सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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Featured Books

अय्याश--भाग(३०) By Saroj Verma

सत्यकाम अपनी बहन त्रिशला के घर से लौट तो आया लेकिन काशी में उसके ठहरने का कोई ठिकाना नहीं था इसलिए उसने सोचा कि यहाँ वहाँ भटकने से तो अच्छा है क्यों ना मैं काशी की किसी धर्मशाला मे...

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घुटन - भाग १२ By Ratna Pandey

वीर प्रताप यह नाटक देख कर ख़ुद भी भूतकाल के काले साए में समाते जा रहे थे। प्रिया को उदास देखकर उसकी माँ ने पूछा, "प्रिया क्या हुआ बेटा, तुम इतनी उदास क्यों हो?" "माँ अमर ने मुझे धोख...

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गुलाम भारत में खुली एक छोटी सी दुकान कैसे बनी आजाद भारत का नंबर वन ब्रांड By Jatin Tyagi

हल्दीराम के प्रोडक्ट्स लगभग हर घर में इस्तेमाल किए जाते हैं. वहीं किसी भी पार्टी में नाश्ते के तौर पर लगाई जाने वाली नमकीन बिना हल्दीराम के अधूरी सी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि...

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शेष जीवन (कहानियां पार्ट 9) By Kishanlal Sharma

3--एक औरत का फैसला"यह बच्चा किसका है?"राकेश की नज़र कमरे में घुसते ही पलँग पर लेटे बच्चे पर गयी थी।"मेरा",निशा बोली।"क्यो मजाक कर रही हो,"राकेश ने बच्चे की तरफ देखते हुए निशा से फिर...

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कितना बदल गया इंसान By S Sinha

                                                    लेख -  कितना बदल गया इंसान    आज हम दशकों बाद  अपने बीते दिनों , ख़ास कर बचपन की धूमिल यादों को  ,  साफ़ साफ़ देखने का प्रयास कर रह...

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मजदूर की बेटी By Kumar Kishan Kirti

मैं प्रतिदिन उसे शाम के वक्त पसीने से लथपथ होकर अपने घर की तरफ लौटता देखता।सिर पर मैला-कुचैला पगड़ी बांधे, शरीर पर धूलकण,पैबंद लगी पुरानी धोती पहने हुए वह अपने कंधे पर कुदाल लेकर लौ...

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खोखले रिश्ते By Rama Sharma Manavi

आराध्या अनमनी सी सोफे पर बैठी विगत जगत में विचरण कर रही थी, सामने टेबल पर रखी चाय भाप उड़ाकर कोल्ड टी में बदल चुकी थी।अभी 14 दिन पहले तो सब ठीक ही प्रतीत हो रहा था या शायद सामान्य र...

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परवाह By Saroj Prajapati

"क्या सिर्फ दो परांठे! एक और ले!!" मीनल की मां उससे आग्रह करते हुए बोली।" क्या मम्मी पहले भी तो दो ही पराठे खाती थी। अब शादी हो गई ।इसका मतलब यह तो नहीं कि मेरी भूख बढ़ जाएगी!! आप...

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क्यों झूठ बोलते हो साहब कि चरखे से आजादी मिली By Jatin Tyagi

45 साल के गाँधी 1915 में भारत आते हैं, 2 दशक से भी ज्यादा दक्षिण अफ्रीका में बिता कर। इससे 4 साल पहले 28 वर्ष का एक युवक अंडमान में एक कालकोठरी में बन्द होता है। अंग्रेज उससे दिन भ...

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गरीबी मजबूरी - 3 By आरोही" देसाई

राजु यूपीएससी परीक्षा की तैयारियां कर रहा था और उसने परीक्षा भी दी थी। मगर उसमें वो पास ना हो सका ।उसका फर्स्ट अटेंप था । इसलिए उसके माता पिता ने भी कुछ नहीं बोला और उसे समझाने की...

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अधूरा पहला प्यार (अंतिम किश्त) By Kishanlal Sharma

मीरा जिस से मनोहर प्यार करता था।जिसे दिलो जान से चाहता था।जो उसकी जिंदगी थी।जो उसके रोम रोम में बसी थी।वो मीरा अब उसे दुश्मन नज़र आने लगी थी।मीरा के पिता जिस लड़के से मीरा के रिश्ते...

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काढ़ागोला : एक यात्रा - भाग - 3 By rajeshdaniel

ढाला : ढाला शब्द शायद बहुत से लोगों को समझ न आए और खासकर आज की नई पीढी इस प्रकार के शब्दों से परिचित न हो। ढाला कहा जाता था रेलवे फाटक को। अक्सर जब कोई ट्रैन काढ़ागोला की मुख्य गंगा...

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तन्हाई By Saroj Prajapati

"वीकेंड में कुछ जरूरी काम नहीं तो चलो कहीं घूमने!" मधु ने अपनी सहेलियों से पूछा।"अरे नहीं यार ! बच्चे पिछले कई दिनों से पीछे पड़े हैं कहीं बाहर ले जाने के लिए। कल उनके साथ ही मॉल ज...

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पांचवीं बेटी By Poonam Gujrani Surat

कहानी पाँचवीं बेटी"आप एक बार फिर सोच लेते भाभीसा," दया ने आंगन में लगे झूले पर बैठते हुए कहा।"इसमें सोचणा के है दया, जो एक बार तय कर लेव थारा भभीसा तो फेर पाछे पाँव ना धरै....पूरी...

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जीवन एक सुंदर तोहफा और यात्रा है By Nirmal Rathod

जीवन की दार्शनिक परिभाषा अपनी जैविक परिभाषा से व्यापक रुप में भिन्न है। जीव विज्ञान जीवन के भौतिक पहलुओं को ही मानता है, जबकि दर्शन उन गुणों को मानता है जो जीवन को दूसरों के लिए यो...

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स्पर्श का सुख By Sushma Tiwari

अचानक किसी ने जोर से दरवाजा खटखटाया! आराध्या अनमने मन से उठ कर दरवाज़े तक गई। ये समय उसके पसंदीदा सीरियल अहिल्या का होता है और किसी भी प्रकार की रुकावट उसे खटकती थी। दरवाजे पर अनुप...

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ट्यूशन के फायदे और नुकसान By Jatin Tyagi

आज जिस सोसाइटी और माहौल में हम लोग रह रहे है उसमे ट्यूशन जरुरत से ज्यादा एक फैशन बन गया है। कुछ लोग तो जरुरत के लिए ट्यूशन लगाते है लेकिन कुछ लोग इसे फैशन या हिरस की तरह। उन्हें लग...

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युगान्तर By prabhat samir

डॉ प्रभात समीर मेरे घर के दरवाज़े पर कॉल बैल लगी हुई है, जिसके माध्यम से कोई भी आगन्तुक अपने आने की सूचना दे सकता है, लेकिन मेरी काम वाली बाई को तो ठक-ठक करके दरवाज़ा बजाने में ही आत...

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इसका कारण केवल तुम हो  By Ratna Pandey

संगीता के पति अजय के जीवन का सूर्यास्त अमावस की रात को हुआ था। संगीता की ज़िंदगी में आई वह अमावस की काली रात इतनी लंबी थी कि पूनम आते-आते कई वर्ष बीत गए। पुत्र की अकाल मृत्यु के ग़म...

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ग्रामीण जीवन By Dakshal Kumar Vyas

संध्या वंदन का समय सूर्य की किरणे मंदिर के कलश पर ऊर्जा बिखेर , लुप्त हो रहि है । बच्चे धूल में लत पत अपने घर की ओर प्रस्थान कर रहें है। मन नही है उनका घर को जानें का पर माता की पु...

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दो वक्त की रोटी By Saroj Prajapati

"यह क्या सुनीता!! सारा घर बिखरा पड़ा है और तू आराम से टीवी देख रही हो!" रेनू चिल्लाते हुए अपनी मेड सुनीता से बोली।"क्या करूं मेमसाब! अभी मैंने सब कुछ साफ सफाई कर रखा था कि कुहू ने...

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आख़िर वह बिना बताये क्यों चले गए By Ratna Pandey

सुबह-सुबह दरवाज़े पर दस्तक हुई तब मिसेस कपूर ने दरवाज़ा खोला। गंदे मैले कपड़े पहने हुई एक स्त्री जिसके चेहरे से वह काफ़ी शालीन दिखाई पड़ रही थी, उसके साथ ही एक छोटी-सी नन्हीं गुड़िया उ...

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अय्याश--भाग(३०) By Saroj Verma

सत्यकाम अपनी बहन त्रिशला के घर से लौट तो आया लेकिन काशी में उसके ठहरने का कोई ठिकाना नहीं था इसलिए उसने सोचा कि यहाँ वहाँ भटकने से तो अच्छा है क्यों ना मैं काशी की किसी धर्मशाला मे...

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वीर प्रताप यह नाटक देख कर ख़ुद भी भूतकाल के काले साए में समाते जा रहे थे। प्रिया को उदास देखकर उसकी माँ ने पूछा, "प्रिया क्या हुआ बेटा, तुम इतनी उदास क्यों हो?" "माँ अमर ने मुझे धोख...

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गुलाम भारत में खुली एक छोटी सी दुकान कैसे बनी आजाद भारत का नंबर वन ब्रांड By Jatin Tyagi

हल्दीराम के प्रोडक्ट्स लगभग हर घर में इस्तेमाल किए जाते हैं. वहीं किसी भी पार्टी में नाश्ते के तौर पर लगाई जाने वाली नमकीन बिना हल्दीराम के अधूरी सी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि...

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मजदूर की बेटी By Kumar Kishan Kirti

मैं प्रतिदिन उसे शाम के वक्त पसीने से लथपथ होकर अपने घर की तरफ लौटता देखता।सिर पर मैला-कुचैला पगड़ी बांधे, शरीर पर धूलकण,पैबंद लगी पुरानी धोती पहने हुए वह अपने कंधे पर कुदाल लेकर लौ...

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आराध्या अनमनी सी सोफे पर बैठी विगत जगत में विचरण कर रही थी, सामने टेबल पर रखी चाय भाप उड़ाकर कोल्ड टी में बदल चुकी थी।अभी 14 दिन पहले तो सब ठीक ही प्रतीत हो रहा था या शायद सामान्य र...

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ढाला : ढाला शब्द शायद बहुत से लोगों को समझ न आए और खासकर आज की नई पीढी इस प्रकार के शब्दों से परिचित न हो। ढाला कहा जाता था रेलवे फाटक को। अक्सर जब कोई ट्रैन काढ़ागोला की मुख्य गंगा...

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दो वक्त की रोटी By Saroj Prajapati

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सुबह-सुबह दरवाज़े पर दस्तक हुई तब मिसेस कपूर ने दरवाज़ा खोला। गंदे मैले कपड़े पहने हुई एक स्त्री जिसके चेहरे से वह काफ़ी शालीन दिखाई पड़ रही थी, उसके साथ ही एक छोटी-सी नन्हीं गुड़िया उ...

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