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विधि के पढ़ाई के यह दो साल भी बीत गये...लेकिन अंश की कोई खबर नही आयी ना वो आया।।...
Part 1 दुनिया में दो तरह की डरावनी कहानियाँ होती हैं।एक, जिन्हें लोग खुद बना लेत...
दृश्य – कॉलेज नोटिस बोर्ड | सुबहकॉलेज के नोटिस बोर्ड के सामने भारी भीड़ जमा है। ह...
इंट्रोडक्शनशैतान गढ़ यह एक ऐसा शहर है जहां सारे छोटे बड़े भूत प्रेत और शैतान राक...
अध्यात्म का बहुत सीधा और सरल अर्थ है—ख़ुद को जानना। (‘अधि + आत्म’) यानी आत्म के...
"अम्मी आप फ्री हैं" ?? आज रूटीन के मुताबिक़ शहरयार वॉक करने के बजाए माँ के कमरे...
सुबह के पाँच बजे थे।चंदनगढ़ की सुबह बाकी जगहों जैसी नहीं थी। न अज़ान की आवाज़, न...
आख़िरी चिट्ठी का रहस्यबारिश की हल्की बूंदें गाँव की कच्ची गलियों को भिगो रही थीं...
जयगुरु क्या दीक्षा आवश्यक है? — शास्त्र, संत और मानवता की दृष्टि से एक विचारभारत...
ठंडी हवा चल रही थी…कोरिया की सड़कों पर हल्की रोशनी थी…और सुनामी और कृतिक साथ-साथ...
( ⚠️ पढ़ने से पहले ज़रूर जानें! धार्मिक नहीं, तार्किक: यह किताब किसी धर्म या संप्रदाय के लिए नहीं, बल्कि मानव मनोविज्ञान और व्यावहारिक जीवन जीने के विज्ञान पर आधारित है। शैली...
कामदेव के वाण और प्रजातंत्र के खतरे यशवन्त कोठारी होली का प्राचीन संदर्भ ढूंढने निकला तो लगा कि बसंत के आगमन के साथ ही चारों तरफ कामदेव अपने वाण छोड़ने को आतुर हो जाते हैं मा...
जुलाई का महीना था। आसमान कई दिनों से बादलों को थामे बैठा था, जैसे किसी इकरार का इंतज़ार कर रहा हो। और फिर उस दिन… पहली बारिश शुरू हुई। कॉलेज की छुट्टी के बाद आईशा बस स्टॉप पर खड...
यह कहानी है मासूम – सी मान्या की.. जो अभी केवल 23 साल की है । जो फिलहाल में एक स्कूल टीचर है। जितनी मासूम.. उतनी ही प्यारी है, लेकिन एक दिन उसकी पूरी दुनिया पलट सी जाती है। जब उसकी...
हर दिन एक ही कॉल, ठीक 12 बजे, और फिर सन्नाटा। और जब भी कोई कॉल उठाए, सिर्फ एक आवाज़ "मुझे क्यों मारा?" ये सिलसिला कुछ सालों तक यूँ ही चला, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने स...
रात का सन्नाटा…इतना गहरा था कि जैसे हवा भी डर रही हो चलने से। गाड़ी धीरे-धीरे कच्चे रास्ते पर आगे बढ़ रही थी।चारों तरफ घना जंगल… सूखे पेड़ों की टहनियाँ ऐसे हिल रही थीं जैसे किसी...
शाम का वक्त था और Priyam अपने कमरे में खड़ी थी। खिड़की से हल्की धूप आ रही थी, और कमरे में सन्नाटा था। आज कुछ अलग सा लग रहा था। दिल हल्का-हल्का धड़क रहा था, और मन में हल्की बेचैन...
रात के दो बज चुके थे। दिसंबर की सर्द हवाएं खिड़की के कांच से टकराकर एक सिहरन पैदा कर रही थीं। कमरे के भीतर का सन्नाटा उस बाहरी ठंड से भी ज्यादा सर्द और भारी था। गीता बेड के एक कोने...
इस तरह एक सदियां बीत गए।। लेकिन नैना वनवास खत्म नहीं हुआ था शायद वो अब जिंदगी को एक नया मोड़ पर समझना चाहती थी। और फिर नैना को अब सब कुछ अच्छा लगने लगा था क्या चल रहा था नैन...
रात का अंधेरा बहुत गहरा था…आसमान में बादल ऐसे छाए थे जैसे किसी अनहोनी का इंतज़ार कर रहे हों। एक पुराने खंडहर जैसे महल के अंदर…लाल रोशनी टिमटिमा रही थी। वहीं धीरे-धीरे एक लड़की बाह...
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