कविता कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Poems in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultures. Th...Read More


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अल्हड़ By Mukteshwar Prasad Singh

तेज छिटकती बिजलीबादलों की गडगडाहटहवा के झूले पर डोलतीवारिस की बूंदें आ बैठती हैचेहरे पर।जलकणों से भीगता रोम रोम और सांसेंउतावली।बार बार तेज चमक से चौंकचुंधियाती आंखें मूंद जाती हैं...

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शायराना कलाम By Dr Gayathri Rao

शायराना कलम - कुछ भावनाये,कुछ एहसास,...मेरी शायरी के कुछ नगीने जो आप सबको पेश करती हु.

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ज्यादा बदलाव चाहोगे तो पीट दिये जाओगे (जुलाई २०१९) By महेश रौतेला

जुलाई २०१९१.ज्यादा बदलाव चाहोगे तोपीट दिये जाओगे,अधिक परिवर्तन चाहोगे तोमार दिये जाओगे,बहुत सुधार चाहोगे तोजेल भेज दिये जाओगे!मांगने पर कौरवों नेपाँच गांव भी नहीं दिये थे,और तुम जन...

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थोड़े से तो थोड़े से, हम बदले तो है..! By Akshay Mulchandani

शायद, हम थोड़े से, अब बड़े हो गए है..। उसके ऑनलाइन आने की राह, हम आज भी देखते है, जैसे कुछ साल पहले देखा करते थे..! पर थोड़ा सा तो थोड़ा सा, हम बदले तो है ।---------------------------...

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व्यवधान By Ajay Amitabh Suman

एक फूल का मिट जाना हीं उपवन का अवसान नहीं,एक रोध का टिक जाना हीं विच्छेदित अवधान नहीं । जिन्हें चाह है इस जीवन में स्वर्णिम भोर उजाले की,उन राहों पे स्वागत करते घटाटोप अन्धियारे भी...

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तेरा घमंड By Manjeet Singh Gauhar

मत कर इतना घमंड , ऐ तू ना-समझ इंसानतेरा घमंड ही एक दिन तुझे हरायेगा ।मेरा बारे में तू सोचना छोड़ देमैं क्या हूँ , ये तुझे वक़्त बतायेगा ।।. .तू कितना भी कमाले , धन-दौलत ये सब...

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मैं तो बस इतना चाहूँ By Ajay Amitabh Suman

(१) मैं तो बस इतना चाहूँ हाँ मैं बस कहना चाहूँ,हाँ मैं बस लिखना चाहूँ,जो नभ में थल में तारों में,जो सूरज चाँद सितारों में। सागर के अतुलित धारों में,और सौर मंडल हजारों में,जो...

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गजल - वतन पर मिटने का अरमान By DrAnamika

" गरीब हूँ साहब" **************************"भीगे हुए अरमान आज रोने को है|मत रोको गरीबी को, पेट के बल भूखा मानव अब सोने को है"||"वक्त गुजर गए इंसान फरिश्ता...

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राख़ By Ajay Amitabh Suman

(१) ये कविता मैंने आदमी की फितरत के बारे में लिखा है . आदमी की फितरत ऐसी है कि इसकी वासना मृत्यु पर्यन्त भी बरकरार रहती है. ये मृत्यु के बाद भी ईक्छा करता है कि मारने के बाद उसकी...

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नर या मादा By Ajay Amitabh Suman

(१) माना कि समय के साथ बदलना वक्त की मांग है . पर आधुनिकीकरण और फैशन के नाम पे किसी तरह का पोशाक धारण करना , किसी तरह के हाव भाव रखना , किसी तरह की भाव भंगिमा बनाना , आजकल के य...

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कैसे कहूँ है बेहतर, हिन्दुस्तां हमारा? By Ajay Amitabh Suman

(१) कैसे कहूँ है बेहतर ,हिन्दुस्तां हमारा? कह रहे हो तुम ये , मैं भी करूँ ईशारा,सारे जहां से अच्छा , हिन्दुस्तां हमारा। ये ठीक भी बहुत है, एथलिट सारे जागे ,क्रिकेट में जीतत...

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स्मृति शेष By Namita Gupta

पिता की अचानक हुई मृत्यु से मैं बहुत व्यथित हो गई । इस झटके को मैं काफी समय तक भूल नहीं पाई । यह सदमा आज भी मुझे सालता है । मेरी लेखनी आज अपने उस दर्द को व्यक्त कर अपनी श्रद्धांजलि...

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पत्नी महिमा By Ajay Amitabh Suman

(१) पत्नी महिमा लाख टके की बात है भाई,सुन ले काका,सुन ले ताई।बाप बड़ा ना बड़ी है माई, सबसे होती बड़ी लुगाई। जो बीबी के चरण दबाए , भुत पिशाच निकट ना आवे।रहत निरंतर पत्नी तीरे, घटत...

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श्रंगार का सम्मोहन By Neerja Dewedy

श्रंगार का सम्मोहन ------------------------ १. प्रथम प्रणय की ऊष्मा. २. ऐ मेरे प्राण बता. ९. (अ) बन्सरी प्रीति की बज रही है विजन. (ब) आओ न मेरे...

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बिकी हुई एक कलम By Damini Yadav

1 - ताज़ा ख़बरों का बासीपन
2 - मेरी अमर कलम
3 - एक फ़ालतू से समय में
4 - बिकी हुई एक कलम
5 - यूज़ एंड थ्रो वाला भगवान
6 - आत्ममुग्ध शिखर के नाम
7 - अधर में लटके हुए विश्वासों...

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संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 10 By Manoj kumar shukla

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (10) बदलते समीकरण मधु मक्खियों को छेड़ना किसी समय मौत को दावत देना कहा जाता था, और शहद पाने के लिये तो उन्हें आग की लपटों में भी झुलसाया जाता था । किन्त...

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खुद के सहारे बनो तुम By Ajay Amitabh Suman

(१) मौजो से भिड़े हो पतवारें बनो तुम मौजो से भिड़े हो ,पतवारें बनो तुम,खुद हीं अब खुद के,सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है ,आसां बहुत पर,गिर के सम्भलना है,आसां बहुत पर,डूबे हो द...

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प्रकृति नटी का उद्दीपन By Neerja Dewedy

प्रकृति नटी का उद्दीपन. ------------------------------- १. ऋतुराज नवरंग भर जाये. २. किसलय वसना प्रकृति सुन्दरी. ३. भागीरथी के तट पर सुप्रभात. ४. भागीरथी...

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चंद पंक्तियॉं मातृभारती के लिए By Manjeet Singh Gauhar

ओ मेरे प्यारे भाग्य , तूने सच में मुझे बहुत कुछ दिया है । मेरी सभी परेशानियों और समस्याओ का हल भी तूने ही किया है ।।लेकिन अब आ गया है मेरे जीवन में तुझसे भी अच्छा साथी , मुझे...

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क्या करूँ मैं व्यंग By Lakshmi Narayan Panna

विषय सूची1.क्या करूँ मैं व्यंग2.तोते ने किया जगरात(अवधी हास्य)3.आल आउट4.नक्शेबाजी(अवधी हास्य-व्यंग)5.राम राज्य6.नई दुल्हन(अवधी हास्य)7.शिव भोले 8.इन्शान परेशान है 10.ईशक़ब...

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बिटिया थोड़ी बड़ी हो गयी है (अप्रैल २०१९) By महेश रौतेला

बिटिया थोड़ी बड़ी हो गयी है(अप्रैल २०१९)१.थोड़ा बड़ा कर दो राजनीतिकि ठंडी ,बेहद ठंडी  रातों मेंकिसान उसे ताप सकें।जवान उसे जी सकेंबेरोजगार उसे पा सकें,शिक्षा उसे माप सके।ओ राजनीति...

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प्यार व्यार - हीर वे By Shubham Maheshwari

क्या हम कभी बिछुडे? नही ना। क्या दिल कभी टूटे नही ना। जो साथ हो तेरा हो जाए ये जहान मेरा। हीर वे, हीर वेे क्यों हुए जुदा वे। हीर वे, हीर वे तू बेशकीमती कोहीनूर वे। हीर हीर कर...

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घोर अंधकार By Apurva Raghuvansh

वक़्त से नाराज हूं वक्त से अनजान है, कुछ पता पता नहीं है, जानने की जिज्ञासा पाने की लालसा खोने को कुछ नहीं,  पाने को बहुत कुछ भटकता हूं&nbsp...

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सपूतों की शहादत By daya sakariya

निभाके फर्ज़ चुकाके कर्ज हो गए शहीद शहादत मेंये देश के सपूत जवान कूर्बा हुए भारतमाँ की मुहब्बत मेंकिसीने छोड़ा है माँ का आँचल तो किसीने शर से बाप की छाँव खोई हैकिसीकी हुई है गोद सू...

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तेरे चाहने वाले By Rakesh Sai

हम भी देख लेंगे तेरे चाहने वाले को उस वक्त जब तुम मौत के दरवाजे पर खड़ी होगी? तुम बहुत बोलती हो कि वह मुझसे प्यार करता है या मैं करती हूं? हम भी देख लेंगे उस दिन जब तुम मौत के दरव...

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कभी कभी खबरों में अजीब सी महक आती है (मार्च २०१९) By महेश रौतेला

कभी कभी खबरों में अजीब सी महक आती है(मार्च २०१९)१.कभी कभी खबरों में अजीब सी महक आती है,जैसे देश स्वतंत्र हो गया हैउसकी अब अपनी राजभाषा हैजैसे चुनावों की घोषणा हो गयी है,जो सोचा नही...

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यादों के झरोखों से By Rakesh Kumar Pandey Sagar

"तुम्हारी याद आती है" बरसता है जो ये सावन, तुम्हारी याद आती है, कहाँ तुम हो छुपे प्रियतम, हमें पल पल सताती है। लिखे जो खत तुम्हें मैंने, वो दिल की ही कलम से थे, मेरे अधरों की...

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पगली बदली By Rakesh Kumar Pandey Sagar

१- "पगली बदली" है समां बारिश का, धरती का आँचल झूम रहा, मौसम-ए-बसंत में नटखट सा अली घूम रहा।। फुहार बूँदों की इस वसुंधरा को सिंचित कर...

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तेरा ज़िक्र By Suyogya Singh aviadeez

गहरे जख़्म मिलेंगे , इल्म था , दानिस्ता दिल लगाया पर ।अंगारों पे पाँव रखे और इश्क़ को देखा छूकर ।।Gehre Zakhm Milenge , Ilm Tha , Daanistaa Dil Lagaya Par |Angaaron Pe Paanv Rakhe Au...

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एक सफ़र ऐसा भी By Alok Shekhar Mishra

क्या कमजोरियाँ है मेरी आपको लेकर ये सोचने में कितने कमजोर हो गए ये शिकायत ये झिझक ये आँसू जो कल मेरे थे क्या कमी रह गयी की आपकी ओर हो गए  //1//जब से जगा हूँ नीद...

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योग महिमा By Ajay Amitabh Suman

(१) योग महिमा माननीय प्रधानमंत्रीजी, आपने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इक्कीस जून को योग दिवस के रूप में मान्यता प्राप्त करा कर भारत क़ी महिमा बढ़ाई है . उसके लिए आपको हार्दिक बधाई....

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प्यार का सफर भाग - ३ By Shaimee oza Lafj

1.आंखो मैं बीठा कर रख दिया हम दिल मैं उतारना भुल गए.......तेरे आने के इंतजार मैं हम पर वखत का पहियें ने एक पल भी नहीं सोचा तेरी यादमैं हमारी उम्र गुजरती गई हम जींदगी...

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कवि की अभिलाषा By Ajay Amitabh Suman

(१) कवि की अभिलाषा:अजय अमिताभ सुमन ओ मेरी कविते तू कर,परिवर्तित अपनी भाषा,तू फिर से सजा दे ख्वाब नए,प्रकटित कर जन मन व्यथा। ये देख देश का,नर्म पड़े ना गर्म रुधिर,भेदन करने है ल...

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मेरे अनकहे जज्बात। - अकेला पथिक By Mr Un Logical

यह वसुधा न तो कभी किसी की थी न ही यह किसी की है ।सब तो हैं बस एक पथिक जिनको अपने हिस्से का जीना है ।जब तक तन में सांस चलता है इस जीवन का प्रमाण शेेष रहता है ।तब तक तो सब अपने होत...

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इन्कलाब By Ajay Amitabh Suman

(१) अक्सर वो जब भी जोर से कहता है,ये तो तय है कि वो झूठ कहता है।खुद पे भरोसा जब ना हो यकीनन, औरों को अक्सर दबाकर वो कहता है।कहीं पर जाए उसपे जमाना न भारी,सच को हमेश हीं कमकर के...

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हर घड़ी तुमको गाता हूँ By Rakesh Kumar Pandey Sagar

1. "हर घड़ी तुमको गाता हूँ" महकने लगी सारी गलियां, बहकने लगा भ्रमर मन मीत, लगाया है तुमने जो रोग, पहर हर पहर बढ़ाकर प्रीत, अपने मन के मंदिर में मैं, तुम्ह...

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महानायक नेताजी By Amey Jadhav

कहानी है यह उस वक्त की,भारत पें जब अंग्रेजों का राज था ।तभी उनके वाणी से बरसा,एक एक शब्द क्रांती का आघाज़ था ।।परवशता के उन अँधेरों में,वो दियेसा एक प्रकाश था ।शत शत नमन भारत माँ क...

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मेरे अनकहे जज्बात। - मृत्यु कुण्ड - 2 By Mr Un Logical

शब्दों की सार्थकता तो तब ही है जब वह अपने उद्देश्य को प्राप्त कर ले , समान्यतः मौलिक रूप से मैं कोई कवि या लेखक नहीं हूँ . अतः यह तो कभी कह ही नही सकता कि लेखन में त्रुटि नही होगी...

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अल्हड़ By Mukteshwar Prasad Singh

तेज छिटकती बिजलीबादलों की गडगडाहटहवा के झूले पर डोलतीवारिस की बूंदें आ बैठती हैचेहरे पर।जलकणों से भीगता रोम रोम और सांसेंउतावली।बार बार तेज चमक से चौंकचुंधियाती आंखें मूंद जाती हैं...

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शायराना कलाम By Dr Gayathri Rao

शायराना कलम - कुछ भावनाये,कुछ एहसास,...मेरी शायरी के कुछ नगीने जो आप सबको पेश करती हु.

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ज्यादा बदलाव चाहोगे तो पीट दिये जाओगे (जुलाई २०१९) By महेश रौतेला

जुलाई २०१९१.ज्यादा बदलाव चाहोगे तोपीट दिये जाओगे,अधिक परिवर्तन चाहोगे तोमार दिये जाओगे,बहुत सुधार चाहोगे तोजेल भेज दिये जाओगे!मांगने पर कौरवों नेपाँच गांव भी नहीं दिये थे,और तुम जन...

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थोड़े से तो थोड़े से, हम बदले तो है..! By Akshay Mulchandani

शायद, हम थोड़े से, अब बड़े हो गए है..। उसके ऑनलाइन आने की राह, हम आज भी देखते है, जैसे कुछ साल पहले देखा करते थे..! पर थोड़ा सा तो थोड़ा सा, हम बदले तो है ।---------------------------...

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व्यवधान By Ajay Amitabh Suman

एक फूल का मिट जाना हीं उपवन का अवसान नहीं,एक रोध का टिक जाना हीं विच्छेदित अवधान नहीं । जिन्हें चाह है इस जीवन में स्वर्णिम भोर उजाले की,उन राहों पे स्वागत करते घटाटोप अन्धियारे भी...

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तेरा घमंड By Manjeet Singh Gauhar

मत कर इतना घमंड , ऐ तू ना-समझ इंसानतेरा घमंड ही एक दिन तुझे हरायेगा ।मेरा बारे में तू सोचना छोड़ देमैं क्या हूँ , ये तुझे वक़्त बतायेगा ।।. .तू कितना भी कमाले , धन-दौलत ये सब...

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मैं तो बस इतना चाहूँ By Ajay Amitabh Suman

(१) मैं तो बस इतना चाहूँ हाँ मैं बस कहना चाहूँ,हाँ मैं बस लिखना चाहूँ,जो नभ में थल में तारों में,जो सूरज चाँद सितारों में। सागर के अतुलित धारों में,और सौर मंडल हजारों में,जो...

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गजल - वतन पर मिटने का अरमान By DrAnamika

" गरीब हूँ साहब" **************************"भीगे हुए अरमान आज रोने को है|मत रोको गरीबी को, पेट के बल भूखा मानव अब सोने को है"||"वक्त गुजर गए इंसान फरिश्ता...

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राख़ By Ajay Amitabh Suman

(१) ये कविता मैंने आदमी की फितरत के बारे में लिखा है . आदमी की फितरत ऐसी है कि इसकी वासना मृत्यु पर्यन्त भी बरकरार रहती है. ये मृत्यु के बाद भी ईक्छा करता है कि मारने के बाद उसकी...

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नर या मादा By Ajay Amitabh Suman

(१) माना कि समय के साथ बदलना वक्त की मांग है . पर आधुनिकीकरण और फैशन के नाम पे किसी तरह का पोशाक धारण करना , किसी तरह के हाव भाव रखना , किसी तरह की भाव भंगिमा बनाना , आजकल के य...

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कैसे कहूँ है बेहतर, हिन्दुस्तां हमारा? By Ajay Amitabh Suman

(१) कैसे कहूँ है बेहतर ,हिन्दुस्तां हमारा? कह रहे हो तुम ये , मैं भी करूँ ईशारा,सारे जहां से अच्छा , हिन्दुस्तां हमारा। ये ठीक भी बहुत है, एथलिट सारे जागे ,क्रिकेट में जीतत...

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स्मृति शेष By Namita Gupta

पिता की अचानक हुई मृत्यु से मैं बहुत व्यथित हो गई । इस झटके को मैं काफी समय तक भूल नहीं पाई । यह सदमा आज भी मुझे सालता है । मेरी लेखनी आज अपने उस दर्द को व्यक्त कर अपनी श्रद्धांजलि...

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पत्नी महिमा By Ajay Amitabh Suman

(१) पत्नी महिमा लाख टके की बात है भाई,सुन ले काका,सुन ले ताई।बाप बड़ा ना बड़ी है माई, सबसे होती बड़ी लुगाई। जो बीबी के चरण दबाए , भुत पिशाच निकट ना आवे।रहत निरंतर पत्नी तीरे, घटत...

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श्रंगार का सम्मोहन By Neerja Dewedy

श्रंगार का सम्मोहन ------------------------ १. प्रथम प्रणय की ऊष्मा. २. ऐ मेरे प्राण बता. ९. (अ) बन्सरी प्रीति की बज रही है विजन. (ब) आओ न मेरे...

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बिकी हुई एक कलम By Damini Yadav

1 - ताज़ा ख़बरों का बासीपन
2 - मेरी अमर कलम
3 - एक फ़ालतू से समय में
4 - बिकी हुई एक कलम
5 - यूज़ एंड थ्रो वाला भगवान
6 - आत्ममुग्ध शिखर के नाम
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संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि - 10 By Manoj kumar shukla

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (10) बदलते समीकरण मधु मक्खियों को छेड़ना किसी समय मौत को दावत देना कहा जाता था, और शहद पाने के लिये तो उन्हें आग की लपटों में भी झुलसाया जाता था । किन्त...

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खुद के सहारे बनो तुम By Ajay Amitabh Suman

(१) मौजो से भिड़े हो पतवारें बनो तुम मौजो से भिड़े हो ,पतवारें बनो तुम,खुद हीं अब खुद के,सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है ,आसां बहुत पर,गिर के सम्भलना है,आसां बहुत पर,डूबे हो द...

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प्रकृति नटी का उद्दीपन By Neerja Dewedy

प्रकृति नटी का उद्दीपन. ------------------------------- १. ऋतुराज नवरंग भर जाये. २. किसलय वसना प्रकृति सुन्दरी. ३. भागीरथी के तट पर सुप्रभात. ४. भागीरथी...

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चंद पंक्तियॉं मातृभारती के लिए By Manjeet Singh Gauhar

ओ मेरे प्यारे भाग्य , तूने सच में मुझे बहुत कुछ दिया है । मेरी सभी परेशानियों और समस्याओ का हल भी तूने ही किया है ।।लेकिन अब आ गया है मेरे जीवन में तुझसे भी अच्छा साथी , मुझे...

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क्या करूँ मैं व्यंग By Lakshmi Narayan Panna

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बिटिया थोड़ी बड़ी हो गयी है (अप्रैल २०१९) By महेश रौतेला

बिटिया थोड़ी बड़ी हो गयी है(अप्रैल २०१९)१.थोड़ा बड़ा कर दो राजनीतिकि ठंडी ,बेहद ठंडी  रातों मेंकिसान उसे ताप सकें।जवान उसे जी सकेंबेरोजगार उसे पा सकें,शिक्षा उसे माप सके।ओ राजनीति...

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प्यार व्यार - हीर वे By Shubham Maheshwari

क्या हम कभी बिछुडे? नही ना। क्या दिल कभी टूटे नही ना। जो साथ हो तेरा हो जाए ये जहान मेरा। हीर वे, हीर वेे क्यों हुए जुदा वे। हीर वे, हीर वे तू बेशकीमती कोहीनूर वे। हीर हीर कर...

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घोर अंधकार By Apurva Raghuvansh

वक़्त से नाराज हूं वक्त से अनजान है, कुछ पता पता नहीं है, जानने की जिज्ञासा पाने की लालसा खोने को कुछ नहीं,  पाने को बहुत कुछ भटकता हूं&nbsp...

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सपूतों की शहादत By daya sakariya

निभाके फर्ज़ चुकाके कर्ज हो गए शहीद शहादत मेंये देश के सपूत जवान कूर्बा हुए भारतमाँ की मुहब्बत मेंकिसीने छोड़ा है माँ का आँचल तो किसीने शर से बाप की छाँव खोई हैकिसीकी हुई है गोद सू...

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तेरे चाहने वाले By Rakesh Sai

हम भी देख लेंगे तेरे चाहने वाले को उस वक्त जब तुम मौत के दरवाजे पर खड़ी होगी? तुम बहुत बोलती हो कि वह मुझसे प्यार करता है या मैं करती हूं? हम भी देख लेंगे उस दिन जब तुम मौत के दरव...

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कभी कभी खबरों में अजीब सी महक आती है (मार्च २०१९) By महेश रौतेला

कभी कभी खबरों में अजीब सी महक आती है(मार्च २०१९)१.कभी कभी खबरों में अजीब सी महक आती है,जैसे देश स्वतंत्र हो गया हैउसकी अब अपनी राजभाषा हैजैसे चुनावों की घोषणा हो गयी है,जो सोचा नही...

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यादों के झरोखों से By Rakesh Kumar Pandey Sagar

"तुम्हारी याद आती है" बरसता है जो ये सावन, तुम्हारी याद आती है, कहाँ तुम हो छुपे प्रियतम, हमें पल पल सताती है। लिखे जो खत तुम्हें मैंने, वो दिल की ही कलम से थे, मेरे अधरों की...

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पगली बदली By Rakesh Kumar Pandey Sagar

१- "पगली बदली" है समां बारिश का, धरती का आँचल झूम रहा, मौसम-ए-बसंत में नटखट सा अली घूम रहा।। फुहार बूँदों की इस वसुंधरा को सिंचित कर...

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तेरा ज़िक्र By Suyogya Singh aviadeez

गहरे जख़्म मिलेंगे , इल्म था , दानिस्ता दिल लगाया पर ।अंगारों पे पाँव रखे और इश्क़ को देखा छूकर ।।Gehre Zakhm Milenge , Ilm Tha , Daanistaa Dil Lagaya Par |Angaaron Pe Paanv Rakhe Au...

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एक सफ़र ऐसा भी By Alok Shekhar Mishra

क्या कमजोरियाँ है मेरी आपको लेकर ये सोचने में कितने कमजोर हो गए ये शिकायत ये झिझक ये आँसू जो कल मेरे थे क्या कमी रह गयी की आपकी ओर हो गए  //1//जब से जगा हूँ नीद...

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योग महिमा By Ajay Amitabh Suman

(१) योग महिमा माननीय प्रधानमंत्रीजी, आपने अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर इक्कीस जून को योग दिवस के रूप में मान्यता प्राप्त करा कर भारत क़ी महिमा बढ़ाई है . उसके लिए आपको हार्दिक बधाई....

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प्यार का सफर भाग - ३ By Shaimee oza Lafj

1.आंखो मैं बीठा कर रख दिया हम दिल मैं उतारना भुल गए.......तेरे आने के इंतजार मैं हम पर वखत का पहियें ने एक पल भी नहीं सोचा तेरी यादमैं हमारी उम्र गुजरती गई हम जींदगी...

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कवि की अभिलाषा By Ajay Amitabh Suman

(१) कवि की अभिलाषा:अजय अमिताभ सुमन ओ मेरी कविते तू कर,परिवर्तित अपनी भाषा,तू फिर से सजा दे ख्वाब नए,प्रकटित कर जन मन व्यथा। ये देख देश का,नर्म पड़े ना गर्म रुधिर,भेदन करने है ल...

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मेरे अनकहे जज्बात। - अकेला पथिक By Mr Un Logical

यह वसुधा न तो कभी किसी की थी न ही यह किसी की है ।सब तो हैं बस एक पथिक जिनको अपने हिस्से का जीना है ।जब तक तन में सांस चलता है इस जीवन का प्रमाण शेेष रहता है ।तब तक तो सब अपने होत...

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इन्कलाब By Ajay Amitabh Suman

(१) अक्सर वो जब भी जोर से कहता है,ये तो तय है कि वो झूठ कहता है।खुद पे भरोसा जब ना हो यकीनन, औरों को अक्सर दबाकर वो कहता है।कहीं पर जाए उसपे जमाना न भारी,सच को हमेश हीं कमकर के...

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हर घड़ी तुमको गाता हूँ By Rakesh Kumar Pandey Sagar

1. "हर घड़ी तुमको गाता हूँ" महकने लगी सारी गलियां, बहकने लगा भ्रमर मन मीत, लगाया है तुमने जो रोग, पहर हर पहर बढ़ाकर प्रीत, अपने मन के मंदिर में मैं, तुम्ह...

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महानायक नेताजी By Amey Jadhav

कहानी है यह उस वक्त की,भारत पें जब अंग्रेजों का राज था ।तभी उनके वाणी से बरसा,एक एक शब्द क्रांती का आघाज़ था ।।परवशता के उन अँधेरों में,वो दियेसा एक प्रकाश था ।शत शत नमन भारत माँ क...

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मेरे अनकहे जज्बात। - मृत्यु कुण्ड - 2 By Mr Un Logical

शब्दों की सार्थकता तो तब ही है जब वह अपने उद्देश्य को प्राप्त कर ले , समान्यतः मौलिक रूप से मैं कोई कवि या लेखक नहीं हूँ . अतः यह तो कभी कह ही नही सकता कि लेखन में त्रुटि नही होगी...

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