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शहर की रङ्गीन रोशनियाँ By H.k Bhardwaj

उत्तर प्रदेश के बदायूँ जनपद के एक छोटे से गाँव में रहने वाला किशोर एक सीधा-सादा, शांत और संस्कारी युवक था।गाँव की मिट्टी की सोंधी खुशबू, खेतों में लहलहाती फसलें, नीम के पेड़ों की छ...

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जब रिश्ता प्यार बन जाए. By Priyam Gupta

शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी।
खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था।
आज कुछ अलग सा लग रहा था।
दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...

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अनकहा जुनूँ By Priya Chaudhary

(बैकग्राउंड में हल्की बारिश की आवाज़, धीरे-धीरे एक उदास पियानो म्यूजिक शुरू होता है)
नरेटर (गहरी और शांत आवाज़): "इंसान की ज़िंदगी में कुछ लम्हे ऐसे आते हैं, जहाँ वो हार मान लेता...

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टाम ज़िंदा हैं By Neeraj Sharma

दुनिया सीधे लोगों की नहीं हैं.... चलाक बनो.. जानकारी उतनी ही इकठी करो जिसको तुम रख सकते हो.. जयादा जानकारी बहुत सेहत के लिए हानिकारक होती हैं.. हाँ मेरी बात अक्सर त्रिपाठी से होती...

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फिल्मोत्सव By Mahendra Sharma

हिंदी फिल्म और वेबसिरिज़ रिव्यू.

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हमराज By Gajendra Kudmate

खिड़की खुली जरा, जरा परदा सरक गया बहोत ही खबसूरत सा गाना सोनू नीगम का गाया हुआ रेडिओ पर बज रहा था और तभी रोडपर हंगामा हो गया. कोई राह चलता हुआ युवक एक महिला से टकरा गया जो सब्जीमंड...

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स्वर्ग का दरवाजा By Author Pawan Singh

अक्सर आपके मन में एक सवाल आता होगा कि आख़िर में क्षत्रिय में क्यों पैदा हुआ? या ब्राह्मण परिवार में क्यों पैदा हुआ उसका आख़िर मुझे क्या फ़ायदा?

इससे तो अच्छा मैं किसी भी जाति म...

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अजनबी By Sonam Brijwasi

त के ठीक 12 बजे…सड़क सुनसान थी… हवा में अजीब सी ठंडक घुली हुई थी… रिद्धि सिंह अपनी scooty पर घर लौट रही थी। हेलमेट के अंदर उसकी सांसें तेज़ चल रही थीं, जैसे उसे खुद नहीं पता कि वो...

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The Last Page of the Diary By Anshika Naithani

दोपहर के तीन बज रहे थे। जून की इस चुभती हुई गर्मी में ऐसा लग रहा था मानो आसमान से आग बरस रही हो। दुकान इतनी छोटी थी कि वहां ढंग से खड़े होने की भी जगह नहीं थी, ऊपर से पुरानी किताबो...

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यह कैसा अहसास By H.k Bhardwaj

बात उन दिनों की है जब मेरी नई नई शादी हुई थी। मेरे पिता जी अपनी ड्यूटी के चक्कर में पड़े हुए थे, अतः उनका हमारे परिवार की ओर ध्यान लगभग कम ही था अतः हमारा सयुंक्त परिबार दादीअम्मा...

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