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बिसात का आखिरी मोहरा By Aarti Garval

रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...

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अवनि एक अटूट विश्वास By RAAHULL SHARMA

कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है।

यह सिर्फ एक घर नहीं, बल्क...

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महिमा: शक्तिशाली तलवार By Ashish Taak

यह कहानी है राघव की….

जो अपने मम्मी पापा के साथ फॉरेन में रहता था, लेकिन उसके दादा- दादी इंडिया के एक छोटे से गांव में रहते थे। जिस गांव का नाम कलिंग था, राघव अपने पेरेंट्स से ह...

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WAIT FOR WET By Ren Remag

मध्य रात्रि का समय था. सन्नाटे से घिरी बीच सडक पर एक लंबे कद का आदमी धीमे- धीमे अपने कदम आगे बढा रहा था. उसने एक लंबा ब्लैक कोट पहना हुआ था, जिसकी वजह से इस अंधियारी रात में वह बेह...

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तेरी मेरी खामोशियां। By Mystic Quill

अम्मी! मेरा सफ़ेद दुपट्टा नहीं मिल रहा! नायरा ने कमरे से आवाज़ लगाई, तो रसोई से अम्मी की सधी हुई टोन आई— अरे! तेरी अलमारी में अगर कुछ मुक़ाम पर रखा होता, तो शायद तलाश ना करनी पड़ती...

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MTNL की घंटी By kalpita

नवंबर की हल्की ठंड...
और मीठी-सी धूप में...
आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी।

तभी अंदर से फोन की आवाज़ आई...

? "ट्रिन ट्रिन... ट्रिन ट...

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Raaz By Aarushi Singh Rajput

Chapter 1

दिल्ली। सुबह के सात बजे।

अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी।

बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।...

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अंतर्निहित By Vrajesh Shashikant Dave

आठ वर्ष पूर्व :-

दूसरे दिन प्रात: ब्राह्म मुहूर्त से ही सेलेना की योग साधना प्रारंभ होनेवाली थी। सेलेना को रात्री भर निद्रा नहीं आई। कारण यह नहीं था कि पहाड़ पर सभी सुख सुविधा का...

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Beginning of My Love By My imaginary world

बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है…
वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था।
छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...

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रिटर्न ऑफ़ द किंग By Aparajita Tripathi

सुनसान सड़क पर एक काली एसयूवी स्थिर गति से आगे बढ़ रही थी। कार की रफ्तार लगभग चालीस किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी। इंजन की धीमी घरघराहट और टायरों की सड़क पर रगड़ खाने की आवाज़ के अल...

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बिसात का आखिरी मोहरा By Aarti Garval

रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था। बादलों के गरजने की गूँज ऐसी थी मानो पहाड़ अपना सीना पीट रहे हों। मूसलाधार बारिश ने नीचे की घाटियों क...

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कानपुर की कड़कड़ाती ठंड में जब सूरज की पहली किरण गंगा के घाटों को छूती है, तब शहर के बीचों-बीच खड़ी 'गोयंका हवेली' अपनी भव्यता के साथ जागती है।

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महिमा: शक्तिशाली तलवार By Ashish Taak

यह कहानी है राघव की….

जो अपने मम्मी पापा के साथ फॉरेन में रहता था, लेकिन उसके दादा- दादी इंडिया के एक छोटे से गांव में रहते थे। जिस गांव का नाम कलिंग था, राघव अपने पेरेंट्स से ह...

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तेरी मेरी खामोशियां। By Mystic Quill

अम्मी! मेरा सफ़ेद दुपट्टा नहीं मिल रहा! नायरा ने कमरे से आवाज़ लगाई, तो रसोई से अम्मी की सधी हुई टोन आई— अरे! तेरी अलमारी में अगर कुछ मुक़ाम पर रखा होता, तो शायद तलाश ना करनी पड़ती...

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MTNL की घंटी By kalpita

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छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...

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रिटर्न ऑफ़ द किंग By Aparajita Tripathi

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