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{रहे तेरी दुआ मुझ पर - जोदाहवां हिस्सा}{जादूई ताकत का हकदार और गुलनाज की शैतानी}...
कुंभ्मन परेसान होकर कहता है--> ये....ये मुझे क्या हो रहा है । मैं....मैं ठीक से...
राजमहल के सभा-कक्ष में सन्नाटा पसरा था। कुंवर प्रताप हल्की सी मुस्कान के साथ बोल...
अस्पताल से निशा को लगभग 34 दिन के बाद छुट्टी दे दी गई संगीता अब हर वक्त उसके साथ...
सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही थी।राधा की नींद सबसे पहले खुली।उसने क...
एक साल बाद मैं गोवा में एक छोटे से क्लिनिक में काम करता था। मुंबई से दूर, अपनी प...
मैं दादा-दादी की लाडली – 6दूसरी शादी — वही टूटा भरोसायह “मैं दादा-दादी की लाडली”...
Doctor cabin. Shreya chair पर बैठी है, आँखें बंद, हल्का दर्द अभी भी बना है। Kabi...
रात के दस बज चुके थे। बच्चों को सुलाने के बाद काया ने पूरे घर का चक्कर लगाया। ड्...
(जीवन का प्रत्यक्ष विज्ञान-दर्शन — वेदांत 2.0) अज्ञात अज्ञान...
अंधेरा... सिर्फ घना अंधेरा और चारों तरफ खून की गंध। यह एक विशाल साम्राज्य की कालकोठरी, जहाँ की दीवारों पर कभी सोने की नक्काशी होती थी, आज वहां सिर्फ लोहे की जंजीरों की खनखनाहट थी।...
सूर्य कैसा है ! सूर्य क्या है ! सूर्य हमारे सौर मंडल का सबसे बड़ा ग्रह है . वैगेनिकों के अनुसार इसका जन्म या इसकी उत्पत्ति लगभग 460 करोड़ वर्ष पूर्व हुई थी . यह एक घूमता हु...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
योगेश और संगीता का घर जगमगा रहा था। सुंदर बिजली की लड़ियाँ मानो बार-बार खिलखिला कर हँस रही थीं। आने-जाने वालों का मन मोहने वाली इस घर की सुंदरता में ताज़े फूलों की ख़ुशबू अपनी उपस्...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
यह कहानी है हमारे ब्रह्मांड R3G7 की... एक ऐसा ब्रह्मांड जो अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था। तबाही का समय निकट था, लेकिन पृथ्वी के लोग अभी भी अनजान थे। पृथ्वी पर सात राज्य थे, जि...
मुंबई कभी नहीं सोती. रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए की तरह. आकृति मेहता इन्हीं सायों में खडी थी. दुनिया की नजरों में वह आज भी वही थी...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
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