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एपिसोड: 'रक्त संबंध या गहरा षड्यंत्र?'1. परिचय: आभ्या खन्नायुवती अंदर आई...
घड़ी की टिक टिक आवाज आ रही थी। जिसके साथ ही फोन पर एक टिंग की आवाज आई।जिसे सुन ड...
. : : प्रकरण -34 : : तिजोरी वाला स्नेहा के पीछे दिवान...
पहला अध्याय: किस्मत की ठोकरशहर की चकाचौंध से दूर, एक पुराने और टूटे हुए मकान मे...
रात का समय था , मुम्बई के हॉस्पिटल के एक वार्ड में एक खून से सनी हुई एक औरत को ल...
किसी को नहीं पता था—कि संस्कृति सिर्फ इस घर से नहीं, अपनी ही बीमारी से भी लड़ रह...
1️⃣ प्रस्तावनाबिग बैंग के प्रारंभिक क्षणों में न तो पदार्थ अस्तित्व में था और न...
भूल-119 सरदार पटेल की पुत्री मणिबेन के प्रति दुर्व्यवहार सरदार पटेल की इकलौती पु...
कहानी: खाली जेब और भरा दिमागएक गाँव में दो दोस्त रहते थेमोहन और सुरेश।मोहन के पि...
देवगढ़ का आखिरी हॉल्टसमीर को पुरानी जगहों और अनसुलझे रहस्यों का शौक था। वह एक डॉ...
मैं अपने बचपन में दादा-दादी की लाड़ली थी।उनकी आँखों का नूर, उनके आँगन की सबसे प्यारी हँसी।घर में अगर कोई सबसे पहले मेरी ओर देखता था,तो वे दादा-दादी ही होते थे।उनके लिए मैं केवल उनक...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था। शहर की यह शाम भी कुछ वैसी ही थी—आधी भागदौड़ में डूबी हुई, आधी थकी हुई। वह कैफ़े के कोने वाली कुर्सी पर ब...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
पहला अध्याय: किस्मत की ठोकरशहर की चकाचौंध से दूर, एक पुराने और टूटे हुए मकान में अंजलि अपनी बीमार माँ के सिरहाने बैठी रो रही थी। डॉक्टर ने साफ़ कह दिया था कि अगर तीन दिन के अंदर म...
नेहरू की भूलों की सूची में ‘आजादी से पूर्व की भूलों’ के तहत अधिक भूलें दर्ज नहीं हैं, जबकि उनकी ‘आजादी के बाद की भूलों’ की सूची काफी लंबी है और ऐसा शायद इसलिए है; क्योंकि आजादी से...
कहानियां कुछ कह सी जाती है, जो दिल की बात है वो बयां सी कर जाति है ऐसे ही मेरी पहली कहानी की कोशिश का पहला भाग..... 21st...
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