सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


Categories
Featured Books

किलकारी - भाग ७ By Ratna Pandey

अभी तक आपने पढ़ा अनाथाश्रम से गोद लेने के काग़ज़ मिलने के बाद पारस बहुत बेचैन था। उस पर राकेश अंकल के हार्ट अटैक से वह बहुत घबरा गया। उसके जाने के बाद मम्मी पापा जी का ख़्याल कौन रखेगा...

Read Free

Real Incidents - Incident 5: बिन माँ जग सुना By Anil Patel_Bunny

“कहाँ है हमारी माँ?” राजेश ने कहा।“भाई तुम्हारी माँ को मरे हुए 1 साल हो चुके है।” सविता जी ने कहा।“नहीं हम ये नहीं मानते! वो यहीं है हमारे पास!” समीर ने कहा।बड़ी ही अजीब कशमकश थी, क...

Read Free

कुछ ख़त और एक रिश्ता By Saroj Verma

जी,आप घर का कौन सा हिस्सा बेचना चाहतीं हैं,एजेंट ने सुजाता से पूछा।। जी पीछे वाला,मैं वैसें भी एक ही कमरें का ज्यादातर इस्तेमाल करती हूँ,आगें के हिस्से में रसोई,दो कमरें ,एक बाथरूम...

Read Free

जुदाई By kirti chaturvedi

घर का काम पूरा हो चला था। कुछ ही दिनों बाद उन्हें दूसरी मंजिल पर सामान जमा कर रखना था। रूमाना को रह रहकर ख्याल आ रहा था कि आज के दिन अम्मी अगर जिंदा होती तो कितना बेहतर होता। रूमान...

Read Free

निष्कलंक - अंतिम भाग By राही

जब तक चबा कर खा सकते थे। खाई गई। औरफिर घर से बहार फेंक दी गई। काम कि नहीं रही। पेट में बच्चा था। किसका? किसीको नहीं पड़ी थी। अबसे यही मेरी बेटी है कह,, आशा कि माँ से शादी रचाने वाल...

Read Free

माँ को कौन समझता है... By Shalini Gautam

ये कहानी है उस मां की है, जिसने अपने बच्चों को पाल पोसकर इतना बड़ा तो कर दिया ताकि वो अपने कदमो पर खड़े हो पाए , पर शायद वो उन बच्चों को दुनियादारी नहीं सिखा पाई कि बुढापे में मां...

Read Free

छल - Story of love and betrayal - 26 By Sarvesh Saxena

रात के आठ बज चुके थे, भैरव अगले दिन मिलने का वादा करके चला गया, लेकिन दोनों को रात भर नींद नहीं आई वह समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर यह हो क्या रहा है | आधी रात के बाद प्रेरित को कु...

Read Free

स्थान- परिवर्तन By prabhat samir

सुबह की चाय का प्याला थमाते हुए जयन्ती ने बड़ी सहजता से प्रतीक से कहा-‘प्रतीक, मैं अब तुम्हारी माँ के साथ नहीं रह सकती। प्रतीक अखबार पढ़ रहा था, पढ़ता रहा। बिना नज़र उठाए उसने भी...

Read Free

जादू भरी आँखों वाली सुनो By Ranjana Jaiswal

पहली बार नीलिमा को देखकर मुझे बिलकुल नहीं लगा था कि वह जादूगरनी है |उम्र यही कोई 22 -23 की होगी |भरे बदन की लंबी पर कुछ ज्यादा ही साँवली लड़की थी |हाँ, उसकी आँखें जरूर बड़ी और आकर्षक...

Read Free

बावरा मन By Rama Sharma Manavi

आजकल रश्मि कुछ उदास,कुछ उखड़ी सी,कुछ व्यथित रहने लगी है,वैसे देखा जाय तो कोई विशेष समस्या भी नहीं है,बल्कि सब कुछ पहले से काफ़ी बेहतर हो गया है।गृहस्थ जीवन का संघर्ष भी लगभग नगण्य हो...

Read Free

मैं ही क्यों.... By Shalini Gautam

नमस्कार दोस्तो....आज मैं आप सब से कुछ कहना चाहती हूं कि कैसे आज भी लड़की का पैदा होना इतनी खुशी की बात नहीं होती है।जब एक लड़की किसी घर आंगन में जनम लेती है तो ना जाने क्यो खुशी से...

Read Free

चाँद की किरचें By DrPranava Bharti

बरसों पहले की याद उसे कुछ ऐसे आने लगी जैसे कोई गड़गड़ाता बड़ा सा बादल का भयंकर शोर मचाता टुकड़ा मन के आँगन में टूटने की तैयारी में हो | दो निस्तब्ध सूनी आँखों में न जाने क्या भरा था...

Read Free

काढ़ागोला : एक यात्रा - भाग - 1 By rajeshdaniel

बिहार के एक छोटे से कसबे का नाम है काढ़ागोला। इसे काढ़ागोला कहें या बरारी अथवा गुरुबाजार । ऐतिहासिक महत्त्व से देखें तो शेरशाह सूरी ने यहाँ से गंगा दार्जीलिंग सड़क का निर्माण करवाया थ...

Read Free

इंसान की पहचान काम से नही शिक्षा और विचार से होती है By NEELKAMAL GAUTAM

एक दिन की बात थी महाशिवरात्रि का दिन था चारो ओर से रास्ते बंद थे क्योंकि मंदिर पर अधिक भीड़ होती है मै और मेरे मिलने वाले एक स्थान पर बैठे थे तो मैंने देखा की लड़के एक लड़की का पीछ...

Read Free

शादी एक पिंजरा By shama parveen

नायरा जो एक बैंक मैनेजर है। और वो बहुत ही मेहनती और खुले विचारो वाली लडकी है। जिसे अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से जीना पसन्द है। उसे शादी के नाम से ही परेशानी है। वो बस यू ही अपनी ज़िं...

Read Free

फ़िर बेटा कैसे ख़राब हुआ By Ratna Pandey

बारह वर्ष का पवन कुछ दिनों से घर में बहुत ही उदास रहने लगा था। दिन भर उछल-कूद करना, अपनी बहन को तंग करना, मस्ती करना, सब कुछ बंद था। अब वह अपनी बहन के साथ बात-बात पर झगड़ा भी करने...

Read Free

भटकाव By Rama Sharma Manavi

जिंदगी के सफ़र में अत्यंत अजीबोगरीब घटनाएं घटती रहती हैं।मैं एक शिक्षित 44 वर्षीय हाउस वाइफ हूँ।ग्रेजुएशन में ही विवाह कर दिया गया था, पति के प्रोत्साहन से विवाहोपरांत मैंने PG क...

Read Free

असली अपराधी (भाग-4) By Ruchika Khanna

अचानक जगन ने पूछा, "बिट्टू, क्या आपने श्री शुक्ला (जिन्होंने पहले ही हत्या-अनुबंध दिया है) का अनुबंध पूरा कर लिया है? बिट्टू ने जवाब दिया, "नहीं बॉस"। जगन ने जल्द से जल्द कार्य पूर...

Read Free

अंत... एक नई शुरुआत - अंतिम भाग By निशा शर्मा

आज ईश्वर की कृपा से मेरे पास सबकुछ है । एक बहुत अच्छा और अपनी माँ को बहुत प्यार करने वाला बेटा, सबका सम्मान करने वाली मेरी लाडली बहू और हाँ समीर की माँ भी आज मेरे हर एक फैसले में म...

Read Free

बसेरा By Dr Jaya Shankar Shukla

"बसेरा" -डा जय शंकर शुक्लधूल-भरे रास्ते उस पर जेठ की तिलमिलाती गर्मी को सहते, मजदूरों का कारवां बढ़ा जा रहा है, अपने गंतव्य की ओर । मजदूरों का ये कारवां अंत म...

Read Free

कजरी- अंतिम भाग By Ratna Pandey

अभी तक आपने पढ़ा निशा की अलमारी में सफेद पर्स से निकली 'आई विल किल यू' की पर्चियाँ देख कर नवीन के पैरों तले से ज़मीन खिसक गई। निशा के मुँह से कजरी का नाम सुनते ही नवीन समझ गय...

Read Free

आत्म सम्मान By Dr Jaya Shankar Shukla

"आत्म सम्मान" डा जय शंकर शुक्लछुआछूत के रोग से ग्रसित रोगी, स्वस्थ हो जाने पर भी काफी दिन तक क्वॉरेंटाइन मैं रहता है क्वॉरेंटाइन में रहना उसकी मजबूरी है ज...

Read Free

गुमनाम क्रांतिकारी By Harshit Ranjan

हमारे देश को स्वतंत्र बनाने के लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों तथा क्रांतिकारियों ने प्रयास किया था और उनके बलिदानों का ज़िक्र आज भी हमारे इतिहास में है । लेेेकि कई क्रांतिकारी ऐसे भी...

Read Free

अनपढ़ By Dr Jaya Shankar Shukla

"अनपढ़" -डा जय शंकर शुक्लदोपहर का समय, फिर भी हल्की-हल्की धूप खिली है। फाल्गुन का उत्सव, होली का दिन चारों ओर धूम-धम्क्कड़ ढोल-नगाडों के साथ नाचती-गात...

Read Free

चंद्रशेखर आज़ाद By Harshit Ranjan

चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म सन् 1906 में मध्यप्रदेश के भाभरा गाँव में हुआ था । उनके पिताजी का नाम सीताराम तिवारी तथा माताजी का नाम जगरानी तिवारी था । उनके पिता संस्स्कृत भाषा के बहुत ब...

Read Free

नातेदार By Dr Jaya Shankar Shukla

सारा सामान लेकर वह स्टेशन पर आ गया। वेटिंग रूम में पहुँचने पर वेंटिग रूम के इंचार्ज ने उसे बताया कि रात में यहाँ सामान-चोर आते हैं। अतः अपने सामान के प्रति सावधानी रखें। दिव्यांश अ...

Read Free

एक नई राह  By Ratna Pandey

दिन प्रतिदिन शांतनु की बिगड़ती आदतों से परेशान होकर रुचि ने उससे कहा, “शांतनु तुम्हें अपने आप को बदलना होगा। तुम्हारी यह रंगरेलियां मैं सहन नहीं कर पाऊंगी। तुम्हें क्या लगता है, मु...

Read Free

औरत कभी रिटायर नहीं होती By Ranjana Jaiswal

मम्मी जी बहुत बीमार थीं |बिस्तर से सिर्फ नीति-क्रिया से निबटने के लिए ही किसी तरह उठतीं |कभी-कभी नहीं उठ पातीं तो घर के किसी सदस्य को मदद के लिए पुकारतीं |पापा जी दिन-रात उनकी देखभ...

Read Free

ज़िंदगी के इंद्रधनुषी रंग By kirti chaturvedi

कहते हैं कि होई वही जो रब रची राखा। कभी—कभी ज़िंदगी में ऐसे लम्हे गुजरतें हैं कि पता ही नहीं होता कि ज़िंदगी किस ओर करवट लेगी। हम सोचते हैं कि हमारी ज़िंदगी के फैसले हम ले रहे होते...

Read Free

किलकारी - भाग ७ By Ratna Pandey

अभी तक आपने पढ़ा अनाथाश्रम से गोद लेने के काग़ज़ मिलने के बाद पारस बहुत बेचैन था। उस पर राकेश अंकल के हार्ट अटैक से वह बहुत घबरा गया। उसके जाने के बाद मम्मी पापा जी का ख़्याल कौन रखेगा...

Read Free

Real Incidents - Incident 5: बिन माँ जग सुना By Anil Patel_Bunny

“कहाँ है हमारी माँ?” राजेश ने कहा।“भाई तुम्हारी माँ को मरे हुए 1 साल हो चुके है।” सविता जी ने कहा।“नहीं हम ये नहीं मानते! वो यहीं है हमारे पास!” समीर ने कहा।बड़ी ही अजीब कशमकश थी, क...

Read Free

कुछ ख़त और एक रिश्ता By Saroj Verma

जी,आप घर का कौन सा हिस्सा बेचना चाहतीं हैं,एजेंट ने सुजाता से पूछा।। जी पीछे वाला,मैं वैसें भी एक ही कमरें का ज्यादातर इस्तेमाल करती हूँ,आगें के हिस्से में रसोई,दो कमरें ,एक बाथरूम...

Read Free

जुदाई By kirti chaturvedi

घर का काम पूरा हो चला था। कुछ ही दिनों बाद उन्हें दूसरी मंजिल पर सामान जमा कर रखना था। रूमाना को रह रहकर ख्याल आ रहा था कि आज के दिन अम्मी अगर जिंदा होती तो कितना बेहतर होता। रूमान...

Read Free

निष्कलंक - अंतिम भाग By राही

जब तक चबा कर खा सकते थे। खाई गई। औरफिर घर से बहार फेंक दी गई। काम कि नहीं रही। पेट में बच्चा था। किसका? किसीको नहीं पड़ी थी। अबसे यही मेरी बेटी है कह,, आशा कि माँ से शादी रचाने वाल...

Read Free

माँ को कौन समझता है... By Shalini Gautam

ये कहानी है उस मां की है, जिसने अपने बच्चों को पाल पोसकर इतना बड़ा तो कर दिया ताकि वो अपने कदमो पर खड़े हो पाए , पर शायद वो उन बच्चों को दुनियादारी नहीं सिखा पाई कि बुढापे में मां...

Read Free

छल - Story of love and betrayal - 26 By Sarvesh Saxena

रात के आठ बज चुके थे, भैरव अगले दिन मिलने का वादा करके चला गया, लेकिन दोनों को रात भर नींद नहीं आई वह समझ ही नहीं पा रहे थे कि आखिर यह हो क्या रहा है | आधी रात के बाद प्रेरित को कु...

Read Free

स्थान- परिवर्तन By prabhat samir

सुबह की चाय का प्याला थमाते हुए जयन्ती ने बड़ी सहजता से प्रतीक से कहा-‘प्रतीक, मैं अब तुम्हारी माँ के साथ नहीं रह सकती। प्रतीक अखबार पढ़ रहा था, पढ़ता रहा। बिना नज़र उठाए उसने भी...

Read Free

जादू भरी आँखों वाली सुनो By Ranjana Jaiswal

पहली बार नीलिमा को देखकर मुझे बिलकुल नहीं लगा था कि वह जादूगरनी है |उम्र यही कोई 22 -23 की होगी |भरे बदन की लंबी पर कुछ ज्यादा ही साँवली लड़की थी |हाँ, उसकी आँखें जरूर बड़ी और आकर्षक...

Read Free

बावरा मन By Rama Sharma Manavi

आजकल रश्मि कुछ उदास,कुछ उखड़ी सी,कुछ व्यथित रहने लगी है,वैसे देखा जाय तो कोई विशेष समस्या भी नहीं है,बल्कि सब कुछ पहले से काफ़ी बेहतर हो गया है।गृहस्थ जीवन का संघर्ष भी लगभग नगण्य हो...

Read Free

मैं ही क्यों.... By Shalini Gautam

नमस्कार दोस्तो....आज मैं आप सब से कुछ कहना चाहती हूं कि कैसे आज भी लड़की का पैदा होना इतनी खुशी की बात नहीं होती है।जब एक लड़की किसी घर आंगन में जनम लेती है तो ना जाने क्यो खुशी से...

Read Free

चाँद की किरचें By DrPranava Bharti

बरसों पहले की याद उसे कुछ ऐसे आने लगी जैसे कोई गड़गड़ाता बड़ा सा बादल का भयंकर शोर मचाता टुकड़ा मन के आँगन में टूटने की तैयारी में हो | दो निस्तब्ध सूनी आँखों में न जाने क्या भरा था...

Read Free

काढ़ागोला : एक यात्रा - भाग - 1 By rajeshdaniel

बिहार के एक छोटे से कसबे का नाम है काढ़ागोला। इसे काढ़ागोला कहें या बरारी अथवा गुरुबाजार । ऐतिहासिक महत्त्व से देखें तो शेरशाह सूरी ने यहाँ से गंगा दार्जीलिंग सड़क का निर्माण करवाया थ...

Read Free

इंसान की पहचान काम से नही शिक्षा और विचार से होती है By NEELKAMAL GAUTAM

एक दिन की बात थी महाशिवरात्रि का दिन था चारो ओर से रास्ते बंद थे क्योंकि मंदिर पर अधिक भीड़ होती है मै और मेरे मिलने वाले एक स्थान पर बैठे थे तो मैंने देखा की लड़के एक लड़की का पीछ...

Read Free

शादी एक पिंजरा By shama parveen

नायरा जो एक बैंक मैनेजर है। और वो बहुत ही मेहनती और खुले विचारो वाली लडकी है। जिसे अपनी ज़िंदगी अपने तरीके से जीना पसन्द है। उसे शादी के नाम से ही परेशानी है। वो बस यू ही अपनी ज़िं...

Read Free

फ़िर बेटा कैसे ख़राब हुआ By Ratna Pandey

बारह वर्ष का पवन कुछ दिनों से घर में बहुत ही उदास रहने लगा था। दिन भर उछल-कूद करना, अपनी बहन को तंग करना, मस्ती करना, सब कुछ बंद था। अब वह अपनी बहन के साथ बात-बात पर झगड़ा भी करने...

Read Free

भटकाव By Rama Sharma Manavi

जिंदगी के सफ़र में अत्यंत अजीबोगरीब घटनाएं घटती रहती हैं।मैं एक शिक्षित 44 वर्षीय हाउस वाइफ हूँ।ग्रेजुएशन में ही विवाह कर दिया गया था, पति के प्रोत्साहन से विवाहोपरांत मैंने PG क...

Read Free

असली अपराधी (भाग-4) By Ruchika Khanna

अचानक जगन ने पूछा, "बिट्टू, क्या आपने श्री शुक्ला (जिन्होंने पहले ही हत्या-अनुबंध दिया है) का अनुबंध पूरा कर लिया है? बिट्टू ने जवाब दिया, "नहीं बॉस"। जगन ने जल्द से जल्द कार्य पूर...

Read Free

अंत... एक नई शुरुआत - अंतिम भाग By निशा शर्मा

आज ईश्वर की कृपा से मेरे पास सबकुछ है । एक बहुत अच्छा और अपनी माँ को बहुत प्यार करने वाला बेटा, सबका सम्मान करने वाली मेरी लाडली बहू और हाँ समीर की माँ भी आज मेरे हर एक फैसले में म...

Read Free

बसेरा By Dr Jaya Shankar Shukla

"बसेरा" -डा जय शंकर शुक्लधूल-भरे रास्ते उस पर जेठ की तिलमिलाती गर्मी को सहते, मजदूरों का कारवां बढ़ा जा रहा है, अपने गंतव्य की ओर । मजदूरों का ये कारवां अंत म...

Read Free

कजरी- अंतिम भाग By Ratna Pandey

अभी तक आपने पढ़ा निशा की अलमारी में सफेद पर्स से निकली 'आई विल किल यू' की पर्चियाँ देख कर नवीन के पैरों तले से ज़मीन खिसक गई। निशा के मुँह से कजरी का नाम सुनते ही नवीन समझ गय...

Read Free

आत्म सम्मान By Dr Jaya Shankar Shukla

"आत्म सम्मान" डा जय शंकर शुक्लछुआछूत के रोग से ग्रसित रोगी, स्वस्थ हो जाने पर भी काफी दिन तक क्वॉरेंटाइन मैं रहता है क्वॉरेंटाइन में रहना उसकी मजबूरी है ज...

Read Free

गुमनाम क्रांतिकारी By Harshit Ranjan

हमारे देश को स्वतंत्र बनाने के लिए कई स्वतंत्रता सेनानियों तथा क्रांतिकारियों ने प्रयास किया था और उनके बलिदानों का ज़िक्र आज भी हमारे इतिहास में है । लेेेकि कई क्रांतिकारी ऐसे भी...

Read Free

अनपढ़ By Dr Jaya Shankar Shukla

"अनपढ़" -डा जय शंकर शुक्लदोपहर का समय, फिर भी हल्की-हल्की धूप खिली है। फाल्गुन का उत्सव, होली का दिन चारों ओर धूम-धम्क्कड़ ढोल-नगाडों के साथ नाचती-गात...

Read Free

चंद्रशेखर आज़ाद By Harshit Ranjan

चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म सन् 1906 में मध्यप्रदेश के भाभरा गाँव में हुआ था । उनके पिताजी का नाम सीताराम तिवारी तथा माताजी का नाम जगरानी तिवारी था । उनके पिता संस्स्कृत भाषा के बहुत ब...

Read Free

नातेदार By Dr Jaya Shankar Shukla

सारा सामान लेकर वह स्टेशन पर आ गया। वेटिंग रूम में पहुँचने पर वेंटिग रूम के इंचार्ज ने उसे बताया कि रात में यहाँ सामान-चोर आते हैं। अतः अपने सामान के प्रति सावधानी रखें। दिव्यांश अ...

Read Free

एक नई राह  By Ratna Pandey

दिन प्रतिदिन शांतनु की बिगड़ती आदतों से परेशान होकर रुचि ने उससे कहा, “शांतनु तुम्हें अपने आप को बदलना होगा। तुम्हारी यह रंगरेलियां मैं सहन नहीं कर पाऊंगी। तुम्हें क्या लगता है, मु...

Read Free

औरत कभी रिटायर नहीं होती By Ranjana Jaiswal

मम्मी जी बहुत बीमार थीं |बिस्तर से सिर्फ नीति-क्रिया से निबटने के लिए ही किसी तरह उठतीं |कभी-कभी नहीं उठ पातीं तो घर के किसी सदस्य को मदद के लिए पुकारतीं |पापा जी दिन-रात उनकी देखभ...

Read Free

ज़िंदगी के इंद्रधनुषी रंग By kirti chaturvedi

कहते हैं कि होई वही जो रब रची राखा। कभी—कभी ज़िंदगी में ऐसे लम्हे गुजरतें हैं कि पता ही नहीं होता कि ज़िंदगी किस ओर करवट लेगी। हम सोचते हैं कि हमारी ज़िंदगी के फैसले हम ले रहे होते...

Read Free