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भारत के एथलिटों ने ग्लास्गो कॉमनवेल्थ गेम्स-2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए 39...
ब्लडस्टोन कैसल के भीतर—मरहम और हास्य का तड़काब्लडस्टोन कैसल के उस विशाल और रहस्य...
यह कोई काल्पनिक कहानी या फिल्म की कहानी नहीं है बल्कि आँखों देखा सच है! मैं कंपन...
प्रस्तावना मैं जब भी कभी किसी अंधभक्त लोगों से मिलता...
बारिश की शाम थी। नंदिनी स्टेशन की पुरानी बेंच पर बैठी थी। आज ठीक पाँच साल बाद उस...
आज अग्निहोत्री हाउस पूरी तरह रोशनी से जगमगा रहा था।रितांशी का जन्मदिन था। पूरा घ...
# मेरे पास माँ है## Episode 2 — बीस साल पुराना राज़**[SFX: तेज़ बारिश… खिड़की पर...
वेस्टर्न बेगम, नटखट पिया और गोद का 'गार्ड' भाग १: 'मिस' या '...
रहस्यमयी जंगल का दरवाज़ा — भाग 2लेखक: संदीप बिन्दआर्यन कुछ क्षण तक उस पत्थर के द...
यह कहानी एक काल्पनिक है.हमारी कहानी की शुरुवात कुछ ऐसे पात्रों से होती है. जो एक...
हिंदी फिल्म और वेबसिरिज़ रिव्यू.
रात के लगभग दस बज रहे थे। लोधी रोड स्थित CBI Special Crime Division के office से बाहर निकलते हुए शक्ति ने अपनी SUV स्टार्ट की। पिछले छह घंटों से चल रहे operation ने उसे थका दिया था...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
करीब चार सौ - पांच सौ साल पहले ................... शिवनगर में हुए खौफनाक हादसे के आखिरी दिन एक विचित्र घटना घटी। हुआ यूँ कि आखिरी दिन बाबा बटेश्वर की नज़र गेरुआ धोती में लिपटी...
भारत को आज़ाद हुए अभी कुछ ही वर्ष हुए थे। देश स्वतंत्र हो चुका था, लेकिन गाँवों की गरीबी अभी भी वैसी ही थी, जैसे आज़ादी की किरण पहाड़ों के उस पार कहीं रुक गई हो। पेट की आग, कर्ज क...
ઓટલો ગામની એ સવાર આજે પણ મારી આંખો સામે એવી જ ઊભી થાય છે સૂરજ હજી પૂરો ઉગ્યો ન હતો આકાશમાં હળવો લાલ રંગ પથરાયો હતો ઘરના આંગણામાં પડેલી ઠંડી માટી પર મારા નાના પગલા પડતા અને હું દોડત...
जन्म से कॉलेज तक मेरा नाम अंकित है। मैं उत्तराखंड के चमोली जिले के एक छोटे से गाँव, त्रिकोट, का रहने वाला हूँ। मेरा जन्म 29 दिसंबर को मेरे मामा के गाँव में हुआ था। मेरे नाम की...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
दोपहर का समय था।चारों ओर सूखी और पथरीली ज़मीन फैली हुई थी। दूर-दूर तक छोटी-छोटी पहाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं। उनके बीच से एक सँकरा कच्चा मार्ग निकल रहा था। उसी मार्ग के किनारे एक बड़...
मध्यमवर्गीय परिवार की 22 वर्षीय माया की हंसती-खेलती जिंदगी अचानक एक भयानक तूफान में घिर गई। उसके पिता की तबीयत अचानक बिगड़ी और अस्पताल के आईसीयू में उन्हें वेंटिलेटर पर डालना पड़ा।...
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