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21 जनवरी की वो सुबह कुछ अलग थी। कान्हा बाइक लेकर आए थे और उन्होंने मुझे पीछे बिठ...
Part 18 डायरी का आखिरी पन्ना...मेरे हाथ अब काँपने लगे थे। पता नहीं क्यों... ऐसा...
रात का समय था…कोरिया में लाइट्स चमक रही थीं…और सुनामी अपने केबिन में अकेली बैठी...
**Sirf Tumhara** **Part 6**रुद्र की मुट्ठियाँ इतनी जोर से भींची हुई थीं कि उसके...
AI का विकल्प : क्या प्राचीन भारत में चेतना-आधारित बुद्धिमत्ता की कोई परंपरा थी?म...
वह दोनों तैयार हो कर नीचे आईं तो सब लॉन में बैठे चाय पी रहे थे।"गई नही तुम दोनों...
हॉस्पिटल से बाहर निकलते ही ऐसा लग रहा था जैसे अंकिता और उसकी माँ की दुनिया एक ही...
अध्याय १: बिजली, बादल और भूली हुई प्रार्थनाआसमान उस रात फटने को था। रामटोला के ऊ...
किसन कुमार शिव नारायण के सामने हाथ जोड़ते है और कहते है --किसन कुमार: - संबंधी ज...
40. चमड़ी का मोहजिसे तुम प्रेम कहते हो, वह बस एक बीमारी है,खाल के रंग-रूप पर, ये...
“शिफ़ा शिफ़ा....”,अनस सहन में खड़ा उसको आवाज़ कम दे रहा था और चि़ल्ला ज़्यादा रहा था।“क्या मुसीबत है, कभी तो चैन से खाना खाने दिया करो। हर वक़्त सर पर नाज़िल रहते हो”वह बड़बड़ाती ह...
खामोश हवेली का रहस्य रात के सन्नाटे को चीरती हुई अयान मल्होत्रा की महँगी एसयूवी (SUV) शहर के शोर-शराबे से दूर, उस सुनसान इलाके की ओर बढ़ रही थी जहाँ बरसों पुरानी 'ब्लैकवुड हवे...
विराट का आलीशान घर – सुबह रसोईघर में संपूर्णा (चाय बनाते हुए, मुस्कान के साथ) बोली - अच्छा, आज विराट जी को जल्दी जाना है, तो चाय गर्म और नाश्ता तैयार। विवान, अपना खिलौना इध...
एपिसोड 1: वीरान हवेली की अनकही दस्तक पहाड़ों की ऊँचाइयों पर, घने चीड़ के पेड़ों के बीच छिपी हुई थी— नीलगिरी हवेली। लेकिन अब— यहाँ सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो कानों...
भाग 1: देवपुर रियासत सन 1926, भारत भूमि पर फिरंगियों का क्रूर शासन अपने चरम पर था। चारों ओर गुलामी की ज़ंजीरें जकड़ी हुई थीं, लेकिन उसी दौर में राजपूताने और जंगलों के बीच ब...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
पहला हा सही सुना अपने कुछ उसके बारे में एहसास से ज्यादा करने का मन हो रहा है सोचा कुछ लिखा ही जाए बस कुछ गुदगुदहात सी होती है न जब पहला प्यार , इजहार ,पहली मुलाकात , जै...
बहुत लंबे और थकान भरे दिन के बाद अगर जिंदगी में कहीं सुकून है तो वो है सिर्फ़ ये मसाला चाय! मैं अपने घर की बालकनी में एक खाट पर बैठी थी। पास में एक हुक्का रखा हुआ था जिसे मैं घूरे...
लोग कहते हैं कि जीवन में पैसा ही सब कुछ होता है। यह बात मैं नहीं कहता—मेरे आसपास के सभी लोग कहते हैं। बचपन से ही मैं यह सुनता आया था कि अगर आपके पास पैसा हो, तो जीवन की हर चीज आसान...
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