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राघव का झूठ:-अनाया ने बॉक्स बंद कर दिया।“मुझे तुमसे कुछ नहीं सुनना।”राघव ने कहा,...
भाग — १पिताजी की दी हुई वह घड़ी…कुछ चीज़ें ऐसी होती हैं, जिनकी कीमत दुकानदार तय...
Mr. & Ms. FakeEpisode 13 – The Rain Dateरात के लगभग साढ़े नौ बजे...पार्टी खत्म ह...
जब वे वहाँ पहुँचे, तो नज़ारा दहला देने वाला था। दिग्विजय की पुलिस सुरक्षा, यज्ञेश...
यादों का खजाना मोहन की शहर में नौकरी लगी तो वो अपने साथ परिवार को भी ले आया। दोन...
अधूरी किताब – सीजन 2 एपिसोड 36 : पहले पाठक की डायरी पूरे शून्य पुस्तकालय म...
शहरयार बिजली की सी तेज़ी से बाहर निकल गया। “कुछ कम हुआ फीवर बेटे” ??? उन्होंने श...
दादी नानकी जी दिन भर के बाल गोविन्द जी को पाकर उसे अपनी गोद में बिठाकर लाड प्यार...
संत कबीरदास जी का यह दोहा समाज में ज्ञान और व्यवहार के गहरे अंतर को समझाकर जीवन...
Sirf TumharaPart 10अंश के हाथ काँप रहे थे। लॉकर में मिला थ्रेट नोट अभी भी उसकी आ...
मध्य रात्रि का समय था. सन्नाटे से घिरी बीच सडक पर एक लंबे कद का आदमी धीमे- धीमे अपने कदम आगे बढा रहा था. उसने एक लंबा ब्लैक कोट पहना हुआ था, जिसकी वजह से इस अंधियारी रात में वह बेह...
सुनसान सड़क पर एक काली एसयूवी स्थिर गति से आगे बढ़ रही थी। कार की रफ्तार लगभग चालीस किलोमीटर प्रति घंटा रही होगी। इंजन की धीमी घरघराहट और टायरों की सड़क पर रगड़ खाने की आवाज़ के अल...
1. प्रारंभिक स्वरूप परंपरागत मानसिकता में पूजा–पाठ धर्म का आरंभिक और सबसे प्रचलित रूप है। यह वह अवस्था है जहाँ व्यक्ति बाह्य देवताओं या प्रतीकों की आराधना करता है, मंत्रोच्चार औ...
मेरे ख्वाबो मे जो आए,,,, आ के मुझे छेड़ जाए,,,,, उससे कहो मेरे.... सामने तो आए,,, मेरे ख्वाबो मे जो आए ,,,,ऐ,,,,ऐ,,,, तभी माँ ने अंदर से आवाज लगाई,...
" इंस्पेक्टर मैं सच कह रही हूँ। उस दिन मेरे घर पार्टी में लगभग 110 लोग आए थे। सभी मेरे दोस्त थे। खाने में चिकन करी, फिश करी और अंडा करी तीनों ही थीं। कुछ लोग चिकन नहीं खाते थे,...
कुछ हटकर जो हो रहा साहब, हम उसके बारे कहने का दूसहास किया है, इस के लिए कुछ भी घटिकत हो जाए। होने दो। भूमिका सोचते हो पता चल गयी हरगिज नहीं।कहने का तातपर्य कुछ ये है। बम्बे जाना ही...
इंट्रोडक्शनशैतान गढ़ यह एक ऐसा शहर है जहां सारे छोटे बड़े भूत प्रेत और शैतान राक्षस रहते है और वो वहां से निकलना चाहते है पर निकल नहीं पा रहे तो वो अपनी पूरी कोशिश करते है कि वो बा...
"जिस दिन इंसान नहीं, किस्मत रोई थी..." रात के ठीक बारह बजे... आसमान जैसे अपना सारा दर्द धरती पर उँडेल रहा था। बिजली की हर कड़क के साथ पूरा शहर काँप उठता, और उसी बारिश में श...
सुबह का समय था…हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी…मंदिर की घंटियों की मधुर आवाज़ पूरे माहौल को पवित्र बना रही थी…राधा-कृष्ण के मंदिर में आज कुछ खास शांति थी…उसी मंदिर के दरवाज़े पर एक...
Chapter 1 दिल्ली। सुबह के सात बजे। अलार्म की तेज़ आवाज़ पूरे कमरे में गूँज रही थी। बिस्तर पर चादर में लिपटी अवंतिका शर्मा ने करवट बदली और तकिया अपने कानों पर रख लिया।...
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