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मुखौटा ही मुखौटा By Heena_Pathan

" मुखौटे दिख रहे हैं आजकल मुखौटे बिक रहे हैं आजकल

सच दबाया जा रहा है झूठ बिक रहे हैं आजकल यूँ तो सब ज्ञानी हैं यहाँ परिस्थितियों को देख ज्ञान दे रहे आजकल।

इंटरनेट के इस द...

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इस सुबह को नाम क्या दूँ - महेश कटारे By राज बोहरे

रामरज शर्मा अभी अपना स्कूटर ठीक तरह से स्टैंड पर टिका भी नहीं पाए थे कि उनकी प्रतीक्षा में बैठा भगोना-चपरासी खड़ा हो, चलकर निकट पहुँच गया-'मालिक आपकी बाट देख रहे हैं ....बहुत जर...

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सर्कस By Keval Makvana

रॉयल सर्कस शहर का प्रसिद्ध सर्कस था। वहा शो सप्ताह में तीन दिन होता था, इसलिए टिकट खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी। इस सर्कस के फेमस होने के पीछे की वजह वहां पर किए गए भय...

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अमलतास के फूल By Neerja Hemendra

वो एक वामा हैं मोबाइल फोन की घंटी बजी। मैं उठ कर नम्बर देखती हूँ। यह नम्बर चन्दा चाची का है। आज लम्बे अरसे बाद उनका फोन आया है। मैं उत्सुकतावश तीव्र गति से फोन रिसीव करती हूँ। मेरे...

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अक्षम्य अपराध By Rama Sharma Manavi

प्रस्तर मूर्ति के समान स्थिर बैठी दिव्या निर्निमेष,सूनी अश्रुविहीन नेत्रों से सामने की दीवार देखे जा रही थी।सफेद चेहरे पर ठहरी हुई पुतलियां इंगित कर रही थीं कि वह जीवित तो है, प...

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ज़िन्दगी सतरंग.. By Sarita Sharma

अम्मा की नजरें सामने आती स्कूटी की तरफ़ ही टिकी हुई थी.. कौन है? कौन नहीं ये जानने के लिए अम्मा बेख़ौफ़ होकर सड़क पर स्कूटी के सामने ही आ रही थी.. पी..ईईईप....पीईईईईईईईप........ मैं जो...

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सपने By Kishanlal Sharma

वह अपने देश से दुबई गया तब उसके जेहन में ढेर सारे सपने थे।उसने सोचा था।परिवार की सारी दरिद्रता और अभाव हमेशा के लिए खत्म कर देगा।उस समय उसके मन मे यह ख्याल नही आया था कि जरूरी नही...

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स्वतंत्र सक्सेना की कहानियाँ By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

कहानी स्मृति की पोटली होती है| जो कुछ घट चुका है उसमें से काम की बातें छाँटने का सिलसिला कहानीकार के मन में निरंतर चलता रहता है| सार-तत्व को ग्रहण कर और थोथे को उड़ाते हुए सजग कहानी...

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उदास इंद्रधनुष By Amrita Sinha

उदास इंद्रधनुष ************ रात के दस बजने वाले थे। कोमल सोने की तैयारी में लगी थी । सिरहाने पानी की बोतल रख, कमरे की बत्...

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विश्वासघात By Saroj Verma

नन्दपुर गाँव___
ओ..बेला की माँ !जरा सम्भालों तो अपने लाल को देखो तो बस,रोए ही जा रहा है, दयाशंकर ने अपनी पत्नी मंगला से कहा।।
आती हूँ जी! तुम्हारा ही तो काम कर रही थीं, तुम्हा...

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मुखौटा ही मुखौटा By Heena_Pathan

" मुखौटे दिख रहे हैं आजकल मुखौटे बिक रहे हैं आजकल

सच दबाया जा रहा है झूठ बिक रहे हैं आजकल यूँ तो सब ज्ञानी हैं यहाँ परिस्थितियों को देख ज्ञान दे रहे आजकल।

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इस सुबह को नाम क्या दूँ - महेश कटारे By राज बोहरे

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सर्कस By Keval Makvana

रॉयल सर्कस शहर का प्रसिद्ध सर्कस था। वहा शो सप्ताह में तीन दिन होता था, इसलिए टिकट खरीदने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती थी। इस सर्कस के फेमस होने के पीछे की वजह वहां पर किए गए भय...

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अमलतास के फूल By Neerja Hemendra

वो एक वामा हैं मोबाइल फोन की घंटी बजी। मैं उठ कर नम्बर देखती हूँ। यह नम्बर चन्दा चाची का है। आज लम्बे अरसे बाद उनका फोन आया है। मैं उत्सुकतावश तीव्र गति से फोन रिसीव करती हूँ। मेरे...

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अक्षम्य अपराध By Rama Sharma Manavi

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ज़िन्दगी सतरंग.. By Sarita Sharma

अम्मा की नजरें सामने आती स्कूटी की तरफ़ ही टिकी हुई थी.. कौन है? कौन नहीं ये जानने के लिए अम्मा बेख़ौफ़ होकर सड़क पर स्कूटी के सामने ही आ रही थी.. पी..ईईईप....पीईईईईईईईप........ मैं जो...

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सपने By Kishanlal Sharma

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स्वतंत्र सक्सेना की कहानियाँ By बेदराम प्रजापति "मनमस्त"

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आती हूँ जी! तुम्हारा ही तो काम कर रही थीं, तुम्हा...

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