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यह बात वर्ष 2021 की है। उन दिनों मैं बिहार में थी और सरकारी नौकरी की तैयारी कर र...
एपिसोड 16– भरोसे की शुरुआतशाम के पाँच बज चुके थे।सिटी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल...
सुबह की पहली सुनहरी किरणें Asterion ग्रह की राजधानी Navashikhar City पर बिखर रही...
जुगनू: एक नन्हे दोस्त की कहानीदोपहर का समय था। मैं अपने कमरे में आराम कर रही थी...
अध्याय–4 : अधूरी इच्छाएँ रविवार की सुबह थी। आज महेश घर पर था। उमा ने सोचा, श...
**भाग दस: हक़ीक़त का सौदा**कमरे की वह भारी खामोशी अब पल्लवी की सिसकियों में टूट...
खामोश इकरारपहाड़ी से कार तक का वह छोटा सा रास्ता जैसे एक अनंत सफर बन गया था। न अ...
50 हजार का कर्जा तो भर गया... पर मुसीबत अभी शुरू हुई है।निशा को मनोज पर शक है। र...
85 साल के बुजुर्ग बाबा पिछले तीन महीनों से अस्पताल के कमरे में ज़िंदगी और मौत के...
अधूरी किताब: एक रूहानी दास्तानएपिसोड 47: जड़ों के नीचे का अंधकारस्मृति-वृक्ष की...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।" "प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
एक ऐसी दुनिया जहां कमजोरो की कोई जगह नहीं बस ताकतवर लोग ही हुकूमत चलते है और ताकत का मतलब है "पैसा" अगर तुम्हारे पास पैसा है तो तुम दुनिया की हर चीज हासिल कर सकते हो। लोग आ...
आंध्र प्रदेश का एक दूर-दराज और अलग-थलग गाँव था—पेरीकुलम (Perikulam)। यह गाँव भौगोलिक रूप से एक ऐसी जगह पर फंसा था जहाँ चारों तरफ से संकट घिरा हुआ था। गाँव के दो तरफ ऊंचे-ऊंचे पहाड़...
शादी से बचने का आख़िरी रास्ता सुबह के आठ बजे। दिल्ली की सड़कें रोज़ की तरह भाग रही थीं। हॉर्न, मेट्रो की आवाज़, चाय की दुकानों पर भीड़ और लोगों के चेहरों पर काम पर पहुँचने की...
रसोई में चाय की भाप उठ रही थी। सुबह का समय था। राधा चुपचाप खाना बना रही थी। उसके बालों में अब सफेदी की हल्की लकीरें आ चुकी थीं। चेहरे की चमक पहले जैसी नहीं रही थी। उम्र लगभग चालीस...
दोपहर का समय था।चारों ओर सूखी और पथरीली ज़मीन फैली हुई थी। दूर-दूर तक छोटी-छोटी पहाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं। उनके बीच से एक सँकरा कच्चा मार्ग निकल रहा था। उसी मार्ग के किनारे एक बड़...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 1 : रहस्यमयी किताब वाराणसी की रात हमेशा से रहस्यमयी मानी जाती थी। दिन में जितनी चहल-पहल रहती, रात होते ही शहर की पुरानी गलियाँ किसी अनकहे रहस्य में डू...
संत कबीर जी के इस दोहे को अक्सर लोग गलत समझ लेते हैं। वे सोचते हैं कि कबीर जी हमें डरा रहे हैं या जीवन से निराश कर रहे हैं कि “जब अंत में मिट्टी ही होना है, तो मेहनत क्यों करें?” ल...
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