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संस्मरण मेरी साहित्यिक यात्रा - सुधीर श्रीवास्तव से यमराज मित्र तक ******** ...
मल्होत्रा का महलमल्होत्रा का महल…घर कम, ऐलान ज़्यादा था।ऊँचे काले लोहे के गेट उन...
— "ब्रह्मांड की दरार: 5वीं सदी का वो खौफनाक सफर"दृश्य 1: भविष्य की चेतावनीस्थान:...
फाइनल टेस्ट पास करने के बाद तारा की भूमिका सहयोग फाउंडेशन में बदल चुकी थी. अब वह...
लिव-इन कमल चोपड़ा अरुण...
गार्ड्स चिल्लाए। अनन्या कमरे से बाहर निकली, दिल धक्-धक्। आर्यन दौड़ता आया, हाथ म...
उसे इस तरह तड़पते हुए देख सभी घबरा से गये थें। पार्टी-वार्टी छोड़ वे सब उसे घेरे...
कहते है जीवित बचे रहना बहुत बड़ी बात है पर कोई ये नहीं जानता उसकी भी एक कीमत है।_...
उस दिन मनमोहन और प्रार्थना किसी काम से गाँव के दूसरे छोरगए हुए थे। घर पहली बार प...
सब औरतों की हँसी-मज़ाक चल रही थी।किसी के नए सूट की बात…किसी के मायके जाने की तैय...
पुलिस स्टेशन के सामने, धूप में झुलसता हुआ एक बूढ़ा आदमी घुटनों के बल पड़ा था। उसकी आँखों के आंसू कब के सूख चुके थे, पर चेहरा अब भी रो रहा था। उसकी कांपती उंगलियाँ जमीन पर ऐसे...
यह कहानी है हमारे ब्रह्मांड R3G7 की... एक ऐसा ब्रह्मांड जो अब अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था। तबाही का समय निकट था, लेकिन पृथ्वी के लोग अभी भी अनजान थे। पृथ्वी पर सात राज्य थे, जि...
मुंबई कभी नहीं सोती. रात के तीन बजे भी इसकी सडकों पर जिंदगी बहती रहती है—कभी रोशनी बनकर, कभी साए की तरह. आकृति मेहता इन्हीं सायों में खडी थी. दुनिया की नजरों में वह आज भी वही थी...
मजबूरी की शादीबारिश की वो रात भूला न जाने वाली थी। पटना की तंग गलियों में पानी की धाराएँ तेज़ी से बह रही थीं, सड़कें नदियों में बदल चुकी थीं। मानो आसमान भी अनन्या मिश्रा के आँसुओं...
यह दुनिया बहुत बड़ी है और सबके खयालात भी अलग होते हैं, इसलिए मैंने आज कुछ अलग सोचा है, हां मानती हूं कि इस विषय में बहुत सी कहानियां और नोवेल्स होंगी मगर फिर भी एक अलग नजरिए से इस...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
सुबह का समय था।शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन सड़कों पर भागती जिंदगी की आहट सुनाई देने लगी थी। चाय की केतली से उठती भाप के साथ मिश्रा जी बरामदे में कुर्सी डालकर अख़बार पढ़ रह...
पौराणिक कथाओं में विष्णुभक्त प्रह्लाद की कथा का अत्यंत महत्त्व है। यह कथा अन्याय, अत्याचार एवं अभिमान पर न्याय, सदाचार और स्वाभिमान की जीत की शिक्षा देती है। यह कथा उस समय की है, ज...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
मौत का दस्तक बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...
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