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एपिसोड 5 (दरिंदों की जंग)चट्टान की सीढ़ियों पर चढ़ते हुए उस ब्लैक जगुआर के पंजों क...
असली शिक्षक अंजली स्वभाव से थोडी चंचल थी मगर पढने में बेहद होशियार, कंम्प्युटर उ...
2020 से 2022 तक के उन दो सालों के इंतज़ार की घड़ियाँ, जब अंततः 2022 में उस '...
कृष्णा जैसे ही घर के अंदर पहुँचा…दरवाज़ा अपने आप पीछे से हल्के से बंद हो गया। घर...
वाजिद हुसैन सिद्दीक़ी की कहानीचौड़ी सड़क पर शाम उतर रही थी। दिन भर की तप...
अध्याय 19: अंतिम पंक्ति का भ्रम पन्ना पलटा जा रहा था। लेकिन इस बार आर्या को महसू...
धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभा (आगे)चित्रगुप्त की वाणी समाप...
घर का ड्रॉइंग रूम। परदे बंद। धूप का एक किरण भी अंदर नहीं। हवा भारी है। सन्नाटा ग...
वैसे,हम दोनों भाई बहन, मॉम डैड बस इतने ही। मगर हमारे पूरे फैमिल की बात करे तो बह...
उधर दिल्ली से अग्निश चट्टोपाध्याय और मंत्री दिग्विजय सिंह भी विशेष विमान से सीधे...
ऊना को चार्ली चैप्लिन होने का मतलब फ्रैंक हैरीज़, चार्ली चैप्लिन के समकालीन लेखक और पत्रकार ने अपनी किताब चार्ली चैप्लिन को भेजते उस पर निम्नलिखित पंक्तियां लिखी थीं: चार्ली...
यादों के झरोखे से ====== मेरे जीवनसाथी की डायरी के कुछ पन्ने - मैट्रिक , प्री यूनिवर्सिटी और इंजीनियरिंग में एडमिशन और चीनी आक्रमण ====...
महान प्रकृतिविज्ञानी चार्ल्स रॉबर्ट डार्विन (12 फरवरी 1809- 19 अप्रैल 1882) को प्रजातियों के विकास की नयी अवधारणाओं के जनक के रूप में जाना जाता है। वे आधुनिक विज्ञान के भी जनक हैं।...
बाग़ के फल अब पकने लगे थे। लेकिन माली भी बूढ़ा होने लगा। माली तो अब भी मज़े में था, क्योंकि बूढ़ा होने की घटना कोई एक अकेले उसी के साथ नहीं घटी थी। जो उसके सामने पैदा हुए वो भी बूढ...
मेरे घर आना ज़िंदगी आत्मकथा संतोष श्रीवास्तव (1) ज़िंदगी यूँ हुई बसर तनहा काफिला साथ और सफर तनहा जो घर फूँके आपनो कबीर मेरे जीवन में रचे बसे थे। खाली वक्त कभी रहा नहीं। रहा भी तो कबी...
( एक )जबलपुर आते समय मन में ठंडक और बेचैनियों का एक मिला- जुला झुरमुट सा उमड़ रहा था जो मुंबई से ट्रेन में बैठते ही मंद- मंद हवा के झौंकों की तरह सहला भी रहा था और कसक भी रहा था।ईम...
13 जनवरी रुद्रपुर के एक हॉस्पिटल में मेने इस दुनिया को पहली बार देखा।बहुत यादगार था वो पल लेकिन बहुत दुखदायी भी।मेरी हालत बहुत दयनीय थी।डाक्टर्स ने मुझे एमरजेंसी वार्ड में सिफत किय...
एक ही व्यक्ति के दो किरदारों को मानना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है, यूं कहूँ तो उसके दो किरदार मै मानता ही नही । पहले किरदार मे वह लोगों मे फुट डालने की बात करता है, लोगों मे नफरत फैला...
पहला कदम बचपन की पहली याद के बारे में सोचती हूँ तो मुँह पर ठांय-से पड़े एक ज़ोरदार थप्पड़ की याद आ जाती है। इस थप्पड़ से पहले की कुछ यादें अवश्य हैं, पर वे सभी यादें धुँधली-सी हैं।...
बॉलीवुड लीजेंडस Part 1 . दादा साहब फाल्के जन्म 30 अप्रैल - 1870 , त्रयम्केश्वर ( नासिक ) , बॉम्बे ब्रिटिश इंडिया मृत्यु -16 फ़रवरी 1944 , नासिक जन्म का...
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