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अब नहीं सहुंगी... By Sayra Ishak Khan

हल्लो दोस्तों...मैं एक बार फिर से आप लोगो के सामने एक नई कहानी लेकर हाजिर हूं ! मुझे उम्मीद है ,आप सभी को मेरी ये कहानी भी पसंद आएगी! मेरी कहानी ऐसी फिमेल पर है जो ऑफिस वर्क करती ह...

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दहलीज़ के पार By Dr kavita Tyagi

उस दिन गरिमा अपने विद्यालय से लौटकर घर पहुँची, तो उसकी माँ एक पड़ोसिन महिला के साथ दरवाजे पर खड़ी हुई बाते कर रही थी। गरिमा जानती थी कि वह महिला, जो उसकी माँ के साथ बाते कर रही थी, क...

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कहाँ गईं तुम नैना By Ashish Kumar Trivedi

एक गलतफहमी के कारण आदित्य और नैना अलग हो गए। लेकिन यह अलगाव भी उनके प्यार को कम नहीं कर सका। इसीलिए जब आदित्य को नैना के अचानक गायब हो जाने का पता चला तो उससे रहा नहीं गया। नैना को...

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नया सवेरा - (सवेरे का सूरज) By Yashvant Kothari

खट। खट।।
’’कौन ? ‘‘
’’जी। पोस्टमैन। बाबू जी आपकी रजिस्टी है। आकर ले लें। ‘‘अभिमन्यु घर से बाहर आया। दस्तखत किये। लिफाफा लिया। खोला। पढ़ा। और खुशी से चिल्ला पड़ा।
‘‘मॉ। मॉं मुझे नौ...

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संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि By Manoj kumar shukla

संवेदनाओं के स्वरः एक दृष्टि (1) हे माँ वीणा वादिनी ..... हे माँ वीणा वादिनी, शत् शत् तुझे प्रणाम । हम तेरे सब भक्त हैं, जपते तेरा नाम ।। शांत सौम्य आभा लिए, मुख में है मुस्कान । ग...

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आई तो आई कहाँ से By Dr Sudha Gupta

आरुषि ........ आरुषि ........
हाँ मम्मा, मैं यहाँ हूँ l अपनी गुड़िया के साथ खेल रही हूँ l
अच्छा, अच्छा अब जल्दी से तैयार हो जा, शाम हो गई है, चल मैं तेरी चोटी गूँथ दूँ l
हाँ,...

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काँटों से खींच कर ये आँचल By Rita Gupta

क्षितीज पर सिन्दूरी सांझ उतर रही थी और अंतस में जमा हुआ बहुत कुछ जैसे पिघलता जा रहा था. मन में जाग रही नयी-नयी ऊष्मा से दिलों दिमाग पर जमी बर्फ अब पिघल रही थी. एक ठंडापन जो पसरा हु...

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हवाओं से आगे By Rajani Morwal

“जाना है... जाने दो हमें... छोरो, न... चल परे हट लरके ! ए दरोगा बाबू सुनत रहे हो !”
“क्या चूँ-चपड़ लगा रखी है तुम लोगों ने ?” दारोगा ज़रा नाराज़ लहज़े में बोला या ये भी हो सकता है कि...

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वो कौन थी.. By SABIRKHAN

(अपने अंदाज को बरकरार रखते हुये एक और कहानी लेकर हाजिर हुं ) १ मकान हवा उजास वाला और काफी बडा है जिजु..! निगाहने सारे कमरे का मुआयना करके अरमान...

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ख़्वाबगाह By Suraj Prakash

एक बार फिर विनय का फोन। अब तो मैं मोबाइल की तरफ देखे बिना ही बता सकती हूं कि विनय का ही फोन होगा। वह दिन में तीस चालीस बार फोन करता है। कभी यहां संख्या पचास पार कर जाती है। और इतनी...

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