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अध्याय-२भार्गवी अपनी जेठानी के गले लग गई और मानो दोनों एक-दूसरे का साथ देते हुए...
लेख हिंदी के दो शिखर कवि , दो भिन्न दिशाएँविवेक रंजन श्रीवास्तव आधुनिक हिंदी कवि...
काल कोठरी ----- (21) चीची के हाथ मे देख वो पिक को वो जैसे घबरा गया। मिटू एक...
प्रस्तावना शिक्षा व्यवस्था किसी भी राष्ट्र के विकास, संस्कृत...
उस पहली मुलाक़ात के बाद समर कई दिनों तक कोई पत्र नहीं लिख पाया।शब्द, जो इतने मही...
परोपकार करने के लिए पैसे से ही दूसरों की मदद करें यह ज़रुरी नहीं है। हम अपनी शारी...
" तुम फूल हो भूल गये हो क्या महको हवाओं को महसूस करो किसी प्रेमी के हाथों म...
एपिसोड 46: समाधि का अंतिम युद्धशहर की बेचैनीसमाधि के पुनर्जन्म को रोकने के बाद भ...
राधा शर्मा। उन्नीस साल की। दिल्ली विश्वविद्यालय में इतिहास की छात्रा। उसके पिता...
रीना ब्लड टेस्ट कराकर घर आई तो घर की हालत देखकर उसका मन और बैठ गया। रसोई में बर्...
"कैसी है तुम्हारी मंगेतर?" राहुल मेरा सहकर्मी है।उसकी सगाई सुुरेेखा सेे हुई थी।दो महीने बाद उसकी शादी थी।कल सुरेखा के पििता का फोन आया था। चाय बनाते समय अचानक सिलें...
"प्यार वो खुशनुमा पल होता है जिसमें हर एक व्यक्ति पूरी जिंदगी जीना चाहता है।" "कुछ रिस्ते खून के होकर भी दिल के करीब नहीं होते और कुछ रिस्ते खून के न होकर भी दिल से निभ...
23 अगस्त 2018 की सुबह 8:20 वाली मेट्रो नंबर 12427 नोएडा सिटी सेन्टर से द्वारका सेक्टर21 की और बीच में पड़ने वाले हर स्टेशन पर रुकते हुए, बड़ी तेजी से हवा को दो हिस्सों में बाटती हुई...
अरे ओ कालिया आज मिला क्यां कोई शिकार या फिर आज भी हमेशा की तरह मुंह लटकाए वापस आगये हो। और आज कल कहा हो तुम दिख भी नहीं रहे हो क्या हो गया है। तुम्हे भाई कोई प्रॉब्लम है तो बताओ...
काहाणी शुरु करते हैं ये काहाणी बोहत पुरानी हैं इस काहाणी में एक मंदिर हैं जो बोहत पुराना हैं लेकिन कोछ शेतान उस मंदिर को पाणा चाहाते हैं क्यो की वो मंदिर सोने का हैं तो काहाणी शुरु...
यूँ तो बहुत आसान होता है किसी को ब्लॉक करना,दिल पे क्या गुज़रती है कभी सोचो तो सही,एक वो शख्स जिसने ख़ुद से बढ़कर चाहा हो किसी को,हर बुरे पल में साथ दिया हो जिसने,जिसने उम्मीद ना क...
मरुस्थल की तपती सुनहरी रेत पर जब आकाश में घिर आये स्लेटी बादल अपने आगोश में लेने की कोशिश करती तो रेत के गुब्बार भी शांत होकर धरती पर बिछ जाते, वातावरण में ठंडी हवा के झोंके जन-जन...
“दोस्तों पाँच मिनिटमे मीटिंग के लिये रेडी रहिए ” सागर ने अपनी कंपनिके पाँच वरिष्ठ कर्मचारिओको अपनी केबिनमे से आधा बाहर आंके कहा। सागर ,सागर भारद्वाज एक एक्सपोर्ट कंपनिका मालिक था।...
ज़िंदगी होती है बेतरतीब, बड़ी ऊट पटाँग, थोड़ी सी बेढब, थोड़ी सी खट्टी मीठी, हंसी और आँसुओं की पोटली, अकल्पनीय बातें आपके रास्ते में फेंकती आपको बौखलाती हुई, ठगती हुई --अपनी तरह से भूल...
ये कहानी शुरू होती हैं कंचनापुर से चंद्रिका को उसके भाई नीलेश ने एक गुप्त स्थान पर छुपा रखा है ताकि भावी जादूगरनी को कोई नुक़सान न पहुॅंचा सके। चंद्रिका नादान सी इन सब बातो से अनज...
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