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Part 16 डायरी का अगला पन्ना पलटते ही मेरे चेहरे पर एक सुकून-सी मुस्कान आ गई। पिछ...
सुखपुर नाम का वह गाँव कभी अपनी असीम हरियाली, लहलहाते खेतों और आपस में मिल-जुलकर...
(सुबह की हल्की धूप खिड़की से कमरे में आ रही है। सिमरन नींद से उठती है, उसका चेहर...
संस्मरण :_ अपने अपने नामवर ----------------------------------------- "तुम्...
अपने सारे मन में चल रहे विचारों को साइड रखते हुए मान्या सोफे पर बैठ जाती है... र...
रणविजय ने अंकिता को बिस्तर पर धक्का दिया और गुस्से से उसकी ओर बढ़ा। उसने उसका जब...
शहद की गुड़िया - प्रकरण -61 " दादू! अर्जु...
पुस्तक चर्चाप्रबोध जी पर विभिन्न एंगल से साहित्यिक सामाजिक शोध बोध चर्चा : विवेक...
आर्यमन की उलझन और पिघलती बर्फआर्यमन का आंतरिक संघर्षपूरे दिन कानपुर की गलियों मे...
धर्मराज की सभाप्रथम अध्याय : यमलोक की आपातकालीन सभापृथ्वी पर पाप, भ्रष्टाचार, छल...
यह कहानी है राघव की…. जो अपने मम्मी पापा के साथ फॉरेन में रहता था, लेकिन उसके दादा- दादी इंडिया के एक छोटे से गांव में रहते थे। जिस गांव का नाम कलिंग था, राघव अपने पेरेंट्स से ह...
ऑथर नोट: हेलो फ्रेंड्स! ?? आप सबका बहुत-बहुत शुक्रिया कि आपने सीजन 1 को इतना प्यार दिया। 30 पार्ट्स में Aira और Rehaan की जर्नी—कैफे से शुरू होकर शादी तक—आपके कमेंट्स ने मुझे मोटिव...
वेदांश राठौर एक ऐसी शख्सियत जो मुंबई ही नहीं बल्कि पूरी एशिया में अपना सिक्का जमाए हुए है। बिज़नेस वर्ल्ड में एक नाम गूंजता है .. वेदांश राठौर। इनकी दूसरी ओर सबसे खतरनाक पर्सनेल...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
हर इंसान के भीतर कुछ ऐसे शब्द होते हैं जो कभी कहे नहीं जा पाते। समय के साथ वे ख़ामोशियाँ बन जाते हैं, और वही ख़ामोशियाँ कभी-कभी कविताओं का रूप ले लेती हैं। यह संग्रह मेरे उन्हीं...
मैं यह कहानी दोबारा लिख रही हूँ, लेकिन इस बार बिल्कुल वैसे, जैसे मैंने इसे अपने दिल में महसूस किया था। मेरी पहले की कहानी "दिल से दिल तक: एकतरफा सफर" से यह काफी मिलती-जुलती...
नवंबर की हल्की ठंड... और मीठी-सी धूप में... आँगन में बैठी महक अपने गीले बालों को सुखाते हुए कुछ गुनगुना रही थी। तभी अंदर से फोन की आवाज़ आई... ? "ट्रिन ट्रिन... ट्रिन ट...
( ⚠️ पढ़ने से पहले ज़रूर जानें! धार्मिक नहीं, तार्किक: यह किताब किसी धर्म या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान और व्यावहारिक जीवन जीने के विज्ञान पर आधारित है। शैली...
अम्मी! मेरा सफ़ेद दुपट्टा नहीं मिल रहा! नायरा ने कमरे से आवाज़ लगाई, तो रसोई से अम्मी की सधी हुई टोन आई— अरे! तेरी अलमारी में अगर कुछ मुक़ाम पर रखा होता, तो शायद तलाश ना करनी पड़ती...
कामदेव के वाण और प्रजातंत्र के खतरे यशवन्त कोठारी होली का प्राचीन संदर्भ ढूंढने निकला तो लगा कि बसंत के आगमन के साथ ही चारों तरफ कामदेव अपने वाण छोड़ने को आतुर हो जाते हैं मा...
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