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आर्य अंदर आता है और कमरे को ध्यान से देखने लगता है। उसे सब कुछ बिल्कुल सामान्य ल...
ऋगुवेद सूक्ति-(१६)-की व्याख्या"मान्तः स्थूर्नो अरातयः" — १०/५७/१भावार्थ --हमारे...
महाराणा अमर सिंह : प्रताप के अधिकारी पुत्र(1597-1620 ईसवी)मेवाड़ के अत्यधिक शक्त...
एक मौलिक हिन्दी कहानी प्रस्तुत है — शीर्षक “प्यार की चमक”। यह लगभग 3000 शब्दों क...
एपिसोड 5 — “जिसने श्राप दिया… वो तुम ही थी”हवा… थम गई थी।पूरा हॉल…अजीब सी खामोशी...
Part 17 "अगले चार महीने..."ये चार महीने मेरी ज़िंदगी के सबसे खूबसूरत भी थे...और...
**Sirf Tumhara** **Part 5**अंश का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था। विहान का फोन कॉ...
शाम धीरे-धीरे ढल रही थी।पूरा दिन जैसे आँसुओं में भीगकर निकल गया। अब आँखें तो सूख...
जगह कोई आम ठिकाना नहीं, बल्कि 'रॉयल फिटनेस होटल' था। बाहर से देखने में य...
लाल निशानभाग – 1 : मौत की शुरुआतअध्याय 1रात, जिसने शहर की नींद छीन लीरात के दो ब...
(साउंड इफेक्ट: एक पुरानी घड़ी की 'टिक-टिक' की आवाज जो धीरे-धीरे दिल की धड़कन जैसी तेज होती है। बाहर मूसलाधार बारिश और बादलों के गरजने की गूँज।) नैरेटर: समय का पहिया अक्सर...
यह एक पूर्णतः काल्पनिक (Fictional) कहानी है। इस कहानी के सभी पात्र, घटनाएँ, स्थान (जहाँ विशेष रूप से वास्तविक स्थान का केवल पृष्ठभूमि के रूप में उल्लेख न हो), संवाद और प्रसंग लेखक...
अंधेरी रात, दिल्ली के आसमान पर काले बादल उमड़े हुए। लाल बिजली चमकती है। धरती पर एक अजनबी उतरा है। जिसका चेहरा इंसानों जैसा है, मगर रगों में खून नहीं आग बहती है। करण धीरे-धीरे एक...
Part 1: श्रापित गांव ~ साल था 1826। जगह थी - *राजस्थान का गांव "धू-धू"*। पिछले 100 साल से यहां बारिश नहीं हुई। कुएं सूखे। खेत बंजर। लोग भूखे। बूढ़े कहते थे: "य...
15 अक्टूबर 2003 को दिल्ली की अस्पताल में मेरा जन्म हुआ था. उस वक़्त वक़्त तेज बारिश हो रही थी. मेरा चेहरा देखकर मेरे माता पिता खुशी से पागल हो गये थे. मैं काफ़ी शरारती थी...
ये कहानी पूरी तरह से मेरी कल्पना पर आधारित है ये कहानी पूरी तरह से मेरी कल्पना पर आधारित है अगर इस कहानी या इसके किसी भी पात्र से आपको भावनात्मक रूप से ठेस पहुंचाती हैं तो मैं क्षम...
राजस्थान का ठाकुरगढ़ गांव। रेत, गर्मी, और ठाकुरों का राज। यहां कानून किताबों में नहीं, बंदूकों में लिखा जाता था। *Scene 1: कर्ज और कयामत ~ 400 शब्द* आराध्या शर्मा। 22 साल।...
बहुत लंबे और थकान भरे दिन के बाद अगर जिंदगी में कहीं सुकून है तो वो है सिर्फ़ ये मसाला चाय! मैं अपने घर की बालकनी में एक खाट पर बैठी थी। पास में एक हुक्का रखा हुआ था जिसे मैं घूरे...
हुक्म था — बचाओ, हसरत थी — छीन लो... और मोहब्बत कभी इजाज़त नहीं मांगती।" "प्यारे Parahearts परिवार, अध्याय 7 में मुझसे अनजाने में प्रातिलिपि पर रेटिंग लिख दी गई, जबकि मेरा...
शहर की भीड़भाड़ से दूर, एक संकरी गली के कोने में बना वह छोटा सा कैफे, 'द ओल्ड ओक', आज कुछ ज्यादा ही खामोश लग रहा था। शायद उस खामोशी की वजह दोपहर का वक्त था, या शायद कुदरत ख...
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