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भादो मांझी — वंश और विरासतभादो मांझी कई दिनों से मुँह फुलाए बैठा था।घर में उसकी...
शहर के किनारे एक पुराना, वीरान इलाका था, जहाँ सूरज ढलते ही सन्नाटा अपनी चादर बिछ...
अधूरी किताब – सीजन 2एपिसोड 63 : वह बच्चा कौन था?अंतिम पुस्तकालय में गूँजी वह आवा...
अमेरिका में मृत्युदंड की एक...
फरारी के टायरों की चीखती हुई आवाज़ के साथ गाड़ी गोरेगांव के उस मशहूर स्टूडियो के...
ठाकुर साहब और माँ डॉक्टर के पास जा चुके थे। मैं भी कुछ ज़रूरी फाइलें उठाकर ड्राइ...
मैंने काँपते हाथों से सिंदूर का डिब्बा बंद किया। कबीर की आँखों में सवाल था - क्य...
100 साल पुराना वह अभिमंत्रित ताला एक भयंकर धमाके के साथ टूट चुका था।चारों ओर काल...
पाशुपतोपनिषद--यह उपनिषद अथर्ववेद से सम्बद्ध माना जाता है।यह मुख्यतः भगवान शिव के...
अध्याय 6जादुई, फूलों से लदे पेड़ से एकाएक सारे फूल झड़कर हवा में उड़ने लगे। दिन...
ऊना को चार्ली चैप्लिन होने का मतलब फ्रैंक हैरीज़, चार्ली चैप्लिन के समकालीन लेखक और पत्रकार ने अपनी किताब चार्ली चैप्लिन को भेजते उस पर निम्नलिखित पंक्तियां लिखी थीं: चार्ली...
यादों के झरोखे से ====== मेरे जीवनसाथी की डायरी के कुछ पन्ने - मैट्रिक , प्री यूनिवर्सिटी और इंजीनियरिंग में एडमिशन और चीनी आक्रमण ====...
महान प्रकृतिविज्ञानी चार्ल्स रॉबर्ट डार्विन (12 फरवरी 1809- 19 अप्रैल 1882) को प्रजातियों के विकास की नयी अवधारणाओं के जनक के रूप में जाना जाता है। वे आधुनिक विज्ञान के भी जनक हैं।...
बाग़ के फल अब पकने लगे थे। लेकिन माली भी बूढ़ा होने लगा। माली तो अब भी मज़े में था, क्योंकि बूढ़ा होने की घटना कोई एक अकेले उसी के साथ नहीं घटी थी। जो उसके सामने पैदा हुए वो भी बूढ...
मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (1) ज़िंदगी यूँ हुई बसर तनहा काफिला साथ और सफर तनहा जो घर फूँके आपनो कबीर मेरे जीवन में रचे बसे थे। खाली वक्त कभी रहा नहीं। रहा भी तो कबी...
( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा के झौंकों की तरह सहला भी रहा था और कसक भी रहा था।ईम...
13 जनवरी रुद्रपुर के एक हॉस्पिटल में मेने इस दुनिया को पहली बार देखा।बहुत यादगार था वो पल लेकिन बहुत दुखदायी भी।मेरी हालत बहुत दयनीय थी।डाक्टर्स ने मुझे एमरजेंसी वार्ड में सिफत किय...
एक ही व्यक्ति के दो किरदारों को मानना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है, यूं कहूँ तो उसके दो किरदार मै मानता ही नही । पहले किरदार मे वह लोगों मे फुट डालने की बात करता है, लोगों मे नफरत फैला...
पहला कदम बचपन की पहली याद के बारे में सोचती हूँ तो मुँह पर ठांय-से पड़े एक ज़ोरदार थप्पड़ की याद आ जाती है। इस थप्पड़ से पहले की कुछ यादें अवश्य हैं, पर वे सभी यादें धुँधली-सी हैं।...
बॉलीवुड लीजेंडस Part 1 . दादा साहब फाल्के जन्म 30 अप्रैल - 1870 , त्रयम्केश्वर ( नासिक ) , बॉम्बे ब्रिटिश इंडिया मृत्यु -16 फ़रवरी 1944 , नासिक जन्म का...
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