कविता कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Poems in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cultures. Th...Read More


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  • सिर्फ तुम.. - 4

    सिर्फ तुम-4खत्म हो जाते हैं कुछ रिस्ते यूँही,बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी,और साथ मे...

  • बेनाम शायरी - 5

    बेनाम शायरी?? ?? ?? ?? ?? ??हम चांद को पाने की हिमाकत लिए बै...

  • मे और मेरे अह्सास - 17

    मे और मेरे अह्सास 17 चुप चुप से महफ़िल में बेठे है वो lजाम पे जाम पिया है, चुप ह...

सिर्फ तुम.. - 4 By Sarita Sharma

सिर्फ तुम-4खत्म हो जाते हैं कुछ रिस्ते यूँही,बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी,और साथ में खत्म हो जाती है ज़िन्दगी,जो जी रही होती है हममें..और रह जाती है, एक उदासी हमेशा के लिए ज़हन में..हर...

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बेनाम शायरी - 5 By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

बेनाम शायरी?? ?? ?? ?? ?? ??हम चांद को पाने की हिमाकत लिए बैठे है।हम धरती पर रहकर आसमान लिए बैठे है।।?? ?? ?? ?? ?? ??डूबने का डर लिए समन्दर किनारे बैठे है।टूटन...

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मे और मेरे अह्सास - 17 By Dr Darshita Babubhai Shah

मे और मेरे अह्सास 17 चुप चुप से महफ़िल में बेठे है वो lजाम पे जाम पिया है, चुप है वो ll ************************************************ सब कुछ सह लेगे हम lतेरी कमी ना सहेंगे हम ll...

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दुर्गेश जी का काव्य संग्रह By Durgesh Tiwari

(गाथा बुढ़िया माई का)चली आ रही बारात एक ओर,जिसमें लोगो की भीड़ जोड़ एक ओर।नाच रहा जोकर जोड़-२ एक ओर,थोड़ी देर में मची शोर जोड़ एक ओर।।बन्द करो बाजा जोड़-थॉर एक ओर,रास्ता अभी है ड...

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आत्मव्यक्ति - काव्य संग्रह By Abhaya Sinha

फुटानी बाबुजी के दलानी में का उ फुटानी रहे बाबुजी के दलानी में,भर हीक खाई के, फटफटिया घुमाई के।यारन सभे आगे पीछे, गौगल चमकाई के,मोबाईल से सेल्फी लेवे गुटखा...

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From Bottom Of Heart - 10 By Jiya Vora

1.मेरे विचार आज बह रहे है इस कलम से, और जाकर ठहरे हैं इन पन्नों पे | इस पंक्तियों के बीच दबे हैं कहीं अल्फाज, जिनमे मैंने छुपाकर भी खोल दिए हैं इन लफ्जों के राज2.बेटी !प्यार की...

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संवाद, दिल से By Neha Awasthi

मेरी कुछ इस तरह से हुई वार्तालाप मेरे दिल से । कि दिल भी हार गया समझाते समझाते । हुई कुछ दलीले इस तरह की । कभी मैं आगे कभी दिल ।▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪...

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ख़ामोश आवाजें... By Satyendra prajapati

__१__हक भी अदा किया है....

जिस्म से मानो जान को जुदा किया है।
इक बाप ने अपनी बेटी को विदा किया है।।

सब मांगते हैं यहां हक अपना-अपना मगर।
आज इक मां ने अपना हक भी अदा किया है।।...

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सधे हुये आखेटक बैठे चारों ओर मचान पर...! By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

केबीएल पांडे के गीत नवगीत- सधे हुये आखेटक बैठे चारों ओर मचान पर...! जाने कब से सोच रहा हूँ मै भी कोई गीत लिखू ! खुशियों में खोये सोये अपने हिंदुस्तान पर!!...

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प्यार हो गया By Kishanlal Sharma

काश------/////----तुमब्रह्मा की अनुपम कृति हो,लगता है,सृष्टि के निर्माता ने,तुम्हे,फुर्सत में,बड़े जतन से घड़ा है,तभी तो,तुम्हारा हर अंग,प्रत्यंगबोलता है,तुम्हारी झील सी गहरी,आंखेगुल...

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शब्दांश (मेरा काव्य संग्रह ) By Arjuna Bunty

पहला संस्करण: 2020 इस पुस्तक का कोई भी भाग लेखक की लिखित अनुमति के बिना किसी भी रूप में पुन: प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है ! कवर डिज़ाइन, टाइपिंग, पुस्तक लेआउट और संकलन, साहित्य...

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दिल ऐ नूर By મોહનભાઈ આનંદ

========दिल ए नूर, टपकता है टपक टपक,मन कहीं चमकता है, चमक चमक;आइना ए दिल। , रोशन चांद सूरज,रुह ए दिल जिंदगी है ,लपक झपक;=====&#6...

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ये मेरा और तुम्हारा संवाद है #कृष्ण – 2 By Meenakshi Dikshit

1. तुम्हारे स्वर का सम्मोहन तुम्हारे अनुराग की तरह, तुम्हारे स्वर का सम्मोहन भी अद्भुत है, अपनत्व की सघनतम कोमलता, और सत्य की अकम्पित दृढ़ता का ये संयोग तुम्हारे पास ही हो...

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मानवता के डगर पे By Shivraj Anand

प्यारे तुम मुझे भी अपना लो ।गुमराह हूं कोई राह बता दो।युं ना छोडो एकाकी अभिमन्यु सा रण पे।मुझे भी साथले चलो मानवताकी डगर पे।।वहां बडे सतवादी है।सत्य -अहिंसाकेपुजारी हैं।।वे रावण...

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सलाखों के पीछे By SHAMIM MERCHANT

आज बोहोत दिनों बाद, सुकून से सोऊंगा,आज बड़े दिनों बाद, अच्छी नींद आएगी।जेल में वो सुकून कहां?सलाखों के पीछे वो आराम कहां?एक ऐसी बात के लिए अंदर हुआ था,जिसमे कुसूर मेरा था भी, और नह...

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जय हो बकरी माई By Ajay Amitabh Suman

(१) जय हो बकरी माई बकरी को प्रतीक बनाकर मानव के छद्म व्यक्तित्व और बाह्यआडम्बर को परिभाषित करती हुई एक हास्य व्ययांगात्म्क कविता। सच कहता हूँ बात बराबर,सुन ले मेरे भाई,तुझसे...

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हम कल ही तो मिले थे By Niraj Bishwas

हम कल ही मिले हो ऐसे लगता है,फिर तुम्हे क्यों लगता है हमें अलग ,हो जाना चाहिए ,मुझे तो नही लगता,मैंने तो सोचा भी था कि हम दोनों ,साथ मिलकर दुनिया के एडवेंचर पर चलेंगेफिर आखिर मेरे...

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लिख रहे वे नदी की अन्तर्कथाऐं, By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

गीात क्ृष्ण विहारी लाल पांडेय घाट पर बैठे हुए हैं जो सुरक्षित लिख रहे वे नदी की अन्तर्कथाऐं, आचमन तक के लिए उतरे नहीं जो...

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कविता By प्रतिभा चौहान

अधूरी कविताओं को अधूरी लालसाएं समझना…
जब सांस घुटती है बारुद के धुँएं में आवाजें कलेजा चीर देती हैं अपने खौफनाक रूप से सुनती है सेंध में चुपचाप सिसकियां तब मेरी कविता अधूरी...

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सीता: एक नारी - 7 - अंतिम भाग By Pratap Narayan Singh

सीता: एक नारी ॥ सप्तम सर्ग॥ निर्विघ्न सकुशल यज्ञ मर्यादा पुरुष का चल रहा किस प्राप्ति का है स्वप्न उनके हृदयतल में पल रहा ? अर्धांगिनी के स्थान पर अब तो सुशोभित मूर्ति है यह लोक-भी...

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कुछ ख्याल सुनोगे? By Gadhavi Prince

सब से पहले एक छोटिशी रचना पेश करता हूं।लडकिचाय के बागानों से निकलती खुशबू लगती हो;लडकी साडी पहना करो अच्छी लगती हो।आइने की नज़र ना लगे तुमको;क्या ईस लीये काली बिंदी करती हो।मेरे कान...

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ऐ जिंदगी By Yakshita Patel

नमस्कार मित्रो... हिन्दीमे कविता लिखने का ये मेरा पहला प्रयास है, इसमे कई सारी कमिया हो सकती है, शब्दो की गलतियां भी हो सकती है। आप इसे पढ़कर अपने प्रतिभाव ओर सूचन दे जिससे आगे मे...

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अर्धनिमिलिप्त By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

"अर्धनिमिलिप्त"??? ?? ??? ?? ??? "राधिका"दुनिया के हर प्रेम का आधार राधिका।श्याम के जीवन का जनाधार राधिका।।आंसू...

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ग़ज़ल, कविता, शेर By Kota Rajdeep

प्रेम-जल बरशा बादल से, दरख़्त की हर पत्तियां सुनहरी हों चली हैं।अंगड़ाई लिए नई कोंपलें उठती हैं, जमीं कितनी ताज़ा हो चली हैं।___Rajdeep Kotaएक रोज़ शादाब शामों से दूर जाना होगा।ज़ि...

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और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा ) By DrPranava Bharti

और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा ) ------------------------------------ ख़ामोशी मनुष्य-मन के भीतर हर पल चलती है ,कभी तीव्र गति से तो कभी रुक-रुककर लेकिन भीतर होती हर...

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कविता - ‘ माँ ‘ By प्रतिभा चौहान

माँ... तुम बिन बिन इह लोक, जगत मर्माहत सूने अंचल और इन्द्रधनुष प्रेम,त्याग,क्षमा,दया की धाराधैर्य,कुशलता,धर्मपरायण जीवन रहा तुम्हारा, इठलाती, बलखाती गुण तेरे ही गाती माँन पड़ता क...

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कुछ अछांदस रचनाएं By DrPranava Bharti

(कुछ अछांदस रचनाएं) 1-हाँडी...

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एक लड़की By अर्चना यादव

लगता था मुझ सा कोई दुखी नहीं आज देखा जो अंदर उसके झाँककरतो उस सा दुखी कोई है ही नहीं...कोई मिला उसे भी उस घड़ीदुनिया थी एक तरफ और वो थी अकेलीमोड़ था कुछ अजीब तब और ज़िन्दगी बनी थी...

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महारथी कर्णःभाग-१-(विषय प्रवेश एवं गुरु परशुराम द्वारा कर्ण का अभिशापित होना।) By Manish Kumar Singh

कौन कर्ण सा दानवीर है,इस अम्बर,धरा, रसातल में।सदा पार्थ से श्रेष्ठ रहा,वह धनुष-बाण या भुजबल में।।मधुसूदन सारथी न होते, माया अपनी ना दिखलाते।तो पार्थ जैसेे योद्धा भी,रण उससे जीत नही...

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कविताएं By Kishanlal Sharma

दिनचर्या--------------जैसेहवा,पानी,खाना जरूरी हैऐसे ही जरूरत बन गया हैअखबारइसके बिनारहा नही जाातासुबह उठते हीगेट की तरफ नज़रे टिकी रहती हैंअखबार वाले के इन्तजार मेजब तक अखब...

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कुछ पंक्ति By Narendra Rajput

"पंछी" हे ईश्वर क्या हे हमारी जिंदगानी,जेल में खाना जेल में पानी,जैसे मिली हो सजा ए कालापानी। इंसान हमें कैद करके रखते है,वजह पूछो तो बताते है, हम तुम्हे बहोत चाहते है,अगर यह चाहत...

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फितरत इंसान की By Ajay Amitabh Suman

मानव के स्वभाव को दिखाती हुई पाँच कविताएँ1.फितरत इंसान कीइन्सान की ये फितरत है अच्छी खराब भी,दिल भी है दर्द भी है दाँत भी दिमाग भी ।खुद को पहचानने की फुर्सत नहीं मगर,दुनिया समझाने...

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सिर्फ तुम.. - 4 By Sarita Sharma

सिर्फ तुम-4खत्म हो जाते हैं कुछ रिस्ते यूँही,बेइंतहा मोहब्बत के बाद भी,और साथ में खत्म हो जाती है ज़िन्दगी,जो जी रही होती है हममें..और रह जाती है, एक उदासी हमेशा के लिए ज़हन में..हर...

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बेनाम शायरी - 5 By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

बेनाम शायरी?? ?? ?? ?? ?? ??हम चांद को पाने की हिमाकत लिए बैठे है।हम धरती पर रहकर आसमान लिए बैठे है।।?? ?? ?? ?? ?? ??डूबने का डर लिए समन्दर किनारे बैठे है।टूटन...

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मे और मेरे अह्सास - 17 By Dr Darshita Babubhai Shah

मे और मेरे अह्सास 17 चुप चुप से महफ़िल में बेठे है वो lजाम पे जाम पिया है, चुप है वो ll ************************************************ सब कुछ सह लेगे हम lतेरी कमी ना सहेंगे हम ll...

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दुर्गेश जी का काव्य संग्रह By Durgesh Tiwari

(गाथा बुढ़िया माई का)चली आ रही बारात एक ओर,जिसमें लोगो की भीड़ जोड़ एक ओर।नाच रहा जोकर जोड़-२ एक ओर,थोड़ी देर में मची शोर जोड़ एक ओर।।बन्द करो बाजा जोड़-थॉर एक ओर,रास्ता अभी है ड...

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आत्मव्यक्ति - काव्य संग्रह By Abhaya Sinha

फुटानी बाबुजी के दलानी में का उ फुटानी रहे बाबुजी के दलानी में,भर हीक खाई के, फटफटिया घुमाई के।यारन सभे आगे पीछे, गौगल चमकाई के,मोबाईल से सेल्फी लेवे गुटखा...

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From Bottom Of Heart - 10 By Jiya Vora

1.मेरे विचार आज बह रहे है इस कलम से, और जाकर ठहरे हैं इन पन्नों पे | इस पंक्तियों के बीच दबे हैं कहीं अल्फाज, जिनमे मैंने छुपाकर भी खोल दिए हैं इन लफ्जों के राज2.बेटी !प्यार की...

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संवाद, दिल से By Neha Awasthi

मेरी कुछ इस तरह से हुई वार्तालाप मेरे दिल से । कि दिल भी हार गया समझाते समझाते । हुई कुछ दलीले इस तरह की । कभी मैं आगे कभी दिल ।▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪▪...

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ख़ामोश आवाजें... By Satyendra prajapati

__१__हक भी अदा किया है....

जिस्म से मानो जान को जुदा किया है।
इक बाप ने अपनी बेटी को विदा किया है।।

सब मांगते हैं यहां हक अपना-अपना मगर।
आज इक मां ने अपना हक भी अदा किया है।।...

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सधे हुये आखेटक बैठे चारों ओर मचान पर...! By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

केबीएल पांडे के गीत नवगीत- सधे हुये आखेटक बैठे चारों ओर मचान पर...! जाने कब से सोच रहा हूँ मै भी कोई गीत लिखू ! खुशियों में खोये सोये अपने हिंदुस्तान पर!!...

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प्यार हो गया By Kishanlal Sharma

काश------/////----तुमब्रह्मा की अनुपम कृति हो,लगता है,सृष्टि के निर्माता ने,तुम्हे,फुर्सत में,बड़े जतन से घड़ा है,तभी तो,तुम्हारा हर अंग,प्रत्यंगबोलता है,तुम्हारी झील सी गहरी,आंखेगुल...

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शब्दांश (मेरा काव्य संग्रह ) By Arjuna Bunty

पहला संस्करण: 2020 इस पुस्तक का कोई भी भाग लेखक की लिखित अनुमति के बिना किसी भी रूप में पुन: प्रस्तुत नहीं किया जा सकता है ! कवर डिज़ाइन, टाइपिंग, पुस्तक लेआउट और संकलन, साहित्य...

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दिल ऐ नूर By મોહનભાઈ આનંદ

========दिल ए नूर, टपकता है टपक टपक,मन कहीं चमकता है, चमक चमक;आइना ए दिल। , रोशन चांद सूरज,रुह ए दिल जिंदगी है ,लपक झपक;=====&#6...

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ये मेरा और तुम्हारा संवाद है #कृष्ण – 2 By Meenakshi Dikshit

1. तुम्हारे स्वर का सम्मोहन तुम्हारे अनुराग की तरह, तुम्हारे स्वर का सम्मोहन भी अद्भुत है, अपनत्व की सघनतम कोमलता, और सत्य की अकम्पित दृढ़ता का ये संयोग तुम्हारे पास ही हो...

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मानवता के डगर पे By Shivraj Anand

प्यारे तुम मुझे भी अपना लो ।गुमराह हूं कोई राह बता दो।युं ना छोडो एकाकी अभिमन्यु सा रण पे।मुझे भी साथले चलो मानवताकी डगर पे।।वहां बडे सतवादी है।सत्य -अहिंसाकेपुजारी हैं।।वे रावण...

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सलाखों के पीछे By SHAMIM MERCHANT

आज बोहोत दिनों बाद, सुकून से सोऊंगा,आज बड़े दिनों बाद, अच्छी नींद आएगी।जेल में वो सुकून कहां?सलाखों के पीछे वो आराम कहां?एक ऐसी बात के लिए अंदर हुआ था,जिसमे कुसूर मेरा था भी, और नह...

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जय हो बकरी माई By Ajay Amitabh Suman

(१) जय हो बकरी माई बकरी को प्रतीक बनाकर मानव के छद्म व्यक्तित्व और बाह्यआडम्बर को परिभाषित करती हुई एक हास्य व्ययांगात्म्क कविता। सच कहता हूँ बात बराबर,सुन ले मेरे भाई,तुझसे...

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हम कल ही तो मिले थे By Niraj Bishwas

हम कल ही मिले हो ऐसे लगता है,फिर तुम्हे क्यों लगता है हमें अलग ,हो जाना चाहिए ,मुझे तो नही लगता,मैंने तो सोचा भी था कि हम दोनों ,साथ मिलकर दुनिया के एडवेंचर पर चलेंगेफिर आखिर मेरे...

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लिख रहे वे नदी की अन्तर्कथाऐं, By कृष्ण विहारी लाल पांडेय

गीात क्ृष्ण विहारी लाल पांडेय घाट पर बैठे हुए हैं जो सुरक्षित लिख रहे वे नदी की अन्तर्कथाऐं, आचमन तक के लिए उतरे नहीं जो...

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कविता By प्रतिभा चौहान

अधूरी कविताओं को अधूरी लालसाएं समझना…
जब सांस घुटती है बारुद के धुँएं में आवाजें कलेजा चीर देती हैं अपने खौफनाक रूप से सुनती है सेंध में चुपचाप सिसकियां तब मेरी कविता अधूरी...

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सीता: एक नारी - 7 - अंतिम भाग By Pratap Narayan Singh

सीता: एक नारी ॥ सप्तम सर्ग॥ निर्विघ्न सकुशल यज्ञ मर्यादा पुरुष का चल रहा किस प्राप्ति का है स्वप्न उनके हृदयतल में पल रहा ? अर्धांगिनी के स्थान पर अब तो सुशोभित मूर्ति है यह लोक-भी...

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कुछ ख्याल सुनोगे? By Gadhavi Prince

सब से पहले एक छोटिशी रचना पेश करता हूं।लडकिचाय के बागानों से निकलती खुशबू लगती हो;लडकी साडी पहना करो अच्छी लगती हो।आइने की नज़र ना लगे तुमको;क्या ईस लीये काली बिंदी करती हो।मेरे कान...

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ऐ जिंदगी By Yakshita Patel

नमस्कार मित्रो... हिन्दीमे कविता लिखने का ये मेरा पहला प्रयास है, इसमे कई सारी कमिया हो सकती है, शब्दो की गलतियां भी हो सकती है। आप इसे पढ़कर अपने प्रतिभाव ओर सूचन दे जिससे आगे मे...

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अर्धनिमिलिप्त By Er.Bhargav Joshi અડિયલ

"अर्धनिमिलिप्त"??? ?? ??? ?? ??? "राधिका"दुनिया के हर प्रेम का आधार राधिका।श्याम के जीवन का जनाधार राधिका।।आंसू...

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ग़ज़ल, कविता, शेर By Kota Rajdeep

प्रेम-जल बरशा बादल से, दरख़्त की हर पत्तियां सुनहरी हों चली हैं।अंगड़ाई लिए नई कोंपलें उठती हैं, जमीं कितनी ताज़ा हो चली हैं।___Rajdeep Kotaएक रोज़ शादाब शामों से दूर जाना होगा।ज़ि...

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और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा ) By DrPranava Bharti

और ख़ामोशी बोल पड़ी (पुस्तक-समीक्षा ) ------------------------------------ ख़ामोशी मनुष्य-मन के भीतर हर पल चलती है ,कभी तीव्र गति से तो कभी रुक-रुककर लेकिन भीतर होती हर...

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कविता - ‘ माँ ‘ By प्रतिभा चौहान

माँ... तुम बिन बिन इह लोक, जगत मर्माहत सूने अंचल और इन्द्रधनुष प्रेम,त्याग,क्षमा,दया की धाराधैर्य,कुशलता,धर्मपरायण जीवन रहा तुम्हारा, इठलाती, बलखाती गुण तेरे ही गाती माँन पड़ता क...

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कुछ अछांदस रचनाएं By DrPranava Bharti

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एक लड़की By अर्चना यादव

लगता था मुझ सा कोई दुखी नहीं आज देखा जो अंदर उसके झाँककरतो उस सा दुखी कोई है ही नहीं...कोई मिला उसे भी उस घड़ीदुनिया थी एक तरफ और वो थी अकेलीमोड़ था कुछ अजीब तब और ज़िन्दगी बनी थी...

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महारथी कर्णःभाग-१-(विषय प्रवेश एवं गुरु परशुराम द्वारा कर्ण का अभिशापित होना।) By Manish Kumar Singh

कौन कर्ण सा दानवीर है,इस अम्बर,धरा, रसातल में।सदा पार्थ से श्रेष्ठ रहा,वह धनुष-बाण या भुजबल में।।मधुसूदन सारथी न होते, माया अपनी ना दिखलाते।तो पार्थ जैसेे योद्धा भी,रण उससे जीत नही...

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कविताएं By Kishanlal Sharma

दिनचर्या--------------जैसेहवा,पानी,खाना जरूरी हैऐसे ही जरूरत बन गया हैअखबारइसके बिनारहा नही जाातासुबह उठते हीगेट की तरफ नज़रे टिकी रहती हैंअखबार वाले के इन्तजार मेजब तक अखब...

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कुछ पंक्ति By Narendra Rajput

"पंछी" हे ईश्वर क्या हे हमारी जिंदगानी,जेल में खाना जेल में पानी,जैसे मिली हो सजा ए कालापानी। इंसान हमें कैद करके रखते है,वजह पूछो तो बताते है, हम तुम्हे बहोत चाहते है,अगर यह चाहत...

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फितरत इंसान की By Ajay Amitabh Suman

मानव के स्वभाव को दिखाती हुई पाँच कविताएँ1.फितरत इंसान कीइन्सान की ये फितरत है अच्छी खराब भी,दिल भी है दर्द भी है दाँत भी दिमाग भी ।खुद को पहचानने की फुर्सत नहीं मगर,दुनिया समझाने...

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