सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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कंचन मृग - 22-23. पत्र अपने पास रख लिया By Dr. Suryapal Singh

22. पत्र अपने पास रख लिया- शिशिरगढ़ चामुण्डराय ने घेर लिया, यह सूचना प्राप्त होते ही महाराज परमर्दिदेव चिन्तित हो उठे। उन्होंने अपने मन्त्रियों से विचार विमर्श किया। सभी को यह आशंका...

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आधुनिक बहू, परंपरा का सम्मान By H M Writter0

रिया, एक तेजतर्रार ग्राफिक डिज़ाइनर, हमेशा से ही अपनी शर्तों पर जीने में विश्वास रखती थी। शादी के बाद, ससुराल आना उसके लिए एक नया अनुभव था। रिया की सासूजी, शांतिदेवी, एक सख्त परंपर...

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यूँ ही सफर में By Arvend Kumar Srivastava

“मैं सोचता हूँ कि अब इस घर को बेच दूँ।“राघव (राघवेन्द् ) ने अपने कमरे की खिड़की से बाहर खुले आसमान की ओर बहुत दूर तक देखते हुए कहा। अगले ही पल राघवेन्द्र ने अपनी दृष्टि को दूर आसमान...

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सर्कस - 10 By Madhavi Marathe

                                                                                         सर्कस:१०         हम लडकों ने पहले ही तय किया था कि अरुण सर जहाँ बैठेंगे उन्ही के अगल-बगल की...

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शोहरत का घमंड - 66 By shama parveen

अरुण की बाते सुनकर आर्यन हंसने लगता है और बोलता है, "अभी आगे आगे देख भाई क्या होता है।उसके बाद आर्यन आलिया के पास चला जाता हैं। आर्यन चाय ले कर जाता हैं।आलिया बोलती है, "मैं चाय नह...

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उजाले की ओर –संस्मरण By DrPranava Bharti

=================== नमस्कार मित्रो जीवन के अनुभवों से हम न जाने कितना कितना सीखते हैं। एक दिन में न जाने...

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हरसिंगार By Bharati babbar

डॉक्टर के चले जाने के बाद भी आभा देर तक बरामदे में ही बैठी रही।मेज़ पर चाय की जूठी प्यालियों के नीचे मेडिकल रिपोर्ट के पन्ने फड़फड़ाते रहे।कमरे से टीवी चलने की आवाज़ आ रही थी लेकिन आभा...

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कलयुग के श्रवण कुमार - 9 By संदीप सिंह (ईशू)

कलयुग के श्रवण कुमार........ मनोहर ने मुरली से पूछा था- "क्या हो गया था मुरली ।" कुछ नही मनोहर काका.. (सुबकते हुये) मैं खेत से लौटा था, तबियत ठीक नही लग रही थी बुखार था कल दोपहर से...

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बन्धन प्यार का - 24 By Kishanlal Sharma

और उस दिन तो नगमा चली गयी थी।लेकिन जफर और नगमा निकाह का मन बना चुके थे।सलमा ने यह बात अपने फोन करके अब्बू को बताई थी।अब्बू बोले,"तुम ही समझा सकती हो।अगर मान जाए तो लेकिन जफर कह...

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एडोप्टेड फैमिली By bhagirath

“जानते हो पापा आजकल किसी के चक्कर में फंस गए है।”                                                                 “अच्छा! किसके चक्कर में?” “कोई बाल बच्चेदार महिला है, उससे फेसबुक...

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किस्से - कहानियां By DINESH KUMAR KEER

1. गांठ रिश्तों की "पापा! ताईजी को शायद कैंसर है!" बेटा धड़धड़ाते हुए कमरे में घुसा."कहां से चले आ रहे हो रिपोर्टर बने हुए? पता भी है क्या बोल रहे हो..?" मैंने महसूस किया कि दिसंबर...

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प्यारी बेटी By DINESH KUMAR KEER

प्यारी बेटी (बेटी है तो कल है) किसी गाँव में एक परिवार रहता था। उस परिवार में गणेश अपनी पत्नी रेखा, छोटा बेटा दिनेश, बहू विमला, पौत्री अनन्या के साथ रहता था। गणेश का बड़ा बेटा विका...

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वर्तमान का सिख पंथ ही क्षत्रिय रुपरेखा By Ritin Pundir

क्या आपको मालूम है कि पहला खालसा राज स्थापित करने वाले बाबा बंदा सिंघ बहादर जी राजपूत थे, आधुनिक खालिस्तान मूवमेंट के संस्थापक जगजीत सिंघ चौहान जी राजपूत थे, बब्बर खालसा इंटरनेशनल...

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कौन थे प्रधानमंत्री चंद्रशेखर सिंह By Ritin Pundir

10 नवंबर 1990 को कार्यभार संभालने के 12 दिनों के ही भीतर चंद्रशेखर पांचवे सार्क शिखर सम्मेलन में भाग लेने माले मालदीव गए. वहाँ उन्होंने ठेठ हिंदी औऱ अपनी मातृभाषा भोजपुरी में ज़बर्...

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क़िस्सा 1930 का By Wajid Husain

वाजिद हुसैन की कहानी 12 मार्च 1930 को एक यात्रा शुरू हुई थी। एक ऐसी यात्रा जिसने सारी दुनिया को दिखाया, कि कैसे 80 लोगों की निहत्थी सेना अपने अहिंसक सत्याग्रह के रास्ते चलकर दुनिया...

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कंचन मृग - 22-23. पत्र अपने पास रख लिया By Dr. Suryapal Singh

22. पत्र अपने पास रख लिया- शिशिरगढ़ चामुण्डराय ने घेर लिया, यह सूचना प्राप्त होते ही महाराज परमर्दिदेव चिन्तित हो उठे। उन्होंने अपने मन्त्रियों से विचार विमर्श किया। सभी को यह आशंका...

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क़िस्सा 1930 का By Wajid Husain

वाजिद हुसैन की कहानी 12 मार्च 1930 को एक यात्रा शुरू हुई थी। एक ऐसी यात्रा जिसने सारी दुनिया को दिखाया, कि कैसे 80 लोगों की निहत्थी सेना अपने अहिंसक सत्याग्रह के रास्ते चलकर दुनिया...

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