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भाग 1दुबई की शामें झूठी होती हैं।खूबसूरत, चमकदार… और भीतर से बेरहम।सूरज समुद्र म...
कुछ कहानियाँ अचानक शुरू नहीं होतीं।वे धीरे-धीरे बनती हैं—दिनों के साथ, आदतों के...
तब संगीता बोली यह नहीं हो सकता निशा तुम समझो लोग क्या कहेंगे समाज क्या कहेगा,,,,...
मीरा की गवाही ने पूरे कोर्टरूम को हिला दिया। वो विटनेस स्टैंड पर खड़ी थी, शांत औ...
---हिन्दी कहानी: तुम बिन(लगभग 1500 शब्दों में) ---प्रस्तावनाकभी-कभी ज़िन्दगी हम...
किडनी तोह्फ़ा का 3...
“ऋगुवेद सूक्ति--(11) की व्याख्या--एको विश्वस्य भुवनस्य राजा” — ऋग्वेद -- ६/३६/४ ...
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दोपहर के डेढ़ बज रहे थे। सड़क पर स्कूल बसों के हॉर्न की आवाज़ें गूँजने लगी थीं।...
एक साल की शादी, उम्र भर का फैसलासियोल की ऊँची ऊंची इमारतें हमेशा से ही ली जू-हान...
डिस्को का माहौल गर्म था, म्यूजिक की तेज़ धुन में लोग मस्ती के रंग में रंगे हुए थे। लेकिन एक लड़की थी, जो बाकी सब से बिल्कुल अलग दिख रही थी। उसका नाम था सनजना, और वो किसी अप्सरा जैस...
सागरपुर नाम का शहर, जो न तो पूरी तरह गाँव था और न ही पूरी तरह महानगर। यहाँ न तो मेट्रो की गूंज थी और न ही ऊँची-ऊँची इमारतों की चकाचौंध। लेकिन यहाँ के लोग अपनी ज़िंदगी जीने के लिए स...
जीवनोपनिषद (प्रथम पुस्तक) प्रस्तावना सदियों से मनुष्य सत्य की खोज में है।कभी उसने वेदों का सहारा लिया,कभी उपनिषदों की गहराई में उतरने की कोशिश की,कभी गीता सुनी, कभी शास्त्र पढ़...
ह कहानी मैं उन सभी दिलों को समर्पित करती हूँ, जो टूटी हुई हालात में भी मोहब्बत पर यकीन रखते हैं। उन लड़कियों के लिए, जो अकेली होकर भी अपने परिवार के लिए लड़ती हैं, और उन लड़कों...
अपने जन्म वर्ष 1953 से अपने जीवन की युवावस्था और दाम्पत्य तथा नौकरी शुरुआत तक की अवधि का आत्मगंधी लेखा- जोखा मैंने अपनी आत्मकथा के पहले खंड “ आमी से गोमती तक “ में दे दिया है जिसे...
प्रारम्भिक जीवन और आध्यात्मिक झुकाव वृंदावन की पावन गंध, राधे-राधे की गूँज और कृष्ण नाम की रसधारा… इन्हीं भावों के बीच प्रेमानंद जी महाराज का जीवन आरंभ हुआ। उनका जन्म सामान्य पर...
(बचपन की तन्हाई) मैं आज आप सब के सामने अपनी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूं जो भी गलती हो माफ कीजिएगा । मेरा जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था कुछ कारणो और मजबूरी के कारण मुझे मे...
मैं टीवी से चिपका हुआ था, किसी सिंगिंग शो में पूरी तरह खोया हुआ, खुद को हर हाई नोट पर शानदार तरीके से हिट करते हुए और भीड़ को दीवानगी में देखते हुए कल्पना कर रहा था। आवाज़ें, ला...
जब चीफ जस्टिस की और से एक कॉन्फ्रेंस में यह कहा गया कि हमे और जेले बनाने कि जरूरत है, तब हमारे देश की महामहिम राष्ट्रपति महोदया द्वारा कहा गया कि आखिर हम कैसा समाज बनाना चाहते है?ह...
आरव हमेशा से चुपचाप रहने वाला लड़का था। उसकी दुनिया में न दोस्त थे, न महफ़िलें, न ही भीड़ का शोर। उसे लोगों से ज़्यादा किताबों की संगत अच्छी लगती थी। पन्नों के बीच लिखे अनगिनत शब्द...
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