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Featured Books

वो जो मेरा था By Neetu Suthar

शहर की गलियों में उस दिन बरसात कुछ ज़्यादा ही बेक़रार थी...
जैसे बादलों के पास कहने को बहुत कुछ हो और वो किसी से छुप-छुप कर रो रहे हों।

काव्या, एक छतरी के बिना, बूँदों से भीगती...

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बिराज बहू By Sarat Chandra Chattopadhyay

हुगली जिले का सप्तग्राम-उसमें दो भाई नीलाम्बर व पीताम्बर रहते थे।
नीलाम्बर मुर्दे जलाने, कीर्तन करने, ढोल बजाने और गांजे का दम भरने में बेजोड़ था। उसका कद लम्बा, बदन गोरा, बहुत ही...

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परिणीता By Sarat Chandra Chattopadhyay

विचारों में डूबे हुए गुरूचरण बापु एकांत कमरे में बेठें थे। उनकी छोटी पुत्री ने आकर कहा-‘बाबू! बाबू। माँ ने एक नन्हीं सी बच्ची को जन्म दिया है।’ यह शुभ समाचार गुरूचरण बाबू के हृदय म...

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राय साहब की चौथी बेटी By Prabodh Kumar Govil

राय साहब की चौथी बेटी प्रबोध कुमार गोविल 1 कॉलेज की पूरी इमारत जगमगा रही थी। ईंटों से बनी बाउंड्री वॉल को रंगीन अबरियों और पन्नियों से सजाया गया था। आज इस पर पांव लटका कर लड़के बैठ...

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वो कौन थी.. By SABIRKHAN

(अपने अंदाज को बरकरार रखते हुये एक और कहानी लेकर हाजिर हुं ) १ मकान हवा उजास वाला और काफी बडा है जिजु..! निगाहने सारे कमरे का मुआयना करके अरमान...

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चुड़ैल वाला मोड़ By VIKAS BHANTI

घनी सी रात में वो थरथराई सी हाइवे पर खड़ी थी , हर आते जाते मुसाफिर को हाथ देती l उसके बिखरे से बाल और स्याह सफेद सलवार सूट शायद राहगीरों को रुकने नहीं देना चाहता था l कई कहानियाँ थी...

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मौत का खेल By Kumar Rahman

जासूसी उपन्यास मौत का खेल कुमार रहमान कॉपी राइट एक्ट के तहत जासूसी उपन्यास ‘मौत का खेल’ के सभी सार्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित हैं। किसी भी तरह के उपयोग से पूर्व लेखक से लिखित अनु...

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दहलीज़ के पार By Dr kavita Tyagi

उस दिन गरिमा अपने विद्यालय से लौटकर घर पहुँची, तो उसकी माँ एक पड़ोसिन महिला के साथ दरवाजे पर खड़ी हुई बाते कर रही थी। गरिमा जानती थी कि वह महिला, जो उसकी माँ के साथ बाते कर रही थी, क...

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कहाँ गईं तुम नैना By Ashish Kumar Trivedi

एक गलतफहमी के कारण आदित्य और नैना अलग हो गए। लेकिन यह अलगाव भी उनके प्यार को कम नहीं कर सका। इसीलिए जब आदित्य को नैना के अचानक गायब हो जाने का पता चला तो उससे रहा नहीं गया। नैना को...

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उजाले की ओर By Pranava Bharti

मित्रों ! प्रणाम जीवन की गति बहुत अदभुत है | कोई नहीं जानता कब? कहाँ?क्यों? हमारा जीवन अचानक ही बदल जाता है ,कुछ खो जाता है ,कुछ तिरोहित हो जाता है |हम एक आशा की प्रतीक्षा में खड़े...

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