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Chapter 1: आख़िरी लोकलरात के 11:52।ट्रेन छूटने ही वाली थी।अंगद दौड़ते हुए प्लेटफ...
रुद्रपुर की पहाड़ियों पर आज रात आसमां से पानी नहीं, बल्कि साक्षात कहर बरस रहा था।...
मुंबई की रात हमेशा की तरह चमक रही थी।ऊँची-ऊँची इमारतों के बीच से गुजरती सड़कों प...
Part 1: वो रात, जहाँ सब शुरू हुआउस रात की खामोशी में एक अजीब सा तूफान छुपा था।हव...
भाग 1: हवेली की पुकारराहुल ने कार का इंजन बंद किया।कुछ सेकंड तक सिर्फ सन्नाटा था...
मैंने उत्सुकता से कहा,“भंते जी, चलिए ज़रा करीब से देखते हैं… दूर से तो कुछ साफ द...
कृषांत ठाकुर (Hero) — 25 वर्ष का, सख्त मिज़ाज, कम बोलने वाला, लेकिन अंदर से बहुत...
वो जिंदा है He Is ALIVE नोट - यह काल्पनिक कहानी एक ऐसे अपराधी की है जो ह...
हर कहानी में एक नायक होता है, पर कुछ नायक ऐसे भी होते हैं, जो कभी अपने लिए नहीं...
शिजा एक शर्मीली, समझदार और चश्मा पहनने वाली लड़की थी। उसका चश्मा उसके लिए सिर्फ...
अमर – प्रेम – राज अध्याय 1 : अंधेरी रात, एक माँ और अधूरा सच बरसात की वह रात जैसे पूरे शहर पर बोझ बनकर उतरी थी। आसमान में बादल नहीं, बल्कि काले इरादे तैर रहे थे। कभी तेज़ बिजली...
लखनऊ की गलियों से लेकर राजस्थान की रेत तक, दो नौजवान — रैयान मीर और ज़ेहरा नाज़ — एक ऐसे नक़्शे की तलाश में निकलते हैं जो सदियों पुराने सुल्तान बहादुर शाह के गुमशुदा ख़ज़ाने तक पहु...
बारह पन्ने अतीत की शृंखला के बचपन इंसान की ज़िंदगी का सबसे सुनहरा दौर जिसे शायद अंतिम साँस तक नही भुलाया जा सकता ।जीवन का सबसे स्वर्णिम काल ,चिंतारहित खेलना खाना ,बेपरवाह सी ज...
"कभी-कभी, जो काम सबसे मामूली लगता है, वही सबसे गहरी साजिशों से घिरा होता है।" आपके हाथों में जो किताब है, वह सिर्फ एक कहानी नहीं, बल्कि हकीकत के कड़वे और रोमां...
जयपुर का बस स्टॉप शाम को और भी गुलाबी लगता है। हवा में गुलाब जल की महक है, और सामने की दीवार पर जान्हवी पेंट कर रही है — एक अधूरा मोर जिसकी आँखों में उदासी है। जान्हवी कोई आम...
शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी। खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था। आज कुछ अलग सा लग रहा था। दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...
बस में बहुत भीड थी, लोगों को खड़े खड़े सफर कर रहे थे। बैठने वाले भी दांत को कसके जा रहे थे। लेकिन उन्हीं बीच एक युवक जो दिखने में तो एक सीधा साधा २० २१ साल का जवान लड़का था, सरल सफ...
ये बात २००५ की तब हम लखनऊ इसी आलमबाग रेलवे क्वार्टर में रहते थे। हमारा परिवार तीसरे माले में रहता था। एक रात सोटे हुए अचानक मेरी आंख खुल गई। में बाथरूम की तरफ से बड़ा तो मुझे किसी...
मैं अपने बचपन में दादा-दादी की लाड़ली थी।उनकी आँखों का नूर, उनके आँगन की सबसे प्यारी हँसी।घर में अगर कोई सबसे पहले मेरी ओर देखता था,तो वे दादा-दादी ही होते थे।उनके लिए मैं केवल उनक...
मदरसे के सहन में, जहाँ बचपन की बेफिक्रियाँ रक़्स करती थीं, आरिफ़ की निगाहें अक्सर एक नूरानी चेहरे पर ठहर जाती थीं - ज़ोया। ज़ोया, अपनी हया और सादगी में बे-मिसाल थी। आरिफ़, जो अपनी...
हनुमत हांक' बलदेव दास जी द्वारा लिखी गई बड़ी महत्वपूर्ण पुस्तक है । यद्यपि यह सामान्य रूप से सब जगह नहीं पाई जाती, मंदिरों, बड़े पुस्तकालयों और पुस्तक विक्रेताओं से मांगने पर भ...
निशांत :- पोपकोर्न खाओगी ? ये भैया बहोत अच्छे पॉपकॉर्न बनाता है पता है ?क्यारा :- हम यहा शायद पोपकोर्न खाने नही आये निशांत ? एक साल में कुछ कुछ तो में समजती हु आपको ।निशांत :- अच्छ...
सखी (मन मे) - आप मेरे हो सत्या और मैं आपकी हु। में आपकी ही रहूंगी । में आपकी हंसिनी हु जो अकेली रह सकती है मर सकती है पर कही ओर नहीं जा सकती । दुनिया की रिवाजों जरूरत मुझे नहीं है...
मुंबई की एक सर्द सुबह... समंदर की लहरें शांत थीं, लेकिन शहर के बीचोंबीच एक तूफानी शख्सियत की एंट्री होने वाली थी। काली Mercedes-Benz Maybach का दरवाज़ा खुला, और धुएं की तरह ब...
सागरपुर नाम का शहर, जो न तो पूरी तरह गाँव था और न ही पूरी तरह महानगर। यहाँ न तो मेट्रो की गूंज थी और न ही ऊँची-ऊँची इमारतों की चकाचौंध। लेकिन यहाँ के लोग अपनी ज़िंदगी जीने के लिए स...
एक एसी हारर कहानी जो पल पल रोमांच और रहस्य से भरी है, जिसे पढ़ते समय पाठक को लगता है वह किसी रहस्यमय दुनिया में आ गया है कुछ पाने के लिए कुछ करना पड़ता है और सब कुछ पाने के लिए...
एक दिन जब तनुजा ने अपने घर फोन किया , उसके पापा ने फोन उठा कर कहा “ हाँ बेटा , बोल कैसी चल रही है तेरी पढ़ाई ? “ “ वो सब ठीक है , मुझे आपलोगों को एक खुशखबरी देनी है . “ “...
छोटे शहर बरेली के एक साधारण से कॉलेज में, नया सत्र शुरू हो चुका था। कॉलेज की भीड़ में, हलके भूरे रंग की शर्ट और नीली जींस पहने एक लड़का, कुछ घबराया, कुछ उत्साहित-सा कैंपस में प्रवे...
एक अंडरवर्ल्ड की परछाईं में पनपती मासूम मोहब्बत की दास्तान...... Characters introduction............ -वीर सैयद (28 वर्ष) :- "शहर में डर का दूसरा नाम — पर...
जोग लिखी ‘‘बाऊजी आप फिर हुक्का गुड़गुड़ाने लगे कित्ती बार कहा कि जे तोहार सेहत के लिए ठीक ना है। ’’ ‘अरी लाली, तू क्यों मेरे पीछे पड़ी है, अब जे लत आज की तो है ना जो छूट जाए। अब तो...
खामोश पेंटिंग की पहली साँस पुरानी गली की वह कला-दुकान हमेशा की तरह उस शाम भी आधी अँधेरे में डूबी हुई थी। बाहर बारिश की हल्की बूँदें पत्थरों से टकरा रही थीं और अंदर हवा में पुरान...
सुबह के छह बज रहे थे। शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन अंकित की ज़िंदगी में नींद के लिए जगह कब की खत्म हो चुकी थी। किराए के छोटे से कमरे में रखे एक पुराने से पलंग पर वह...
घर भरा हुआ था। आँगन में रिश्तेदारों की आवाज़ें थीं—हँसी, गाने, बर्तनों की खनक। शादी की तारीख़ पास थी, और हर कोना तैयारियों से भरा हुआ। सौम्या गुनगुनाती हुई कमरे में आई।...
नंदलाल यादव दिल्ली में नौकरी करते हैं और साहिबाबाद में किराए के एक फ्लैट में रहते हैं। लोकल ट्रेन से आना-जाना करते हैं। आई.टी.ओ. पर उतर कर बस से आर.के.पुरम जाते हैं।सुबह शाम सप्ताह...
शांतनु मातृभारती पर इसी नाम से अत्यंत लोकप्रिय साबित हुए गुजराती उपन्यास का हिन्दी रूपांतरण है इस उपन्यास में एक तरफ़ा प्रेम और दोस्ती की ऊंचाईयों को बड़ी परिपक्वता से दर्शाया गया ह...
दोहा- श्री गणपति मंगल करण हरण अमंगल मूल । मंगल मूरति मोहि पर रहहु सदा अनुकूल ॥१॥ संवत सर श्रुति खंड विधु कार्तिक शुभ सित पक्ष । छठि मंगल बलदेव कृत हनुमत विनय प्रत्यक्ष ॥२॥( दोहे...
कितनी अजीब बात है ना... बचपन जहाँ खेल और खिलौनों का होना चाहिए, वहाँ कुछ बच्चों के हिस्से सिर्फ ताने, ज़िम्मेदारियाँ और रोने की मनाही आती है। क्यों? क्योंकि वो "लड़का"...
बॉस… आपने जैसा कहा था, काम हो गया है… वह उसी तरह एक पैर पर दूसरा पैर रखे, उस घने अंधेरे कमरे में कुर्सी को आगे-पीछे झुलाते हुए बैठा था। छह फीट से भी लंबा उसका शरीर मानो उस अंधेरे...
वह चार साल बाद अपने घर पहुँची लेकिन गेट पर लगी कॉल-बेल का स्विच दबाने का साहस नहीं कर पाई। क़रीब दस मिनट तक खड़ी रही। उसके हाथ कई बार स्विच तक जा-जा कर ठहर गए। जून की तपा देने वाली...
ख़ुलूस ओ प्यार के सांचे में ढल के देखते हैं। जफ़ा की क़ैद से बाहर निकल के देखते हैं।। हम अपने आप को थोडा बदल के देखते हैं। चलो के हम भी हक़ीक़त पे चल के देखते हैं।।...
दूर दूर तक यह भजन पहुंचकर अपने ओर लोगों को आकर्षित कर रहा था!! मंदिर के रास्ते पर दो बड़े-बड़े काले रंग कि विलायती गाड़ियां रास्ते से गुजर रही थी उसमें बैठे शख्स को भजन कि आवाज ने...
हिमालय की ढलानों पर रात पूरी तरह उतर चुकी थी। देवदार के घने जंगल के बीच बने छोटे-से कैम्प में एक अलाव जल रहा था, जिसकी लपटें सबके चेहरों पर नारंगी रोशनी बिखेर रही थीं। ठंडी हवा तम्...
फ्लाई किल्लर एस. आर. हरनोट (1) उस चिनार के पेड़ पर सारे मौसम रहते थे। उसके नीचे लगी लोहे की बैंच अंग्रेजों के ज़माने की थी जिस पर वह बैठा रहता था। वह कई बार अपनी उंगलियों के पोरों पर...
रूहों का सौदा क्या जीत केवल तलवार से होती है? जब मर्यादा की दीवारें ढहने लगीं और क्रोध ने विवेक का गला घोंट दिया, तब रुद्र ने उठाया एक ऐसा कदम जिसने सबको स्तब्ध कर दिया। लेकिन इस श...
प्रस्तावना"वो कहते हैं न, कि लड़कियां कमजोर होती हैं...पर मैंने तो देखा है-एक लड़की अपने टूटने की आवाज़ भी अंदर ही दबा लेती है,और जब दुनिया उसे गिरा देती है,तब वो जमीन से नहीं...
ठंडी हवा के झोंके पेड़ो को झूमने पर मजबूर कर रहे थे।शाम का धुंदलका छा रहा था। हर चीज सुर्खी लिए हुए महसूस हो रही थी।सूरज नीले आसमान पर अपनी मंजिल तय करता हुआ चारों तरफ सुर्खी बिखेर...
चिंदी चिंदी सुख थान बराबर दुःख (1) इवनिंग वाक से लौट कर अभी गेट खोल ही रही थी कि फोन की घंटी बजने लगी | स्क्रीन पर अनजान नंबर चमक रहा था सोचा अभी चेंज कर के ही फोन रिसीव करुँगी |नं...
मौत का दस्तक बनारस की उस रात में गंगा के घाटों पर सन्नाटा नहीं, बल्कि एक अजीब सी बेचैनी थी। शाम की आरती के बाद जो शांति छा जानी चाहिए थी, वह आज कहीं खो गई थी। मणिकर्णिका घाट पर ज...
एक झुंड भरकर युवा आधुनिक लडकियां टीचर्स ट्रेंनिंग काॅलेज के गेट पर रुककर यह देहाती गीत गा रही हैं। सभी लडकियों ने ट्रेनिंग काॅलेज की यूनिफाॅर्म पहन रखी है - राजकमल की सफेद काॅटन सा...
वो उस वक्त सिर्फ 12 साल की थी। एक छोटी सी लड़की, जिसकी सुबह बाकी बच्चों जैसी हँसी-खुशी से नहीं, बल्कि घुटन और ज़िम्मेदारियों से शुरू होती थी। वो बाकी बच्चों से अलग स्कूल जाने...
उसकी आँखों में भर आए आँसू उसके गालों पर गिरने ही वाले थे। आँसुओं से भरी उसकी आँखों में भीड़ और उनके हाथों में लहराते तिरंगे के अक्स दिखाई दे रहे थे। ज़ीरो डिग्री टेम्प्रेचर वाली कड़...
कुछ प्रेम कहानियाँ अधूरी रह जाती हैं... और कुछ अधूरी होकर भी अमर हो जाती हैं। यह कहानी भी उन्हीं में से एक है। ‘प्रकाश और राधिका’— दो नाम नहीं, दो आत्माएँ थीं जो एक-दूसरे की सा...
19 साल की थी मैं, जब ज़िंदगी ने मुझे बेच दिया था…” बरसों से जिसे घर कहा था, उसी घर के कोने में बैठी मैं उस दिन अपना वजूद समेट रही थी। माँ की आँखें भीगी थीं, लेकिन लाचार। बाप… वो...
प्यार, एक चार अक्षर से बनी शब्द। लेकिन ये छोटी सी शब्द समुद्र से ज्यादा गहराई और कभी न रुकने वाली लहरों की तरह है। इस विश्व में हर किसी को प्यार होता है, लेकिन सच्चा प्यार नहीं। अक...
इजरायल-हमास संघर्ष के वास्तविक तथ्यों (जैसे, गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार 55,223 मौतें, 1.8 मिलियन विस्थापित) पर आधारित होगी। यह काल्पनिक लेकिन प्रामाणिक कहानी आमिना (28, शिक्...
Location: अंडरग्राउंड RAW फ़ैसिलिटी, लद्दाख वक्त: सुबह 4:30 बजे काँपती हुई ठंडी हवा उस बंकर के लोहे के दरवाज़े से टकरा रही थी, जहाँ देश का सबसे ख़ुफ़िया मिशन शुरू होने जा रहा...
आज वह फिर नस्लवादी कॉमेंट की बर्छियों से घायल होकर घर लौटी है। वह रास्ते भर कार ड्राइव करती हुई सोचती रही कि आख़िर ऐसे कॅरियर पैसे का क्या फ़ायदा जो सम्मान सुख-चैन छीन ले। क्या मैं ग...
“वादल बेटा, आज फिर खिड़की से सूरज को देख रहे हो?”मथुरा के अनाथालय की अधीक्षिका सरला मैडम ने हल्के डपट भरे स्वर में पूछा। उनकी उम्र पचपन के आसपास रही होगी। चेहरे पर कठोरता की रेखाएँ...
अध्याय 1 — रामगढ़ में मेनका का आगमन सुबह की धूप अभी-अभी पहाड़ियों के पीछे से झाँकने लगी थी। रामगढ़ गाँव की मिट्टी से उठती हल्की भाप, खपरैल के घरों की छतों से टपकती ओस की बूंदें...
सुनो पुनिया (1) घाम की चादर आंगन के पूर्वी कोने में सिकुड़ गई थी. पुनिया ने मुंडेर की ओर देखा और अनुमान लगाया सांझ होने में अधिक देर नहीं है. ठंड का असर काफी देर पहले से ही बढ़ने लगा...
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