सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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  • पापा कि गुड़िया

    मेहमान के जाते हि पापा और निराश हो गये और बोले,
    पापा - राज ये गाँव है, यहाँ शा...

  • मानवता के झरोखे

    रूढ़ियो की जंजीरों में जकड़े हुए पुरुषवादी समाज का एक अंश 21वी शताब्दी में भी ना...

  • मानवता के झरोखे

    मानवता के झरोखे, नामक कहानी संग्रह का यह तृतीय भाग है । विखंडित होते हुए मानवीय...

झबरी चुड़ैल और रमकलिया By Rajan Dwivedi

ग्रामीण परिवेश में रची-बसी एक कथा जो ग्रामीण क्षेत्र में व्याप्त अंधविश्वास को रेखांकित करती है और पाठक को सोचने पर विवश करती है कि किस प्रकार समाज का एक बड़ा हिस्सा अपनी रूढ़िवादी...

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पापा कि गुड़िया By Divana Raj bharti

मेहमान के जाते हि पापा और निराश हो गये और बोले,
पापा - राज ये गाँव है, यहाँ शादी में पैसा खर्च करना हि पड़ता है, इसतरह स्टांप पेपर पे कुछ शर्ते लिखकर, कुछ लोगों के हस्ताक्षर ले क...

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मानवता के झरोखे By Dr kavita Tyagi

रूढ़ियो की जंजीरों में जकड़े हुए पुरुषवादी समाज का एक अंश 21वी शताब्दी में भी नारी-शक्ति की अवहेलना और संविधान प्रदत्त उसके अधिकारों की अवमानना करते हुए उसका तिरस्कार कर रहा है ।...

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समुद्र की रेत By Neetu Singh Renuka

यह कहानी सुब्रमणियन उर्फ़ मणि की है जिनका दफ़्तर में आज आख़िरी दिन है। वे आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं। पिछले आठ साल से इस दफ़्तर में रहते हुए उन्होंने हर सहकर्मी के बारे मेंं अपनी एक धार...

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पापा कि गुड़िया By Divana Raj bharti

अगले दिन जब मैं शहर वापस आ रहा था, तो मैं शांत और गहरे सोच में दुबा था, क्योंकि गुड़िया कि शादी और दहेज को लेकर हि तरह-तरह के ख्याल मन मे आ रहे थे। हम कहते हैं कि हमारा देश बदल रहा...

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मानवता के झरोखे By Dr kavita Tyagi

मानवता के झरोखे, नामक कहानी संग्रह का यह तृतीय भाग है । विखंडित होते हुए मानवीय एवं पारिवारिक मूल्य , भारतीय संस्कृति को पीछे छोड़ते हुए बच्चों एवं वृद्धों के प्रति कर्तव्य विमुख ह...

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मानवता के झरोखे By Dr kavita Tyagi

प्रस्तुत कहानी मानवता के झरोखे नामक कहानी संग्रह का द्वितीय भाग है। प्रस्तुत कहानी में मनुष्य के भटकते मन को कथानक का आधार बनाया गया है । उसका अधिकार-मोह किस तरह से उसकी मुक्ति...

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मानवता के झरोखे By Dr kavita Tyagi

जीवन के वास्तविक अर्थ को भूलकर अर्थ(धन) के पीछे दौड़ते हुए व्यक्ति मानवता को भूलते जा रहे हैं । मानवीय मूल्य विघटित हो रहे हैं और जीवन-दर्शन निरन्तर बदलता जा रहा हैं। इसी विडंबना क...

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दस व्यंग्य कथाएँ By bhagirath

‘गर्मी’ चुनाव में वोटर कोट और पैसे की गर्मी चाहता है व्यवस्था ने वोटर को भ्रष्ट कर दिया है. “दौरा” एस पी साहब का दौरा थानेदार को कितना महंगा-सस्ता पडा !जानने के लिये यह कथा अवश्य...

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सपना By Pawnesh Dixit

कैसे एक व्यक्ति जीवन के झंझावातों से झुझते हुए भी अपने सपने को हर रोज साकार होते हुए देखता है और जब उसके यथार्थ में जब वह सपना पूरा होने वाला होता है तब अचानक नियति क्या करती है

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जमूरा By Pradeep Kumar sah

स्वामी बदलने के साथ जमूरा का स्वभाव भी बदल जाता है, इस तथ्य से अनभिज्ञ पूर्वाग्रही मदारी के हाथ से जमूरा का रास छीन लिया. फिर क्या हुआ पूरा पढ़ने के पश्चात इस तथ्य से अवगत कराया जा...

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वो अकेली लडकी और रात By Khushi Saifi

सब की नज़रों के खोफ से वो कुछ और अपने अंदर सिमट गई। ट्रेन हल्की हल्की सीटी दे कर अपनी पूरी रफ्तार पकड़ चुकी थी। अब ट्रैन से नीचे उतरना ना मुमकिन था -Khushi Saifi

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चचेरी By महेश रौतेला

कहानियां पहले की तरह जन्म लेती रहती हैं।बुद्ध भगवान ने तीन स्थितियों में आदमी को देखा और उनका मन संसार से विरक्त हो गया।इसी तरह लोगों का मन आसक्त भी हो जाता है। शेरू उच्च शिक्षा प्...

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पापा की गुड़िया By Divana Raj bharti

गुड़िया कि उम्र शादी कि हो गयीं है । उनके पापा उसके लिए लड़के ढूँढ़ते है लेकिन लड़के मिलने के बाद भी शादी नहीं कर पाते क्योंकि उनके पास देने के लिए दहेज नहीं है। तो क्या गुड़िया कि...

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अक्ल बड़ी या भैंस By Pawnesh Dixit

एक गाँव के आदमी के लिए शहरी लड़की की दीवानगी किस कदर होती है गाँव का पानी शहर आकर कितना उछाल मारता है ,सुराही में जा भी पाता है या धूप में सूखकर घड़ा बनकर ही रह जाता है जानने...

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ज़िन्दगी By Mukesh Joshi

ज़िन्दगी बड़ी मुश्किल.......ज़िन्दगी से जंग लड़ता हुआ एक गरीब आदमी.........................................................................................................................

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विद्याआरंभ By Atul Arora

जनवादी हिंदी लेखन के मुख्य हस्ताक्षर श्री श्रीनाथ जी हिंदी लेखन में १९७६ से २०१५ तक सक्रिय रहे। जोंक, मुक्तिपर्व एवं उपसंहार उनके प्रकशित कहानी संग्रह में से हैं । विद्याआरंभ उनकी...

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गद्दार By Mirza Hafiz Baig

राख की उसी ढेर से वह एक आश्चर्य की तरह बाहर निकल आया । खाक आलूदा चेहरा, राख आलूदा सिर । कलिख पुते हुये हाथ पैर वह एक छोटा नन्हा सा मासूम । उसका यूं प्रगट होना किसी आश्चर्य से कम...

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आहट By Ambalika Sharma

यह कहानी एक लड़के सोमू के बारे में है सोमू अपने माता पिता के साथ रहता था
उसकी माँ उसे बहुत प्यार करती थी एक रोज़ स्कूल जाते हुए सोमू को लगा जैसे कोई उसका पीछा कर रहा है...

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ढिबरी टाइट By Tejendra sharma

कर दी सालों की ढिबरी टाइट.......खा गया सालों को, .......उनकी तो मां.......!
सभी अवाक् गुरमीत को देखे जा रहे थे। कहीं इतने दिनों की चुप्पी से पागल तो नहीं हो गया .......पर अभी-अ...

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स्कूटी वाली मैम By Divana Raj bharti

शोभा को पढ़ने मे बहुत मन लगता वो पढ लिख के अपनी गांव मे पढाने वाली स्कूटी वाली मैम जैसे बनना चाहती है लेकिन उनके पापा किसी शक की वजह से जल्दी शादी करवा देते है जहाँ कोई पढ़ने लिखने...

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नन्हा बंटी By Mirza Hafiz Baig

बाल मनोविज्ञान का विश्लेषण करती एक कहानी ।

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रागिनी की रैगिंग By Jitendra Jeetu

स्कूल के पहले ही दिन ऐसा क्या हुआ उस लड़की के साथ जिसने उसकी ज़िंदगी ही बदल दी

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कमलाबाग की चुड़ैल का आतंक By paresh barai

यह एक काल्पनिक (fiction) कहानी है। इस कहानी के किसी भी पात्र, स्थान, या घटना का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई लेना देना नहीं है। यह लेख केवल आप के मनोरंजन के लिए है।

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झबरी चुड़ैल और रमकलिया By Rajan Dwivedi

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पापा कि गुड़िया By Divana Raj bharti

मेहमान के जाते हि पापा और निराश हो गये और बोले,
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मानवता के झरोखे By Dr kavita Tyagi

रूढ़ियो की जंजीरों में जकड़े हुए पुरुषवादी समाज का एक अंश 21वी शताब्दी में भी नारी-शक्ति की अवहेलना और संविधान प्रदत्त उसके अधिकारों की अवमानना करते हुए उसका तिरस्कार कर रहा है ।...

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समुद्र की रेत By Neetu Singh Renuka

यह कहानी सुब्रमणियन उर्फ़ मणि की है जिनका दफ़्तर में आज आख़िरी दिन है। वे आज सेवानिवृत्त हो रहे हैं। पिछले आठ साल से इस दफ़्तर में रहते हुए उन्होंने हर सहकर्मी के बारे मेंं अपनी एक धार...

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पापा कि गुड़िया By Divana Raj bharti

अगले दिन जब मैं शहर वापस आ रहा था, तो मैं शांत और गहरे सोच में दुबा था, क्योंकि गुड़िया कि शादी और दहेज को लेकर हि तरह-तरह के ख्याल मन मे आ रहे थे। हम कहते हैं कि हमारा देश बदल रहा...

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मानवता के झरोखे By Dr kavita Tyagi

मानवता के झरोखे, नामक कहानी संग्रह का यह तृतीय भाग है । विखंडित होते हुए मानवीय एवं पारिवारिक मूल्य , भारतीय संस्कृति को पीछे छोड़ते हुए बच्चों एवं वृद्धों के प्रति कर्तव्य विमुख ह...

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मानवता के झरोखे By Dr kavita Tyagi

प्रस्तुत कहानी मानवता के झरोखे नामक कहानी संग्रह का द्वितीय भाग है। प्रस्तुत कहानी में मनुष्य के भटकते मन को कथानक का आधार बनाया गया है । उसका अधिकार-मोह किस तरह से उसकी मुक्ति...

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मानवता के झरोखे By Dr kavita Tyagi

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सपना By Pawnesh Dixit

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जमूरा By Pradeep Kumar sah

स्वामी बदलने के साथ जमूरा का स्वभाव भी बदल जाता है, इस तथ्य से अनभिज्ञ पूर्वाग्रही मदारी के हाथ से जमूरा का रास छीन लिया. फिर क्या हुआ पूरा पढ़ने के पश्चात इस तथ्य से अवगत कराया जा...

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वो अकेली लडकी और रात By Khushi Saifi

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चचेरी By महेश रौतेला

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पापा की गुड़िया By Divana Raj bharti

गुड़िया कि उम्र शादी कि हो गयीं है । उनके पापा उसके लिए लड़के ढूँढ़ते है लेकिन लड़के मिलने के बाद भी शादी नहीं कर पाते क्योंकि उनके पास देने के लिए दहेज नहीं है। तो क्या गुड़िया कि...

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अक्ल बड़ी या भैंस By Pawnesh Dixit

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स्कूटी वाली मैम By Divana Raj bharti

शोभा को पढ़ने मे बहुत मन लगता वो पढ लिख के अपनी गांव मे पढाने वाली स्कूटी वाली मैम जैसे बनना चाहती है लेकिन उनके पापा किसी शक की वजह से जल्दी शादी करवा देते है जहाँ कोई पढ़ने लिखने...

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नन्हा बंटी By Mirza Hafiz Baig

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कमलाबाग की चुड़ैल का आतंक By paresh barai

यह एक काल्पनिक (fiction) कहानी है। इस कहानी के किसी भी पात्र, स्थान, या घटना का किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई लेना देना नहीं है। यह लेख केवल आप के मनोरंजन के लिए है।

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