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भोर की प्रार्थना समाप्त होते ही शिबू बिना किसी को कुछ बताए मठ से निकल पड़ा। पूर्...
नरेश गुलाटी अस्मिता अहमदाबाद महिला लेखकों का ऐसा संगठन है जो अपनी उपस्थिति काफ़ी...
The Kingdom That Put a Fiction on Trial एक डार्क फैंटेसी महाकाव्य है, जहाँ राजनी...
उस रात श्रेया बहुत ज़्यादा थकी हुई थी। इतनी थकी हुई कि शरीर से ज़्यादा उसका मन ज...
लघु कथा जमीनएक जमीन से न जाने कितने रिश्ते जुड़े होते हैं, और न जाने कितने स्वार...
रहस्यमयी हवेली का आख़िरी कमराबरसात की काली रात थी। गाँव के बाहर बनी सौ साल पुरान...
---------------अवासा की वादियाँ जितनी हसीन थीं, यहाँ का मौसम उतना ही अप्रत्याशित...
पुस्तकालय के शीशों पर रात भर से हो रही मौत की दस्तक अब थमती हुई महसूस हो रही थी।...
The Mysterious Kids and Great Chaosअध्याय 1 प्लेटफॉर्म 9¾ का जादूरात के ठीक 12 ब...
एक आम सी प्रेम कहानी भाग- १लेखिका "अनामिका"लेखिका की ओर सेअक्सर ऐसा होता हे की ह...
मुम्बई वो शहर जहाँ लोग आँखों में सपने बसाएँ आते हैं। दिन की रौशनी और रात की चकाचौंध, हमेशा न इस शहर काे जिंदा रखती हैं। पर इस रौशनी और चकाचौंध के पीछे छिपे हैं कई राज़। जिनको किसी...
राजस्थान एक ऐसा प्रदेश जिसका नाम सुनकर ही चारों तरफ रेत ही रेत महसूस होने लगती है | जिसने कभी राजस्थान नहीं देखा उसकी नज़र में राजस्थान एक बंजर भूमि के अलावा कुछ नहीं | वास्तव में ऐ...
कई साल पहले तक जो भी मुझे देखता था वो यही कहता था कि इसके उपर किसी बुरी आत्मा का वास है, लेकिन मेरे घर वाले इस बात को मानने के लिए राजी नही थे. घर वालों ने मुझे बहुत सारे डॉक्टरों...
मैं यानि पवन पेसे से एक अकाउंटेंट, ऑफिस से निकल कर मैं पास के ही बस स्टॉप पे बस का इंतजार कर रहा था। ये वो दौर था जब देश अभी उतना डिजिटल नहीं हुआ था, और भगवन की कृपा से अभी फ़ोन नही...
पापा की जोब मुम्बंई ट्रान्सफर हुई थी।कल रात ही पापा-मम्मी और मे विस्वकर्मा एपार्टमेन्ट के आठवे माले पे फ्लेट नंबर 103 मे सीफ्ट हुए थे।लगभग सारा सामान आ चुका था।लेकिन कुछ स...
फिर कौन था वो? शिल्पा शर्मा (1) ‘‘याद है न तुम्हें, हमारी शादी को छह महीने हो गए हैं आज,’’ थके-हारे ऑफ़िस से लौटे पति को चाय थमाते हुए मीता ने बड़े उत्साह से कहा. ‘‘हम्म...’’ बड़ा...
ज़िन्दगी के सफ़र में चलते हुए कई बार ऐसे अनुभव होते हैं जिन्हें आप सारी उम्र नहीं भूल पाते हैं । मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही अनुभव हुआ जब मैं छुट्टियों में अपने रिश्ते के मामा के घर गया...
नमस्ते दोस्तो। आपके ढेर सारे प्यार के लिए आपका बहुत बहुत धन्यवाद करती हूँ। आपने मेरी लेखनी को सराहा उसका शुक्रिया शब्दो मे करना कम ही होगा। आपके इस प्यार को बरकरार रखते हुए में...
सुनसान् जगंल, रात के दो बजे । बडी अजीब लगती है । छोटी सी छोटी आवाज भी हमे डरा देती है । जब हम चलते हैं तो यैसा लगता है जैसे की हमारे साथ या पिछे कोई है । बहत खोफनाक होत...
तुझे मना किया था ना,अपार फिर तू क्यो गया?वहां तुझे कुछ हो जाता तो, मैं इसलिए मना कर रही थी कि तू मेरे साथ मत आ,वो तो मैं समय से पहुंच गई नहीं तो____ अब खड़ा क्या है,चल उठा ये पानी...
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