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रात का वक्त…सड़क पर पसरा हुआ गहरा सन्नाटा…और उसी सन्नाटे को चीरती हुई5–6 ब्लैक ल...
वहां बैठे लोग रुद्र को हैरानी के साथ देखने लगाते है |शायद लोगों को कभी नही लगता...
रिद्धि एक पुरानी दीवार के पीछे छूपी हुई थी। और वह अपने हाथों से अपने कानों को...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 7: वसुंधरा की अधूरी चीखआग।चारों तरफ सिर्फ आ...
# पिता #सेठ रत्नाकर अपने समय के धनाढ्य व्यक्तियों में से थे। अच्छा खासा नाम था...
_"कहल जाला नीमन घर बर खोजत खोजत बाप के एड़ी खिया जाला।बाकि अब से कहल जाई की बाप...
दो मिनट बाद बहुत संयमीत लहजे मे बोले देव "आलोक ने मुझें तुम्हारा लिखा पत्र दिया...
ऋगुवेद सूक्ति--(२०) की व्याख्या "कृत्वा चेतिष्ठो विश्वार्म्भूत"" १/६५/५भावार्थ -...
बच्चों को जितना हो सके जंक फूड कम खाने के लिए कैसे मार्गदर्शन करें?वर्तमान समय म...
(एक काली चमचमाती कार कॉफी शॉप पर रूकती है। कार में से वीर प्रताप बहुत एटीट्यूड...
काहाणी शुरु करते हैं ये काहाणी बोहत पुरानी हैं इस काहाणी में एक मंदिर हैं जो बोहत पुराना हैं लेकिन कोछ शेतान उस मंदिर को पाणा चाहाते हैं क्यो की वो मंदिर सोने का हैं तो काहाणी शुरु...
यूँ तो बहुत आसान होता है किसी को ब्लॉक करना,दिल पे क्या गुज़रती है कभी सोचो तो सही,एक वो शख्स जिसने ख़ुद से बढ़कर चाहा हो किसी को,हर बुरे पल में साथ दिया हो जिसने,जिसने उम्मीद ना क...
मरुस्थल की तपती सुनहरी रेत पर जब आकाश में घिर आये स्लेटी बादल अपने आगोश में लेने की कोशिश करती तो रेत के गुब्बार भी शांत होकर धरती पर बिछ जाते, वातावरण में ठंडी हवा के झोंके जन-जन...
“दोस्तों पाँच मिनिटमे मीटिंग के लिये रेडी रहिए ” सागर ने अपनी कंपनिके पाँच वरिष्ठ कर्मचारिओको अपनी केबिनमे से आधा बाहर आंके कहा। सागर ,सागर भारद्वाज एक एक्सपोर्ट कंपनिका मालिक था।...
ज़िंदगी होती है बेतरतीब, बड़ी ऊट पटाँग, थोड़ी सी बेढब, थोड़ी सी खट्टी मीठी, हंसी और आँसुओं की पोटली, अकल्पनीय बातें आपके रास्ते में फेंकती आपको बौखलाती हुई, ठगती हुई --अपनी तरह से भूल...
ये कहानी शुरू होती हैं कंचनापुर से चंद्रिका को उसके भाई नीलेश ने एक गुप्त स्थान पर छुपा रखा है ताकि भावी जादूगरनी को कोई नुक़सान न पहुॅंचा सके। चंद्रिका नादान सी इन सब बातो से अनज...
ये काहाणी एक राजमेहल से शुरु होती हे जाहा पे एक राणी थी उसका नाम राजनंदिनी था लेकिन उसे कोई तो मार देता हे कोछ दिनो बाद उसकी आत्मा भटकने लगती हे वो सबको डराती थी तब एक पंडित आते...
मै एक नवीन लेखक अपनी इन लघु कहानियों से एक समाज की भिन्न - २ समस्याओ से ग्रस्त छवि को दिखाने का प्रयत्न करूँगा। मै हर समस्या के मध्य रह व मुझसे जूडे अनुभवो की भ्रांतियो को अपने लेख...
आज तारू अपने घर आने वाली थी। घरमे कोई खुश नही था उसके आनेसे। तारू पूरे चार साल अपने परिवार से दूर रही है। तारू को भी उसके परिवार से लगाव नही था वी भी...
मौसम की आवारगी में खोई हू और आज भी मै डायरी में तुम्हारे आने की उम्मीद में लिख रही हूं , यह डायरी जिसमें तुमसे जुड़ी हर बात लिखते ही जा रही , मुझे यकीन है कि तुम आओगे जरूर , 1946 क...
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