सामाजिक कहानियां कहानियाँ पढ़े और PDF में डाउनलोड करे

Stories and books have been a fundamental part of human culture since the dawn of civilization, acting as a powerful tool for communication, education, and entertainment. Whether told around a campfire, written in ancient texts, or shared through modern media, Moral Stories in hindi books and stories have the unique ability to transcend time and space, connecting people across generations and cult...Read More


Categories
Featured Books

दो अजनबी और वो आवाज़ - 3 By Pallavi Saxena

दो अजनबी और वो आवाज़ भाग-3 इसके पहले मैं कुछ और सोच पाती, वह आवाज मेरे निकट आकर मुझसे कहती है तुम यहाँ बैठो और मेरा इंतज़ार करो। जब हमारी कॉफी तैयार हो जाएगी तो यह भैया तुम्हारा नाम...

Read Free

कुर्सी अभी भी खाली है.. By Madhu Arora

....कुर्सी अभी भी खाली है.... यह अभय भी एक अजीब शख्‍स़ हैं। एक ही इंसान के इतने मुखौटे, उसके व्‍यक्‍तित्‍व की इतनी पर्तें कैसे हो सकती हैं? उसका अच्‍छा ख़ासा क़द याने छ: फुट। उम्र...

Read Free

आषाढ़ का फिर वही एक दिन - 2 By PANKAJ SUBEER

आषाढ़ का फिर वही एक दिन (कहानी: पंकज सुबीर) (2) दूसरा कमरा जिसे ड्राइँग रूम कहा जा सकता है उसमें अब भार्गव बाबू नाश्ते के लिये आ चुके हैं । घड़ी साढ़े आठ के आस पास है । भार्गव बाबू...

Read Free

योगिनी - 9 By Mahesh Dewedy

योगिनी 9 ‘‘हाय! ह्वेयर आर यू फ्रा़म’’ दीवान मार्केट से लौटकर मीता जब अपने कमरे का ताला खोल रही थी, तभी पीछे से एक गोरी अधेड़ महिला की चहकती सी आवाज़ आई। मीता के ‘‘आय ऐम फ्रा़म इंडिया...

Read Free

राय साहब की चौथी बेटी - 10 By Prabodh Kumar Govil

राय साहब की चौथी बेटी प्रबोध कुमार गोविल 10 अम्मा को ताश खेलने का खूब शौक़ था। अपनी पुराने दिनों की सहेलियों के संग कभी- कभी, और परिवार के लोगों के संग चाहे जब अम्मा ताश मंडली की ब...

Read Free

कौन दिलों की जाने! - 24 By Lajpat Rai Garg

कौन दिलों की जाने! चौबीस रविवार की छुट्‌टी होने के कारण ड्राईवर तो आया नहीं था। रात को आये झक्कड़ व बारिश के कारण कार साफ करनी जरूरी थी, अतः रमेश ने लच्छमी से कार साफ करने के लिये क...

Read Free

इस दश्‍त में एक शहर था - 16 By Amitabh Mishra

इस दश्‍त में एक शहर था अमिताभ मिश्र (16) तिक्कू चाचा लेटे हुए अपने ब्याह को देख रहे थे। तभी उन्हें जोर की पेशाब लगी, अपनी समझ में वे उठे अपने शरीर को उठाया और बाथरूम तक पहुंचे और क...

Read Free

संन्यासी By Jitendra Shivhare

*संन्यासी-कहानी* *व* ह लगातार गौतम महाराज पर किचड़ उछाल रहा था। महाराज के शिष्य क्रोधित थे। उन्हें मात्र महाराज की अनुमति चाहिए थी। इतने में ही वे उस युवक की जीवनलीला समाप्त कर सकते...

Read Free

ततइया - 3 - अंतिम भाग By Nasira Sharma

ततइया (3) ”नहा-धोकर भोर में ही तैयार हो जाया कर, सारा दिन लोग आते-जाते हैं, अच्छा नहीं लगता बहू !“शन्नो उल्टे पैर कोठरी में वापस चली गई। बारिन का चेहरा पीला चड़ गया। सिल्लो ने गटागट...

Read Free

रिमोट से चलने वाला गुड्डा - 3 - अंतिम भाग By Mazkoor Alam

रिमोट से चलने वाला गुड्डा मज्कूर आलम (3) वह व्यंग्यात्मक अंदाज में मुस्कुराई- ठीक कहते हो... आजकल तो रिश्तों पर भी आत्मघाती हमले होते हैं। एक बार फिर असलम मुंह फाड़े एकटक उसकी ओर द...

Read Free

हूक - 3 - अंतिम भाग By Divya Shukla

हूक (3) दिमाग जिस तरफ इशारा कर रहा था आत्मा उसे मानने से छिटक रही थी | मुझे मौन देख फूला बुआ ने पूछा “ किस सोच में हो बिट्टी अब तुम दो दिन को ही आई हो काहे हलकान हो रही हो छछूंदर क...

Read Free

बेचैनी को चैन मिले तो By Satish Sardana Kumar

बेचैनी को चैन मिले तो मैं कुछ सोचूँ,बेख्याली को ध्यान में रखूँ तो मैं कुछ पाऊं।जीवन इतना सरल कहाँ,अमृत में ही गरल पड़ा,नीरव हो गए स्वपन भी अपने,आँखों से भी तरल चुका।बेदिली को दिल मे...

Read Free

एक अप्रैल की कहानी By Neerja Dewedy

एक अप्रैल की कहानी नीरजा द्विवेदी शीला एक अंतर्देशीय पत्र लेकर विचारमग्न खड़ी थीं. उनके पति ने धोखे से बेटी के मंगेतर का पत्र खोल दिया था और अपराध बोध से ग्रस्त होकर झिझकते हुए बोले...

Read Free

रुक सत्तो.. By Shobhana Shyam

रुक सत्तो!एक बेहद सर्द दिन! दोपहर के बावजूद बाहर घटाटोप अंधकार है, जो खिड़की के रास्ते शारदा के मन-मस्तिष्क में उतरता जा रहा है। हलकी बूँदा-बाँदी बाहर भी हो रही है और अंदर भी। आसमान...

Read Free

तुम लोग By PANKAJ SUBEER

तुम लोग कहानी पंकज सुबीर ‘‘लाहौल विला कुव्वत, पंडत तुमसे तो कोई बात भी करना फ़िज़ूल है। एसा लगता है मानो ज़माने भर के सारे पत्थर तुम्हारी अकल पर ही पड़े गए हों।’’ अज़ीज़ फ़ारूक़ी ने बुर...

Read Free

नॉमिनी - 3 - अंतिम भाग By Madhu Arora

नॉमिनी मधु अरोड़ा (3) आखि़र रविवार भी आ ही गया और इसी दिन का इंतज़ार था सपना को। रवि ने कहा, ‘आज हम पिक्‍चर देखने जायेंगे। तुम्‍हें हॉल में पिक्‍चर देखना अच्‍छा लगता है न?’ सपना ने...

Read Free

महत्वाकांक्षा - 4 - अंतिम भाग By Shashi Ranjan

महत्वाकांक्षा टी शशिरंजन (4) तभी प्रियंका ने अचानक अपने चेहरे का भाव बदलते हुए कहा - जिंदगी के मजे ऐसे नहीं होते हैं पंकज बाबू । इसके लिए पैसों की आवश्यकता होती है और आपकी जितनी सै...

Read Free

मकसद By Raj Gopal S Verma

“क्या बताऊं, कैसे समझाऊं तुमको. कुछ सुनती ही नहीं तो समझोगी कैसे अनन्या”, भुनभुनाता हुआ प्रसनजीत अपना मोबाइल उसके हाथ से लेकर बाहर निकल आया. गुस्से में प्रसनजीत घर से निकल गया. क...

Read Free

सखी होली आ रही है By Sneh Goswami

सखी होली आने वाली हैबसंत पंचमी आ चुकी है . बसंत यानि उमंग .बसंत यानि तरंग . एक विभोर, एक हिलौर ,एक हलक, एक हुलस का पर्व . मन में तन में आस-पास के वातावरण में रंग ही रंग का पर्व ....

Read Free

हमें भगवान क्यो नही मिलते हैं ? By Sahaj Sabharwal

हमें भगवान क्यों नहीं मिलते ? आज प्रतिभाशाली और कलात्मक लोगों द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास से भरी दुनिया है। इस दुनिया में विभिन्न प्रकार के लोग रहते हैं। उन...

Read Free

चाबी By PANKAJ SUBEER

चाबी (कहानी : पंकज सुबीर) ‘सीमा जी नहीं हैं क्या ?’ रश्मि ने जैसे ही दरवाज़ा खोला तो सामने हाथ में ब्रीफकेस थामे लगभग चालीस पैंतालीस साल का एक आदमी खड़ा था। रश्मि को देख कर उस आदमी...

Read Free

एक अदद टॉयलेट बाथरूम By Satish Sardana Kumar

हम दो जन थे।फिर एक छोटी सी टीन्डसी आ गई।रिश्तेदारी इतनी तल्ख हो गई थी कि न किसी के आना न जाना।बेटी आ गई थी दिन भर मुहल्ले में मां को डुलाए रहती।दिन छोटे होते और रातें लंबी।बेटी सो...

Read Free

नग्न मानसिकता के महिलावादी By Vijay Vibhor

हर जीव् का एक नैसर्गिक स्वभाव होता है.. ठीक वैसे ही पुरुष है।। चरित्र और काम वासना पुरुषो का नैसर्गिक रूप से सबसे अधिक कमज़ोर और संवेदनशील बिंदु है… और चालाक औरते पुरुषो के इसी पॉइं...

Read Free

पुनर्जन्म By Vinita Shukla

बहुत दिनों से नौवीं की छात्रा कलिका, स्टाफ- रूम में चर्चा का विषय बनी हुई है. शिक्षिकाएं एकमत हैं कि उसे कोई मानसिक समस्या जरूर है. सबको श्रीमती मीरा वर्मा का इंतजार है, जो अपने ढी...

Read Free

फैसला - 5 - अंतिम भाग By Divya Shukla

फैसला (5) मै भी तो बहुत परेशान थी | जिस जद्दोजहद से मै गुजर रही थी अब उसका हल निकलना ही चाहिये, यह सोच कर ही मैने बात छेड़ी, "सुनो मुझे तुम से बात करनी है " विजयेन्द्र ने अख़बार से न...

Read Free

मुख़बिर - 31 - अंतिम भाग By राज बोहरे

मुख़बिर राजनारायण बोहरे (31) कृपाराम के मुखबिर हेतमसिंह बताता है कि इगलैंड से ख़ास तरह की तालीम लेकर आये पुलिस के एक आई जी को इस अंचल में डाकू समस्या को निपटाने का काम सोंपा गया तो...

Read Free

दो अजनबी और वो आवाज़ - 3 By Pallavi Saxena

दो अजनबी और वो आवाज़ भाग-3 इसके पहले मैं कुछ और सोच पाती, वह आवाज मेरे निकट आकर मुझसे कहती है तुम यहाँ बैठो और मेरा इंतज़ार करो। जब हमारी कॉफी तैयार हो जाएगी तो यह भैया तुम्हारा नाम...

Read Free

कुर्सी अभी भी खाली है.. By Madhu Arora

....कुर्सी अभी भी खाली है.... यह अभय भी एक अजीब शख्‍स़ हैं। एक ही इंसान के इतने मुखौटे, उसके व्‍यक्‍तित्‍व की इतनी पर्तें कैसे हो सकती हैं? उसका अच्‍छा ख़ासा क़द याने छ: फुट। उम्र...

Read Free

आषाढ़ का फिर वही एक दिन - 2 By PANKAJ SUBEER

आषाढ़ का फिर वही एक दिन (कहानी: पंकज सुबीर) (2) दूसरा कमरा जिसे ड्राइँग रूम कहा जा सकता है उसमें अब भार्गव बाबू नाश्ते के लिये आ चुके हैं । घड़ी साढ़े आठ के आस पास है । भार्गव बाबू...

Read Free

योगिनी - 9 By Mahesh Dewedy

योगिनी 9 ‘‘हाय! ह्वेयर आर यू फ्रा़म’’ दीवान मार्केट से लौटकर मीता जब अपने कमरे का ताला खोल रही थी, तभी पीछे से एक गोरी अधेड़ महिला की चहकती सी आवाज़ आई। मीता के ‘‘आय ऐम फ्रा़म इंडिया...

Read Free

राय साहब की चौथी बेटी - 10 By Prabodh Kumar Govil

राय साहब की चौथी बेटी प्रबोध कुमार गोविल 10 अम्मा को ताश खेलने का खूब शौक़ था। अपनी पुराने दिनों की सहेलियों के संग कभी- कभी, और परिवार के लोगों के संग चाहे जब अम्मा ताश मंडली की ब...

Read Free

कौन दिलों की जाने! - 24 By Lajpat Rai Garg

कौन दिलों की जाने! चौबीस रविवार की छुट्‌टी होने के कारण ड्राईवर तो आया नहीं था। रात को आये झक्कड़ व बारिश के कारण कार साफ करनी जरूरी थी, अतः रमेश ने लच्छमी से कार साफ करने के लिये क...

Read Free

इस दश्‍त में एक शहर था - 16 By Amitabh Mishra

इस दश्‍त में एक शहर था अमिताभ मिश्र (16) तिक्कू चाचा लेटे हुए अपने ब्याह को देख रहे थे। तभी उन्हें जोर की पेशाब लगी, अपनी समझ में वे उठे अपने शरीर को उठाया और बाथरूम तक पहुंचे और क...

Read Free

संन्यासी By Jitendra Shivhare

*संन्यासी-कहानी* *व* ह लगातार गौतम महाराज पर किचड़ उछाल रहा था। महाराज के शिष्य क्रोधित थे। उन्हें मात्र महाराज की अनुमति चाहिए थी। इतने में ही वे उस युवक की जीवनलीला समाप्त कर सकते...

Read Free

ततइया - 3 - अंतिम भाग By Nasira Sharma

ततइया (3) ”नहा-धोकर भोर में ही तैयार हो जाया कर, सारा दिन लोग आते-जाते हैं, अच्छा नहीं लगता बहू !“शन्नो उल्टे पैर कोठरी में वापस चली गई। बारिन का चेहरा पीला चड़ गया। सिल्लो ने गटागट...

Read Free

रिमोट से चलने वाला गुड्डा - 3 - अंतिम भाग By Mazkoor Alam

रिमोट से चलने वाला गुड्डा मज्कूर आलम (3) वह व्यंग्यात्मक अंदाज में मुस्कुराई- ठीक कहते हो... आजकल तो रिश्तों पर भी आत्मघाती हमले होते हैं। एक बार फिर असलम मुंह फाड़े एकटक उसकी ओर द...

Read Free

हूक - 3 - अंतिम भाग By Divya Shukla

हूक (3) दिमाग जिस तरफ इशारा कर रहा था आत्मा उसे मानने से छिटक रही थी | मुझे मौन देख फूला बुआ ने पूछा “ किस सोच में हो बिट्टी अब तुम दो दिन को ही आई हो काहे हलकान हो रही हो छछूंदर क...

Read Free

बेचैनी को चैन मिले तो By Satish Sardana Kumar

बेचैनी को चैन मिले तो मैं कुछ सोचूँ,बेख्याली को ध्यान में रखूँ तो मैं कुछ पाऊं।जीवन इतना सरल कहाँ,अमृत में ही गरल पड़ा,नीरव हो गए स्वपन भी अपने,आँखों से भी तरल चुका।बेदिली को दिल मे...

Read Free

एक अप्रैल की कहानी By Neerja Dewedy

एक अप्रैल की कहानी नीरजा द्विवेदी शीला एक अंतर्देशीय पत्र लेकर विचारमग्न खड़ी थीं. उनके पति ने धोखे से बेटी के मंगेतर का पत्र खोल दिया था और अपराध बोध से ग्रस्त होकर झिझकते हुए बोले...

Read Free

रुक सत्तो.. By Shobhana Shyam

रुक सत्तो!एक बेहद सर्द दिन! दोपहर के बावजूद बाहर घटाटोप अंधकार है, जो खिड़की के रास्ते शारदा के मन-मस्तिष्क में उतरता जा रहा है। हलकी बूँदा-बाँदी बाहर भी हो रही है और अंदर भी। आसमान...

Read Free

तुम लोग By PANKAJ SUBEER

तुम लोग कहानी पंकज सुबीर ‘‘लाहौल विला कुव्वत, पंडत तुमसे तो कोई बात भी करना फ़िज़ूल है। एसा लगता है मानो ज़माने भर के सारे पत्थर तुम्हारी अकल पर ही पड़े गए हों।’’ अज़ीज़ फ़ारूक़ी ने बुर...

Read Free

नॉमिनी - 3 - अंतिम भाग By Madhu Arora

नॉमिनी मधु अरोड़ा (3) आखि़र रविवार भी आ ही गया और इसी दिन का इंतज़ार था सपना को। रवि ने कहा, ‘आज हम पिक्‍चर देखने जायेंगे। तुम्‍हें हॉल में पिक्‍चर देखना अच्‍छा लगता है न?’ सपना ने...

Read Free

महत्वाकांक्षा - 4 - अंतिम भाग By Shashi Ranjan

महत्वाकांक्षा टी शशिरंजन (4) तभी प्रियंका ने अचानक अपने चेहरे का भाव बदलते हुए कहा - जिंदगी के मजे ऐसे नहीं होते हैं पंकज बाबू । इसके लिए पैसों की आवश्यकता होती है और आपकी जितनी सै...

Read Free

मकसद By Raj Gopal S Verma

“क्या बताऊं, कैसे समझाऊं तुमको. कुछ सुनती ही नहीं तो समझोगी कैसे अनन्या”, भुनभुनाता हुआ प्रसनजीत अपना मोबाइल उसके हाथ से लेकर बाहर निकल आया. गुस्से में प्रसनजीत घर से निकल गया. क...

Read Free

सखी होली आ रही है By Sneh Goswami

सखी होली आने वाली हैबसंत पंचमी आ चुकी है . बसंत यानि उमंग .बसंत यानि तरंग . एक विभोर, एक हिलौर ,एक हलक, एक हुलस का पर्व . मन में तन में आस-पास के वातावरण में रंग ही रंग का पर्व ....

Read Free

हमें भगवान क्यो नही मिलते हैं ? By Sahaj Sabharwal

हमें भगवान क्यों नहीं मिलते ? आज प्रतिभाशाली और कलात्मक लोगों द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विकास से भरी दुनिया है। इस दुनिया में विभिन्न प्रकार के लोग रहते हैं। उन...

Read Free

चाबी By PANKAJ SUBEER

चाबी (कहानी : पंकज सुबीर) ‘सीमा जी नहीं हैं क्या ?’ रश्मि ने जैसे ही दरवाज़ा खोला तो सामने हाथ में ब्रीफकेस थामे लगभग चालीस पैंतालीस साल का एक आदमी खड़ा था। रश्मि को देख कर उस आदमी...

Read Free

एक अदद टॉयलेट बाथरूम By Satish Sardana Kumar

हम दो जन थे।फिर एक छोटी सी टीन्डसी आ गई।रिश्तेदारी इतनी तल्ख हो गई थी कि न किसी के आना न जाना।बेटी आ गई थी दिन भर मुहल्ले में मां को डुलाए रहती।दिन छोटे होते और रातें लंबी।बेटी सो...

Read Free

नग्न मानसिकता के महिलावादी By Vijay Vibhor

हर जीव् का एक नैसर्गिक स्वभाव होता है.. ठीक वैसे ही पुरुष है।। चरित्र और काम वासना पुरुषो का नैसर्गिक रूप से सबसे अधिक कमज़ोर और संवेदनशील बिंदु है… और चालाक औरते पुरुषो के इसी पॉइं...

Read Free

पुनर्जन्म By Vinita Shukla

बहुत दिनों से नौवीं की छात्रा कलिका, स्टाफ- रूम में चर्चा का विषय बनी हुई है. शिक्षिकाएं एकमत हैं कि उसे कोई मानसिक समस्या जरूर है. सबको श्रीमती मीरा वर्मा का इंतजार है, जो अपने ढी...

Read Free

फैसला - 5 - अंतिम भाग By Divya Shukla

फैसला (5) मै भी तो बहुत परेशान थी | जिस जद्दोजहद से मै गुजर रही थी अब उसका हल निकलना ही चाहिये, यह सोच कर ही मैने बात छेड़ी, "सुनो मुझे तुम से बात करनी है " विजयेन्द्र ने अख़बार से न...

Read Free

मुख़बिर - 31 - अंतिम भाग By राज बोहरे

मुख़बिर राजनारायण बोहरे (31) कृपाराम के मुखबिर हेतमसिंह बताता है कि इगलैंड से ख़ास तरह की तालीम लेकर आये पुलिस के एक आई जी को इस अंचल में डाकू समस्या को निपटाने का काम सोंपा गया तो...

Read Free