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भोर की प्रार्थना समाप्त होते ही शिबू बिना किसी को कुछ बताए मठ से निकल पड़ा। पूर्...
नरेश गुलाटी अस्मिता अहमदाबाद महिला लेखकों का ऐसा संगठन है जो अपनी उपस्थिति काफ़ी...
The Kingdom That Put a Fiction on Trial एक डार्क फैंटेसी महाकाव्य है, जहाँ राजनी...
उस रात श्रेया बहुत ज़्यादा थकी हुई थी। इतनी थकी हुई कि शरीर से ज़्यादा उसका मन ज...
लघु कथा जमीनएक जमीन से न जाने कितने रिश्ते जुड़े होते हैं, और न जाने कितने स्वार...
रहस्यमयी हवेली का आख़िरी कमराबरसात की काली रात थी। गाँव के बाहर बनी सौ साल पुरान...
---------------अवासा की वादियाँ जितनी हसीन थीं, यहाँ का मौसम उतना ही अप्रत्याशित...
पुस्तकालय के शीशों पर रात भर से हो रही मौत की दस्तक अब थमती हुई महसूस हो रही थी।...
The Mysterious Kids and Great Chaosअध्याय 1 प्लेटफॉर्म 9¾ का जादूरात के ठीक 12 ब...
एक आम सी प्रेम कहानी भाग- १लेखिका "अनामिका"लेखिका की ओर सेअक्सर ऐसा होता हे की ह...
सुनीति ऑफिस से वापस आती है। उसके चेहरे पर थकान और उदासी साफ झलक रही है। आज ऑफिस में बॉस ने उसे डाँट दिया था। पहली बार उसे अपने आप पर भरोसा टूटा हुआ लगा। कमरे में आते ही वो ज़मीन पर...
सड़कों पर रोज़ की तरह भीड़ दौड़ रही थी। हर कोई कहीं पहुंचने की जल्दी में था। लेकिन उन्हीं चेहरों के बीच एक चेहरा ऐसा भी था, जो न दौड़ रहा था, न रुक रहा था — बस चल रहा था... अ...
दरिया, परिंदे और वो अजनबी अज़ीम …. वह ज़ोया को जाते हुए देखता है और सोचता है— "यह कैसी अजनबी थी जो आई तो एक शोर की तरह थी (महंगी गाड़ी, रुतबा), पर छोड़ एक खामोशी गई। क्या यह...
यह कहानी कुछ ही दिन पहले की है। एक दिन मैं अपनी डायरी में कहानी लिख रहा था। तभी मेरी खिड़की के पास एक बिल्ली आ गई। वह “म्याऊँ-म्याऊँ” कर रही थी। मैंने उसे प्यार से “पूसी” कहकर बु...
कभी-कभी ज़िंदगी वो सवाल पूछ लेती है... जिनका जवाब सिर्फ ख़ामोशी के पास होता है। और मोहब्बत... वो अक्सर वहीं से शुरू होती है, जहाँ लोग टूट कर बिखर जाते हैं। सहर की हल्की सी रौ...
इस शाम की तरह जिंदगी भी ढल रही थी राधा की.... शाम के 4:00 रहे थे, राधा अपने कमरे से निकल कर बाहर आती है। क्या हुआ राधा कुछ चाहिए क्या तुम्हें? तुम उठकर क्यों चली आई मुझे ब...
रात का दूसरा पहर था। जैसलमेर का सोनार किला चाँदनी में नहाया हुआ था, और रेगिस्तान की ठंडी हवा रेत के कणों को हल्के-हल्के उड़ा रही थी। दूर से लोक-संगीत की धुनें आ रही थीं—रावणहत्था क...
मुंबई का ताज महल पैलेस होटल आज रात किसी सपने की तरह चमक रहा था। ग्रैंड बॉलरूम को इतना शानदार सजाया गया था कि लग रहा था कोई बॉलीवुड की बड़ी फिल्म की शूटिंग चल रही है। छत से लटके क्र...
मुंबई की बारिश का कोई भरोसा नहीं होता। कभी यह सुकून देती है, तो कभी ज़िंदगी की रफ्तार थाम देती है। उस रात भी कुछ ऐसा ही था। आसमान से पानी की चादर गिर रही थी और शहर की चकाचौंध लाइटे...
सुहानी को भीड़ पसंद नहीं थी, लेकिन अकेलापन उससे भी ज़्यादा डराता था। शहर की यह शाम भी कुछ वैसी ही थी—आधी भागदौड़ में डूबी हुई, आधी थकी हुई। वह कैफ़े के कोने वाली कुर्सी पर ब...
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