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तीन महीने पहले की बात है।हम लोग नए शहर में आए थे। पापा की नौकरी ट्रांसफर हुई थी।...
एपिसोड 68: "अनुभव का निर्वात" — जब होना ही पर्याप्त हैउस प्रश्न के गूंजते ही—ब्र...
39 वा धारावाहिक ईश्वर की प्राप्ति के लिए कितना संघर्च करना पड़ता है तुम जानते भी...
वर्कशॉप का दिन धीरे-धीरे करीब आ रहा था और उसके साथ ही रवीना और तुषार दोनों के भी...
( माया- मनोज दोस्ती की अनोखी मिशाल)...
बारिश उस शहर की आदत थी।हर शाम आसमान ऐसे बरसता था जैसे उसे भी किसी का इंतज़ार हो।...
अकादमी में रहते रुद्र को कुछ दिन हो चुका था और इसी बीच कुछ स्टूडेंट रुद्र को चैल...
चलो दूर कहीं.. 19सुमी की चुप्पी प्रतीक्षा को खाए जा रहा था, प्रतीक्षा की सिसकिय...
रात की वो खौफनाक आंधी तो थम चुकी थी, पर कबीर के स्पर्श की जो थरथराहट सिया के बदन...
स्वागत है दोस्तों एपिसोड 2 में! पिछले एपिसोड में हमने देखा कि आन्या मिस्टीरियस अ...
वह पुराना बंगला मल्हार एक फ्रीलांस फोटोग्राफर था, जिसे पुरानी इमारतों और सन्नाटों को कैमरे में कैद करने का जुनून था। इसी जुनून के चलते वह हिमाचल के एक दूरदराज गाँव 'अंधेरी घाट...
2087 में, सबसे महंगी चीज़ यादें थीं। और सबसे सस्ती चीज़ भी। मीरा के हाथ काँपते थे — बस थोड़े से, मुश्किल से नज़र आने वाले — जब उसने अपनी हथेली मेमवॉल्ट स्कैनर के ऊपर रखी। शीशे के...
पहली रात… लेकिन वैसी नहीं कमरे में हल्की पीली रोशनी फैली हुई थी… फूलों की खुशबू जैसे हर सांस के साथ दिल तक उतर रही थी… और मैं… लाल जोड़े में सजी मैं थी…मैं धीरे से आईने के सामने...
मुंबई की रात हमेशा की तरह चमक रही थी।ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच से गुजरती सड़कों पर गाड़ियों की लाइट्स किसी नदी की तरह बहती दिखाई दे रही थीं।लेकिन उस चमक के बीच एक लड़की के मन में अज...
दुनिया की 7 सबसे डरावनी फिल्में Part 1: The Exorcist (1973) चेतावनी: यह सिर्फ एक फिल्म नहीं… एक अनुभव है रात के 2:47 बजे का समय था। कमरे में हल्की-सी हवा चल रही थी। मो...
दिल्ली, शहर की दुर्गा कॉलोनी , आलोक शर्मा जी का घर, आलोक शर्मा एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर हैं। सुबह-सुबह हॉल में बैठकर चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहे हैं। सुबह के तकरीबन 8...
शुरुआत दिल्ली के बाहरी इलाके में बनी नई हाईराइज़ सोसायटी ब्लैकवुड रेजीडेंसी दिन में जितनी चमकती थी, रात में उतनी ही डरावनी लगती थी। ऊँची इमारतें, लंबे सुनसान कॉरिडोर, सीसीटीवी कैम...
केशव किसी तरह धक्कामुक्की से निकलते हुए सप्त क्रांति ट्रेन में चढ़ पाया। पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन लोगों से खचाखच भरा हुआ था— किसी की आँखों में बिछड़ने का दर्द था, तो किसी के चे...
आधी रात का समय था, पर शहर कभी सोता नहीं था। एम्स के तेरहवीं मंजिल के ऑपरेशन थियेटर की चमचमाती लाइटें अब धुंधली पड़ने लगी थीं। डॉ. आर्यन वर्मा ने अपने हाथों के लेटेक्स दस्ताने उतारक...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
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