर तनहा काफिला साथ और सफर तनहा जो घर फूँके आपनो कबीर मेरे जीवन में रचे बसे थे। खाली वक्त कभी रहा नहीं। रहा भी तो कबी...

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तेरे शहर के मेरे लोग By Prabodh Kumar Govil

( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा के झौंकों की तरह सहला भी रहा था और कसक भी रहा था।ईम...

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गृहस्थ संन्यासी By PARIKH MAULIK

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महापुरुष के जीवन की बात By Pandya Ravi

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मेरी लेखन यात्रा By Kishanlal Sharma

मेरा जन्म कृषक परिवार में हुआ था।पुश्तेनी पेशा खेती था।लेकिन बाद में सर्विस में भी आने लगे थे।मेरे बड़े ताऊजी रेलवे में ड्राइवर थे।उनसे छोटे खेती सम्हालते थे।उनसे छोटे हेड मास्टर...

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घर से निकाल गया प्यार में गिर गया By Dear Zindagi 2

में खुद से अलग हुआ जब मुझे घर से निकाला गया। तब मे कुछ नहीं करता था, मे बस घूमता रहता था, इसीलिए मुझे अपने घर से निकला दिया था। घरवालों ने कहा, "घर से निकाल जाओ।" तो म...

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चार्ली चैप्लिन - मेरी आत्मकथा By Suraj Prakash

ऊना को चार्ली चैप्लिन होने का मतलब

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तेरे शहर के मेरे लोग By Prabodh Kumar Govil

( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा के झौंकों की तरह सहला भी रहा था और कसक भी रहा था।ईम...

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