सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • आखर चौरासी - 12

    झटके से जगीर सिंह की आँख खुल गई। उसका दिल बुरी तरह धड़क रहा था। सारा बदन पसीने से...

  • जादू की छड़ी

    मैं उन दिनों अपनी दीदी के यहां गई थी। जीजाजी अॅाफिसर थे। गाड़ी बंगला मिला हुआ था।...

  • एकजुटता

    एकजुटता इस विघटनकारी समय में सामाजिक एकजुटता के नए आयाम परिभाषित करती कहानी...

लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 14 By Neelam Kulshreshtha

`` निशी की शादी को बरस ही कितने हुये थे जो विहान --------। `` दामिनी ने उसाँस लेते हुये निशी के साथ जो गुज़री थी, उस चलती हुई कहानी में व्यवधान डाला ।
कावेरी भी आश्चर्य कर उठी, ``...

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तुमने कहा था न By Sapna Singh

अमिता दी लगातार फोन कर रही थी...... तबसे, जबसे उनकी बेटी की शादी तय हुई थी..... जरूर आना है ..... की रट्ट....पहले डेट नवम्बर में फिक्स हुई थी .....पर टलते टलते अब जाकर मई में फाइनल...

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आखर चौरासी - 12 By Kamal

झटके से जगीर सिंह की आँख खुल गई। उसका दिल बुरी तरह धड़क रहा था। सारा बदन पसीने से सराबोर था। काफी देर तक वे ‘वाहे गुरु... वाहे गुरु’’ का जाप करते रहे। रात आधी बीत चुकी थी।
बिस्तर प...

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परिणीता - 5 By Sarat Chandra Chattopadhyay

गुरुचरण बाबू बहुत ही मिलनसार व्यक्ति थे। किसी भी छोटे-ड़े व्यक्ति से वे निःसंकोच बातें कर सकते थे। अपनी मिलनसार आदत के कारण ही, गिरीन्द्र के साथ दो-तीन बातें हने पर ही उनकी गहरी मि...

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जड़ें By Upasna Siag

परमेश्वरी विवाह के एक दिन पहले की रात को अपने बाबा के पिछवाड़े के आँगन में लगे हरसिंगार के पेड़ के नीचे खड़ी थी। मानों उसकी खुशबू एक साथ ही अपने अन्दर समाहित कर लेना चाहती थी। रह -...

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भले आदमी! By Arpan Kumar

“अरे मत पूछो यार, वह बहुत घटिया आदमी था...” एक भला आदमी दूसरे भले आदमी से रात्रि के यही कोई पौने नौ बजे दक्षिणी दिल्ली के एक बस-स्टैंड पर बैठा अपनी टाँगें झुलाते हुए और मूँगफली के...

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डुबकी By Geeta Shri

वह लौट रही है अपने घर, मन में तरह तरह की शंकाएं, आशंकाएं लिए। क्या होगा जब वह घर लौटेगी। हरीश कितना खुश होगा। गुड्डी, चिंटू तो खुशी के मारे पागल न हो जाएं। कितना आहलादकारी क्षण होग...

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जादू की छड़ी By Sapna Singh

मैं उन दिनों अपनी दीदी के यहां गई थी। जीजाजी अॅाफिसर थे। गाड़ी बंगला मिला हुआ था। लिहाजा छुट्टियां बिताने की इससे बेहतर और कौन सी जगह हो सकती थी।
दीदी शादी के बाद अफसरी मिजाज वाली...

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एकजुटता By KAMAL KANT LAL

एकजुटता इस विघटनकारी समय में सामाजिक एकजुटता के नए आयाम परिभाषित करती कहानी एकजुटता उस दिन मैं जयपुर से अपने शहर लौटने के लिए एयरपोर्ट की तरफ जा रहा था कि रास्ते में मेरे पिताज...

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मैं जीत गई By S Bhagyam Sharma

‘‘अम्मा आपने हमारी परवरिश ठीक से नहीं की' ये सुन सरोजनी का दिल धक से रह गया। जब बेटा मेरे गर्भ में था, तब मैंने रविन्द्रनाथ ठाकुर की कविताओं को पढ़ा तो मुझे इतना अच्छा लगा कि मै...

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चाकर राखो जी... By Sapna Singh

चारू तुम भी आ रही हो न हमारे साथ ---!’’ लंच ब्रेक में उसकी मेज की ओर आती हुई मालती ने पूछा था ‘‘कहां भाई.......?’’ उठते हुए पूछा उसने ‘‘ल्यो...... इनको कुछ खबर ही नहीं रहती - अरे भ...

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और फिर क्या? By Pritpal Kaur

“आखें बंद कर के देखोगे तो अँधेरा ही दिखाई देगा.”
विजय ने झुंझलाते हुए ऊंची आवाज़ में कहा. सुधाकर बड़े भाई की बात सुनते ही क्रोध से भर उठा. उसे हर किसी का सुझाव देना नहीं भाता था. ले...

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यादें - 2 By प्रियंका गुप्ता

एक अजीब सी बेचैनी तारी हो गई थी मुझ पर...। क्या हो रहा होगा वहाँ...? काश, मैं तुम्हारे साथ होती। वैसे तुम अकेले भी नहीं थे, अच्छा-खासा स्टॉफ़ गया था तुम्हारे साथ...और सबसे बड़ी बात,...

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पथ के दावेदार - 10 - Last Part By Sarat Chandra Chattopadhyay

भोजन की थाली उसी तरह पड़ी रही। उसकी आंखों से आंसू की बड़ी-बड़ी बूंदे गालों पर से झर-झर नीचे गिरने लगीं। अपूर्व की मां को उसने कभी देखा नहीं था। पति-पुत्र के कारण उन्होंने जीवन में बहु...

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मेरा नाम अन्नपुर्णी है। By S Bhagyam Sharma

बाहर से कुछ आवाज आई। मैंने सिर्फ थोड़ा सा सिर बाहर करके झांका तो देखा सास लक्ष्मी एक बडे थैले को लेकर आ रहीं थी। ऐ बात पन्द्रह दिन में एक बार होती रहती है। पति चन्द्रशेखर की तेज आवा...

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लबरी By Geeta Shri

“लबरा लबरी चले बाजार...लबरा गिरा बीच बाजार, लबरी बोली खबरदार...”
माला कुमारी ने जिस घड़ी गांव जाने के बारे में सोचा था तभी से कान में एक ही धुन बज रही थी..। स्मृतियों की रील बेहद...

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कंफर्ट जोन के बाहर By Sapna Singh

वह गुस्से में थी! बहुत-बहुत ज्यादा गुस्से में।
‘‘साले, हरामी, कुत्ते’’ उसके मुँॅह से धाराप्रवाह गालियाँॅ निकल रही थीं। हॉँलाकि उसे बहुत सारी गालियॉँ नहीं आती थीं। हर बार वह इन्ही...

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पर्व के रंग By Dr. Vandana Gupta

दीवाली की रात.. सूरज और चाँद मानो एक साथ सम्पूर्ण निहारिका लेकर धरती पर जगमगाने चले आए हों. मन के भीतर भी और बाहर भी उत्सव का उल्लास छाया हुआ . सृष्टि का कण कण पर्वमयी हो सप्त...

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वेपिंग कपल By r k lal

वेपिंग कपलआर 0 के 0 लालबिल्डिंग के तीसरे मंजिल पर अच्छा खासा कार्यालय था परंतु सीढ़ियों के सामने ही एक भट्टी में कोयले धधक रहे थे। कार्यालय में जाने वाले किसी बाहरी व्यक्ति ने पूछा...

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टुकड़ा-टुकड़ा ज़िन्दगी - 2 By प्रियंका गुप्ता

फ़ैज़ान मियाँ एकदम खामोश हो गए। आलिया आखिर कैसा वादा चाह रही थी...बिन जाने कैसे खुदा को हाज़िर-नाज़िर जान कर वादा कर लें...? आलिया उनकी ख़ामोशी की आवाज़ भी सुन सकती थी, ये शायद वो अब भी...

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काली वध By S Bhagyam Sharma

‘‘क्या है री!.......... बोल.............क्यों भाग कर आ रही है?'
‘‘अत्ते......अत्तेय....कुंवारी की तरफ' ‘‘क्या बात है री? बोल तो।'
‘‘एक अबोध बच्ची...................चा...

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कब सहर होगी By Rajesh Bhatnagar

वह पूरे राज्य में नौकरी देने वाले भर्ती दफ्तर में लगा एक अदना-सा वर्कचार्ज कर्मचारी है । पहले तो वह वर्कचार्ज की हैसियत से ही लगा था । मगर पिछले पांच-छः वर्षों से कंगाल सरकार ने उस...

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निबन्ध-ये कैसी मित्रता By Dinesh Tripathi

मित्र का शब्द बड़ा व्यापक है| इसेसखा,सखी मित,्र दोस्त आदि नाम से जाना जाता है लेकिन प्रचलन में दोस्त शब्द व्यापक है मित्रता के बाजार में एक नया शब्द अंग्रेजी का फ्रेंड ज्यादातर उपय...

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जादुई छड़ी By Mamtora Raxa

जादुई छड़ी सूरज अपने सुनहरे किरनों का प्रकाश फैला रहा है, लोगो की बढ़ रही चहल-पहल धीरे-धीरे वातावरण की खामिशियों में बाधा डाल रही हैं| शहर के बीचोबीच स्थित छोटे से सुंदर बंगले...

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इस कहानी में हीरो नहीं है By Pritpal Kaur

कल रात बिस्तर पर लेते हुए ख्याल आया कि हमारे आस-पास के इंसानों पर तो हम सब कहानियां लिखते हैं और पढ़ते हैं. क्यूँ न अपने इर्द गिर्द रहने वाले जानवरों पर एक कहानी लिखी जाये. जब कहानी...

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नर्मदे हर By Manish Vaidya

नदी के शांत और निर्द्वंद बहते पानी पर से अभी – अभी सिंदूरी रंग उतरा है और अब नदी के पानी में धूप की सुनहरी परतें झिलमिला रही हैं. चैत के महीने में धूप अभी से चटख हो रही है. वैसे यह...

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मेकिंग आफ बबीता सोलंकी By Geeta Shri

“अरे..सब एक साथ उठ कर चल दिए। मैं अकेला रहूंगा अभी से...कोई एक तो रुको, मेरा जाम खत्म हो जाए, फिर चले जाना। ये रिवाज नहीं महफिल का...”
बूढीं आखों में मिन्नतें चमकीं। आवाज लरज रही...

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लाइफ़ @ ट्विस्ट एन्ड टर्न. कॉम - 14 By Neelam Kulshreshtha

`` निशी की शादी को बरस ही कितने हुये थे जो विहान --------। `` दामिनी ने उसाँस लेते हुये निशी के साथ जो गुज़री थी, उस चलती हुई कहानी में व्यवधान डाला ।
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तुमने कहा था न By Sapna Singh

अमिता दी लगातार फोन कर रही थी...... तबसे, जबसे उनकी बेटी की शादी तय हुई थी..... जरूर आना है ..... की रट्ट....पहले डेट नवम्बर में फिक्स हुई थी .....पर टलते टलते अब जाकर मई में फाइनल...

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आखर चौरासी - 12 By Kamal

झटके से जगीर सिंह की आँख खुल गई। उसका दिल बुरी तरह धड़क रहा था। सारा बदन पसीने से सराबोर था। काफी देर तक वे ‘वाहे गुरु... वाहे गुरु’’ का जाप करते रहे। रात आधी बीत चुकी थी।
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परिणीता - 5 By Sarat Chandra Chattopadhyay

गुरुचरण बाबू बहुत ही मिलनसार व्यक्ति थे। किसी भी छोटे-ड़े व्यक्ति से वे निःसंकोच बातें कर सकते थे। अपनी मिलनसार आदत के कारण ही, गिरीन्द्र के साथ दो-तीन बातें हने पर ही उनकी गहरी मि...

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जड़ें By Upasna Siag

परमेश्वरी विवाह के एक दिन पहले की रात को अपने बाबा के पिछवाड़े के आँगन में लगे हरसिंगार के पेड़ के नीचे खड़ी थी। मानों उसकी खुशबू एक साथ ही अपने अन्दर समाहित कर लेना चाहती थी। रह -...

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भले आदमी! By Arpan Kumar

“अरे मत पूछो यार, वह बहुत घटिया आदमी था...” एक भला आदमी दूसरे भले आदमी से रात्रि के यही कोई पौने नौ बजे दक्षिणी दिल्ली के एक बस-स्टैंड पर बैठा अपनी टाँगें झुलाते हुए और मूँगफली के...

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डुबकी By Geeta Shri

वह लौट रही है अपने घर, मन में तरह तरह की शंकाएं, आशंकाएं लिए। क्या होगा जब वह घर लौटेगी। हरीश कितना खुश होगा। गुड्डी, चिंटू तो खुशी के मारे पागल न हो जाएं। कितना आहलादकारी क्षण होग...

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जादू की छड़ी By Sapna Singh

मैं उन दिनों अपनी दीदी के यहां गई थी। जीजाजी अॅाफिसर थे। गाड़ी बंगला मिला हुआ था। लिहाजा छुट्टियां बिताने की इससे बेहतर और कौन सी जगह हो सकती थी।
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एकजुटता By KAMAL KANT LAL

एकजुटता इस विघटनकारी समय में सामाजिक एकजुटता के नए आयाम परिभाषित करती कहानी एकजुटता उस दिन मैं जयपुर से अपने शहर लौटने के लिए एयरपोर्ट की तरफ जा रहा था कि रास्ते में मेरे पिताज...

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मैं जीत गई By S Bhagyam Sharma

‘‘अम्मा आपने हमारी परवरिश ठीक से नहीं की' ये सुन सरोजनी का दिल धक से रह गया। जब बेटा मेरे गर्भ में था, तब मैंने रविन्द्रनाथ ठाकुर की कविताओं को पढ़ा तो मुझे इतना अच्छा लगा कि मै...

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चाकर राखो जी... By Sapna Singh

चारू तुम भी आ रही हो न हमारे साथ ---!’’ लंच ब्रेक में उसकी मेज की ओर आती हुई मालती ने पूछा था ‘‘कहां भाई.......?’’ उठते हुए पूछा उसने ‘‘ल्यो...... इनको कुछ खबर ही नहीं रहती - अरे भ...

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और फिर क्या? By Pritpal Kaur

“आखें बंद कर के देखोगे तो अँधेरा ही दिखाई देगा.”
विजय ने झुंझलाते हुए ऊंची आवाज़ में कहा. सुधाकर बड़े भाई की बात सुनते ही क्रोध से भर उठा. उसे हर किसी का सुझाव देना नहीं भाता था. ले...

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पथ के दावेदार - 10 - Last Part By Sarat Chandra Chattopadhyay

भोजन की थाली उसी तरह पड़ी रही। उसकी आंखों से आंसू की बड़ी-बड़ी बूंदे गालों पर से झर-झर नीचे गिरने लगीं। अपूर्व की मां को उसने कभी देखा नहीं था। पति-पुत्र के कारण उन्होंने जीवन में बहु...

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मेरा नाम अन्नपुर्णी है। By S Bhagyam Sharma

बाहर से कुछ आवाज आई। मैंने सिर्फ थोड़ा सा सिर बाहर करके झांका तो देखा सास लक्ष्मी एक बडे थैले को लेकर आ रहीं थी। ऐ बात पन्द्रह दिन में एक बार होती रहती है। पति चन्द्रशेखर की तेज आवा...

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लबरी By Geeta Shri

“लबरा लबरी चले बाजार...लबरा गिरा बीच बाजार, लबरी बोली खबरदार...”
माला कुमारी ने जिस घड़ी गांव जाने के बारे में सोचा था तभी से कान में एक ही धुन बज रही थी..। स्मृतियों की रील बेहद...

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कंफर्ट जोन के बाहर By Sapna Singh

वह गुस्से में थी! बहुत-बहुत ज्यादा गुस्से में।
‘‘साले, हरामी, कुत्ते’’ उसके मुँॅह से धाराप्रवाह गालियाँॅ निकल रही थीं। हॉँलाकि उसे बहुत सारी गालियॉँ नहीं आती थीं। हर बार वह इन्ही...

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पर्व के रंग By Dr. Vandana Gupta

दीवाली की रात.. सूरज और चाँद मानो एक साथ सम्पूर्ण निहारिका लेकर धरती पर जगमगाने चले आए हों. मन के भीतर भी और बाहर भी उत्सव का उल्लास छाया हुआ . सृष्टि का कण कण पर्वमयी हो सप्त...

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वेपिंग कपल By r k lal

वेपिंग कपलआर 0 के 0 लालबिल्डिंग के तीसरे मंजिल पर अच्छा खासा कार्यालय था परंतु सीढ़ियों के सामने ही एक भट्टी में कोयले धधक रहे थे। कार्यालय में जाने वाले किसी बाहरी व्यक्ति ने पूछा...

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टुकड़ा-टुकड़ा ज़िन्दगी - 2 By प्रियंका गुप्ता

फ़ैज़ान मियाँ एकदम खामोश हो गए। आलिया आखिर कैसा वादा चाह रही थी...बिन जाने कैसे खुदा को हाज़िर-नाज़िर जान कर वादा कर लें...? आलिया उनकी ख़ामोशी की आवाज़ भी सुन सकती थी, ये शायद वो अब भी...

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काली वध By S Bhagyam Sharma

‘‘क्या है री!.......... बोल.............क्यों भाग कर आ रही है?'
‘‘अत्ते......अत्तेय....कुंवारी की तरफ' ‘‘क्या बात है री? बोल तो।'
‘‘एक अबोध बच्ची...................चा...

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कब सहर होगी By Rajesh Bhatnagar

वह पूरे राज्य में नौकरी देने वाले भर्ती दफ्तर में लगा एक अदना-सा वर्कचार्ज कर्मचारी है । पहले तो वह वर्कचार्ज की हैसियत से ही लगा था । मगर पिछले पांच-छः वर्षों से कंगाल सरकार ने उस...

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निबन्ध-ये कैसी मित्रता By Dinesh Tripathi

मित्र का शब्द बड़ा व्यापक है| इसेसखा,सखी मित,्र दोस्त आदि नाम से जाना जाता है लेकिन प्रचलन में दोस्त शब्द व्यापक है मित्रता के बाजार में एक नया शब्द अंग्रेजी का फ्रेंड ज्यादातर उपय...

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जादुई छड़ी By Mamtora Raxa

जादुई छड़ी सूरज अपने सुनहरे किरनों का प्रकाश फैला रहा है, लोगो की बढ़ रही चहल-पहल धीरे-धीरे वातावरण की खामिशियों में बाधा डाल रही हैं| शहर के बीचोबीच स्थित छोटे से सुंदर बंगले...

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इस कहानी में हीरो नहीं है By Pritpal Kaur

कल रात बिस्तर पर लेते हुए ख्याल आया कि हमारे आस-पास के इंसानों पर तो हम सब कहानियां लिखते हैं और पढ़ते हैं. क्यूँ न अपने इर्द गिर्द रहने वाले जानवरों पर एक कहानी लिखी जाये. जब कहानी...

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नर्मदे हर By Manish Vaidya

नदी के शांत और निर्द्वंद बहते पानी पर से अभी – अभी सिंदूरी रंग उतरा है और अब नदी के पानी में धूप की सुनहरी परतें झिलमिला रही हैं. चैत के महीने में धूप अभी से चटख हो रही है. वैसे यह...

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मेकिंग आफ बबीता सोलंकी By Geeta Shri

“अरे..सब एक साथ उठ कर चल दिए। मैं अकेला रहूंगा अभी से...कोई एक तो रुको, मेरा जाम खत्म हो जाए, फिर चले जाना। ये रिवाज नहीं महफिल का...”
बूढीं आखों में मिन्नतें चमकीं। आवाज लरज रही...

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