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महात्मा गांधी: एक युगपुरुष, एक विचार और मानवता की अमर विरासत |बीसवीं सदी के सबसे...
अध्याय 9: शर्मा अंकल का रहस्यएक शुक्रवार की शाम, तारा work से थकी-हारी घर लौट रह...
नदी में स्नान भारत बनाम दुनिया विवेक रंजन श्रीवास्तव भारत में नदियों के खुले घाट...
एपिसोड 64 — “अतीत की चीखें और अनकहा डर” कहानी — अधूरी खिताब---रात की स्याही ढल र...
एकतरफा प्यार बरसात के बाद गुनगुनी धुप निकल चुकी थी। मौसम खुशनूमा हो गया था। हवा...
बुराड़ी घाट का युद्ध: स्वराज्य के लिए अंतिम बलिदान जनवरी 1760 का कड़कड़ाती ठंड...
दुनिया को लगता है कि लड़का होना आसान है, पर सच बोलूं तो—आसान कुछ भी नहीं होता। ल...
: : प्रकरण - 26 : : ' कीसी ' के जाने के बाद...
अध्याय 1: ब्लैक ज़ोनसाल 2026 में शहर के बाहर फैला जंगल अब भी वैसा ही था, लेकिन उ...
बारिश की पहली बूंदेंदिल्ली की गर्मियां हर साल की तरह इस बार भी बेहद बेरहम थीं। स...
शाम का समय था । जानवी अपने पापा अशोक मुखर्जी से अपने पसंद के लड़के से शादी करने की जिद कर रही थी । जिस कारण से अशोक अपनी एकलौती बेटी जानवी को डांटता है । अशोक धनबाद शहर का एक जाना...
मुंबई की उस रात में उमस नहीं, एक दम घोटने वाली खामोशी थी. उपनगर की एक तंग गली के आखिरी छोर पर स्थित उस जर्जर इमारत का कमरा नंबर सत्रह, किसी जिंदा कब्र जैसा लग रहा था. घडी की सुइयां...
एपिसोड 1: रिश्तों की नीलामीशहर की रफ़्तार शाम ढलते ही और तेज़ हो गई थी, लेकिन 'खन्ना मेंशन' के भीतर वक्त जैसे ठहर गया था। यह घर नहीं, संगमरमर से बना एक आलीशान ताबूत लगता था...
इस घर में प्यार मना है… क्योंकि यहाँ प्यार ने कभी किसी को पूरा नहीं छोड़ा। या शायद… क्योंकि इस घर का मालिक प्यार से नफरत करता है। अध्याय 1— एक अनचाही शादी “संस्कृति… तैयार...
एक भयानक खोज दिल्ली की पुरानी लाइब्रेरी, जहां धूल से भरे शेल्फ़ और पन्नों की हल्की महक थी, रिया का पसंदीदा ठिकाना था। 22 साल की रिया, इतिहास की छात्रा थी, और उसे लगता था कि हर पुर...
में और मेरे अहसास भाग-१ *** ईश्क में तेरे जोगन बन गई lआज राधा जोगन बन गई ll *** गरघर कीदीवार केकर्णहोतेकोई घरखड़ाना होता ll *** काटे नहीं कटता एक पल यहां lकैसे कटेगी एक उम्र भला यहा...
उस वक़्त मैं तीन साल का था, मेरा बड़ा भाई सुखेश पांच साल का था औऱ मेरी छोटी बहन भाविका केवल छह महिने की थी. उस वक़्त मेरी मा असाध्य बीमारी का शिकार हो गई थी. उन्हें कांदिव...
मम्मीमम्मी - मम्मी -मम्मी कहाँ हो आप ' अभिनव अवाज देता हुआ घर में आता है। बेटा मैं यहां स्टोर मे हूं। दीवाली की सफाई कर रही हूँ। अभिनव ये क्या है ? बक्शे मे क्या टटॉल रही हो। म...
नेहरू की भूलों की सूची में ‘आजादी से पूर्व की भूलों’ के तहत अधिक भूलें दर्ज नहीं हैं, जबकि उनकी ‘आजादी के बाद की भूलों’ की सूची काफी लंबी है और ऐसा शायद इसलिए है; क्योंकि आजादी से...
सुबह के छह बज रहे थे। शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज़िंदगी में नींद के लिए जगह कब की खत्म हो चुकी थी। किराए के छोटे से कमरे में रखे एक पुराने से पलंग पर वह...
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