लघुकथा कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Short Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


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बेटे की चाह By Jeetendra

ड्राइंग रूम के पुराने सोफे पर बैठी सुमित्रा देवी अपनी उंगलियों में फंसी माला को बड़ी तेजी से फेर रही थीं। कमरे में अगरबत्ती का धुआं किसी भारी कोहरे की तरह तैर रहा था। नेहा रसोई में...

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पहचान की धुंध By kajal jha

शीर्षक: अनाम अहसाससब कुछ एक 'गलत नंबर' से शुरू हुआ था। आर्यन ने अपने दोस्त को फोन लगाया था, लेकिन दूसरी तरफ से एक सौम्य और ठहरी हुई आवाज़ आई— "हेलो?"वह आवाज़ मीरा की थी। उस ए...

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नेहरू फाइल्स - भूल-115 By Rachel Abraham

भूल-115 नेताजी सुभाष बोस के प्रति दुर्व्यवहार नेताजी की मृत्यु की जाँच करवाने, जाँच रिपोर्ट को प्रभावित करवाने (भूल#112), आई.एन.ए. के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया रखने (भूल#114) और नेत...

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विदुर नीति संवाद - विदुर और धृतराष्ट्र के बीच By Prithvi Nokwal

विदुर नीति संवाद – विदुर और धृतराष्ट्र के बीचमहाभारत केवल एक युद्धकथा नहीं है, बल्कि यह जीवन, धर्म, राजनीति, समाज और मानव स्वभाव का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करने वाला महाग्रंथ है। इसम...

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पुरानी हेवेली का प्रेम By kajal jha

पुरानी हवेली का प्रेम: एक अधूरी दास्तानपहाड़ों की तलहटी में बसी वह पुरानी हवेली सालों से वीरान पड़ी थी। लोग कहते थे कि उस हवेली की दीवारों में दर्द और चीखें दफन हैं। शहर की भागदौड़ स...

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शांति प्रस्ताव से पहले द्रोपदी और श्री कृष्ण संवाद By Prithvi Nokwal

शांति प्रस्ताव से पहले द्रौपदी और श्रीकृष्ण संवाद(महाभारत प्रसंग पर आधारित विस्तृत संवाद)उपप्लव्य नगरी में पांडवों का शिविर लगा हुआ था। वनवास और अज्ञातवास की कठिन परीक्षाओं के बाद...

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श्री कृष्ण द्वार हस्तिनापुर की राजसभा में शांति प्रस्ताव! By Prithvi Nokwal

श्रीकृष्ण द्वारा शांति प्रस्ताव संवाद(महाभारत प्रसंग पर आधारित विस्तृत संवाद)हस्तिनापुर की राजसभा सजी हुई थी। विशाल स्तंभों से सुसज्जित उस सभा में कौरवों और पांडवों के बीच चल रहे त...

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बलि का बकरा By Jeetendra

गाँव की पगडंडी पर धूल उड़ रही थी। सूरज ढलने को था, लेकिन हवा में एक अजीब सी तपन थी। माधव अपनी पुरानी साइकिल रोके खड़ा था। सामने खलिहान में पंचायत बैठी थी। सन्नाटा ऐसा कि सूखे पत्तों...

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जीरो बेरोजगारी By Jeetendra

शहर की सुबह अब अलार्म की आवाज़ से नहीं, बल्कि एक अजीब सी खामोशी से शुरू होती थी। निखिल अपनी बालकनी में खड़ा नीचे की सड़क को देख रहा था। सड़क बिल्कुल साफ थी, न कहीं कचरा, न कहीं ट्र...

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श्री कृष्ण-अर्जुन-दुर्योधन संवाद पर आधारित नारायणी सेना मांगने का प्रसंग By Prithvi Nokwal

नचे श्रीकृष्ण–अर्जुन–दुर्योधन संवाद पर आधारित नारायणी सेना माँगने का प्रसंग**श्रीकृष्ण, अर्जुन और दुर्योधन का संवाद(नारायणी सेना का प्रसंग)**द्वारका की प्रातःकालीन वेला थी। समुद्र...

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महाभारत का प्रसिद्ध पासा क्रीड़ा प्रसंग: दुर्योधन और युधिष्ठिर By Prithvi Nokwal

महाभारत का प्रसिद्ध पासा क्रीड़ा प्रसंग: दुर्योधन और युधिष्ठिरमहाभारत: जब धर्म पासों की चाल में उलझ गयाहस्तिनापुर का राजमहल उस दिन असामान्य रूप से शांत था। आकाश में बादल घिरे थे, म...

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आजाद सवेरा By Jeetendra

 कोहरे की चादर ने पूरी घाटी को ढका हुआ था। दूर कहीं से आती हुई झरनों की आवाज सन्नाटे को और गहरा बना रही थी। एक पुरानी लकड़ी की चौकी, जिसकी दीवारें समय की मार से काली पड़ चुकी थीं,...

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आज़मी साहब मीठा नहीं खाते By Dr Sandip Awasthi

संदीप अवस्थी कई बार लगता है कि धर्म को हम चलाते हैं। पर ऐसा है नहीं दरअसल धर्म मजहब हमें चला रहा होता है। यह तो जगजाहिर  है कि मनुष्य पहले या धर्म पहले?  तो फिर कुछ लोग इ...

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युद्ध से पहले श्रीकृष्ण, माता कुंती और कर्ण के बीच हुए संवाद पर आधारित ! By Prithvi Nokwal

यह महाभारत की कथाओं पर आधारित रचनात्मक संवाद है, जिसमें मूल भाव सुरक्षित रखे गए हैं।युद्ध से पहले श्रीकृष्ण, माता कुंती और कर्ण का संवादकुरुक्षेत्र के युद्ध की विभीषिका से ठीक पहले...

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अधुरी चिट्ठी By kajal jha

अधूरी चिट्ठीगांव के किनारे बसे एक छोटे से घर में राधा मैया रहती थीं। उम्र हो चली थी उनकी – साठ के पार। चेहरे पर झुर्रियां थीं, लेकिन आंखों में आज भी वही चमक जो बचपन में बेटे को गोद...

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सपनों का कैनवस: एक जादुई हकीकत By khushboo

लेखिका: [खुशबू️......दुनिया की भीड़ में श्री खुद को हमेशा अकेला पाती थी। उसके विचार, उसकी पसंद और जीने का तरीका सबसे अलग था, शायद इसीलिए लोगों से उसकी पटरी कभी नहीं बैठी। रिश्तों के...

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पिंजरे के बाहर का आकाश By Jeetendra

शहर की चकाचौंध से दूर एक मध्यमवर्गीय अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी अदिति अपनी कॉफी के कप से उठती भाप को देख रही थी। सुबह के सात बज रहे थे। घर में शांति थी, लेकिन उसके भीतर एक शोर म...

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रामायण युद्ध के पश्चात श्री रामजी और हनुमानजी का संवाद By Prithvi Nokwal

यहाँ युद्ध के बाद भगवान श्रीराम और हनुमान जी के बीच संवाद प्रस्तुत है — भावपूर्ण, भक्तिरस से युक्त और लगभग लंका का युद्ध समाप्त हो चुका था।रावण का अंत हो गया था, अधर्म पर धर्म की व...

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बारिश की वो शाम प्यार कि एक भीगी सुरुआत By kajal jha

बारिश की वो शामदिल्ली की गर्मियों में बारिश का मौसम आते ही शहर एक अलग ही रंग में रंग जाता है। सड़कें चमकने लगती हैं, हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू फैल जाती है, और लोग छाते थामे भाग...

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दो कहानी By Rajeev kumar

अस्तित्व मनोहर के मन-मस्तिष्क पर अस्तित्व शब्द ने खलबली मचा दी थी। उसने सुन रखा था कि आपका अस्तित्व ही आपका जीवन है। उसने कई लोगों से इस विषय पर चर्चा की लेकिन उस प्रश्न की जकड़न को...

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बारिश की पहली बुंदे By kajal jha

बारिश की पहली बूंदेंदिल्ली की गर्मियां हर साल की तरह इस बार भी बेहद बेरहम थीं। सूरज जैसे आसमान से आग बरसा रहा था। दोपहर के वक्त सड़कों पर निकलना किसी सज़ा से कम नहीं था। हवा में तप...

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उम्मीद की एक नई किरण By Jeetendra

शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक पुराने जर्जर मकान की बालकनी में बैठे अविनाश के चेहरे पर गहरी चिंता की लकीरें खिंची हुई थीं। उसके हाथ में एक लिफाफा था, जिसे वह बार-बार खोलता और फिर बंद क...

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एकतरफा प्यार By Rajeev kumar

एकतरफा प्यार बरसात के बाद गुनगुनी धुप निकल चुकी थी। मौसम खुशनूमा हो गया था। हवा भी चल रही थी और नमी भी बरकरार थी। बरगद के पेड़ के पत्तों से अभी भी जल की बुदें तपक रही थी, जो पेड़ के...

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घर जो कभी बेचा नही गया By InkImagination

घर जो कभी बेचा नहीं गयाशहर के सबसे चमकदार इलाके में, जहां हर तरफ़ गगनचुंबी इमारतें आसमान को चीर रही थीं, वो एक पुराना सा घर अकेला खड़ा था।चारों ओर कांच की दीवारें, नीली रोशनी वाली...

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मिड-डे मील By Rinki Singh

प्राथमिक विद्यालय का प्रांगण कोलाहल से भरा हुआ था। आज स्कूल का अंतिम दिन था, कल से गर्मी की छुट्टियाँ शुरू होने वाली थीं। बच्चे आज कुछ ज़्यादा ही उत्साहित थे। कोई मैदान में दौड़ रह...

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इश्क. - 17 By om prakash Jain

सिम्मी को रजनी मेहता अमेरिका वाली लड़की सहज संयोग से  मिल ही जाता है ।शेखर दोपहर को सिम्मी के घर आता है ।आज सिम्मी घर में  है ,रविवार के दिन सिम्मी मां के  घरेलु काम में हाथ बटा  र...

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बेटा By Rajeev kumar

बेटा बड़ी थकान महसुस हो रही थी। रास्ते में कई बार कई पेड़ के नीचे बैठ कर सुस्ता चुका मोहना का ऐसा हाल था। एक तो शरिरिक कमजोरी, उस पर तबियत खराब और जाना इतना जरूरी था कि बिना गए काम न...

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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ - 6 By Dr. Pradeep Kumar Sharma

डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ माँऑफिस से लौटकर जैसे ही वह घर पहुँचा, पत्नी बोलीं, "सुनिए जी, आपके पास किसी स्नेक रेस्क्यू वाले या सपेरे का फोन नंबर हो, तो बुला लीजिए। घर के पी...

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बगावती By Deepak sharma

                     “मैं सिनेमा जा रही हूं,”गली के नुक्कड़ पर उस बुद्धवार जैसे ही मां अपने झोलों के साथ प्रकट हु...

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सुबह का तारा By Rakesh Kaul

सुबह का तारा आज के नए ज़माने के शहरों में ज़्यादातर तालीमयाफ़्ता नौजवान अच्छी नौकरी की तलाश में घर-परिवार से दूर दूसरे शहरों या विदेशों में बसना पसंद कर रहे हैं | लिहाज़ा संयुक्त परिवा...

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युद्ध के पश्चात कृष्ण और गान्धारी संवाद By Prithvi Nokwal

पुत्र वियोग में तड़पती गांधारी जब कृष्ण को श्राप देने चली तब कृष्ण गांधारी से कहते हैंमाता मैं शोक ,मोह ,पीड़ा सबसे परे हूँ, न जीत में न हार में, न मान में , न अपमान में, न जीवन मे ,...

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कॉफी शॉप की अधूरी मुलाकात By Bharti 007

बारिश उस दिन कुछ ज़्यादा ही ठहरकर बरस रही थी, जैसे शहर को नहीं—अन्वी के दिल को भिगोना चाहती हो।कॉफ़ी हाउस की खिड़की के पास वही पुरानी टेबल…जहाँ कभी दो कप चाय,और अनगिनत सपने रखे जात...

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जिंदगी की खुशी By manshi

क्या आप ने कभी सोचा है, कि कोई ऐसा भी होगा, जिसमें गुण तो बहुत हैं, पर वह किसी को बताता नहीं है। अपने गुण वह किसी को दिखलाता नहीं है। उसके साथ अन्याय होता है, पर वह उसे चुप करके सह...

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पतंगों से लालटेन तक By Ankur Saxena Maddy

14 जनवरी की सुबह जयपुर में कुछ अलग ही रंग लेकर आती है। ठंडी हवा में हल्की धूप, छतों पर चढ़ते लोगों की चहल-पहल, और आसमान में पहले से तनी हुई डोरें—मानो शहर ने खुद को त्योहार के लिए...

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हिकमत और कमाई By Devendra Kumar

कल मुझे गुडगाँव से एक मीटिंग के लिये दिल्ली प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में एक आयोजान में जाना था. उसके लिये मैंने उबेर से एक टैक्सी मंगाई. मेरे मोबाइल पर ड्राईवर का नाम आया था असलम और ठी...

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ऐसा ही होता है By Rajeev kumar

ऐसा ही होता है दिन भर मशीन की गड़गड़ और घर की चख-चख से बड़ी दुर, गंदा नाला के उपर ब्रीज पर बैठना ज्ञान को बड़ा सुखद अनुभूति देता था। वह अपने नाक पे, श्वास पे तो अत्चाचार बर्दाश्त कर सक...

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ग्रे शेड्स By Dr Sandip Awasthi

      ________________________   लगता है सब कुछ व्यर्थ है।क्योंकि सभी तरफ झूठ जीत रहा और सच हार रहा। सोशल साइट्स पर आप नहीं हैं तो मानो आपका अस्तित्व ही दुनिया...

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कन्यादान By Jeetendra

दिल्ली की एक छोटी सी कॉलोनी में, जनवरी का महीना था। ठंडी हवा चल रही थी, और घरों में हीटर चल रहे थे। शर्मा जी का घर हमेशा की तरह हलचल भरा था। उनकी बेटी नेहा की शादी की बात चल रही थी...

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ऊपर उठी हुई नाक By Deepak sharma

कहानी: दीपक शर्मा                  “मेरी ट्विट अपनी पूरी उड़ान नहीं भर रही। आवाज़ भी इस की बीच ही में रुक रही है….”...

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कुंती का खेल By Deepak sharma

                  कुंती को वह खेल अकस्मात ही सूझा था।                   टंडन मेम साहब उस स...

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स्मृतियों की खाट By Rinki Singh

दरवाज़े के बगल में रखी पुरानी सी खाट पर बैठकर हरिप्रसाद जी हर सुबह चाय की चुस्कियों के साथ सूरज को निकलते देखते, और शाम को उसी सूरज के पीछे छिपती उम्मीदें |कभी यही खाट आँगन में होत...

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टप्पे के बाद By Deepak sharma

                      स्टेशन पर बहन ने मुझे अकेले पाया तो एकाएक उस का चेहरा बदल- बदल गया। भेद- भरे स्वर में बोली, “तुम...

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कोई फर्क नहीं पडता By InkImagination

कोई फर्क नहीं पड़तावो कॉलेज की पुरानी, घिसी-पिटी सीढ़ियों पर बैठी रहती, घुटनों को सीने से चिपकाए। नीचे, ग्राउंड में हंसी का शोर था – वो लोग, जो कभी उसके साथ घंटों गप्पें मारते थे।...

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पहला अनकहा प्यार By ch Devendra

पहला प्यार लव एट फर्स्टसाइट ये बहुत लोगों को हुआ है, बहुतों ने इसे फिल किया है कुछ का आगे बढ़ा और कुछ का नहीं एसा फिल मुझे भी हुआ जब मैं तुम्हें पहली बार देखा पार्टी में वही मिश्रा...

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खामोशी के बाद By Deepak Bundela Arymoulik

“खामोशी के बाद”हाय…मैं रीना हूँ।आज जब मैं यह सब लिख रही हूँ, मेरी उम्र चालीस के पार है। बाहर से देखने वाला कहेगा—एक पढ़ी-लिखी, सभ्य, आत्मनिर्भर औरत।लेकिन भीतर… भीतर मैं एक ऐसे कमरे...

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एक अनकही प्यार की शुरुआत By Bharti 007

जबलपुर की शांत गलियों में पली-बढ़ी आराध्या त्रिपाठी के सपनों में एक ही तस्वीर थी—सफेद एप्रन, स्टेथोस्कोप और एक डॉक्टर बनने का आत्मविश्वास।बारहवीं के बाद उसने पूरे मन से NEET दिया,...

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तुम हो साथ जो मेरे By Juhi Upadhyay

नमस्कार मेरा नाम जूही उपाध्याय है मैं मनोविज्ञान व्याख्याता हूंँ।अपनी कुछ बातों को आप सबके सामने रखना आई हूंँ।मेरे हमसफ़र जब तुम मेरे साथ होते हो, नज़ारा कुछ अलग होता है जब मेरे क़...

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प्रमाणपत्र By Rinki Singh

ऑनलाइन कवि सम्मेलन की तैयारी में नीलिमा पुरानी अलमारी खंगाल रही थी |विषय था- "अपनी पहली रचना"|सोच रही थी, उस पुरानी डायरी को ढूंढ ले, जिसमें अपने शुरुआती दिनों की कविताएँ लिखी थीं...

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बेटे की चाह By Jeetendra

ड्राइंग रूम के पुराने सोफे पर बैठी सुमित्रा देवी अपनी उंगलियों में फंसी माला को बड़ी तेजी से फेर रही थीं। कमरे में अगरबत्ती का धुआं किसी भारी कोहरे की तरह तैर रहा था। नेहा रसोई में...

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पहचान की धुंध By kajal jha

शीर्षक: अनाम अहसाससब कुछ एक 'गलत नंबर' से शुरू हुआ था। आर्यन ने अपने दोस्त को फोन लगाया था, लेकिन दूसरी तरफ से एक सौम्य और ठहरी हुई आवाज़ आई— "हेलो?"वह आवाज़ मीरा की थी। उस ए...

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नेहरू फाइल्स - भूल-115 By Rachel Abraham

भूल-115 नेताजी सुभाष बोस के प्रति दुर्व्यवहार नेताजी की मृत्यु की जाँच करवाने, जाँच रिपोर्ट को प्रभावित करवाने (भूल#112), आई.एन.ए. के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया रखने (भूल#114) और नेत...

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विदुर नीति संवाद - विदुर और धृतराष्ट्र के बीच By Prithvi Nokwal

विदुर नीति संवाद – विदुर और धृतराष्ट्र के बीचमहाभारत केवल एक युद्धकथा नहीं है, बल्कि यह जीवन, धर्म, राजनीति, समाज और मानव स्वभाव का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करने वाला महाग्रंथ है। इसम...

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पुरानी हेवेली का प्रेम By kajal jha

पुरानी हवेली का प्रेम: एक अधूरी दास्तानपहाड़ों की तलहटी में बसी वह पुरानी हवेली सालों से वीरान पड़ी थी। लोग कहते थे कि उस हवेली की दीवारों में दर्द और चीखें दफन हैं। शहर की भागदौड़ स...

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शांति प्रस्ताव से पहले द्रोपदी और श्री कृष्ण संवाद By Prithvi Nokwal

शांति प्रस्ताव से पहले द्रौपदी और श्रीकृष्ण संवाद(महाभारत प्रसंग पर आधारित विस्तृत संवाद)उपप्लव्य नगरी में पांडवों का शिविर लगा हुआ था। वनवास और अज्ञातवास की कठिन परीक्षाओं के बाद...

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श्री कृष्ण द्वार हस्तिनापुर की राजसभा में शांति प्रस्ताव! By Prithvi Nokwal

श्रीकृष्ण द्वारा शांति प्रस्ताव संवाद(महाभारत प्रसंग पर आधारित विस्तृत संवाद)हस्तिनापुर की राजसभा सजी हुई थी। विशाल स्तंभों से सुसज्जित उस सभा में कौरवों और पांडवों के बीच चल रहे त...

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बलि का बकरा By Jeetendra

गाँव की पगडंडी पर धूल उड़ रही थी। सूरज ढलने को था, लेकिन हवा में एक अजीब सी तपन थी। माधव अपनी पुरानी साइकिल रोके खड़ा था। सामने खलिहान में पंचायत बैठी थी। सन्नाटा ऐसा कि सूखे पत्तों...

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जीरो बेरोजगारी By Jeetendra

शहर की सुबह अब अलार्म की आवाज़ से नहीं, बल्कि एक अजीब सी खामोशी से शुरू होती थी। निखिल अपनी बालकनी में खड़ा नीचे की सड़क को देख रहा था। सड़क बिल्कुल साफ थी, न कहीं कचरा, न कहीं ट्र...

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श्री कृष्ण-अर्जुन-दुर्योधन संवाद पर आधारित नारायणी सेना मांगने का प्रसंग By Prithvi Nokwal

नचे श्रीकृष्ण–अर्जुन–दुर्योधन संवाद पर आधारित नारायणी सेना माँगने का प्रसंग**श्रीकृष्ण, अर्जुन और दुर्योधन का संवाद(नारायणी सेना का प्रसंग)**द्वारका की प्रातःकालीन वेला थी। समुद्र...

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महाभारत का प्रसिद्ध पासा क्रीड़ा प्रसंग: दुर्योधन और युधिष्ठिर By Prithvi Nokwal

महाभारत का प्रसिद्ध पासा क्रीड़ा प्रसंग: दुर्योधन और युधिष्ठिरमहाभारत: जब धर्म पासों की चाल में उलझ गयाहस्तिनापुर का राजमहल उस दिन असामान्य रूप से शांत था। आकाश में बादल घिरे थे, म...

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आजाद सवेरा By Jeetendra

 कोहरे की चादर ने पूरी घाटी को ढका हुआ था। दूर कहीं से आती हुई झरनों की आवाज सन्नाटे को और गहरा बना रही थी। एक पुरानी लकड़ी की चौकी, जिसकी दीवारें समय की मार से काली पड़ चुकी थीं,...

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आज़मी साहब मीठा नहीं खाते By Dr Sandip Awasthi

संदीप अवस्थी कई बार लगता है कि धर्म को हम चलाते हैं। पर ऐसा है नहीं दरअसल धर्म मजहब हमें चला रहा होता है। यह तो जगजाहिर  है कि मनुष्य पहले या धर्म पहले?  तो फिर कुछ लोग इ...

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युद्ध से पहले श्रीकृष्ण, माता कुंती और कर्ण के बीच हुए संवाद पर आधारित ! By Prithvi Nokwal

यह महाभारत की कथाओं पर आधारित रचनात्मक संवाद है, जिसमें मूल भाव सुरक्षित रखे गए हैं।युद्ध से पहले श्रीकृष्ण, माता कुंती और कर्ण का संवादकुरुक्षेत्र के युद्ध की विभीषिका से ठीक पहले...

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अधुरी चिट्ठी By kajal jha

अधूरी चिट्ठीगांव के किनारे बसे एक छोटे से घर में राधा मैया रहती थीं। उम्र हो चली थी उनकी – साठ के पार। चेहरे पर झुर्रियां थीं, लेकिन आंखों में आज भी वही चमक जो बचपन में बेटे को गोद...

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सपनों का कैनवस: एक जादुई हकीकत By khushboo

लेखिका: [खुशबू️......दुनिया की भीड़ में श्री खुद को हमेशा अकेला पाती थी। उसके विचार, उसकी पसंद और जीने का तरीका सबसे अलग था, शायद इसीलिए लोगों से उसकी पटरी कभी नहीं बैठी। रिश्तों के...

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पिंजरे के बाहर का आकाश By Jeetendra

शहर की चकाचौंध से दूर एक मध्यमवर्गीय अपार्टमेंट की बालकनी में खड़ी अदिति अपनी कॉफी के कप से उठती भाप को देख रही थी। सुबह के सात बज रहे थे। घर में शांति थी, लेकिन उसके भीतर एक शोर म...

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रामायण युद्ध के पश्चात श्री रामजी और हनुमानजी का संवाद By Prithvi Nokwal

यहाँ युद्ध के बाद भगवान श्रीराम और हनुमान जी के बीच संवाद प्रस्तुत है — भावपूर्ण, भक्तिरस से युक्त और लगभग लंका का युद्ध समाप्त हो चुका था।रावण का अंत हो गया था, अधर्म पर धर्म की व...

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बारिश की वो शाम प्यार कि एक भीगी सुरुआत By kajal jha

बारिश की वो शामदिल्ली की गर्मियों में बारिश का मौसम आते ही शहर एक अलग ही रंग में रंग जाता है। सड़कें चमकने लगती हैं, हवा में मिट्टी की सोंधी खुशबू फैल जाती है, और लोग छाते थामे भाग...

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दो कहानी By Rajeev kumar

अस्तित्व मनोहर के मन-मस्तिष्क पर अस्तित्व शब्द ने खलबली मचा दी थी। उसने सुन रखा था कि आपका अस्तित्व ही आपका जीवन है। उसने कई लोगों से इस विषय पर चर्चा की लेकिन उस प्रश्न की जकड़न को...

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बारिश की पहली बुंदे By kajal jha

बारिश की पहली बूंदेंदिल्ली की गर्मियां हर साल की तरह इस बार भी बेहद बेरहम थीं। सूरज जैसे आसमान से आग बरसा रहा था। दोपहर के वक्त सड़कों पर निकलना किसी सज़ा से कम नहीं था। हवा में तप...

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उम्मीद की एक नई किरण By Jeetendra

शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक पुराने जर्जर मकान की बालकनी में बैठे अविनाश के चेहरे पर गहरी चिंता की लकीरें खिंची हुई थीं। उसके हाथ में एक लिफाफा था, जिसे वह बार-बार खोलता और फिर बंद क...

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एकतरफा प्यार By Rajeev kumar

एकतरफा प्यार बरसात के बाद गुनगुनी धुप निकल चुकी थी। मौसम खुशनूमा हो गया था। हवा भी चल रही थी और नमी भी बरकरार थी। बरगद के पेड़ के पत्तों से अभी भी जल की बुदें तपक रही थी, जो पेड़ के...

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घर जो कभी बेचा नही गया By InkImagination

घर जो कभी बेचा नहीं गयाशहर के सबसे चमकदार इलाके में, जहां हर तरफ़ गगनचुंबी इमारतें आसमान को चीर रही थीं, वो एक पुराना सा घर अकेला खड़ा था।चारों ओर कांच की दीवारें, नीली रोशनी वाली...

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मिड-डे मील By Rinki Singh

प्राथमिक विद्यालय का प्रांगण कोलाहल से भरा हुआ था। आज स्कूल का अंतिम दिन था, कल से गर्मी की छुट्टियाँ शुरू होने वाली थीं। बच्चे आज कुछ ज़्यादा ही उत्साहित थे। कोई मैदान में दौड़ रह...

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इश्क. - 17 By om prakash Jain

सिम्मी को रजनी मेहता अमेरिका वाली लड़की सहज संयोग से  मिल ही जाता है ।शेखर दोपहर को सिम्मी के घर आता है ।आज सिम्मी घर में  है ,रविवार के दिन सिम्मी मां के  घरेलु काम में हाथ बटा  र...

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बेटा By Rajeev kumar

बेटा बड़ी थकान महसुस हो रही थी। रास्ते में कई बार कई पेड़ के नीचे बैठ कर सुस्ता चुका मोहना का ऐसा हाल था। एक तो शरिरिक कमजोरी, उस पर तबियत खराब और जाना इतना जरूरी था कि बिना गए काम न...

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डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ - 6 By Dr. Pradeep Kumar Sharma

डॉ. प्रदीप कुमार शर्मा की लघुकथाएँ माँऑफिस से लौटकर जैसे ही वह घर पहुँचा, पत्नी बोलीं, "सुनिए जी, आपके पास किसी स्नेक रेस्क्यू वाले या सपेरे का फोन नंबर हो, तो बुला लीजिए। घर के पी...

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बगावती By Deepak sharma

                     “मैं सिनेमा जा रही हूं,”गली के नुक्कड़ पर उस बुद्धवार जैसे ही मां अपने झोलों के साथ प्रकट हु...

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सुबह का तारा By Rakesh Kaul

सुबह का तारा आज के नए ज़माने के शहरों में ज़्यादातर तालीमयाफ़्ता नौजवान अच्छी नौकरी की तलाश में घर-परिवार से दूर दूसरे शहरों या विदेशों में बसना पसंद कर रहे हैं | लिहाज़ा संयुक्त परिवा...

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युद्ध के पश्चात कृष्ण और गान्धारी संवाद By Prithvi Nokwal

पुत्र वियोग में तड़पती गांधारी जब कृष्ण को श्राप देने चली तब कृष्ण गांधारी से कहते हैंमाता मैं शोक ,मोह ,पीड़ा सबसे परे हूँ, न जीत में न हार में, न मान में , न अपमान में, न जीवन मे ,...

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कॉफी शॉप की अधूरी मुलाकात By Bharti 007

बारिश उस दिन कुछ ज़्यादा ही ठहरकर बरस रही थी, जैसे शहर को नहीं—अन्वी के दिल को भिगोना चाहती हो।कॉफ़ी हाउस की खिड़की के पास वही पुरानी टेबल…जहाँ कभी दो कप चाय,और अनगिनत सपने रखे जात...

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जिंदगी की खुशी By manshi

क्या आप ने कभी सोचा है, कि कोई ऐसा भी होगा, जिसमें गुण तो बहुत हैं, पर वह किसी को बताता नहीं है। अपने गुण वह किसी को दिखलाता नहीं है। उसके साथ अन्याय होता है, पर वह उसे चुप करके सह...

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पतंगों से लालटेन तक By Ankur Saxena Maddy

14 जनवरी की सुबह जयपुर में कुछ अलग ही रंग लेकर आती है। ठंडी हवा में हल्की धूप, छतों पर चढ़ते लोगों की चहल-पहल, और आसमान में पहले से तनी हुई डोरें—मानो शहर ने खुद को त्योहार के लिए...

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हिकमत और कमाई By Devendra Kumar

कल मुझे गुडगाँव से एक मीटिंग के लिये दिल्ली प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया में एक आयोजान में जाना था. उसके लिये मैंने उबेर से एक टैक्सी मंगाई. मेरे मोबाइल पर ड्राईवर का नाम आया था असलम और ठी...

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ऐसा ही होता है By Rajeev kumar

ऐसा ही होता है दिन भर मशीन की गड़गड़ और घर की चख-चख से बड़ी दुर, गंदा नाला के उपर ब्रीज पर बैठना ज्ञान को बड़ा सुखद अनुभूति देता था। वह अपने नाक पे, श्वास पे तो अत्चाचार बर्दाश्त कर सक...

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ग्रे शेड्स By Dr Sandip Awasthi

      ________________________   लगता है सब कुछ व्यर्थ है।क्योंकि सभी तरफ झूठ जीत रहा और सच हार रहा। सोशल साइट्स पर आप नहीं हैं तो मानो आपका अस्तित्व ही दुनिया...

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कन्यादान By Jeetendra

दिल्ली की एक छोटी सी कॉलोनी में, जनवरी का महीना था। ठंडी हवा चल रही थी, और घरों में हीटर चल रहे थे। शर्मा जी का घर हमेशा की तरह हलचल भरा था। उनकी बेटी नेहा की शादी की बात चल रही थी...

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ऊपर उठी हुई नाक By Deepak sharma

कहानी: दीपक शर्मा                  “मेरी ट्विट अपनी पूरी उड़ान नहीं भर रही। आवाज़ भी इस की बीच ही में रुक रही है….”...

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कुंती का खेल By Deepak sharma

                  कुंती को वह खेल अकस्मात ही सूझा था।                   टंडन मेम साहब उस स...

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स्मृतियों की खाट By Rinki Singh

दरवाज़े के बगल में रखी पुरानी सी खाट पर बैठकर हरिप्रसाद जी हर सुबह चाय की चुस्कियों के साथ सूरज को निकलते देखते, और शाम को उसी सूरज के पीछे छिपती उम्मीदें |कभी यही खाट आँगन में होत...

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टप्पे के बाद By Deepak sharma

                      स्टेशन पर बहन ने मुझे अकेले पाया तो एकाएक उस का चेहरा बदल- बदल गया। भेद- भरे स्वर में बोली, “तुम...

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कोई फर्क नहीं पडता By InkImagination

कोई फर्क नहीं पड़तावो कॉलेज की पुरानी, घिसी-पिटी सीढ़ियों पर बैठी रहती, घुटनों को सीने से चिपकाए। नीचे, ग्राउंड में हंसी का शोर था – वो लोग, जो कभी उसके साथ घंटों गप्पें मारते थे।...

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पहला अनकहा प्यार By ch Devendra

पहला प्यार लव एट फर्स्टसाइट ये बहुत लोगों को हुआ है, बहुतों ने इसे फिल किया है कुछ का आगे बढ़ा और कुछ का नहीं एसा फिल मुझे भी हुआ जब मैं तुम्हें पहली बार देखा पार्टी में वही मिश्रा...

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खामोशी के बाद By Deepak Bundela Arymoulik

“खामोशी के बाद”हाय…मैं रीना हूँ।आज जब मैं यह सब लिख रही हूँ, मेरी उम्र चालीस के पार है। बाहर से देखने वाला कहेगा—एक पढ़ी-लिखी, सभ्य, आत्मनिर्भर औरत।लेकिन भीतर… भीतर मैं एक ऐसे कमरे...

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एक अनकही प्यार की शुरुआत By Bharti 007

जबलपुर की शांत गलियों में पली-बढ़ी आराध्या त्रिपाठी के सपनों में एक ही तस्वीर थी—सफेद एप्रन, स्टेथोस्कोप और एक डॉक्टर बनने का आत्मविश्वास।बारहवीं के बाद उसने पूरे मन से NEET दिया,...

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तुम हो साथ जो मेरे By Juhi Upadhyay

नमस्कार मेरा नाम जूही उपाध्याय है मैं मनोविज्ञान व्याख्याता हूंँ।अपनी कुछ बातों को आप सबके सामने रखना आई हूंँ।मेरे हमसफ़र जब तुम मेरे साथ होते हो, नज़ारा कुछ अलग होता है जब मेरे क़...

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प्रमाणपत्र By Rinki Singh

ऑनलाइन कवि सम्मेलन की तैयारी में नीलिमा पुरानी अलमारी खंगाल रही थी |विषय था- "अपनी पहली रचना"|सोच रही थी, उस पुरानी डायरी को ढूंढ ले, जिसमें अपने शुरुआती दिनों की कविताएँ लिखी थीं...

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