The Download Link has been successfully sent to your Mobile Number. Please Download the App.
You are welcome to the world of inspiring, thrilling and motivating stories written in your own language by the young and aspiring authors on Matrubharti. You will get a life time experience of falling in love with stories.
Principal मैम ने जैसे-तैसे खुद को संभाला ही था कि बाहर खड़े दो–तीन शरारती स्टूडे...
एपिसोड: 'विस्मृति का उल्लास' — सचेतन धूल का महा-नृत्य1. 'नीले ग्रह&#...
भाग -6 रुक!!! कबीर की आवाज कमरे में गूँज गई आरव का हा...
मैंने दुःख जताते हुए कहा,“हाँ छोटे भाई… अब लोगों के अंदर इंसानियत जैसे खत्म होती...
आलेख –सादर प्रकाशनार्थ सुरक्षा गार्डों की व्यथा –कथा यशवंत कोठारी शुरू शुरू में...
ग्रिसेल्डा: कोकीन की गॉडमदर के उदय और पतन की रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तान (व...
दिसंबर की उस सर्द शाम के बाद, रोहन और अनन्या का रिश्ता 'द विंटेज कैफे' क...
: यादों की सहेलगाह - प्रकरण 84 स्नेहा म...
खाने पीने का सारा अरेंजमेंट अनिक देख रहा था।टेरेस पर सारा इंतजाम किया गया था।सार...
जानवी की बात को सुनकर शमिका कहती है --शमिका: - हां जानवी ... क्यों नही , तुम दोन...
वह l लगातार स्वयं से बातें करते हुए अपने तीन मंजिले मकान में बड़ी फुर्ती से ऊपर नीचे चढ़ता उतरता रहता I वह अपने रास्ते में आने वाली हर सजीव व निर्जीव वस्तु से इशारे करके उसकी खैरि...
लड़की ने शादी अस्वीकृत की आर० के० लाल पूरे घर में उदासी छाई थी। अंकिता ने रिश्ता जो ठुकरा दिया था। उसकी दादी उसी को कोस रही थी, “ अच्छा खासा रिश्ता स्वयं चल कर आया था। ब...
बेटी को पराया धन माना जाता है।इसलिए बेटी के जवान होते ही माँ बाप को उसकी शादी की चिंता सताने लगती है।बेटी के हाथ पीले करने से पहले ही पिता इस दुनिया से चला जाये,तो माँ की चिंता और...
"क्या बात है रमेश?काफी परेशान लग रहे हो।"रमेश के चेहरे पर नज़र पड़ते ही महेश बोला था।"कुछ नही"राााेे रमेश के गले से मरी सी आवाज निकली थी।वह महेेेश के पास नही रुका औ...
"पूनम राज को फोन करके बता दो कमर्शियल होम जिम का केबल टूट गया है और कोने वाली ट्रेडमिल T- 1500 की मोटर जल गई है और राज आए तो क्रॉस ट्रेनर के. एच.- 2007 के नट बोल्ट कसने को बोल...
ऊपर आसमान के कुछ ऐसे छितरे टुकड़े और नीचे कहीं, सपाट, कहीं गड्ढे और कहीं टीलों वाली ज़मीन | गुमसुम होते गलियारे और उनमें खो जाने को आकुल-व्याकुल मन ! पता ही तो नहीं चलता किधर जाएँ ?...
छोटे-छोटे बल्बों की झालरों से घर और दरवाज़े झिलमिला रहे थे ।जैसे हर नन्हा बल्ब दुल्हन की ख़ुशी का इज़हार कर रहा हो।मैं उन्हें निहारकर उनमें अपनी मॉं के हंसते मुस्कुराते चेहरे को मह...
गोपाल माथुर 1 आँख कुछ देर से खुली. बाहर सुबह जैसा कुछ भी नहीं लगा, हालांकि सूरज निकल चुका था, पर वह घने बादलों के पीछे कैद था. बारिश बादलों में लौट गईं थीं और हवाएँ भी थक कर पेड़ों...
यह लघु उपन्यास ग्रामीण भारत में स्वतंत्रता व गांधीजी के आन्दोलन के प्रति अलख जगाने की लोमहर्षक अनकही दस्तान है I २ स्वतत्रता सेनानी द्वारा हरिजन उत्थान का प्रयास करने पर जाति वा...
"मम्मी मम्मी!" पवित्रा ने घर में घुसते हुए उत्साह से आवाज़ लगायी। किन्तु उसे घर का वातावरण कुछ बोझिल सा महसूस हुआ। मुकेश हमेशा की तरह टी.वी. पर घटिया और साजिशों से भरे पारिव...
लॉग इन करें
लॉगिन से आप मातृभारती के "उपयोग के नियम" और "गोपनीयता नीति" से अपनी सहमती प्रकट करते हैं.
वेरिफिकेशन
ऐप डाउनलोड करें
ऐप डाउनलोड करने के लिए लिंक प्राप्त करें
Copyright © 2026, Matrubharti Technologies Pvt. Ltd. All Rights Reserved | Powered by Nichetech.
Please enable javascript on your browser