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एपिसोड 5: "अधूरा सच और खून का रिश्ता"सुप्रीम यास्किन के निजी कक्ष में सन्नाटा इत...
शक्कर और आंसूराठौर मेंशन का किचन (रसोई) सान्वी के माता-पिता के घर से भी बड़ा था।...
महीनों से त्रिशा के घर में जिस शादी की तैयारियां चल रही थी आखिरकार वह शादी पूरे...
W-22 : The Door That Should Not ExistSEASON 3 – “THE WATCHERS”कहते हैं…अगर कोई च...
रुशाली बिना कुछ कहे वहाँ से चली गई।मयूर सर कुछ पल तक उसी जगह खड़े रहे। उन्हें सम...
आदित्य :- कृतिका , छोड़ो , चुप हो जाओ ।कृतिका :- क्या चुप हो जाओ । ये अपने आपको...
तभी ऑफिस में देव के सर आ जाते हैं।बॉस के आते ही देव उनसे मिलने जाता है।क्या मैं...
अर्शित गुस्से और बेचैनी के बीच अपने घर पहुँचता है। उसके दिमाग़ में सिर्फ़ सिया क...
बुआ की शादीकुंती -मां सुबह जल्दी उठा देना कॉलेज जाना है। बच्चों की किलकारी कभी स...
हड्डियों से बने उस शहर के बीच खड़े अमन और रिया की साँसें बेकाबू थीं, दिल इतनी ते...
शहनाज़! कहाँ जा रहीं हैं आप? हमीदा ने अपनी बेटी से पूछा।। अम्मीजान घर में बैठें बैठें बोर हो गए हैं,सोच रहे थे कि बाहर ही घूम आएं,शहनाज़ बोली।। सुनिए ये गाँव है आपका शहर नहीं है जो...
अब्बा आपको यह काम अपने ऊपर नहीं लेना था । " " क्या करूं बेटा पेट का सवाल है और तो और ऊपर से यह काम जमींदार साहब ने दिया है । अगर मना कर दूँ तो जीना हराम हो जाएगा । "...
'डर, अजीब सा डर मेरे दिलो-दिमाग को दिमक की तरह अंदर से खा रहा है। 'रात' के इस काले अंधेरे में फैले खौफनाक सन्नाटे के बीच उस डर का असर कुछ ज्यादा ही हो रहा है. पर इस डर...
जब से फैक्ट्री मे मेरी दूसरी पाली की शिफ्ट ड्यूटी लगी थी, तब से रात्रि में घर जाने मे काफी देर हो जाया करता था। ऑफिस से घर की दूरी यही करीब एक किलोमीटर की रही होगी। जब तक बहुत ज...
रात के कुछ बारह बज रहे होंगे नितिन के कमरे से कुछ आवाजें उसकी माँ को सुनाई दी " नितिन तुम क्या कर रहे हो " उसकी माँ ने बाहर से आवाज देते हुए पूछा । एकाएक अंदर से सभी च...
कभी-कभी हमारे साथ कुछ ऐसी घटनाएँ बन जाती है जो पूरे जीवन तक हमें याद रहेती है।लाख भूलानेकी कोशिश करो मगर हम नाकामियाब रहते है।मे आकाश, मेरे साथ भी कुछ ऐसा हुआ था।वो वाकया याद आता ह...
हैलो दोस्तो ! मेरी पहली कहानी में आपका स्वागत है। यह कहानी है एक लडकी की जो गांव में अपने माता-पिता के साथ रहती है। खुशी। एक प्यारी सी, शर्मीली सी लड़की है। खुशी अपने काम से...
नमस्कार...! में फिर आ गया हूं, एक नवलकथा लेकर। आप सबने मेरी पिछली सभी कहानीओ को जितना प्यार दिया है, वैसा ही प्यार आप इस कहानी को भी देंगे ऐसी आशा है। ये कहानी है रवि और स्नेहा की।...
“ अरे जल्दी भाग.. वो पीछे आ रहे हैं, तू ऐसा कर इधर से भाग जा, दोनों साथ रहेंगे तो ज्यादा खतरा है, तू मुझे उस मोड वाले कब्रिस्तान में मिल, मैं वही तेरा इंतजार करूंगा" रूपेश न...
"अरे बेटा...दही चीनी तो खा ले, फिर जा क्लिनिक पर" माँ ने सुभाष को रोकते हुए कहा | सुभाष - "क्या माँ..तुम भी ना, दही चीनी से किसी का दिन शुभ नहीं होता, मुझे देर हो रही...
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