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एक लड़का और लड़की कभी दोस्त नहीं हो सकते। ये लाइन तो आपने सुनी ही होगी लेकिन ऐस...
(एक धीमा, सुरीला लेकिन डरावना संगीत। पक्षियों के चहकने की आवाज़, जो बहुत ही कृत्...
चतुर आलोक से कहता है:" ये क्या यार यहां पर ताला लगा है। लगता है सभी बाहर हुए है।...
शिवपुर की रातें अब पहले जैसी नहीं रहीं थीं।पहले अंधेरा सिर्फ डर लाता था।अब अंधेर...
ऋग्वेद सूक्ति-(4) की व्याख्या ऋगुवेद--10/191/2सं गच्छव्व सं वदध्वंभावार्थ--साथ-स...
[47]“श्रीकृष्ण के चरित्र के विषय में बात करना किसी के भी सामर्थ्य की बात नहीं। त...
अब तक हमने पढ़ा की ...सनाया दादी जी की बात सुनकर गुस्से में महेश्वरी मेंशन से नि...
बारिश हमेशा से नेहा को पसंद थी। उसे लगता था कि बारिश सिर्फ मौसम नहीं होती, बल्कि...
ऑफिस का कमरा — रात का समय।श्राव्या अपनी डेस्क पर बैठी है, कंप्यूटर स्क्रीन की हल...
ड्राइवर की सीट पर कालू बैठा था, लेकिन उसका चेहरा बिल्कुल सपाट था, जैसे वो किसी ब...
मैं कोई पेशेवर लेखक तो नहीं लेकिन ऐसे ही थोड़ा लिखने का प्रयास कर रही हूं, इसमें जो भी गलती हो उसको कृपया कर बताएं टिप्पणी करके कृपया अपना सुझाव भी दीजिए। चलिए अब शुरू करते हैं...
एक बड़े मेले के भीड़-भाड़ वाले प्रांगण के भीतर एक विशाल कक्ष सजा हुआ था। वहां बहुत सारे लोग मौजूद थे। सामने, एक सोने-ओसके सिंहासन पर लगभग सोलह–सत्रह वर्ष का एक लड़का बैठा था; जलालु...
मुंबई की सुबह हमेशा की तरह तेज़ थी। मेट्रो स्टेशन के बाहर लोगों की भीड़ उमड़ रही थी। कोई ऑफिस के लिए भाग रहा था, कोई कॉलेज के लिए, तो कोई बस अपने सपनों के पीछे दौड़ रहा था। आर्...
सुबह का वक्त था। हल्की ठंडी हवा कॉलेज कैंपस के पेड़ों से टकराकर गुजर रही थी। गेट के बाहर हमेशा की तरह भीड़ लगी हुई थी — कुछ स्टूडेंट्स जल्दी में, कुछ दोस्ती में, कुछ सिर्फ दिखावे म...
कटनी मध्य प्रदेश (भारत ) एक बार मैं ट्रेन से सफर कर रहा था। कानों में लीड (Earphones) लगाए मैं गानों की धुन में मग्न था। मेरी आँखें बंद थीं और मैं मजे में गुनगुना रहा था। ट्रेन...
शहर की रफ़्तार थम चुकी थी, लेकिन आसमान अपनी पूरी ताकत से गरज रहा था। रात के 11 बज रहे थे। ऐशा अपने भारी बैग को कंधे पर टांगे, कॉलेज की एक्स्ट्रा क्लास खत्म कर घर की ओर तेज़ कदमों स...
सुबह की हल्की धूप खिड़की से होकर दिव्या के कमरे में फैल रही थी। अलार्म बजने से पहले ही उसकी आँख खुल गई थी। वह कुछ पल यूँ ही छत को देखती रही, जैसे किसी अधूरे सपने को याद करने की कोश...
एक सभ्य समाज में पुरुष और महिला के बीच सुंदरता से भरे संबंधों के बारे में यदि कहां जाए तो ----उसे कामसूत्र कहते हैं (क्या है ,कामवासना )और (क्या है, प्रेम), कामसूत्र से संबंधित कई...
यह कहानी एक लड़की की है, इस कहानी में त्याग, एकतरफा प्यार, वफादारी और बहुत कुछ है। धोखा और विश्वासघात। यह एक बहुत ही सुंदर, भावनात्मक और भविष्योन्मुखी कहानी है।
यह उपन्यास पूरी तरह कल्पना पर आधारित है और केवल कहानी व मनोरंजन के उद्देश्य से लिखा गया है। इसमें बताए गए विचार या कॉन्सेप्ट लेखक के व्यक्तिगत विचार नहीं हैं और इस कहानी में दर्शाए...
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