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द फोर लूजर्सशैली: अपराध, एक्शन, रोमांस, कॉमेडी, थ्रिलर, इमोशनमेरा नाम प्रीत गावड...
: प्रकरण - 2 : मैंने तो ऊस दिन के बाद स्कुल...
chapter 1- 'द अनप्लांड यू-टर्न' रात के 12 बजे पढ़ाई का तनाव मिटाने निकल...
" किरदार तो दुनिया देखती है, लेकिन किरदार के पीछे छिपा इंसान बहुत कम लोग समझ पात...
प्रकृति के रह...
एक 19 साल की लड़की आईने के सामने खड़ी थी। वह बिल्कुल नई नवेली दुल्हन की तरह लग र...
प्रताप ने कुछ देर रूक कर कुछ गहरा सोचा और आगे बढ़ गया, धड़कन सामान्य हो चली थी औ...
"गुप्त ख़ज़ाना" तीन नटखट दोस्तों—शिव, दिनेश और शैलेंद्र की एक मजेदार कहा...
दोस्त का पत्र:जब पहली बार नैनीताल पहुँचा तो तब नैनी झील प्रसन्न थी,लबालब भरी। भी...
भाग 1 – "अकादमी की पहली सुबह"सुबह के पाँच बजे भी हवा ठंडी नहीं लग रही थी।पुलिस अ...
गायब हैंडल का रहस्य सुबह के 10 बजे थे। बरेली के एक व्यस्त बैंक में लोगों की ऐसी भीड़ थी, मानो कुंभ का मेला लगा हो। सब अपने-अपने काम में ऐसे डूबे थे, जैसे चींटी शक्कर के दाने पर। कि...
मेरी क्लासमेट ऋत्वि मेहता का अंतिम संस्कार एक बारिश वाले दिन हुआ। अंतिम संस्कार में बहुत से लोग आये होगे। उनकी संख्या और उनके आसु उसके जिवन की अहमियत दशा रहे होगे। अंतिम संस्कार से...
चीड़ के पेड़ों की टहनियां तेज हवा के दबाव से जोरां से हिलती हैं सायं-सायं के कनफोडू षोर से काँंप उठती हूँ। इन चीड़ों से ढेर सूखी पिरूल भी लगातार झर रही है। ऊपर चढ़ने की कोशिश करते पाँव...
जुड़ी रहूँ जड़ों से शहर की सबसे आलीशान कोठी में एक तरफ बैडमिंटन कोर्ट है जहाँ अभी भी कुछ लोग काम करे रहे है। इसी के दूसरे छोर पर दो आउट हाऊस भी बने हुए है। दोनों आउट हाऊस हरियाली...
मानव सभ्यता के इतिहास में पंचमहल धरती का अपना एक अनूठा गौरवपूर्ण इतिहास रहा है। पूर्व सताब्दियों के साथ अष्टमी सताब्दी भी नवीन अनुभूति के, कई पन्ने पलटती दिखीं है।महाकवि भवभूत...
एक बार की बात है... राजस्थान के एक शांत, धूल से भरे गाँव "कुंभसर" में एक पुरानी हवेली थी, जिसे लोग “चौधरियों की कोठरी” कहते थे। ये हवेली अब वीरान थी, लेकिन गाँव के बुज़ु...
मुंबई की रातें— जो कभी हज़ारों सपनों की धड़कन हुआ करती थीं, वे अब अविन अविनाशी चौहान के लिए किसी रोमांच से नहीं, बल्कि एक खामोश मजबूरी से भरी थीं। यह नवंबर की उमस भरी रात थी; मरीन...
[ कोरोनाकाल को याद तो कोई नहीं करना चाहता लेकिन ये उस समय की बिलकुल अलग कहानी है कि लोग किस तरह नाटकीय स्थितियों में फंस गये थे। पढ़िए पहले लॉकडाउन के आरम्भ के एक माह बाद की हमारी ट...
यह कहानी एक वास्तविक लेखक के जीवन से बनाई है पर कहानी को रोमांचक बनाने के लिए लेखक ने अपनी कल्पनाओ का भरपूर इस्तमाल किया है इसलिये इस कहानीको सिर्फ एक कहानी के रूप में ही पढे.
प्रिय पाठकों,यह कहानी पूर्णतः काल्पनिक है जिसका किसी भी व्यक्ति के जीवन अथवा किसी घटना विशेष से कोई सम्बन्ध नहीं है। कहानी का उद्देश्य मनोरंजन मात्र है,किसी की भावनाओं को ठेस पहुं...
मुझे बाइक चलाना बहुत पसंद है। बहुत ज़्यादा। जुनून की हद तक। जब मैं एट स्टैंडर्ड में पहुँची तो स्कूल जाने के लिए फ़ादर ने लेडी बर्ड साइकिल दी। उन्हें यक़ीन था कि नई साइकिल पाकर मैं ख़ु...
एक छोटा-सा शहर, जो खूबसूरत पहाड़ों पर बसा था। वहाँ का मौसम कुछ ऐसा था, जैसे मन को सुकून देने वाली कोई पुरानी धुन — चिड़ियों की चहचहाहट, ठंडी हवा की सरसराहट और आसमान में तैरते बादल।...
90 वर्ष की उम्र पार कर चुकी कावेरी अम्मा अब तक तो एकदम टनकी थीं। लेकिन पिछले कुछ दिनों से हृदय की धड़कनों में थोड़ी मंदी आ गई थी इसलिए उनका शरीर अब वैसा साथ नहीं निभा पा रहा था जैस...
आप अकेले नहीं जो किसी खूबसूरत लड़की से प्यार करना चाहते हैं । कोई बिरला ही होगा जिसे ये चाहत न हो । पर ये वास्तव मे आधा सच है । आप किसी भी खूबसूरत लड़की से प्यार करने को तैयार हो ज...
पीड़ा इस शब्द से हम सभी का परिचय हैं। क्योंकि जिसमें चेतना है उसे पीड़ा की अनुभूति भी होगी। जैसे हंसना मुस्कुराना हमारे जीवित होने की निशानी है। वैसे ही पीड़ा का अनुभव करना भी...
सूरज एक सफल बिजनेसमैन था। वह अपनी मेहनत और लगन से शहर के सबसे प्रमुख उद्योगपतियों में गिना जाता था। मगर दौलत और शोहरत के इस सफर में भी एक खालीपन था, जिसे सिर्फ वह महसूस कर सकता था।...
अरुण ऑफिस में था तभी फोन आया।उसने उठाया उसकी माँ का था "हां माँ।" "तू घर आ जा।" "क्यो माँ?" "तुझसे बात करनी है।" "तो कर ले।"...
एबॉन्डेण्ड - प्रदीप श्रीवास्तव भाग 1 इसे आप कहानी के रूप में पढ़ रहे हैं, लेकिन यह एक ऐसी घटना है जिसका मैं स्वयं प्रत्यक्षदर्शी रहा हूं। चाहें तो आप इसे एक रोचक रिपोर्ट भी कह सकते...
दिल्ली, शहर की दुर्गा कॉलोनी , आलोक शर्मा जी का घर, आलोक शर्मा एक कम्पनी में सॉफ्टवेयर हैं। सुबह-सुबह हॉल में बैठकर चाय पीते हुए अखबार पढ़ रहे हैं। सुबह के तकरीबन 8...
एक आलिशान विला, सुबह के 8 बजे, विला के सभी नौकर अपने-अपने कामों में व्यस्त है। वही दूसरी तरफ सीढियों से एक 52 वर्ष के व्यक्ति फोर्मल सूट पहने हुए नीचे डाईनिंग एर...
कहानी शुरू होती है मेवाड़ के एक नगर नागदा से जहाँ भीलों के एक कबीले को घेरकर गुहिलवंशी शिवादित्य भीलों के सरदार भीलराज बलेऊ को द्वन्द की चुनौती देता है। वो बलेऊ को हराकर उसे मारने व...
कुछ दिन पहले शाम को पार्क में अपने साथी सीनियर सिटीजंस के साथ टहल कर गप्पें लड़ाते समय पड़ौस में रहने वाले एक साथी ने बताया कि आज तो उनका सारा दिन बहुत आराम से बीत गया। उनका गीज़र...
शाम का समय था... हल्की हल्की हवाओं के साथ छोटी छोटी बारिस की बूंदे पड़ रही थी। बड़ा ही सुहाना मौसम था...मैं ग्राउंड में टहल रहा था अचानक मेरे कानों में आवाज आई ।ओ मिस्टर मैंने पलट क...
एक औरत से उसे ऐसी उम्मीद नही थी।वह यह सोचकर आया था कि उसकी नीच और घिनोनी हरकत पर उसके साथी उसे डांटेंगे, जलील करेंगे, भला बुरा कहेंगे। लेकि न जैसा वह सोचकर आया था वैसा नही हुआ था।ब...
वह आवाज़ ठीक वैसी थी मानो किसी चाकू या तलवार को, धारदार बनाने के लिए, किसी पत्थर पर घिसा जा रहा हो। हालाँकि यह आवाज़ बहुत ही धीमे से उभरी थी लेकिन इस सन्नाटे में साफ-साफ सुनी जा सकती...
पचास साल से ज्यादा हो गए पर मुझे आज भी वह सपना ऐसे याद है मानो कल की ही बात हो।भूल भी कैसे सकता हूँ।उस सपने ने साकार होकर मेरे उज्ज्वल भविष्य के सपने को निगल लिया था।उस सपने की टीस...
सुबह के साढ़े पांच बजे थे। शहर की भागदौड़ अभी शुरू नहीं हुई थी, लेकिन भूपेंद्र के घर की रसोई से प्रेशर कुकर की पहली सीटी ने दिन के आगाज़ की घोषणा कर दी थी। खिड़की के बाहर हल्की ओस ज...
यह लघु उपन्यास ग्रामीण भारत में स्वतंत्रता व गांधीजी के आन्दोलन के प्रति अलख जगाने की लोमहर्षक अनकही दस्तान है I २ स्वतत्रता सेनानी द्वारा हरिजन उत्थान का प्रयास करने पर जाति वा...
मेरा खत न मिलने पर 1 हरिसिंह 'हरीश' : परिचय : 1 अगस्त, 1935 (दतिया म.प्र.) शिक्षा : एम.ए. (हिन्दी) तक ग्वालियर जीवाजी विश्वविद्यालय से । मानद : विद्या...
एक ही व्यक्ति के दो किरदारों को मानना मेरे लिए बड़ा मुश्किल है, यूं कहूँ तो उसके दो किरदार मै मानता ही नही । पहले किरदार मे वह लोगों मे फुट डालने की बात करता है, लोगों मे नफरत फैला...
जैसे ही इशिता ने उस कमरे में प्रवेश किया उसकी साँसें ऊपर की ऊपर ही रह गईं | एक अजीब सी मनोदशा में वह जैसे साँस लेना भूल गई, लड़खड़ा गई जैसे चक्कर से आने लगे | "व्हाट हैपेंड म...
रात के बारह बजने वाले थे। करीबी रिश्तेदारों तथा वर-वधू परिवारों के लोगों को छोड़कर विवाह समारोह में आमंत्रित लगभग सभी लोग खा-पीकर तथा बधाई-शुभकामनाएँ देने का फ़र्ज़ निभाकर जा चुके...
यह कहानी एक लड़की रिया के बारे मे है जिसकी जिंदगी मे नवीन प्यार की बहार ले आता है उसे यकीन नही होता के कोई उसे इतना प्यार भी कर सकता है जब रिया नवीन से जीवन भर का साथ मांगती है त...
शहर की कंक्रीट की दीवारों और इंसानी शोर के बीच कुछ ऐसी कहानियाँ जन्म लेती हैं, जो किसी उपन्यास के आखिरी पन्ने तक पहुँचने की ज़िद नहीं करतीं। दिल्ली जैसे शहर में, जहाँ हर कोई किसी न...
कियारा, कियारा कहां हो ? अभी के अभी नीचे आओ। तुम्हें सुनाई नहीं दे रहा है क्या ?उस महल जैसी हवेली के बीच यह आवाज ऐसी गूंज रहे थे कि मानो वह आवाज किसी हवेली में नहीं बल्कि किसी पहाड...
ये कहानी शुरू होती हैं कंचनापुर से चंद्रिका को उसके भाई नीलेश ने एक गुप्त स्थान पर छुपा रखा है ताकि भावी जादूगरनी को कोई नुक़सान न पहुॅंचा सके। चंद्रिका नादान सी इन सब बातो से अनज...
"इतनी जरूरी मीटिंग और ऊपर से लेट हो गया। आज तो मेरी खैर नहीं। पक्का आज तो मुझपर शामत आने वाली है और बॉस से गालियां खाने को मिलेंगी।" – अपनी अम्मी को बोलता हुआ रफ़ीक़ घर से बा...
बागी आत्मा 1 रचना काल-1970-71 उपन्यास रामगोपाल भावुक सम्पर्क- कमलेश्वर कोलो...
घुँघरुओं की छनछनहाट क्यों और कहाँ से उसके कानों में पिघलने लगी थी, वहाँ वह गिरजाघर के प्राँगण में खड़ा था, कॉलेज का नया लेक्चरर अपने कॉलेज के छात्र-छात्राओं के साथ इस गिरजाघर की ज़मी...
हर्ष एक 17 साल का सामान्य सा लड़का था, जो अभी 12वीं कक्षा में पढ़ता था। पढ़ाई में ठीक-ठाक और स्वभाव से थोड़ा शांत था, लेकिन उसकी संगत उसके स्वभाव से मेल नहीं खाती थी। हर्ष की दोस्त...
यह उपन्यास डायरी विधा में लिखित एक स्त्री की दास्तान है। समाज ने स्त्रियों के लिए कुछ साँचे बना रखे हैं जैसे अच्छी माँ ....सुगढ़ गृहणी और फरमावदार बीबी, जो इन साँचों में फिट हो जाती...
आज साकुरा नाम कि एक हाईस्कूल स्टूडेन्ट का फिनरल होता है जहा उसके सारे दोस्त आये होते है लेकिन उसीका एक क्लासमेट हारुकि वहा नहि गया होता वो अपने रूम में उसने किया अपना आखरी मैसेज दे...
इस लघु उपन्यास के प्रसिद्ध लेखक इंदिरा सौंदर्राजन हैं। यह तमिल के बहुत बड़े लेखक हैं। इन्होंने करीब 500 उपन्यास और 800 कहानियां लिखी है। आपने चार हजार के करीब लेख लिखे हैं। आप क...
सूरज कब का दूर क्षितिज में ढल चुका था।शाम अपनी अंतिम अवस्था मे थी।आसमान से उतर रही अंधेरे की परतों ने धरती को अपने आगोश में समेटना शुरू कर दिया था।प्लेटफॉर्म नम्बर पांच के अंतिम छो...
उसने अचानक ही उस पर घूँसे-लात बरसा कर, उसे बेड से नीचे धकेल दिया। टाइल्स लगे फ़र्श पर अकस्मात् गिरने से उसके सिर में गहरी चोट आ गई है। ख़ून के धब्बे पड़ने लगे हैं। उसने पेट पर लात इत...
मैं, एक लेखिका, श्रुत कीर्ति अग्रवाल, आज पहली बार आपके साथ अपनी रचनाओं के माध्यम से नहीं, स्वयं अपने-आप को माध्यम बना आपके समक्ष हूँ। अभी तक मुझे लगता था कि अगर मैं अपनी सारी बातें...
खूबसूरती सबको पसंद होती है। लोग शरीर की सुंदरता पर मोहित हो जाते हैं। पुराने जमाने में भी ऋषि मुनियों भी अप्सराओं से मोहित हो गये थे। खैर वह पुराने जमाने की बातें हैं। अब अप्...
मुंबई की शाम हमेशा किसी फिल्म के सेट जैसी लगती थी. ऊँची बिल्डिंग्स की चमकती खिडकियाँ, गाडियों का लगातार शोर, और बीच- बीच में समुद्र की आवाज. उसी समुद्र किनारे खडी थी आयरा मेहता. उस...
शिजा एक शर्मीली, समझदार और चश्मा पहनने वाली लड़की थी। उसका चश्मा उसके लिए सिर्फ एक साधारण चीज नहीं था, बल्कि एक छुपा हुआ डर भी था। हर बार जब वह अपने दोस्तों के साथ कॉलेज में बैठती,...
हर्ष एक संपन्न परिवार में पैदा हुआ बहुत ही सुंदर बच्चा था। बचपन से ही जो भी उसे देखता वह ये कहना नहीं भूलता कि कितना सुंदर बच्चा है। घर में, परिवार में, स्कूल में, हर जगह अपनी इस त...
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